अंतर्राष्ट्रीय ब्राह्मण परिषद्

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अंतर्राष्ट्रीय ब्राह्मण परिषद् डॉ मनोज शर्मा
संस्थापक अध्यक्ष
अंतरराष्ट्रीय ब्राह्मण परिषद्,
मुख्यालय
सनातन शक्तिपीठम, भाना ब्राह्मनान, नरवाना, जींद, हरियाणा

05/03/2026

*Sanatan Shaktipeetham*
All the Sanatani Bandhu who were born in Sanatan Dharma, want to know their Sanatan Dharma science and want to protect it, know very well that foreign language education and culture, English and schooling are the root cause of our physical, mental, family, social, national and international problems and diseases.
The only solution to this can be our pure Sanatani Gurukuls, which were closed down since 1947/1950 under a conspiracy, and only the secular certificate schooling education system was promoted and is being promoted to keep the Sanatanis mentally enslaved forever by depriving them of the pride and self-respect of their Indian knowledge, science, philosophy and culture. Let us together become participants in the Dharmakaaj, Ramkaaj in the form of Sanatan Shaktipeetham and improve both our worldly and spiritual lives.
*Sanatan Vidya Parishad,*
*Sanatan Shaktipeetham*
9215229687


20/02/2026
17/02/2026

त्यजेद्धर्मं दयाहीनं विद्याहीनं गुरुं त्यजेत् ।
त्यजेत्क्रोधमुखीं भार्या निःस्नेहान्बान्धवांस्त्यजेत् ॥
अर्थ: दया से रहित धर्म को, विद्या से हीन गुरु को, सदैव क्रोध करने वाली पत्नी को और स्नेह (प्रेम) से रहित संबंधियों को त्याग देना चाहिए।

30/01/2026

अपने अधिकारों सामर्थ्य का सदुपयोग ऐसे भी कर सकते हैं देखिए की मामले पर सुनवाई के दौरान पूरी टिप्पणी पढ़िए / जिसे पढ़कर कंचना, निर्देश, प्रियंका, राजकुमार भाटी, नीले टाटी इत्यादि की आँखे फट के बाहर आ गईं :-

CGI की टिप्पणी - हम जातिविहीन समाज चाहते हैँ, आप क्या देश को भूतकाल में ले जाना चाहते हैँ ? गाइडलाइन्स एक ही पक्ष को ध्यान में रखकर बनाई गई हैँ सूर्यकान्त जी

वकील के जिरह पर :- जाति की पूरी व्यवस्था आपने ब्राह्मणों पर मढ़ कर समाज में नफरत घोल दी है, क्या मुस्लिमों की जातियां भी ब्राह्मणों ने बनाई है? ईसाई में जातियां भी ब्राह्मणों की दें है? बौद्ध, सिख, जैन क्या सभी की जातियां ब्राह्मणों ने बनाई है? अगर ब्राह्मणों की जातियों से इतनी दिक्कत है तो आज ही अपने नाम से जाती हटा लीजिये suprimeCaurt कौन आपको रोकेगा? कौन आपको अपने नाम के आगे जाति लगाने के लिए विवश कर रहा है?

स्टे देते समय :- अगर एक समाज खुद को IAS, IPS, CJI, President, PM बनकर भी खुद को शोषित ही रखना चाहता है तो इसमें गलती ब्राह्मणों की नहीं बल्कि उसकी अपनी मानसिकता की है ।

अद्भुत दृश्य था कोर्ट में , दलील और समर्थन पक्ष के लोगो के चेहरे से हवाईया उड़ी रही थी

22/01/2026

सबसे पहला आश्रम ब्रह्मचर्य 25 साल गुरु आचार्य के चरणों में रहकर पहला पुरुषार्थ धर्म धर्म कीजिए अर्थ काम मोक्ष सब वैभव स्वतः चरणों में आ जाएगा। सेक्यूलर सर्टिफिकेट स्कूलिंग एज्युकेशन सबकुछ निगल रही है ....

