11/03/2023
कहां गए बिहार के रोजगार?
लाख उद्योग: गया, पूर्णिया
तेल मिल: पटना, मुंगेर, शाहाबाद
कागज व लुग्दी उद्योग: डालमिया नगर, समस्तीपुर, दरभंगा, पटना, बरौनी
प्लाईवुड: हाजीपुर
चमड़ा उद्योग: गया, दीघा, मोकामा
सीमेंट उद्योग: डालमिया नगर,
तंबाकू उद्योग: मुंगेर, बक्सर, गया, आरा
शराब कारखाना: मुंगेर, पटना, मानपुर, पंचरूखी
शीशा उद्योग: पटना
बंदूक उद्योग: मुंगेर
बटन उद्योग: दलसिंहसराय
दियासलाई: कटिहार
कंबल उद्योग: गया, पूर्णिया, औरंगाबाद, मोतिहारी
बीड़ी उद्योग: बिहारशरीफ, झाझा, जमुई
हथकरघा उद्योग: मधुबनी, भागलपुर, बिहारशरीफ, गया, पटना, मुंगेर
बर्तन उद्योग: सीवान, बिहटा
ये बिहार के हर इलाके में कभी फलते-फूलते उद्योगों की लिस्ट का हिस्सा भर है। इन उद्योगों के कारण खेती आज की तरह घाटे का सौदा नहीं थी। न ही मजबूरी में दूसरे राज्यों में पलायन एकमात्र विकल्प।
लेकिन करीब 4 दशकों में इन्हें एक-एक कर तबाह कर दिया गया। ऐसा नहीं है कि पलायन बिहार के लिए नया है। जगदीश चंद्र झा ने Migration and Achievements of Maithil Pandits में लिखा है कि बेहतर अर्थ लाभ के लिए मैथिल हमेशा से देश के अन्य क्षेत्रों में जाते रहे हैं।
लेकिन तब और अब के पलायन में एक मोटा फर्क है। तब लोग जड़ों की ओर लौटते वक्त अमूमन अपने साथ कृषि की नई तकनीक, स्वस्थ जीवन जीने के तरीके, घरेलू उद्योग लगाने के गुर सीख कर आते थे। इसकी वजह से पुराने वक्त में बिहार में पलायन के साथ उद्योग फल-फूल भी रहा था।
मसलन, मधुबनी में मलमल, दुलालगंज में कपड़ा, किशनगंज में कागज उद्योग चला। दरभंगा हाथी दाँत से बने सामान का केंद्र बना। खगड़िया, किशनगंज पीतल, कांसे के बर्तन के लिए। भागलपुर सिल्क तो मुंगेर घोड़े की नाल, स्टोव, जूते के लिए था। पूर्णिया सिंदूर, टेंट हाउस सामान बनाने के लिए।
चीनी मिल, वस्त्र, जूट, तंबाकू, दाल मिल, आटा चक्की मिलें, तेल मिल वगैरह के साथ-साथ कई सार्वजनिक उपक्रम भी राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लगे। निजी क्षेत्र में रोहतास इंडस्ट्रीज लिमिटेड (डालमिया नगर), अशोक पेपर मिल (दरभंगा), हिन्द इंजीनियरिंग कम्पनी (बरौनी) जैसे कई बड़े नाम थे।
बरौनी में 1946 में खाद कारखाना लगा। फिर यहीं तेल शोधक कारखाना भी। जमालपुर में रेलवे वर्कशाप तो मोकामा में भारत वैगन एवं इंजीनियरिंग कम्पनी लिमिटेड। बिहार से अलग होकर बने झारखंड की पहचान ही उद्योगों और खनिजों से थी। अलग-अलग शहर अलग-अलग कामों के लिए जाने जाते थे।
- अजित झा ()
फोटो भी बिहार के किसी बंद पड़े फैक्ट्री की है।