AUM : Association for Upliftment of Mankind

AUM : Association for Upliftment of Mankind At AUM, we believe that everyone is born equal & hence should not be deprived of the necessities

19/03/2026

इस नवरात्रि देवी आप के घर आएं या ना आएं,
आप अपने अंदर के देव न सही, मनुष्य को अवश्य जगाएं।

अनेकानेक शुभकामनाएं। 💐
नवरात्रि शुभ हो!! 🙏🙏

#नवरात्रि

08/03/2026

~ महिला दिवस ~

** उसे देखा है मैंने... **
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°

उसे देखा है मैंने...
बस की रेलम-ठेल में,
कभी रिक्शे पे, कभी ऑटो में,
कभी ट्रेन में, कभी प्लेन में,
बैठते भी, चलाते भी, उड़ाते भी।

उसे देखा है मैंने
एक बड़ी सी इमारत के बाहर भी,
अन्दर भी।
हसरत से निहारते भी,
बनाते भी, सजाते भी,

उसे सुना है मैंने,
भजन में , अज़ान में,
कीर्तन में, कव्वाली में,
किसी राजनैतिक रैली में
और कभी शास्त्रीय शैली में।

उसे जूझते देखा है मैंने
लाइन में ...
रेलवे और राशन की,
दौड़ में विज्ञापन की, और अक्सर
अपने ही चरित्र के सत्यापन की।

उसे दम तोड़ते और भरते भी देखा है;
अस्पताल के बाहर, और अंदर भी,
कभी मुखर होती, कभी बस मन में,
कभी रक स्ट्रेचर पर, कभी कड़क एप्रन में।

उसे देख लेता हूँ,
किसी शीशमहल से मॉल के भीतर,
पेट्रोल पम्प पर, ढाबे पर,
काम करते भी, कराते भी।

देख पाता हूँ उसे मैं,
पीटते कभी गिट्टी, कभी की-बोर्ड,
और कभी किसी लफ़ंगे को।

उसकी साँस को फूलते भी पाया था,
कभी बोझ उठाते, कभी उठवाते,
सहारा लेते और देते भी।

टिफ़िन पहुँचाते भी देखा है,
कभी पिता, भाई, दोस्त, पति और बेटे का भी।
कभी साथ खाते और अक्सर ख़ुद भूखा रहते भी।

वैसे तो देखा है उसे मैंने
दौड़ाते हुए,
कदम भी और कलम भी।
कभी दूरियाँ नापने को,
कभी दूरियाँ पाटने को।

एक अँधेरी गली में
उसे देखा है मैंने,
कभी साँस भरते, खुद में,
और कभी साहस, दूसरे में।

और देखा तो है खेल के मैदान में भी,
एक सीटी की आवाज़ पर
दौड़ते भी, दौड़ाते भी।
हुकुम देते भी और बजाते भी।

बन्दूक उठाये भी तो देखा था उस दिन,
एक सुनसान बीहड़ में, और
एक खाकी वर्दी में।
एकरूप सी अडिग, भीगी बारिश में,
सजग सी खड़ी उस कड़ी सर्दी में।

उसे पाया था एक शाम को
बाल कटवाते हुए,
कि परिवार के लिए वक़्त नही होता।
देखा था बरिस्ता में , और
अचार-चीनी से रोटी खाते भी।

देखा था होली की सफ़ाई में निकले पैसे छुपाते,
और दीपावली में नई साड़ी न लेते हुये भी।
राखी में प्यार लुटाते हुए भी,
और आँसू अपने छुपाते हुये भी।

छलांगतेे पाया था उसे उस रात
आसमान लाँघते उस रॉकेट में,
और प्रौदुनोवा के बार पर भी,
पार करते वो तरणताल भी,
और 26 जनवरी की कदमताल भी।


उसे देखा तो था धुआँ फाँकते भी,
कभी चूल्हे का,
कभी ट्रैफिक सिग्नल
और कभी गैराज का।
वैसे विश्वसुंदरी का ताज पहनते भी तो देखा ही था।

कहते सुना एक दिन कि उठने का कोई तय नही,
कभी 6 तो कभी 4 बजे।
पर सोने का तो कभी पता ही नहीं।
बीमार होना बस में नहीं,
और पड़ने का तो ख़याल ही नही।
मानो धरती फटने को आ जायेगी।

फिर भी वो चलती रहती है।
बिना टिके, थके या रुकेे।

कभी धीमी तो कभी तेज़।
ठीक समय सी।
या फिर उस घड़ी सी।
उस में भी कभी घण्टे की सुई सी, कभी मिनट और कभी सेकण्ड की सी।
बस अनवरत चलती सी,
कभी न रुकती सी...

