कपाल भाति ..या कमाल की अन्तः अंगो की कसरत ...अकेला ५ चक्रों को ठीक करता है
१ मूलाधार ...आंतो का पूरा विज्ञानं व् उनकी कसरत
२ स्वधिस्थान..जनन अंगो की कसरत
३ मणिपुर ..stomak व् सम्बंधित अंगो की कसरत व् समन्वय
4 निम्न ह्रदय चक्र ...रक्त प्रणाली की सफाई ,अद्रेनिल ग्लैंड की प्रवृत्ति सही करना ...
इसी से मांसाहार अपने आप छूट जाता है गुस्सा ख़तम यही से होता है
५ अनाहत चक्र ...ह्रदय की देखभाल ..सफाई
व् दया व् ममता का केंद्र
यानि अनुलोम विलोम के पहली या कहो ओक्स्य्जें(प्राण के चक्रों में प्रवेश से पहले ) के आने के पहले ये झाड़ू मरने का काम करता है
भाई शारीर के vahya अंगो की कसरत तो हो जाती है पर अन्तः अंग जैसे
गुर्दा ...यकृत ..स्प्लीन रक्वाहिकऊँ की सफाई...आंतो की सफाई ..जनन अंगो का समन्वय ..मूत्र रोगों का निवारण
कैसे हो ......तो ऋषियों ने पाया की सुबह खाली पेट को झटका देने से ५ चक्र शुध्ध हो जाते है व् उपरोक्त सभी बातो का निवारण हो जाता है
यानि मॉल मूत्र गांठे कैंसर हृदयी रोग आंतो की कमजोरी ,,कोलितिस ..धमनियों की सफाई व् अन्तः अंगो का रासायनिक समन्वय सब ठीक हो जाता है
कपाल भाती कई रोगों की एक दवा है ....जरूर करे व् रोग के मुताबिक मात्र बढ़ाये या घटाए
ये थोडा सा कष्ट दे सकता है ...सावधानियां
पेट खाली होना चाहिए
प्रति सेकड एक झटके की दर रखे..व् जोर से नही
करते समय कष्ट अनुभव न हो ॐ कका ध्यान व् आनंद हो
कम से कम १० मिनट ..असाध्य रोग हो तो मात्रा बढ़ा दे
यदि गुस्से की प्रवृत्ति है तो जोर से बिलकुल न करे व् अनुलोम विलोम इसकी मात्रा से ५ मिनट ज्यादा करे व् बाद में ही अनुलोम विलोम हो
यदि गुस्सा आता है बढ़ता है या रक्त दाब पहले से अधिक है तो रक्त दाब चेक करे व् साथ में दिव्या मुक्त वटी रोज एक/दो ले
कमर सीधे ,नीचे चद्दर ....व् आनंद से खुली हवा में उत्तम
क्रम न बिगड़े पहले हल्का व्यायाम ...१० मिनट ....भस्त्रिका ५ मिनट ...कपालभाती १० मिनट कम से कम ...अनुलोम विलोम १५-२० मिनट लगातार उत्तम
५ बार भ्रामरी ..५ बार ॐ ..फिर शवासन
पर जरूर करे .....ॐ.............JBRD