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मौन Retreat | 5 दिन स्वयं के साथक्या आपको भी कभी लगता है कि जीवन की लगातार भागदौड़, फोन, सोशल मीडिया और शोर से कुछ दिनों...
23/09/2026

मौन Retreat | 5 दिन स्वयं के साथ

क्या आपको भी कभी लगता है कि जीवन की लगातार भागदौड़, फोन, सोशल मीडिया और शोर से कुछ दिनों के लिए दूर होना चाहिए?

Sakha Wellness का Maun Retreat आपको देता है 5 दिन-
जहाँ आपको किसी भूमिका में नहीं रहना, किसी को जवाब नहीं देना…
बस खुद के साथ रहना है।

✨ 5 दिन मौन में
📵 Digital Detox — बिना फोन और सोशल मीडिया
🌿 प्रकृति और शांत वातावरण के बीच समय
🧘 अपने भीतर देखने और ठहरने का अवसर
😴 आराम, शांति और अपने लिए समय
🤍 Free of Cost

📅 हर माह: 07–11 एवं 15–19
📍 Sakha Wellness, Saharanpur, UP
📞 Booking/जानकारी: 89794 15551

कुछ दिन दुनिया से दूर नहीं…
बस खुद के थोड़ा करीब।

मोक्ष कितना सहज 😊कितना सौम्य 🥰कितना दुर्लभ भी 🧐तो क्यू न मोक्ष को नज़दीक से पहचाने सोंचे आपने हरिद्वार जाने का फ़ैसला लि...
21/09/2026

मोक्ष
कितना सहज 😊
कितना सौम्य 🥰
कितना दुर्लभ भी 🧐

तो क्यू न मोक्ष को नज़दीक से पहचाने

सोंचे
आपने हरिद्वार जाने का फ़ैसला लिया ,
और निकल पड़े हरिद्वार के लिए तो क्या हरिद्वार पहुँचना आपको अपने विचार से मुक्ति जैसा नही लगेगा ... तो और क्या होता है मोक्ष

लेकिन निकले हरिद्वार के लिए और हरिद्वार पहुँचने से पहले ही सोंच बना ली कि ऋषिकेश भी जाएँगे
तो क्या हरिद्वार पहुँच कर आपको मोक्ष मिलेगा ... ?
या फिर ऋषिकेश की तरफ़ बढ़ते हुए गंगोत्री की सोंच बना ली तो फिर ...?

तो फिर ... आपका मोक्ष भी आपके विचारो और चाहतों की सीढ़ियाँ चढ़ता रहेगा ...
मंज़िल कभी न पाएगा ....!

और ऐसा ही कुछ होता है
धर्म की राह पर मोक्ष के लिए निकले जिज्ञासु के साथ

जब कोई थक जाता है चलते चलते
और थकान बढ़ती जाती है
तब कोई राही विश्राम कर लेना चाहता है
किसी वृक्ष के नीचे... और उसी वृक्ष का नाम “धर्म“ है
जिसकी छांव पुकारती है
उसको जो विरक्ति को उपलब्ध हुआ

लेकिन इस छांव की तलाश में राह ढूँढता हुआ इंसान उन साधु सन्यासियों से पता पूँछता है
जिसको वो समझता है
कि इन्हें वो विश्राम उपलब्ध हुआ है जिसे मोक्ष कहते है

लेकिन वो नही जानता
कि ये मात्र वस्त्रों का धोखा है
इन्हें भी वो छांव अभी तक उपलब्ध नही हुई

लेकिन वो सन्यासी इसे विश्राम न सिखा कर श्रम करना सिखाता है
योग
ध्यान
उन ऊर्जाओं की प्राप्ति के लिए
जिसे कोई कुंडलिनी जागरण का नाम देता है कोई चक्रों की शुद्धि का
कोई तुमको शक्तियाँ समझाता है कोई तुमको इसी को मोक्ष पाना

और अभी कुछ वर्षों के एक नया धंधा शुरू हुआ,
कुछ चालक व्यापारियों ने पहचान लिया कि इस राह पर कोई क्यू निकलता है,
उसके अनुसार संसार में असफल होकर

तो कुछ लोग धर्म के नाम पर
सफलता के गुण सिखाते है
और उसके नाम पर तुमको, काम क्रोध, आदि पर कंट्रोल करने की विधियाँ बताने लग जाते है

और ये बेचारा साधक समझता है
कि ये संसार से विपरीत कुछ सिखा रहा है तो यही होगी मोक्ष की राह

