21/09/2026
मोक्ष
कितना सहज 😊
कितना सौम्य 🥰
कितना दुर्लभ भी 🧐
तो क्यू न मोक्ष को नज़दीक से पहचाने
सोंचे
आपने हरिद्वार जाने का फ़ैसला लिया ,
और निकल पड़े हरिद्वार के लिए तो क्या हरिद्वार पहुँचना आपको अपने विचार से मुक्ति जैसा नही लगेगा ... तो और क्या होता है मोक्ष
लेकिन निकले हरिद्वार के लिए और हरिद्वार पहुँचने से पहले ही सोंच बना ली कि ऋषिकेश भी जाएँगे
तो क्या हरिद्वार पहुँच कर आपको मोक्ष मिलेगा ... ?
या फिर ऋषिकेश की तरफ़ बढ़ते हुए गंगोत्री की सोंच बना ली तो फिर ...?
तो फिर ... आपका मोक्ष भी आपके विचारो और चाहतों की सीढ़ियाँ चढ़ता रहेगा ...
मंज़िल कभी न पाएगा ....!
और ऐसा ही कुछ होता है
धर्म की राह पर मोक्ष के लिए निकले जिज्ञासु के साथ
जब कोई थक जाता है चलते चलते
और थकान बढ़ती जाती है
तब कोई राही विश्राम कर लेना चाहता है
किसी वृक्ष के नीचे... और उसी वृक्ष का नाम “धर्म“ है
जिसकी छांव पुकारती है
उसको जो विरक्ति को उपलब्ध हुआ
लेकिन इस छांव की तलाश में राह ढूँढता हुआ इंसान उन साधु सन्यासियों से पता पूँछता है
जिसको वो समझता है
कि इन्हें वो विश्राम उपलब्ध हुआ है जिसे मोक्ष कहते है
लेकिन वो नही जानता
कि ये मात्र वस्त्रों का धोखा है
इन्हें भी वो छांव अभी तक उपलब्ध नही हुई
लेकिन वो सन्यासी इसे विश्राम न सिखा कर श्रम करना सिखाता है
योग
ध्यान
उन ऊर्जाओं की प्राप्ति के लिए
जिसे कोई कुंडलिनी जागरण का नाम देता है कोई चक्रों की शुद्धि का
कोई तुमको शक्तियाँ समझाता है कोई तुमको इसी को मोक्ष पाना
और अभी कुछ वर्षों के एक नया धंधा शुरू हुआ,
कुछ चालक व्यापारियों ने पहचान लिया कि इस राह पर कोई क्यू निकलता है,
उसके अनुसार संसार में असफल होकर
तो कुछ लोग धर्म के नाम पर
सफलता के गुण सिखाते है
और उसके नाम पर तुमको, काम क्रोध, आदि पर कंट्रोल करने की विधियाँ बताने लग जाते है
और ये बेचारा साधक समझता है
कि ये संसार से विपरीत कुछ सिखा रहा है तो यही होगी मोक्ष की राह
और यह भटकाव हरिद्वार से ऋषिकेश और ऋषिकेश से गंगोत्री के समान फैलता जाता है
जैसे संसार
शादी से बच्चे
और फिर उनकी शादी और फिर उनके बच्चों की तरह फैलता रहता है
तो धीरे धीरे वो इंसान मोक्ष के विश्राम से भटक आध्यतम के नाम पर वही पुराना कभी न रुकने वाला संसार खड़ा कर लेता है
बस अंतर होता है तो सिर्फ़ इतना कि पहले दृश्य ताक़तों की तरफ़ भागते थे और अब अदृश्य ताक़तों की तरफ़ भागते हो
मोक्ष से दूर जैसे मृग मरीचिका हो कोई
अब अगर मेरी बात आपको अपनी भटकाव की कहानी की तरह लगी हो तो
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कितना सहज 😊
कितना सौम्य 🥰
कितना दुर्लभ भी 🧐
तो क्यू न मोक्ष को नज़दीक से पहचाने
सोंचे
आपने हरिद्वार जाने का फ़ैसला लिया ,
और निकल पड़े हरिद्वार के लिए तो क्या हरिद्वार पहुँचना आपको अपने विचार से मुक्ति जैसा नही लगेगा ... तो और क्या होता है मोक्ष
लेकिन निकले हरिद्वार के लिए और हरिद्वार पहुँचने से पहले ही सोंच बना ली कि ऋषिकेश भी जाएँगे
तो क्या हरिद्वार पहुँच कर आपको मोक्ष मिलेगा ... ?
या फिर ऋषिकेश की तरफ़ बढ़ते हुए गंगोत्री की सोंच बना ली तो फिर ...?
तो फिर ... आपका मोक्ष भी आपके विचारो और चाहतों की सीढ़ियाँ चढ़ता रहेगा ...
