जय राजपूताना संघ समदङी

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जय राजपूताना संघ समदङी जय श्रीकृष्ण जय माँभवानी 🚩 🚩
जय राजपूताना सघं समदङी _ सिवाना

जयपुर में मौजूद जैसलमेर सहित मारवाड़ के सर्व समाज के लोगों से अनुरोध, 16 अप्रैल को अपने व्यस्ततम समय में से एक दिन या कुछ...
10/04/2026

जयपुर में मौजूद जैसलमेर सहित मारवाड़ के सर्व समाज के लोगों से अनुरोध, 16 अप्रैल को अपने व्यस्ततम समय में से एक दिन या कुछ घंटे ओरण-गोचर, पर्यावरण, पशुपालन, वन्यजीवन के लिये अवश्य निकालें 🙏🏻🚩

साथ ही आपके आस पास या सम्पर्क में जो भी व्यक्ति पर्यावरण, लोक संस्कृति, जल संरक्षण, वन्यजीवन, पशुपालन में रुची रखते हों उन्हें भी सूचित करें 🙏🏻

जयपुर में जिन्हें अभी भी ओरण बचाओ विषय में नहीं पता उनके लिये जानकारी :

1. ओरण क्या है?
ओरण विभिन्न मंदिरों, देव स्थानों, लोक व कुल देवी देवताओं के नाम से छोड़ी हुई जमीन पर मौजूद जंगल और घास के मैदान हैं। जहाँ खेती नहीं की जा सकती, पेड़ नहीं काटे जाते, घास भी काट कर घर नहीं ले जाते, इनका उपयोग केवल गायों व दूसरे पशु धन को चराने के लिये होता है। इसमें शिकार भी नहीं किया जाता जिस कारण यहाँ वन्यजीवन भी स्वछंद विचरण करता है।

2. ओरण का जल संरक्षण में महत्व-
जैसलमेर में ओरणों में बरसाती जल धाराएं बहती हैँ, इस कम बरसात वाले इलाके में 80-100 किलोमीटर दूरी तक बहने वाली कई बरसाती नदियों का निर्माण इन ओरणों से निकलने वाली जलधाराओ से होता है, जिनके आसपास यहाँ के पुराने तालाब, कुंएँ व खडीन भी मौजूद हैं, जिनसे जैसलमेर के ग्रामीण क्षेत्रों को जलापूर्ति और अन्न की पूर्ति आज तक हो रही है।

3.ओरण संकट में क्यों हैं?
1950-51 में जब जैसलमेर रियासत को भारत -राजस्थान में मिलाया गया तब समरी सेटलमेंट में रियासत काल के पुराने ओरणों को रेवेन्यू रिकॉर्ड में ओरण नाम से दर्ज नहीं किया गया, जैसलमेर जिले का जो इलाका जोधपुर रियासत में था वहाँ के गाँवों में भी ओरिजनल एरिया से कम ओरण रेवेन्यू में दर्ज किये गये। इतने वर्षों तक ग्रामीण जनता इन्हें देवी देवताओं की जमीन समझ कर सुरक्षित माने हुये थी, जबकि यह सरकारी रेवेन्यू रिकॉर्ड में बंजड़ या अन्य किसी किस्म की जमीन से दर्ज कर दिये गये थे। अब 2014 में जब से सोलर एनर्जी और सीमेंट फैक्ट्रीज के लिये जैसलमेर जिले में सरकार ने बंजड़ जमीने देना चालू किया तो उसमें ओरणों की जमीने भी सरकार देने लगी।

4. ओरण बचाओ आंदोलन-
इन्ही सब कारणों से जैसलमेर के श्री देगराय मंदिर के ओरण, बईया गाँव के ओरण, पारेवर गाँव के ओरण, दिधू गाँव के ओरण, आस्कन्द्रा गाँव के ओरण, श्री पनोधर राय मंदिर के ओरण, मोकला गाँव डूंगरपीर जी मंदिर के ओरण, सलखा गाँव के आलाजी मंदिर के ओरण, करियाप गाँव के पाबूजी मंदिर के ओरण, मेघा बिजोंता गाँव के तनोटिया राय ओरण, मेहरेरी गाँव के नागाणाराय ओरण के साथ सम्पूर्ण जिले के विभिन्न गाँवों के ओरणों से विगत 8 वर्षों में उठा जन आक्रोश अब आंदोलन का रूप लेकर 21 जनवरी 2026 से पैदल चलता हुआ 16 अप्रैल को जयपुर पहुँच रहा है।

साथ ही ध्यान रखें, जैसलमेर सहित सम्पूर्ण मारवाड़ अपनी शालीनता, शिष्टाचार व भद्रता के लिये, सांस्कृतिक अपनेपन के लिये विख्यात है। अतः जयपुर में सभी को इसमें उस संस्कृति का रँग भी साथ में लेकर चलना है, शान्ति, धैर्य, शिष्टता, भद्रता, सकारात्मकता पत्थर ह्रदय को भी पिघला देती है, अतः इन सबका पालन भी करना है🙏🏻🚩