और यह भटकाव हरिद्वार से ऋषिकेश और ऋषिकेश से गंगोत्री के समान फैलता जाता है
जैसे संसार
शादी से बच्चे
और फिर उनकी शादी और फिर उनके बच्चों की तरह फैलता रहता है

तो धीरे धीरे वो इंसान मोक्ष के विश्राम से भटक आध्यतम के नाम पर वही पुराना कभी न रुकने वाला संसार खड़ा कर लेता है

बस अंतर होता है तो सिर्फ़ इतना कि पहले दृश्य ताक़तों की तरफ़ भागते थे और अब अदृश्य ताक़तों की तरफ़ भागते हो

मोक्ष से दूर जैसे मृग मरीचिका हो कोई

अब अगर मेरी बात आपको अपनी भटकाव की कहानी की तरह लगी हो तो

Read commentमोक्ष
कितना सहज 😊
कितना सौम्य 🥰
कितना दुर्लभ भी 🧐

तो क्यू न मोक्ष को नज़दीक से पहचाने

सोंचे
आपने हरिद्वार जाने का फ़ैसला लिया ,
और निकल पड़े हरिद्वार के लिए तो क्या हरिद्वार पहुँचना आपको अपने विचार से मुक्ति जैसा नही लगेगा ... तो और क्या होता है मोक्ष

लेकिन निकले हरिद्वार के लिए और हरिद्वार पहुँचने से पहले ही सोंच बना ली कि ऋषिकेश भी जाएँगे
तो क्या हरिद्वार पहुँच कर आपको मोक्ष मिलेगा ... ?
या फिर ऋषिकेश की तरफ़ बढ़ते हुए गंगोत्री की सोंच बना ली तो फिर ...?

तो फिर ... आपका मोक्ष भी आपके विचारो और चाहतों की सीढ़ियाँ चढ़ता रहेगा ...
मंज़िल कभी न पाएगा ....!

और ऐसा ही कुछ होता है
धर्म की राह पर मोक्ष के लिए निकले जिज्ञासु के साथ

जब कोई थक जाता है चलते चलते
और थकान बढ़ती जाती है
तब कोई राही विश्राम कर लेना चाहता है
किसी वृक्ष के नीचे ... और उसी वृक्ष का नाम “ धर्म “ है
जिसकी छांव पुकारती है
उसको जो विरक्ति को उपलब्ध हुआ

लेकिन इस छांव की तलाश में राह ढूँढता हुआ इंसान उन साधु सन्यासियों से पता पूँछता है
जिसको वो समझता है
कि इन्हें वो विश्राम उपलब्ध हुआ है जिसे मोक्ष कहते है

लेकिन वो नही जानता
कि ये मात्र वस्त्रों का धोखा है
इन्हें भी वो छांव अभी तक उपलब्ध नही हुई

लेकिन वो सन्यासी इसे विश्राम न सिखा कर श्रम करना सिखाता है
योग
ध्यान
उन ऊर्जाओं की प्राप्ति के लिए
जिसे कोई कुंडलिनी जागरण का नाम देता है कोई चक्रों की शुद्धि का
कोई तुमको शक्तियाँ समझाता है कोई तुमको इसी को मोक्ष पाना

और अभी कुछ वर्षों के एक नया धंधा शुरू हुआ ,
कुछ चालक व्यापारियों ने पहचान लिया कि इस राह पर कोई क्यू निकलता है ...
उसके अनुसार संसार में असफल होकर

तो कुछ लोग धर्म के नाम पर
सफलता के गुण सिखाते है
और उसके नाम पर तुमको , काम क्रोध, आदि पर कंट्रोल करने की विधियाँ बताने लग जाते है

और ये बेचारा साधक समझता है
कि ये संसार से विपरीत कुछ सिखा रहा है तो यही होगी मोक्ष की राह

और यह भटकाव हरिद्वार से ऋषिकेश और ऋषिकेश से गंगोत्री के समान फैलता जाता है
जैसे संसार
शादी से बच्चे
और फिर उनकी शादी और फिर उनके बच्चों की तरह फैलता रहता है

तो धीरे धीरे वो इंसान मोक्ष के विश्राम से भटक आध्यतम के नाम पर वही पुराना कभी न रुकने वाला संसार खड़ा कर लेता है

बस अंतर होता है तो सिर्फ़ इतना कि पहले दृश्य ताक़तों की तरफ़ भागते थे और अब अदृश्य ताक़तों की तरफ़ भागते हो

