23/03/2025
*तीनों महानायक भारत के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत: जी.एस.बब्बर*
*सहारनपुर । ( ) राष्ट्रहित व समाजहित के लिए समर्पित रजि. एनजीओ ‘‘वी सर्व इण्डिया’’ द्वारा देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तीनों महानायक- भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की महान शहीदी को समर्पित एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें सर्व प्रथम तीनों महानायकों के चित्र पर पुष्प अर्पित व दीप प्रज्ज्वलित कर जयघोष के साथ एनजीओ के प्रधान कार्यालय में किया गया।*
*सर्व प्रथम संस्थापक, अध्यक्ष जीएस बब्बर ने बताया कि ‘‘वी सर्व इण्डिया’’ राष्ट्रहित व समाजहित के लिए समर्पित रजिस्ट्रर्ड एनजीओ हैं, जोकि राष्ट्र के साथ-साथ सभी धर्म, वर्ग, जातियों के सम्मान, सुरक्षा तथा समस्याओं के निदान हेतु निष्पक्ष कार्य करने के लिए संकल्पित हैं। आज शहीद दिवस के अवसर पर एनजीओ कार्यालय पर सदस्यों व पदाधिकारियों द्वारा भारत के वीर सपूतों को याद किया जा रहा है। बब्बर ने बताया कि हमारे देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तीनों महानायक- भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को अंग्रेजी हुकूमत ने 23 मार्च को ही फांसी पर लटका दिया गया था। ये तीनों ही भारत के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। सिर्फ 23 साल की उम्र में भारत माँ की आजादी के लिए उन्होंने हंसते-हंसते अपनी जान का बलिदान दे दिया। तभी से हर साल 23 मार्च को इनकी याद में शहीद दिवस मनाया जाता है। शायद ही हम सब यह जानते हों कि भगत सिंह 8 वर्ष की छोटी उम्र में ही वह भारत की आजादी के बारे में सोचने लगे थे और 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना घर छोड़ दिया था। तीनों को 23 मार्च 1931 को ब्रिटिश शासन ने फांसी पर लटका दिया था। 23 मार्च का यह दिन भारतीय इतिहास में हमेशा के लिए अमर रहेगा क्योंकि इस दिन इन शहीदों ने अपने प्राणों की आहुति देकर भारत को स्वतंत्रता की राह पर एक कदम और बढ़ाया था।*
*नवनिवार्चित सहारनपुर महिला जिलाध्यक्ष श्रीमति अमनदीप कौर सिद्धू ने बताया कि भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव न केवल अपने समय के महान क्रांतिकारी थे, बल्कि आज भी भारत के युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बने हुए हैं। इन तीनों की साहसिकता और देशभक्ति को हम कभी भी भूल नहीं सकते क्योंकि उनका दिल भारत के लिए धड़कता था। सुखदेव ने भारत मां की आजादी के साथ 1929 में जेल में बंद भारतीय कैदियों के साथ हो रहे अपमान और अमानवीय व्यवहार किये जाने के विरोध में भी आवाज उठायी थी। बचपन से ही राजगुरु के अंदर जंग-ए-आजादी में शामिल होने की ललक थी। वाराणसी में विद्याध्ययन करते हुए राजगुरु का सम्पर्क अनेक क्रान्तिकारियों से हुआ। चन्द्रशेखर आजाद से इतने अधिक प्रभावित हुए कि उनकी पार्टी हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी से तत्काल जुड़ गए, उस वक्त उनकी उम्र मात्र 16 साल थी। आज हमें यह समझने की जरूरत है कि इन शहीदों ने हमें जो स्वतंत्रता दी है, वह बहुत कीमती है. हमें इस स्वतंत्रता को सहेज कर रखना है और इसके महत्व को समझते हुए अपने देश की सेवा में अपना योगदान देना है। श्रीमति सिद्धू ने कहा कि वी सर्व इण्डिया एनजीओ के माध्यम से हम इस महान शहीदी दिवस पर संकल्प लेते हैं कि हम सभी महिलाओं को एकजुट कर अपने देश की हरसम्भव सेवा में अपना योगदान देंगे और अपने शहीदों की बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। देश के महान नायकों के आदर्शों को अपनाकर हम अपने राष्ट्र को एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र बनाएंगे। इसी कड़ी में मुख्य रुप से स. गुरभेज सिंह पेजी, श्रीमति अनामिका शर्मा, श्रीमति अनुराधा, श्रीमति वन्दना सचदेवा, श्रीमति गरिमा जैन, श्रीमति वीना बजाज, श्रीमति रितु गुप्ता, श्रीमति संगीता आदि उपस्थित रहे।*