10/04/2026

#ओरण बचाओ पद यात्रा

सरकार की बातें मीठी - मीठी है लेकिन अभी तक परिणाम कुछ भी नही दिया है। 18 मार्च को सरकार के कहने पर यात्रा रोकी गई। 57 दि...
27/03/2026

सरकार की बातें मीठी - मीठी है लेकिन अभी तक परिणाम कुछ भी नही दिया है। 18 मार्च को सरकार के कहने पर यात्रा रोकी गई। 57 दिन हम पैदल चले, पिछले दिनों 34 दिन धरना दिया। पिछले 5 - 6 साळ से ओरण आंदोलन चल रहा है फिर भी केवल वार्ता व आश्वसन परिणाम कुछ नही। इसलिए ऐसा लग रहा है कि यात्रा पुनः प्रारंभ करनी होगी। सभी तैयार रहें, इस बार यात्रा की संख्या पिछली संख्या से बेहतर ही होनी चाहिए। 20 दिनों में यात्रा जयपुर पहुँचेगी तब तो हजारों की संख्या में आना है लेकिन 20 दिन की यात्रा भी संख्या शक्ति के साथ हो यह हम सभी को तय करना है। अगर आज कुछ भी परिणाम नही आता तो आज ही अजमेर से पुनः यात्रा प्रारंभ करने की तारीख तय कर दी जाएगी। आप सभी तैयार रहें .....

जय जय जैसाण ......
#ओरण ैदल_यात्रा

आई टी शैल भी सोच रही है कि इस आदमी का करें तो क्या करें। पास में कुछ नहीं सिर पर पगड़ी दो जोड़ी कपड़े और एक भारी सी जूती...
14/02/2026

आई टी शैल भी सोच रही है कि इस आदमी का करें तो क्या करें। पास में कुछ नहीं सिर पर पगड़ी दो जोड़ी कपड़े और एक भारी सी जूती। सोशल मीडिया के सारे अकाउंट देखें तो सिर्फ पेड़ पौधों , पक्षियों, ऊंटों, बकरियों के ही फोटो। न ही शहर में कोई प्रॉपर्टी, न ही हाईवे पर कोई दुकानें । बिजनेस के नाम पर कुछ ऊंट और बकरियां। न ही कोई पार्टी न ही कोई पद । न ही कुछ ले रहा है न ही कोई इच्छा। कहां फंस गए। नेताओं के जमे जमाए कैरियर खराब हो रहे है इनके कारण ।
जैसान के बड़े भाइयो के संघर्ष को हृदय से प्रणाम। 🔱🔱🚩🚩
Copy paste _ @ gopalsinghji parewar
singhji sawanta, Bhopal Singh Jhalora
singhji mokal
#ओरण #खेजड़ी

01/08/2025

मराठा साम्राज्य और पेशवाओं की लूटपाट दोनों एकदम विपरीत चीज मराठा साम्राज्य (क्षत्रपति शिवाजी महाराज से लेकर क्षत्रपति शाहू जी महाराज प्रथम तक) ने कभी भी लूट पाट नही की किंतु जब राजाराम द्वितीय नाबालिग थे और पेशवाओं ने उनका राज्य अप्रत्यक्ष रूप से हड़प लिया तब पेशवाओं की लूट आरम्भ हुई और इस लूट को महान मराठा साम्राज्य से जोड़ना पूर्णतः अनुचित है ।
हालाँकि आरंभमें सिंधिया और होल्कर जैसे नवोदित गैर क्षत्रिय राजवंश पेशवाओं के साथ लग गये किंतु बाद में पेशवा बाजीराव द्वितीय को यशवंत राव होल्कर ने ही बुरी तरह पराजित कर दिया जिससे वो अंग्रेजो की जाकर मिल गया । अतः पेशवाओं ने कभी भी कोई भी युद्ध देशहित के लिए नही अपितु कभी लूट पाट के लिए तो कभी मुगलों के लिये लड़ा । पेशवाओं ने पहली गद्दारी सूर्यवँशी क्षत्रिय भौंसले राजवंश के साथ ही की यही कारण हैकि महार जाति को पेशवाई सेना के विरुद्ध कोरेगाँव में अंग्रेजों का साथ देना पड़ा । इन पेशवाओ की लूट पाट और भंयकर अत्याचार का नतीजा यह हुआ कि अधिकांश देशी रियासतों को अंग्रेजो से दोस्ती संधि करनी पड़ी ।

20/06/2025

नाथूला सीमा बैठक चौकी (BPM) स्वर्गीय लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह जी को समर्पित ।
राजस्थानी होने के नाते मेरे लिये गर्व की बात है की १९६७ चीन युद्ध के सबसे बड़े नायक सगत सिंह जी के नाम से नाथूला पोस्ट अब सुशोभित होगी । भारतीय सेना व विशेषकर १७ माउंटेन डिवीजन के GOC मेजर जनरल श्री एम.एस. राठौड़ जी का आभार ।
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