School of Kriya yoga

School of Kriya yoga This is 12 year Kriyayoga Course programme . Join ofter age of 15.Divided into 2+3+2+5 Years Practice

09/02/2026
27/12/2025

@ # # # #क्या क्या हो रहा इस संसार में ✨✨✨

18/05/2025

🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷@ #@ #@ #@ #योग: कर्मेषु कौशलम् !! कर्म की कुशलतम स्थिति को योग कहा गया है। अर्थात अगर हमें योग का अभ्यास करना है ,तो हम जो भी काम कर रहे हैं उसमें कुशलता में स्थिति को प्राप्त कर लिया जाए तो समझिए कि आपका योग पूर्ण होगा।
दूसरी तरफ कर्म करते समय जो भी क्रियाएं करी जाती हैं ,उस क्रिया के साथ युक्त हो जाना कुशलतम स्थिति में युक्त होकर के उसे क्रिया को करना, यह भी कर्म की कुशलता को ही बतलाता है।
हम चाहते हैं कि हमारा कर्म दिव्य हो, हमारा कर्म ईश्वरीय हो ,तो हमें सदैव अपनी चेतना को भूमध्य पर स्थिर रखते हुए, अपने सारे क्रियाकलापों और कर्मों को इस तरह से करना चाहिए कि जिससे उसे कर्म के साथ हमें और गहरा ,और गहरा , गहरा जुड़ते चले जाएं !
हम देखेंगे कि उसके जुड़ने में, हम जितनी गहराई प्राप्त करते जा रहे हैं ,हमारी चेतना उतनी ही प्रसारित होती जा रही है ।हमारी चेतना में ईश्वरीय ऊर्जाओं का उतना ही ज्यादा समावेश होता जा रहा है ।और इस प्रकार हम उस दृश्य सत्ता और अदृश्य ऊर्जा से सहज जुड़ने की ओर अग्रसर होते जा रहे हैं।

अतः आए हमने पहले भी सुना है कि कर्म ही पूजा है ,तो कर्म को पूजा की तरह ,कुशलता में स्थिति होकर के और इस स्थिति को अनुभव करते हुए, आगे बढ़े ! हमारा कर्म दिव्य हो जाएगा और परिणाम तो अपने आप दिव्य होना ही होना है🪷🪷🪷🪷🪷🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🪷🪷🪷🪷🪷🪷@ # # # # # # #№@@@@

15/05/2025

@ # #@ #@ #@ #@ #@ #🪷🪷🪷🪷🪷हर एक मनुष्य का उद्देश्य अपने आप को उत्तरोत्तर विकास की ओर ले जाने का रहता है। और इस उत्तरोत्तर विकास में सबसे बड़ी भूमिका उसके स्वयं के विचार ,व्यवहार तथा अन्य क्षमताओं पर निर्भर करती है ।अपने इस विचार व्यवहार तथा अन्य क्षमताओं को विकसित करने के लिए वह तमाम तरह के ऐसी प्रविधियां का प्रयोग करता है जिसके माध्यम से वह अपने को विकसित कर सके। इन्हीं सब प्रविधियां में अपने आप को विकसित करने का, अपने विचार ,अपने व्यवहार अपनी शारीरिक तथा अन्य क्षमताओं को विकसित करने के लिए, कुशलताओं को विकसित करने में ,योग की ध्यान की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसलिए हमें सदैव नियमित तौर पर अपने दैनिक दिनचर्या में क्रिया योग जैसी प्रविधियां का अवश्य सहयोग लेना चाहिए ,जिससे हमारे विचार, एकाग्रता और शारीरिक क्षमताएं ,कुशलताएं आदि विकसित होती रहे🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷@ # # # # #@@

12/08/2024

@ # # #अपने आप में वेदों ने सम्पूर्ण अभिव्यक्ति परमात्मा के बारे में कर दिया है। बहुत सारे लोगों ने अपनी -अपनी व्याख्या करते हुए इसको समझाने का प्रयास किया है।परन्तु फिर भी परमात्मा की प्राप्ति, चेतना के उस स्तर तक प्रकाशित न हो पाने के कारण, पूर्ण रूप से अनुभव नहीं हो पा रहा। शिक्षण और प्रशिक्षण की पूरी व्यवस्था न होने से भी ऐसा हो रहा। फिर भी विश्वास करें हम लोग बहुत भाग्यशाली हैं कि क्रिया योग जैसी खुबसूरत साधना हम लोगों के पास है। इसका नियमित अभ्यास आपको एक दिन परमात्मा का प्रत्यक्षीकरण करा ही देता है!🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🪷🪷🪷