मोक्ष से दूर जैसे मृग मरीचिका हो कोई

अब अगर मेरी बात आपको अपनी भटकाव की कहानी की तरह लगी हो तो आगे सुनो

अन्यथा बंद करो पढ़ना और इंतज़ार करो कि ये कहानी तुम्हारी ज़िंदगी में भी घटे तब आगे की बात और मुझे समझ सकोगे

तो आगे की बात है
कि सदगुरु तुमको कभी भी इन मूढ़ताओ में नही फँसायेगा
बल्कि जो मोक्ष कि तरफ़ ले चलेगा वो विश्राम सिखाएगा
वो रुकवा देगा तुम्हारी सारी दौड़ , और यदि बिना विरक्ति
किसी आकर्षण वश इस राह पर आ गए हो तो बताएगा
वो जीवन शैली
जिससे जल्द से जल्द तुमको विरक्ति घटे

और उसका सबसे सहज तरीक़ा है भोग
अपनी इंद्रियो और अपने सपनो को भोगना
जितना भोग बढ़ेगा उतनी ही जल्दी विरक्ति से मुलाक़ात होगी

और जब विरक्ति से गुज़र कर कोई इंसान अपने गुरु के चरणो में विश्राम पाता है तब वो मोक्ष को उपलब्ध होता है

और मोक्ष को उपलब्ध इंसान का आगे का जीवन क्या होगा ये तय करता है परमपिता 👆🏻

फिर कोई मीरा गीत गाती है
कोई कृष्ण बाँसुरी बजाता है
कोई मोहम्मद तलवार उठा ले तो शक मत करना

और कोई Sakha 🧜‍♂️ तुम्हारे सामने खुद को बेपर्दा करे तो केवल तमाशबीन मत बने रहना

क्यूँकि नग्नता भी तुमको पुकारने का एक ढंग है उस परम की ओर ले चलने की पुकार

जिस तक पहुँचना ही हर जीवन का एक एक मात्र लक्ष्य है 🙏🏻

-Sakha

धार्मिक राह पर मिले भ्रम गिराने के लिए सुने 👇🏻
https://www.youtube.com/user/shashank668

सत्य हर किसी के लिए नहीं होताये करुणा समझने के लिएउस करुणा के साथ बहुत वक़्त गुज़ारना होता हैजिसमें लगता हैसत्य हर किसी ...
17/09/2026

सत्य हर किसी के लिए नहीं होता
ये करुणा समझने के लिए

उस करुणा के साथ बहुत वक़्त गुज़ारना होता है
जिसमें लगता है

सत्य हर किसी के लिए होता है

— Sakha

क्या आप 5 दिन… बिना मोबाइल, बिना सोशल मीडिया और बिना किसी से बात किए रह सकते हैं?ज़रा सोचिए…सुबह उठकर सबसे पहले फोन देखन...
14/09/2026

क्या आप 5 दिन… बिना मोबाइल,
बिना सोशल मीडिया और
बिना किसी से बात किए रह सकते हैं?

ज़रा सोचिए…

सुबह उठकर सबसे पहले फोन देखने की कोई जल्दी नहीं।
किसी को जवाब देने की ज़रूरत नहीं।
कोई बातचीत नहीं।
कोई पहचान नहीं।
कोई दिखावा नहीं।

बस प्रकृति…
मौन…
और आप।

Sakha Wellness, Saharanpur में होने वाला Maun Retreat कोई घूमने की जगह नहीं है।
न कोई course है, न कोई धार्मिक अनुष्ठान।

यह 5 दिन अपने भीतर लौटकर देखने का एक अवसर है।

यहाँ आपको कुछ बनने की कोशिश नहीं करनी है।
बस कुछ दिनों के लिए दुनिया से थोड़ा दूर होकर अपने साथ रहना है।

और सबसे खास बात…

🤍 यह Retreat पूर्णतः निःशुल्क है।

October 2026 में Retreat की तिथियाँ:
📅 07–11 October
📅 15–19 October

हर महीने 7-11 व 15-19

📍 Sakha Wellness – A Divine Healing Resort
गाँव – तिवड़ा माजरा, बस स्टैंड दाऊदपुरा, बेहट रोड, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश

लेकिन यहाँ आने से पहले कुछ ऐसी बातें हैं, जिन्हें जानना ज़रूरी है…

क्या आप 5 दिन बिना फोन रह पाएँगे?
क्या आप बिना बोले अपने साथ रह सकते हैं?
क्या आप बिना किसी पहचान के सिर्फ एक साधक बनकर रह सकते हैं?