मंज़िल कभी न पाएगा ....!
और ऐसा ही कुछ होता है
धर्म की राह पर मोक्ष के लिए निकले जिज्ञासु के साथ
जब कोई थक जाता है चलते चलते
और थकान बढ़ती जाती है
तब कोई राही विश्राम कर लेना चाहता है
किसी वृक्ष के नीचे ... और उसी वृक्ष का नाम “ धर्म “ है
जिसकी छांव पुकारती है
उसको जो विरक्ति को उपलब्ध हुआ
लेकिन इस छांव की तलाश में राह ढूँढता हुआ इंसान उन साधु सन्यासियों से पता पूँछता है
जिसको वो समझता है
कि इन्हें वो विश्राम उपलब्ध हुआ है जिसे मोक्ष कहते है
लेकिन वो नही जानता
कि ये मात्र वस्त्रों का धोखा है
इन्हें भी वो छांव अभी तक उपलब्ध नही हुई
लेकिन वो सन्यासी इसे विश्राम न सिखा कर श्रम करना सिखाता है
योग
ध्यान
उन ऊर्जाओं की प्राप्ति के लिए
जिसे कोई कुंडलिनी जागरण का नाम देता है कोई चक्रों की शुद्धि का
कोई तुमको शक्तियाँ समझाता है कोई तुमको इसी को मोक्ष पाना
और अभी कुछ वर्षों के एक नया धंधा शुरू हुआ ,
कुछ चालक व्यापारियों ने पहचान लिया कि इस राह पर कोई क्यू निकलता है ...
उसके अनुसार संसार में असफल होकर
तो कुछ लोग धर्म के नाम पर
सफलता के गुण सिखाते है
और उसके नाम पर तुमको , काम क्रोध, आदि पर कंट्रोल करने की विधियाँ बताने लग जाते है
और ये बेचारा साधक समझता है
कि ये संसार से विपरीत कुछ सिखा रहा है तो यही होगी मोक्ष की राह
और यह भटकाव हरिद्वार से ऋषिकेश और ऋषिकेश से गंगोत्री के समान फैलता जाता है
जैसे संसार
शादी से बच्चे
और फिर उनकी शादी और फिर उनके बच्चों की तरह फैलता रहता है
तो धीरे धीरे वो इंसान मोक्ष के विश्राम से भटक आध्यतम के नाम पर वही पुराना कभी न रुकने वाला संसार खड़ा कर लेता है
बस अंतर होता है तो सिर्फ़ इतना कि पहले दृश्य ताक़तों की तरफ़ भागते थे और अब अदृश्य ताक़तों की तरफ़ भागते हो
मोक्ष से दूर जैसे मृग मरीचिका हो कोई
अब अगर मेरी बात आपको अपनी भटकाव की कहानी की तरह लगी हो तो आगे सुनो
अन्यथा बंद करो पढ़ना और इंतज़ार करो कि ये कहानी तुम्हारी ज़िंदगी में भी घटे तब आगे की बात और मुझे समझ सकोगे
तो आगे की बात है
कि सदगुरु तुमको कभी भी इन मूढ़ताओ में नही फँसायेगा
बल्कि जो मोक्ष कि तरफ़ ले चलेगा वो विश्राम सिखाएगा
वो रुकवा देगा तुम्हारी सारी दौड़ , और यदि बिना विरक्ति
किसी आकर्षण वश इस राह पर आ गए हो तो बताएगा
वो जीवन शैली
जिससे जल्द से जल्द तुमको विरक्ति घटे
और उसका सबसे सहज तरीक़ा है भोग
अपनी इंद्रियो और अपने सपनो को भोगना
जितना भोग बढ़ेगा उतनी ही जल्दी विरक्ति से मुलाक़ात होगी
और जब विरक्ति से गुज़र कर कोई इंसान अपने गुरु के चरणो में विश्राम पाता है तब वो मोक्ष को उपलब्ध होता है
और मोक्ष को उपलब्ध इंसान का आगे का जीवन क्या होगा ये तय करता है परमपिता 👆🏻
फिर कोई मीरा गीत गाती है
कोई कृष्ण बाँसुरी बजाता है
कोई मोहम्मद तलवार उठा ले तो शक मत करना
और कोई Sakha 🧜♂️ तुम्हारे सामने खुद को बेपर्दा करे तो केवल तमाशबीन मत बने रहना
क्यूँकि नग्नता भी तुमको पुकारने का एक ढंग है उस परम की ओर ले चलने की पुकार
जिस तक पहुँचना ही हर जीवन का एक एक मात्र लक्ष्य है 🙏🏻
-Sakha
धार्मिक राह पर मिले भ्रम गिराने के लिए सुने 👇🏻
https://www.youtube.com/user/shashank668