21/07/2024

@ # # #आप सभी को गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं बधाई 🙏🏻🙏🏻
क्रिया -योग के मार्ग में आप सभी लोग महावतार बाबा जी द्वारा निर्देशित एवं गुरुदेव श्यामाचारण महाशय जी के द्वारा प्रशिक्षित क्रियो का अभ्यास निरंतर, नियमबद्ध तरीके से करते हुए अपने जीवन में शारीरिक ,मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान को और श्रेष्ठ कर बनाएं 🙏🏻🙏🏻
ऐसी शुभकामनाएं एवं प्रभु से प्रार्थना है 🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷🪷

21/06/2024

🌺🌺🌺अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की आप सभी को अनंत शुभकामनाएं एवं बधाई🌺🌺🌺

09/06/2024

सभी जिज्ञासुओंं को सादर प्रणाम 🪷🙏🏻🙏🏻🙏🏻🪷

09/06/2024

@ #योग एक आत्म-विजय की यात्रा है! इस आत्म- विजय में योद्धा भी आप ही हैं और विजेता भी आप ही हैं ।अतः इस युद्ध में जो पराक्रम एवं पुरुषार्थ की आवश्यकता है उस पर अपने आप की ही कुशलता को सिद्ध करना होता है।🪷🪷

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Devdas Mohanty, Ravindra Bhati, Ambareesh Raju, Pramod Si...
09/06/2024

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Devdas Mohanty, Ravindra Bhati, Ambareesh Raju, Pramod Singh, Sukhdevsingh Virk, Amit Kushwaha

@ # # #योग के अभ्यास से चित् की वृत्तियों का निरोध होता है।  प्रारंभ में इसी चित् की वृत्तियों को विकसित किया जाता है, प...
26/05/2024

@ # # #योग के अभ्यास से चित् की वृत्तियों का निरोध होता है। प्रारंभ में इसी चित् की वृत्तियों को विकसित किया जाता है, परिपक्व बनाया जाता है और फिर धीरे-धीरे यह निरोध की ओर बढ़ने लगता है । अतः आप स्वयं के साधन में, आवश्य इस बात की जांच करें कि आपकी वृत्तीया बढ़ रही है या घट रही है। अगर आपकी वृत्तियां बढ़ रही है और घट नहीं रही है ,इसका मतलब है आप योग के दर्शन से प्रतिकूल दिशा में यात्रा कर रहे हैं🪷🪷🪷

कल 25 में को तमाम स्थलों पर, पूर्व के दिनों की तरह लोकतंत्र के महापर्व का एक निर्णायक दिन है। कल मतदाता अपने मत अधिकार क...
24/05/2024