अगर इन सवालों ने आपको थोड़ा भी रोक दिया है…

तो शायद आपको इसके बारे में और जानना चाहिए।

📲 दिनचर्या व पूरी जानकारी और Registration details के लिए WhatsApp करें:
89794 15551

शायद आपको किसी नई जगह की नहीं…
कुछ दिनों के लिए खुद तक पहुँचने की ज़रूरत है। 🤍

Team Sakha Wellness

हर इंसान भगवान से कुछ न कुछ माँग रहा हैलेकिन जहाँ पर मैं खड़ा हूँ वहाँ से देखता हूँ कि भगवान आपसे कुछ माँग रहा हैं मूढ़त...
12/09/2026

हर इंसान भगवान से कुछ न कुछ माँग रहा है
लेकिन जहाँ पर मैं खड़ा हूँ
वहाँ से देखता हूँ कि भगवान आपसे कुछ माँग रहा हैं

मूढ़ता भरे जीवन में समझदारी माँग रहा है
इंसानियत के लिए इंसान की ज़िम्मेवारी माँग रहा है

बच्चों के लिए बचपन माँग रहा है
जवानी के लिए संघर्ष माँग रहा है

समाज के लिए कर्म माँग रहा है
अध्यात्म के लिए सत्य माँग रहा है

प्रेम में खोना माँग रहा है
ध्यान में होना माँग रहा है

भक्तों के लिए भक्ति माँग रहा है
संसार से विरक्ति माँग रहा है

सुनो मित्र
जिससे तुम कुछ माँगना चाहते हो

वो तुमसे बहुत कुछ माँग रहा है

और उसकी माँग में ही , उसका वरदान छुपा है

तुम उसे वो दे दो, और तुम्हें वो मिल जायेगा
बिना माँगे ही ..... जिसके तुम अधिकारी

-Sakha

Glimpses of 9.9.2026The Birthday of Our Beloved Sakha ✨After a long period of reconstruction, our Meditation Hall is now...
10/09/2026

Glimpses of 9.9.2026
The Birthday of Our Beloved Sakha ✨

After a long period of reconstruction, our Meditation Hall is now ready and open for everyone to sit, meditate, and experience stillness.

A new addition to मौन Retreat:
The retreat is now combined with an evening Kirtan, creating a deeper space for silence, meditation, and inner connection. 🙏

Upcoming Event

Maun Retreat | 15–19 September 2026

And every month
7-11
15-19.

Book Your Slot:
📞 89794 15551

सत्य कोखोजने मत निकलनाबल्कि ये खोजना कितुम्हारे जीवन काउद्देश्य क्या है,और उसका सबसेआसान तरीका हैअपनी क्षमताओं कोबिना भ्...
04/09/2026

सत्य को
खोजने मत निकलना
बल्कि ये खोजना कि
तुम्हारे जीवन का
उद्देश्य क्या है,
और उसका सबसे
आसान तरीका है
अपनी क्षमताओं को
बिना भ्रमित हुए पहचानना।
और जिस दिन तुम
अपनी क्षमताओं को
पहचान जाते हो,
उसी दिन तुम्हें अपनी
ज़िंदगी का मक़सद
मिल जाता है।
उसी मक़सद के लिए
जीना तुम्हें एक दिन
उस सत्य से परिचित
कराएगा,
जो सत्य तुम्हारा होगा!

- Sakha

Call & WhatsApp 89794 15551 To know more about other meditation camps You can Comment below or direct message us.Upcomin...
29/08/2026

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89794 15551

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योग निद्रा
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अहंकार को स्वाभिमान कह कर पुकारना शुरू करो हैरान हो जाओगे ये देख कर कि कल तक जिससे मुक्ति चाहते थे अब वही तुम्हारी मुक्त...
23/08/2026

अहंकार को
स्वाभिमान कह कर पुकारना शुरू करो

हैरान हो जाओगे ये देख कर
कि कल तक जिससे मुक्ति चाहते थे

अब वही तुम्हारी मुक्ति बनने लगा

-Sakha

मेरे देखे
अक्सर लोग स्वाभिमान और अहंकार का भेद नहीं कर पाते
जैसे लोग कृष्ण के “मैं” को अहंकार समझ लेते है

और राजनेताओ के “हम” कहने को उनकी विनम्रता।

प्रेम हो और साथ ही समर्पित होने की कला तो साहसी प्रेमी का साथ पाते है और कायर प्रेमी की यादे -Sakha
20/08/2026

प्रेम हो और साथ ही समर्पित होने की कला

तो साहसी
प्रेमी का साथ पाते है

और कायर
प्रेमी की यादे

-Sakha

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