14/06/2026
📢 क्या CSC अपनी मूल पहचान खो रहा है? — एक VLE की पीड़ा 📢
एक समय था जब CSC (Common Service Centre) को गांवों में डिजिटल सेवाओं का भरोसेमंद केंद्र माना जाता था। "एक गांव – एक CSC" की सोच के साथ इसकी शुरुआत हुई थी ताकि ग्रामीण नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सरकारी एवं डिजिटल सेवाएं एक ही स्थान पर मिल सकें।
लेकिन आज स्थिति चिंताजनक होती जा रही है।
❌ बिना उचित प्रशिक्षण के लोग लैपटॉप लेकर CSC जैसी दुकानें खोल रहे हैं।
❌ सेंटर सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया कमजोर पड़ गई है।
❌ एक ही क्षेत्र में कई-कई सेंटर खुलने से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के बजाय अव्यवस्था बढ़ रही है।
❌ योग्य और अनुभवी VLE भी कुछ लोगों की गलत कार्यशैली के कारण बदनाम हो रहे हैं।
❌ अधिकारियों के निर्देश तो आते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और निगरानी की कमी महसूस होती है।
परिणाम यह है कि CSC की संख्या तो गांव-गांव बढ़ गई, लेकिन हर जगह नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवा नहीं मिल पा रही है।
डिजिटल इंडिया का सपना केवल संख्या बढ़ाने से पूरा नहीं होगा, बल्कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने से पूरा होगा।
👉 आवश्यकता है:
✅ नियमित प्रशिक्षण की
✅ सेंटरों के कड़े सत्यापन की
✅ सेवा गुणवत्ता की निगरानी की
✅ योग्य और सक्रिय VLE को प्राथमिकता देने की
✅ अवैध एवं निष्क्रिय सेंटरों पर कार्रवाई की
हम CSC के विरोधी नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि CSC अपनी मूल भावना और प्रतिष्ठा को फिर से प्राप्त करे। यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो सबसे अधिक नुकसान ग्रामीण नागरिकों और ईमानदारी से काम करने वाले VLE भाइयों को होगा।
"CSC की सफलता सेंटरों की संख्या से नहीं, बल्कि नागरिकों को मिलने वाली गुणवत्तापूर्ण सेवाओं से मापी जानी चाहिए।"
"हमें नए CSC सेंटरों से नहीं, बल्कि बेहतर CSC सेवाओं से डिजिटल इंडिया को मजबूत बनाना है।"
क्या आप भी CSC व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता महसूस करते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।