कल 25 में को तमाम स्थलों पर, पूर्व के दिनों की तरह लोकतंत्र के महापर्व का एक निर्णायक दिन है। कल मतदाता अपने मत अधिकार का प्रयोग करेंगे। लोगों को पक्ष विपक्ष को जिस भी तरीके से मतदाताओं को रिझवाना था, अपने पक्ष रखने थे, उन्होंने रखें!
बेचारा मतदाता कितना भी चाह ले वह अपने मतदान का प्रयोग तो करेगा। पर जिस भी आशा उम्मीद के साथ करेंगे ,एक सुशासन ,रोजगार, बेहतर आर्थिक स्थिति, विकास आदि तमाम मुद्दे जो उसके जीवन को दिन प्रतिदिन प्रभावित करते हैं अथवा भारत जैसे धार्मिक देश में आस्था का आधार धार्मिक विभेद का आधार ,जाति भेद का आधार ,वर्ण व्यवस्था का आधार , आदि आदि न जाने कौन सा फैक्टर उसके लिए महत्वपूर्ण है, यह मतदाता स्वयं निर्णय करेगा।
इसके बाद भी अगर उसने वास्तविक रूप से विकास के मूल और मौलिक मुद्दों को ध्यान में रखकर के अपने मत का प्रयोग किया ,तब भी जिस दल को वह अपना मत प्रदान करेगा ,इसकी कोई सुरक्षा नहीं कि वह दल उसकी भावनाओं की रक्षा करेगा, उसकी मान्यताओं को मानेगा, क्योंकि केवल एक ही दिन और कुछ ही क्षण ऐसा होता है ,जब मतदाताओं के ऊपर संपूर्ण दल के रथी ,महारथी निर्भर हो जाते हैं, और उनको लगता है कि अब तो सारा कुछ मतदाता के हाथ में है। हालांकि ऐसा है नहीं, क्योंकि तमाम शासनिक और प्रशासनिक लोगों के प्रवृत्तियों के कारण भी मत को प्रभावित किया जाता है।और फिर से एक बार सरकार हम लोगों के सामने होती है ।चेहरा जिसका हो दल जिसका हो लेकिन उसका व्यवहार जनमानस के विकास और उत्थान की नियत और किस ऊर्जा से लगती है ,वह हम पूरे 5 साल सिर्फ एक मूकदर्शक बनकर के, कठपुतली की तरह उनके उंगलियों के इशारे पर चलते रहते हैं ।
कानून का बलात प्रयोग ,कानून की धमकी, कानून का दुरुपयोग जैसे भी हो ,सीबीआई हो ,पुलिस को ED हो सब बड़ी हो जाती है। केवल चुनाव वाले दिन ही ,शायद उस दिन भी नहीं, पूरी तरह से मतदाता अपने को सामर्थ्यवान ,शक्तिमान या निर्णायक भूमिका में महसूस करता है।
क्योंकि उसे दिन भी उसको प्रभावित करने का प्रयास, शासन सत्ता के द्वारा निरंतर चलता रहता है ।
समझ में नहीं आता कि लोकतंत्र मानव विकास के लिए कितना समर्थवान है ,क्योंकि आज का लोकतंत्र लोक का तंत्र तो रह नहीं गया, वह किसी पार्टी का तंत्र या तो किसी सत्ता का तंत्र बनकर रह गया है।
लोकतंत्र कब मजबूत होगा ?हम लोकतांत्रिक लोग कब इस निर्णायक भूमिका में होंगे कि हम स्वयं के सामर्थ्य ,स्वयं की ताकत, स्वयं की इच्छा से शासन और सट्टा की स्थापना कर सके। क्योंकि यह भावनाएं सुनने में और बोलने में तो बहुत अच्छी लग रही है ,लेकिन पता है कि कल मतदान का दिन समाप्त होते ही सब कुछ परिणाम की प्रतीक्षा में 4 जून तक व्यतीत होगा ।और 4 जून के बाद जो भी पार्टी आएगी पक्ष में अथवा विपक्ष में ,वह कितना लोकतांत्रिक होगी अभी तक इस पर एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह रहा है! और शायद अभी भी रहेगा। और तब तक रहेगा जब तक जन जागरण ना हो जाए ।जन जागरण अभी अपनी चेतना से काफी दूर है ।उसे अपनी काफी लंबी यात्राएं लोकतंत्र के लिए करनी है ।
आए हम सब लोग लोकतंत्र के जनमानस एक विचार करें कि हम अपने को कुप्रवृत्तियों से बाहर निकाल करके, एक सुशासन और सत्ता की स्थापना के लिए जीवन जिएंगे।
हम किसी धर्म , संप्रदायवाद, जातिवाद आदि छोटे-छोटे विषयों पर अपने निर्णय को खराब नहीं करेंगे। हम अपने मौलिक विषयों से जुड़े रहेंगे ।हमारा मौलिक विषय विकास का, शिक्षा का, रोजगार का ,आर्थिक सुधर का होगा।
मानव मानव के लिए प्रेम करें !एक दूसरे के लिए उत्थान के मार्ग पर सहयोगी बने ऐसी परिकल्पना के साथ आप सभी को मतदाता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं एवं बधाई🪷🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🪷
इस क्रिया योग के पेज पर यह मैं लिखना नहीं चाहता था लेकिन फिर भी लिख गया। अगर आप लोगों को कुछ अनुचित लगे तो क्षमा करिएगा और उचित लगे तो संकल्प बंद्ध होकर के, देश को आगे बढ़ाने में अपना संपूर्ण सहयोग करिएगा 🪷🙏🏻🙏🏻🙏🏻🪷

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