उसे देखा है मैंने, ऐसे भी,
किसी मोड़ पर,

हाँ, देखा है मैंने...
उसे लगभग ऐसे ही किसी रूप में,
हर मोड़ पर...
हर क्षण किसी न किसी की चिंता करते,
किसी न किसी का ख़याल रखते,
बस अपना छोड़कर!

किसी न किसी का ख़याल रखते,
बस अपना छोड़कर!!

अन्तर राष्ट्रीय महिला दिवस पर नारीशक्ति को नमन। 🙏
#महिला_दिवस
#भईया_उवाच्

04/03/2026

~~ ** रंगोत्सव ** ~~

नव पल्लव की फुनगी से हरितिमा,
पलाश की मदमाती डाली से केसरिया,
हिमतुंग की विस्तृत धवलता,
सौम्य वासन्ती ओस की शुभ्रता,
दिनकर की अक्षुण्ण अरुणिमा,
अस्ताचल की अपरिमित लालिमा,
कोकिला की कालिमा और
फूली - फैली सरसों की पियरी...

यह सब मिलकर करें मंत्रणा
रंग दें जीवन को इंद्रधनुष सा,
कि पारिजात भी करें प्रशंसा,

स्वयं में अनगिनत रंगों को समेटे,
विविध रंगों की वीथिका के जनक इस भारतवर्ष को रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।

शुभकामनाएं कि हम इसकी सन्तति हैं।

शुभकामनाएं कि हम साक्षी हैं इस विशिष्ट पर्व और दिव्यता के।

शुभकामनाएं कि समस्त विघ्न-रोग-द्वेष-क्लेश इत्यादि का अंत हो,

मंगल हो, रस हो, उल्लास हो,
जीवन का प्रत्येक दिन स्वयं में वसन्त हो। 🙏🏻

#रंगोत्सव शुभ हो। 🙏🏼🙏🏼🚩

15/02/2026

दिग -दिगंत को करता गुंजायमान ,
ये वो तिनके सा कंकर है...

अनेक - अनादि - अनंत - अप्रतिम सा,
ये तो बम भोले अभयंकर है।।

Oldest tradition of ;-) :-)
ादेव
#शिवरात्रि

अ से अज्ञानी से इस जीव कोआ से आशावान बनाकर,इ से  इच्छाओं को नियंत्रित कर,ई से ईश्वर की प्रेरणा से,उ से  उर्ध्वगामी  हो क...
23/01/2026

अ से अज्ञानी से इस जीव को

आ से आशावान बनाकर,

इ से इच्छाओं को नियंत्रित कर,

ई से ईश्वर की प्रेरणा से,

उ से उर्ध्वगामी हो कर,

ऊ से ऊर्जा प्रदान कर,

ए से एकमत से,

ऐ से ऐश्वर्य की ओर अग्रसर कर,

ओ से ओज प्रदान कर,

औ से औचित्य की प्राथमिकता बताकर,

अं से अंगद सा हठ देकर,

अः से अहम को दरकिनार कर;

क से कर्मठता का दीप जलाकर,

ख से खग को भी सम जीव के रूप में स्वीकार कर,

ग से गंतव्य को लक्ष्य बना,

घ से घमण्ड को त्याग कर,

ङ से शून्यता को स्वीकार कर,

च से चर्मोत्कर्ष को साधने में रत कर,

छ से छिद्रान्वेषण करने की क्षमता देकर,

ज से जिह्वा को नियंत्रित कर,

झ से झुण्ड से अलग हटकर सोच सकने की प्रकृति देकर,

ञ से नासिक भाव के महत्व को भाँप कर,

ट से टकराव से बचकर सामूहिकता को स्वीकार कर,

ठ से विषम परिस्थितियों में भी ठहाका लगा सकने की प्रवृत्ति देकर,

ड से डर को दरकिनार कर,

ढ से ढान्ढस बाँध कर बढ़ते रह कर,

ण से अकर्मण्य भाव को दूर कर,

त से तत्व (पञ्च-तत्व) की प्रधानता समझने,

थ से थकने पर भी चलते रहने की प्रेरणा देकर,

द से दया भाव को ऊपर ला,

ध से धैर्य को एक गुण मान कर,

न से निष्काम भाव से समर्पित होने,

प से पुण्य-पाप में भेद समझ,

फ से फल की इच्छा रखे बिना,

ब से ब्रह्म को समर्पित होने की प्रेरणा देकर,
भ से भाव की प्रधानता तो परखने की शक्ति देकर,

