Shri Prannath Jyanpeeth

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25/09/2026

आवो जी वाला #निजानंद #प्रणामी #राजनस्वामी

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के ट्रस्टी, आचार्य , छात्र, कन्या गुरुकुल के छात्र ,  स्वयंसेवक , संगीत कलाकार, इ गुरुकुलम की टीम...
24/09/2026

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के ट्रस्टी, आचार्य , छात्र, कन्या गुरुकुल के छात्र , स्वयंसेवक , संगीत कलाकार, इ गुरुकुलम की टीम #निजानंद #प्रणामी #राजनस्वामी

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ 20वाँ वार्षिकोत्सव दिवस 6/7 मंच 2/3
24/09/2026

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ 20वाँ वार्षिकोत्सव दिवस 6/7 मंच 2/3

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ 20वाँ वार्षिकोत्सव दिवस 6/7 मंच 2/3

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ का 20वाँ वार्षिकोत्सव श्रद्धा, प्रेम, ज्ञान और आत्मीयता की दिव्य अनुभूति के साथ पूर्ण हुआ। सात दि...
22/09/2026

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ का 20वाँ वार्षिकोत्सव श्रद्धा, प्रेम, ज्ञान और आत्मीयता की दिव्य अनुभूति के साथ पूर्ण हुआ। सात दिनों का यह समागम बाहर से भीतर, श्रवण से मनन और मनन से जीवन-रूपान्तरण की यात्रा पर केन्द्रित रहा।

पूर्णाहुति दिवस का आरम्भ स्वामी श्री राजन स्वामी जी के प्रेरक उद्बोधन से हुआ। उन्होंने बीते सात दिनों में सुने, समझे और आत्मसात किए गए तारतम वाणी के वचनों को केवल स्मृति तक सीमित न रखने, बल्कि उन्हें अपनी दृष्टि, आचरण और जीवन में जीवंत बनाने का आह्वान किया। उनका संदेश था कि ज्ञान की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब वह हमारे भीतर परिवर्तन का कारण बने और हमारे व्यवहार में प्रकट हो।

इसके पश्चात पन्ना धाम से पधारे श्री लक्ष्मीकांत शर्मा जी, श्री डी. के. दुबे जी तथा दादाभाई पुजारी जी ने सुन्दरसाथ को संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने तारतम वाणी तथा श्री पद्मावतीपुरी धाम के प्रति अपनी गहन निष्ठा, श्रद्धा और समर्पण व्यक्त किया।

तारतम वाणी पाठ की पूर्णाहुति और आरती के साथ सात दिवसीय वार्षिकोत्सव ने अपने पावन समापन को प्राप्त किया। वातावरण में एक ओर पूर्णता का संतोष था, तो दूसरी ओर इन सात दिनों में प्राप्त संदेशों को जीवन में उतारने का नया संकल्प।

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ उन सभी सेवाभावी सुन्दरसाथ के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त करता है, जिनकी निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और सहयोग से यह महत्त्वपूर्ण आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका।

देश-विदेश से पधारे सभी सुन्दरसाथ को इस आयोजन की सफलता हेतु हार्दिक अभिनन्दन एवं धन्यवाद। आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार की त्रुटि, कमी अथवा असुविधा रह गई हो तो ज्ञानपीठ परिवार विनम्रतापूर्वक क्षमा प्रार्थी है।

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के वार्षिकोत्सव के छठे दिवस का शुभारम्भ प्रातःकालीन ध्यान एवं योग सत्र के साथ हुआ। प्रातःकालीन मं...
20/09/2026

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के वार्षिकोत्सव के छठे दिवस का शुभारम्भ प्रातःकालीन ध्यान एवं योग सत्र के साथ हुआ।

प्रातःकालीन मंचीय सत्र में स्वामी जी ने परब्रह्म के दिव्य शृंगार एवं सौन्दर्य का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक साधना केवल दार्शनिक चिंतन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेम और भाव के माध्यम से परब्रह्म के स्वरूप को हृदय में अनुभव करने की यात्रा है। उनके संबोधन में परब्रह्म के सौन्दर्य, माधुर्य और प्रेममय स्वरूप की व्याख्या ने उपस्थित सुंदर साथ को भावविभोर किया।

इस अवसर पर विभिन्न आचार्यगण ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने विशेष रूप से आध्यात्मिक और धार्मिक क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली आपसी प्रतिस्पर्धा, प्रतिष्ठा की भावना तथा स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने की प्रवृत्ति को साधना के मार्ग में बाधक विकार बताया। उन्होंने कहा कि अध्यात्म का मूल उद्देश्य व्यक्ति को अहंकार, तुलना और प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठाकर विनम्रता, समरसता और प्रेम की ओर ले जाना है। आध्यात्मिक जीवन में पद अथवा प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण परस्पर सम्मान, सहयोग और भीतर की निर्मलता है।

पन्ना से पधारे श्री राहुल जी ने अपनी भावपूर्ण कविता के माध्यम से श्री प्राणनाथ जी की पहचान, उनके संदेश तथा उनके प्रति अपने प्रेम और श्रद्धा को अभिव्यक्त किया। उनकी काव्य प्रस्तुति में भक्ति, प्रेम और आत्मीयता का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसे उपस्थित सुंदर साथ ने विशेष सराहना के साथ सुना।