21/01/2026
21/01/2026

शिखा विज्ञान: चेतना की जाज्वल्यमान अग्नि
​1. शिखा का स्वरूप: अग्नि और शक्ति का पुंज
​वेदों में अग्नि को 'शिखी' कहा गया है। हमारे शरीर के शीर्ष पर स्थित यह स्थान ऊर्जा का सर्वोच्च शिखर है।
​वेदांत की दृष्टि: ऋषियों के अनुसार, शिखा उस स्थान पर होती है जहाँ सुषुम्ना नाड़ी का अंत होता है और सहस्रार चक्र (ब्रह्मरंध्र) स्थित होता है। यह वह द्वार है जहाँ से ब्रह्मांडीय ऊर्जा शरीर में प्रवेश करती है।
​अग्नि, गौ और शिखा: लेख में इन तीनों को 'सर्वदेवमय' कहा गया है। जिस प्रकार भारतीय देशी गौमाता के ककुद (हम्प) में सूर्यकेतु नाड़ी सौर ऊर्जा को ग्रहण करती है, उसी प्रकार मानव शरीर में शिखा 'कॉस्मिक एनर्जी' को सोखकर बुद्धि को कुशाग्र रखती है।
​2. ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव (रामायण व महाभारत के संदर्भ)
​महाभारत: इतिहास इस बात का साक्षी है कि शिखा का अपमान (द्रौपदी के केशों का खिंचना) कुल के विनाश और धर्म की स्थापना (महाभारत युद्ध) का कारण बना। यह दर्शाता है कि शिखा नारी और पुरुष दोनों के स्वाभिमान और शक्ति का प्रतीक है।
​राजसत्ता और मुकुट: राजा का मुकुट वास्तव में उसकी शिखा का ही मान बढ़ाने के लिए होता है। विवाह संस्कार में 'मौड़' या मुकुट धारण करना वर-वधू को उस दिन के लिए 'देव-तुल्य' पद प्रदान करता है।
​3. शास्त्रीय विधान और मंत्र शक्ति
​शिखा बंधन के बिना कोई भी धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण नहीं माना जाता। मंत्रों का विज्ञान ध्वनि तरंगों के माध्यम से उस केंद्र को सक्रिय करता है:
​गायत्री मंत्र से बंधन: "गायत्त्र्या तु शिखां बद्ध्वा..." यह मंत्र ब्रह्मरंध्र को सुरक्षित कर साधक की मेधा शक्ति को केंद्रित करता है।
​समावेशी सनातन धर्म: लेख में स्पष्ट है कि शिखा धारण करने का अधिकार सबको है। शूद्र वर्ण के लिए भी "ब्रह्मवाणीसहस्राणि..." मंत्र का विधान यह सिद्ध करता है कि सनातन विज्ञान समस्त मानवता के कल्याण के लिए है।
​4. शिखा मोचन और देवताओं का निवास
​शिखा खोलते समय का मंत्र "गच्छन्तु सकला देवा..." यह स्पष्ट करता है कि शिखा वह दिव्य स्थान है जहाँ ब्रह्मा, विष्णु और महेश निवास करते हैं। शिखा खोलने पर देवताओं की ऊर्जा को विदा किया जाता है, किंतु 'लक्ष्मी' (श्री या ऐश्वर्य) को वहीं अचल रहने की प्रार्थना की जाती है। यही कारण है कि देवताओं की प्रतिमा के सिर पर हाथ रखना वर्जित है, क्योंकि वह अत्यंत संवेदनशील ऊर्जा केंद्र है।
​5. वैज्ञानिक सावधानी और जीवन पद्धति
​भार निषेध: सिर पर बोझ ढोने की मनाही इसलिए है ताकि हमारे मस्तिष्क के केंद्र और शिखा स्थान पर दबाव न पड़े, जिससे स्नायु तंत्र (Nervous System) प्रभावित न हो।
​पुष्प अर्पण: सिर पर फूल चढ़ाना सकारात्मक ऊर्जा और सुगंध के माध्यम से मस्तिष्क को शांत रखने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
​सदमार्ग और डॉ. मनोज शर्मा का संदेश
​डॉ. मनोज शर्मा (संस्थापक संचालक, सदमार्ग परिवार) सदैव बल देते हैं कि सनातन विद्या परिषद के अनुसार शिवालिक ऋषिकुल में विद्यार्थियों को इसी शिखा विज्ञान और ब्रह्मचर्य के महत्व से अवगत कराया जाता है।
​विशेष विचार: "फैमिली डॉक्टर नहीं, फैमिली किसान ढूंढिए।" जब हम शिखा धारण कर मानसिक रूप से सजग होते हैं और भारतीय देशी गौमाता के घी व पंचगव्य का सेवन करते हैं, तो हमारे मस्तिष्क की कोशिकाएं (Neurons) और अधिक जागृत हो जाती हैं।
​सनातन शक्तिपीठम (भाना ब्राह्मणान, नरवाना) इसी वैज्ञानिक अध्यात्म का केंद्र है, जहाँ शिखा जैसी महान परंपराओं को पुनः स्थापित किया जा रहा है ताकि प्रत्येक हिंदू देवतुल्य और सर्वश्रेष्ठ बन सके।