म से मूल में मानवता रखने को तत्पर कर

य से यत्न की महत्ता समझाकर,

र से रमने की प्रवृति देकर,

ल से लक्ष्य को निमित्त मान बढ़ते रहने की प्रेरणा देकर

व से वाणी की शुचिता समझाकर,

श से शक्ति को उत्तरदायित्व समझने की समझ दे,

ष से षड्यंत्रों से दूर रहने की चेतावनी दे,

स से सत्कर्मों की प्रधानता बता कर,

ह से हठधर्मिता को हथियार बना,

क्ष से क्षात्रधर्म निभाने की प्रेरणा देकर,

त्र से त्रुटियों को कम कर,

ज्ञ से ज्ञान की ओर उत्प्रेरित रख कर;

जीवन में हर प्रकार से प्रकाश और उर्जा का सृजन करने वाली माँ शारदा को कोटि-कोटि नमन|

#वसन्त_पञ्चमी शुभ हो
#भईया_उवाच

15/01/2026

जहाँ साधारण सी खिचड़ी भी एक पर्व, एक उत्सव है;
ऐसा देश है मेरा!

ंक्रान्ति शुभ हो। ☀️🙏🏻
#भारत_भाग्य_विधाता

16/08/2025

सुनो,

ये जो तुम सब,

पगलाये से फिरते हो,

सौन्दर्य प्रसाधनों के पीछे

तमाम,

और उस क्रीम के,

जो देती है गारण्टी गोरेपन की;

बता देना चाहेंगे

तुम सब को कि,

तुमसे करोड़ों साल पहले,

आया था

एक बाँका-सजीला,

रंग-रंगीला,

छैल-छबीला,

दुनिया भर की कलाएं करता,

रिझाता...

चिढ़ाता...

सताता...

मनाता...

रुलाता...

हँसाता...

सबका मन मोहता...

वो भी साँवला ही था,

और उसी रंग से जाना गया...

जिसको दर्शन हुए उसको वो भाता गया,

मन-मस्तिष्क पर जादू चलाता गया...

यशोदावत्सल, देवकीनन्दन, मधुराकृत,
गोविन्द, अनन्त, गोप गोपीश्वर,
महायोगी, यादवेंद्र, गोपाल,
सर्वपालक, कञ्जलोचन, मुरारी,
श्री हरि विष्णु, जगद्गुरू, जगन्नाथ,
पार्थसारथी, नारायण और घनश्याम...

ऐसे सहस्रों उनके नाम...

तो भईया बोलो-बोलो-बोलो$$$$

'श्याम-सुन्दर -- बाँके-बिहारी -- जसोदा-नंदन -- बंसी-बजैय्या --
रास -- रसैय्या -- नाच -- नचैय्या --
हमारे कृष्ण कन्हैया की जय हो !!'

श्री कृष्ण-जन्माष्टमी शुभ हो!! 🙏

#शुभ_जन्माष्टमी। 💐

(चित्र ISKCON से साभार)

27/06/2025

सब-सोनिक से बढ़कर सुपर-सोनिक को पिछाड़ कर आगे निकल जाने की होड़ में लगे विश्व में जहाँ रथ-यात्रा भी एक राष्ट्रीय पर्व, एक सार्वभौमिक उत्सव है,
ऐसा देश है मेरा।

#भईया_उवाच्
#रथयात्रा_2025

06/04/2025

हर अति-उत्साही एवं कदाचित उग्र लक्ष्मण के प्रादुर्भाव के लिये एक संयमित और संतुलित राम का अस्तित्व परम आवश्यक है !
..और प्रत्येक राम के मर्यादा पुरुषोत्तम, प्रजा-वत्सल, स्थितप्रज्ञ श्रीराम हो सकने के लिये एक लक्ष्मण का मनुज रूप में साथ होना और रहना अपरिहार्य है।

श्रीराम नवमी की अनन्य शुभकामनाएं। 🙏🏻

#भईया_उवाच्
#रामनवमी

14/03/2025

~ रंगोत्सव 2025 ~

नव पल्लव की फुनगी से हरितिमा,

पलाश की मदमाती डाली से केसरिया,

हिमतुंग की विस्तृत धवलता,

सौम्य वासन्ती ओस की शुभ्रता,

दिनकर की अक्षुण्ण अरुणिमा,

अस्ताचल की अपरिमित लालिमा,

कोकिला की कालिमा और

फूली - फैली सरसों की पियरी...

यह सब मिलकर करें मंत्रणा

कि पारिजात भी करें प्रशंसा और

रंग दें जीवन को इंद्रधनुष सा...
.. स्वयं में अनगिनत रंगों को समेटे,

विविध रंगों की वीथिका के जनक इस भारतवर्ष को रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।

शुभकामनाएं कि हम इसकी सन्तति हैं।

शुभकामनाएं कि हम साक्षी हैं इस विशिष्ट पर्व और दिव्यता के।

शुभकामनाएं कि समस्त विघ्न-रोग-द्वेष-क्लेश इत्यादि का अंत हो,

जीवन का प्रत्येक दिन स्वयं में वसन्त हो। 🙏🏻

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