भारतवर्ष के झारखंड प्रान्त में 32 जनजातियाँ निवास करती हैं। झारखंड में जनजातियों को उनके सांस्कृतिक आधार पर वर्गीकृत किया गया है। झारखंड राज्य में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 86,45,042 है जो राज्य की कुल जनसंख्या (3,29,88,134) का 26.21 % है। अनुसूचित जनजातियों के 91.7% लोग गांवों में निवास करते हैं। एसटी में समग्र साक्षरता दर 2001 की जनगणना के अनुसार 40.7% थी जो अब बढ़
कर 2011 की जनगणना के अनुसार 51.5% हो गई है। इस सुधार के बावजूद, जनजातियों के बीच साक्षरता दर राष्ट्रीय साक्षरता स्तर (73.0 %) के मुकाबले बहुत नीचे है। जनजातीय समाज को पूर्ण रूप से विकसित करने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास की नितांत आवश्यकता है। आदिवासी संस्कृति, जीवन शैली और भाषा का संरक्षण भी इस सन्दर्भ में बहुत आवश्यक है।
हमारा संगठन इस क्षेत्र में कई वर्षों से काम कर रहा है। हमारा प्रयास भी रहा है कि कामकाजी क्षेत्र के गरीबों के लिए शिक्षा और आदिवासियों के लिए रोजगार उपलब्ध कराएँ। हमारे संगठन के द्वारा आयोजित इस उत्सव का उद्देश्य भी है कि सभी 32 जनजातियों की संस्कृति, परंपराओं, जीवन शैली, कला रूपों, लोक नृत्य, पारंपरिक गायन, कविताओं, भाषाओं, भोजन की आदतों से सभी आदिवासी युवक-युवतियाँ परिचित हों।
इसके अलावा हमारा विशेष ध्यान डायन-प्रथा, शराब की लत आदि जैसे सामाजिक कुरीतियों के समाज पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव की ओर भी है, इन कुरीतियों को वे जाने समझें और उनके निराकरण का उपाय ढूंढें।
हमारा मानना है कि भूख और बेरोजगारी से लड़ने के लिए शिक्षा सबसे अच्छा हथियार है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए युवाओं को एक दूसरे के साथ जुड़ा होना चाहिए, साथ ही साथ हमारे समाज के गरीब बच्चों को करियर परामर्श तथा मार्गदर्शन करने या उनकी पढ़ाई की वित्तीय जिम्मेदारी लेने के लिए सक्षम लोगों को आगे आना चाहिए।
यह उत्सव समाज के पिछड़े युवकों के लिए एक लाभदायक मंच होगा जहाँ सफलतम व्यक्तित्वों से मिलने-जुलने एवं विचार-विमर्श करने का अवसर भी प्राप्त होगा। हमारी संस्कृति हमारी आत्मा है अत: हम अपनी संस्कृति को संरक्षित करते हुए सफल समाजरूपी शरीर के निर्माण की कोशिश कर रहे हैं। यह शिक्षा और रोजगार के साथ-साथ सांस्कृतिक जागरूकता से ही संभव हो सकेगा। इसलिए इस उत्सव के माध्यम से सभी जनजातियों, सफल व्यक्तियों, कलाकारों और आदिवासी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोगों से संपर्क कर उन्हें एक दूसरे के साथ जुड़ने और परिचित होने के लिए मंच प्रदान किया जायेगा। हम अपनी परंपरा और संस्कृति के अनुरूप ही इस उत्सव को ज्यादा से ज्यादा सूचनात्मक और मनोरंजन से भरपूर बनाने की कोशिश करेंगे।
इस उत्सव से विविध आदिवासी संस्कृतियों एवं परंपराओं के आधार पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रचार-प्रसार के अवसर लाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे विभिन्न व्यक्तियों तथा कलाकारों के बीच एक दूसरे को समझने और उनसे शैक्षणिक, बौधिक तथा व्यापारिक संबंध बनाने के भी अवसर प्राप्त होंगे ।