24/05/2024
कल 25 में को तमाम स्थलों पर, पूर्व के दिनों की तरह लोकतंत्र के महापर्व का एक निर्णायक दिन है। कल मतदाता अपने मत अधिकार का प्रयोग करेंगे। लोगों को पक्ष विपक्ष को जिस भी तरीके से मतदाताओं को रिझवाना था, अपने पक्ष रखने थे, उन्होंने रखें!
बेचारा मतदाता कितना भी चाह ले वह अपने मतदान का प्रयोग तो करेगा। पर जिस भी आशा उम्मीद के साथ करेंगे ,एक सुशासन ,रोजगार, बेहतर आर्थिक स्थिति, विकास आदि तमाम मुद्दे जो उसके जीवन को दिन प्रतिदिन प्रभावित करते हैं अथवा भारत जैसे धार्मिक देश में आस्था का आधार धार्मिक विभेद का आधार ,जाति भेद का आधार ,वर्ण व्यवस्था का आधार , आदि आदि न जाने कौन सा फैक्टर उसके लिए महत्वपूर्ण है, यह मतदाता स्वयं निर्णय करेगा।
इसके बाद भी अगर उसने वास्तविक रूप से विकास के मूल और मौलिक मुद्दों को ध्यान में रखकर के अपने मत का प्रयोग किया ,तब भी जिस दल को वह अपना मत प्रदान करेगा ,इसकी कोई सुरक्षा नहीं कि वह दल उसकी भावनाओं की रक्षा करेगा, उसकी मान्यताओं को मानेगा, क्योंकि केवल एक ही दिन और कुछ ही क्षण ऐसा होता है ,जब मतदाताओं के ऊपर संपूर्ण दल के रथी ,महारथी निर्भर हो जाते हैं, और उनको लगता है कि अब तो सारा कुछ मतदाता के हाथ में है। हालांकि ऐसा है नहीं, क्योंकि तमाम शासनिक और प्रशासनिक लोगों के प्रवृत्तियों के कारण भी मत को प्रभावित किया जाता है।और फिर से एक बार सरकार हम लोगों के सामने होती है ।चेहरा जिसका हो दल जिसका हो लेकिन उसका व्यवहार जनमानस के विकास और उत्थान की नियत और किस ऊर्जा से लगती है ,वह हम पूरे 5 साल सिर्फ एक मूकदर्शक बनकर के, कठपुतली की तरह उनके उंगलियों के इशारे पर चलते रहते हैं ।
कानून का बलात प्रयोग ,कानून की धमकी, कानून का दुरुपयोग जैसे भी हो ,सीबीआई हो ,पुलिस को ED हो सब बड़ी हो जाती है। केवल चुनाव वाले दिन ही ,शायद उस दिन भी नहीं, पूरी तरह से मतदाता अपने को सामर्थ्यवान ,शक्तिमान या निर्णायक भूमिका में महसूस करता है।
क्योंकि उसे दिन भी उसको प्रभावित करने का प्रयास, शासन सत्ता के द्वारा निरंतर चलता रहता है ।
समझ में नहीं आता कि लोकतंत्र मानव विकास के लिए कितना समर्थवान है ,क्योंकि आज का लोकतंत्र लोक का तंत्र तो रह नहीं गया, वह किसी पार्टी का तंत्र या तो किसी सत्ता का तंत्र बनकर रह गया है।
लोकतंत्र कब मजबूत होगा ?हम लोकतांत्रिक लोग कब इस निर्णायक भूमिका में होंगे कि हम स्वयं के सामर्थ्य ,स्वयं की ताकत, स्वयं की इच्छा से शासन और सट्टा की स्थापना कर सके। क्योंकि यह भावनाएं सुनने में और बोलने में तो बहुत अच्छी लग रही है ,लेकिन पता है कि कल मतदान का दिन समाप्त होते ही सब कुछ परिणाम की प्रतीक्षा में 4 जून तक व्यतीत होगा ।और 4 जून के बाद जो भी पार्टी आएगी पक्ष में अथवा विपक्ष में ,वह कितना लोकतांत्रिक होगी अभी तक इस पर एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह रहा है! और शायद अभी भी रहेगा। और तब तक रहेगा जब तक जन जागरण ना हो जाए ।जन जागरण अभी अपनी चेतना से काफी दूर है ।उसे अपनी काफी लंबी यात्राएं लोकतंत्र के लिए करनी है ।
आए हम सब लोग लोकतंत्र के जनमानस एक विचार करें कि हम अपने को कुप्रवृत्तियों से बाहर निकाल करके, एक सुशासन और सत्ता की स्थापना के लिए जीवन जिएंगे।
हम किसी धर्म , संप्रदायवाद, जातिवाद आदि छोटे-छोटे विषयों पर अपने निर्णय को खराब नहीं करेंगे। हम अपने मौलिक विषयों से जुड़े रहेंगे ।हमारा मौलिक विषय विकास का, शिक्षा का, रोजगार का ,आर्थिक सुधर का होगा।
मानव मानव के लिए प्रेम करें !एक दूसरे के लिए उत्थान के मार्ग पर सहयोगी बने ऐसी परिकल्पना के साथ आप सभी को मतदाता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं बधाई🪷🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🪷
इस क्रिया योग के पेज पर यह मैं लिखना नहीं चाहता था लेकिन फिर भी लिख गया। अगर आप लोगों को कुछ अनुचित लगे तो क्षमा करिएगा और उचित लगे तो संकल्प बंद्ध होकर के, देश को आगे बढ़ाने में अपना संपूर्ण सहयोग करिएगा 🪷🙏🏻🙏🏻🙏🏻🪷