दोपहर के सत्र में वरिष्ठ एवं वयोवृद्ध प्रचारिका ज्योति जी ने सुंदर साथ के साथ आध्यात्मिक विषयों पर संवाद किया। अपने दीर्घ अनुभव के आधार पर उन्होंने साधना, समर्पण और ज्ञान को जीवन के व्यवहार में उतारने की आवश्यकता पर बल दिया।

दक्षिण भारत से पधारे श्री वेंकटेश जी ने अपने संबोधन में प्रेम के मार्ग को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भाषा, क्षेत्र और परम्पराओं की विविधता के बावजूद प्रेम वह सूत्र है जो सभी को एक साथ जोड़ सकता है। आध्यात्मिकता का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है जब वह व्यक्ति के व्यवहार में करुणा, आत्मीयता और स्वीकार के रूप में प्रकट हो।

कार्यक्रम में श्री नरेश जी ने भी अपने विचार रखे। क़तेब पक्ष के मर्मज्ञ के रूप में उन्होंने उससे संबंधित विभिन्न आध्यात्मिक एवं वैचारिक पक्षों पर प्रकाश डाला।

दिन के अंतिम चरण में स्वामी श्री राजन स्वामी जी द्वारा विशेष प्रश्नोत्तरी एवं जिज्ञासा-समाधान सत्र आयोजित किया गया। सुंदर साथ द्वारा अध्यात्म, साधना, प्रेम, व्यवहार और जीवन से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे गए, जिनका स्वामी जी ने सरल एवं सारगर्भित ढंग से उत्तर दिया। यह सत्र विशेष रूप से संवादात्मक रहा और उपस्थित लोगों को अपनी जिज्ञासाओं का प्रत्यक्ष समाधान प्राप्त करने का अवसर मिला।

इस प्रकार वार्षिकोत्सव का यह दिवस ध्यान, ज्ञान, काव्य, संवाद और प्रेम के संदेश से परिपूर्ण रहा। विभिन्न वक्ताओं के विचारों में एक साझा संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि आध्यात्मिक यात्रा का सार केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि अहंकार और प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर प्रेम, विनम्रता, समरसता और आत्मिक निकटता को जीवन में उतारना है।

चितवन के सेवाभावी सुन्दरसाथ श्री विदुर कार्की जी के पिता श्री जयबहादुर कार्की जी के धामगमन की खबर समस्त परिवार के लिये द...
20/09/2026

चितवन के सेवाभावी सुन्दरसाथ श्री विदुर कार्की जी के पिता श्री जयबहादुर कार्की जी के धामगमन की खबर समस्त परिवार के लिये दु:खद है लेकिन अवश्यंभावी को कौन नकार सकता है? समस्त प्राणनाथ ज्ञानपीठ परिवार इस दु:ख की घड़ी में आपके साथ है | धाम धनी से प्रार्थना है कि निज अंगना को स्व-चरणों में स्थान दें और परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें |

20/09/2026

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ 20वाँ वार्षिकोत्सव दिवस 7/7 मंच 1/1

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के वार्षिकोत्सव के अवसर पर प्राणनाथ ई-गुरुकुलम की ओर से बच्चों एवं युवाओं के लिए विशेष स्टॉल लगाए...
19/09/2026

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के वार्षिकोत्सव के अवसर पर प्राणनाथ ई-गुरुकुलम की ओर से बच्चों एवं युवाओं के लिए विशेष स्टॉल लगाए गए, जहाँ तारतम वाणी पर आधारित रोचक खेल-प्रतियोगिताओं, ज्ञानवर्धक गतिविधियों और मनोरंजक प्रस्तुतियों का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

इन गतिविधियों ने बच्चों और युवाओं को न केवल भरपूर आनंद दिया, बल्कि खेल-खेल में वाणी के संदेश और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान किया। पूरे उत्साह और उमंग के साथ सभी ने इसमें सहभागिता की।

इस सुंदर, रचनात्मक और प्रेरणादायी आयोजन के लिए प्राणनाथ ई-गुरुकुलम की पूरी टीम का हृदय से अभिनन्दन एवं धन्यवाद। 🌸🙏 Spjin E-gurukulam

19/09/2026

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ 20वाँ वार्षिकोत्सव दिवस 6/7 मंच 3/3

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ, सरसावा के वार्षिकोत्सव में विगत एक वर्ष में धामगमन कर चुके सेवाभावी सुन्दरसाथजी को श्रद्धा और कृ...
19/09/2026

श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ, सरसावा के वार्षिकोत्सव में विगत एक वर्ष में धामगमन कर चुके सेवाभावी सुन्दरसाथजी को श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ स्मरण किया गया।

उनके परिवारजनों को मंच के समक्ष आमंत्रित कर ज्ञानपीठ परिवार की ओर से सम्मान एवं संवेदना व्यक्त की गई। सभी सुन्दरसाथ ने सामूहिक रूप से तारतम का जाप कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

उनकी सेवा, प्रेम और समर्पण की स्मृतियाँ सदैव ज्ञानपीठ परिवार के हृदय में जीवित रहेंगी।

भावपूर्ण नमन। 🌹🙏

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Saharanpur
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