10/01/2026

"नकल से नहीं, अक्ल से करें ज्योतिष का निर्णय"
​वर्तमान समय में जहाँ 'सेक्यूलर एजुकेशन माफिया' ने हमारी प्राचीन विद्याओं का बाजारीकरण कर दिया है, वहीं ज्योतिष जैसे दिव्य विज्ञान को AI और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के भरोसे छोड़ दिया गया है। सदमार्ग परिवार और सनातन विद्या परिषद यह स्पष्ट करती है कि ज्योतिष केवल गणितीय डेटा नहीं, बल्कि ऋषियों का 'योगज ज्ञान' है।
​1. ज्योतिष का प्रयोजन: लोक कल्याण
​शास्त्रों के अनुसार ज्योतिष का उद्देश्य केवल भविष्यवाणी करना नहीं, बल्कि मनुष्य को धर्म के मार्ग पर प्रशस्त करना है।
​"शास्त्रं ज्योतिर्विज्ञानं लोकानां हितकाम्यया।"
अर्थात्: ज्योतिष शास्त्र का निर्माण संपूर्ण लोक के कल्याण की कामना से किया गया है, न कि केवल यांत्रिक गणना के लिए।
​2. सूक्ष्म बुद्धि और विवेक का महत्व (गणित बनाम फलित)
​कंप्यूटर सॉफ्टवेयर ग्रहों की स्थिति तो बता सकते हैं, किंतु उनके सूक्ष्म प्रभाव का विश्लेषण केवल गुरु-सानिध्य में प्राप्त बुद्धि ही कर सकती है।
​"गणितं सूक्ष्म बुद्धिनां कार्यं भवति नान्यथा।" — (सूर्य सिद्धांत)
अर्थात्: गणित और उसका फलादेश सूक्ष्म बुद्धि का कार्य है, जिसका संशोधन केवल मानवीय विवेक से संभव है।
​3. योग और दशा का समन्वय
​AI सॉफ्टवेयर राजयोगों की लंबी सूची तो दे सकते हैं, पर वे योग फलित कब होंगे, यह केवल 'अनुपान स्वाध्याय' से सिद्ध होता है।
​"योगं फलप्रदं विन्द्याद् दशाभुक्तानुसारतः।" — (बृहत पाराशर होरा शास्त्र)
अर्थात्: योग तभी फल देते हैं जब दशा काल उनके अनुकूल हो। कंप्यूटर इस समय-काल और तीव्रता का निर्णय लेने में अक्षम है।
​4. ऋषिकुल परंपरा ही एकमात्र विकल्प
​डॉ. मनोज शर्मा जी का संकल्प है कि शिवालिक ऋषिकुल और सनातन शक्तिपीठम के माध्यम से ऐसी पीढ़ी तैयार हो जो 'नकलची कंप्यूटर' के स्थान पर 'अक्ल' और 'अनुभव' से फलादेश करे।
​शिखा-कच्छ मर्यादा: बिना शारीरिक शुद्धि और शास्त्रोक्त नियमों के किया गया कोई भी कर्मकांड या पाठ निष्फल है।
​बुद्धि की शुद्धता: जैसा कि चित्र में संकेत है— "बुद्धिनाशात्प्रणश्यति" (गीता)। यदि बुद्धि का नाश हुआ तो सब कुछ नष्ट हो जाएगा। और बुद्धि की शुद्धि के लिए "फैमिली डॉक्टर नहीं, फैमिली किसान ढूंढिए"।
​निष्कर्ष और आह्वान
​सनातनी ध्यान रखें कि कंप्यूटर केवल 'सूचना' देता है, 'समाधान' गुरु और शास्त्र देते हैं। सदमार्ग परिवार के पंचप्राण हमें यही सिखाते हैं कि हम अपनी जड़ों की ओर लौटें। देशी भारतीय गौमाता का सानिध्य और शुद्ध सात्विक आहार ही वह आधार है जिससे हमारे ऋषियों ने नक्षत्रों की गति को अपने ध्यान में प्रत्यक्ष देखा था।
​आचार्य डॉ. मनोज शर्मा
संस्थापक अध्यक्ष, सदमार्ग परिवार
सनातन विज्ञान भवन, ऋषिकेश
#ब्राह्मण

01/01/2026

अरे मूर्खों काफिरों सुन लो मूर्तिपूजा बच्ची के बलात्कार से बड़ा अपराध है म्लेच्छों के भाईचारा का चारा कब तक बनते रहोगे। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, कश्मीर,केरल , बंगाल, आसाम और लाइव टेलिकास्ट अब बंगला देश देख कर भी नहीं जगे तो कटते रहो ।

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Sandeep Bhardwaj, Ramesh Sharma"बंदउँ प्रथम महीसुर चरना, ...
27/12/2025

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Sandeep Bhardwaj, Ramesh Sharma
"बंदउँ प्रथम महीसुर चरना, मोह जनित संसय सब हरना'।
सुजन समाज सकल गुन खानी, करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी"।
अर्थात् पहले पृथ्वी के देवता ब्राह्मणों के चरणों की वन्दना करता हूँ, जो अज्ञान से उत्पन्न सब संदेहों को हरने वाले हैं। फिर सब गुणों की खान संत समाज को प्रेम सहित सुंदर वाणी से प्रणाम करता हूँ।

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Snatan Vigyan Bhawan, Gumaniwala
Rishikesh
135

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