04/09/2026
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एवं
विश्व हिन्दू परिषद स्थापना दिवस की
हार्दिक शुभकामना
आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर विश्व हिन्दू परिषद के स्थापना के 62 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं।
हिन्दू जीवनमूल्यों के प्रति आस्था रखने वाली विश्व के कल्याणार्थ "अजेय हिन्दू शक्ति" खड़ी करेंगे, इस पावन लक्ष्य के लिये आज ही के दिन 1964 को स्वामी चिन्मयानंद के आश्रम पवई मुम्बई में परिषद की स्थापना हुई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक पूज्य श्रीगुरुजी की प्रेरणा तथा संघ के वरिष्ठ प्रचारक कालान्तर परिषद के प्रथम महामन्त्री श्री शिवरामशंकर आप्टे के कुशल संयोजन,
चिन्मय मिशन के संस्थापक पूज्य स्वामी चिन्मयानंद जी महाराज की अध्यक्षता में मास्टर तारा सिंह,राष्टसंत तूकड़ो जी महाराज, जैन संत पूज्य सुशील मुनि, पूज्य कुशक बकुला, श्री के.एम. मुनशी जैसे देश के गणमान्य मनीषियों की गरिमामई उपस्थिति में
विश्व भर में निवास कर रहे हिन्दू समाज को संगठित करने,हिन्दू जीवनमूल्यों और मानबिन्दुओं की पुनर्प्रतिष्ठा करने, पूज्य संतों के मार्गदर्शन में हिन्दू समाज के युगानुकूल मार्गदर्शन,समतायुक्त और समरस सशक्त हिन्दू खड़ा करने,गिरीवासी वनवासी अभावग्रस्त समाज की सेवा ,मंदिर मठ,तीर्थ,तीर्थयात्रा,तीर्थपुरोहित,संत महात्मा,हिन्दू कुटुंब जिनके कारण पराधीनता के लम्बे कालखंड
में हिंदू समाज अपनी परंपराओं और जीवन मूल्यों के साथ तमाम चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर सुरक्षित रहा उनकी भूमिका के पुनर्स्थापन के लिए परिषद की स्थापना हुई।
1966 तीर्थराज प्रयागराज में महाकुम्भ में परिषद द्वारा आयोजित प्रथम विश्व हिन्दू सम्मेलन संभवतः महाराज हर्ष के बाद हिन्दू का हिन्दू जीवनमूल्यों की रक्षा के संकल्प के उद्देश्य से महाकुम्भ में सबसे विराट एकत्रीकरण था,प्रथम विश्व हिन्दू सम्मेलन के विराट सभास्थल पर उपस्थित समस्त हिन्दू समुदाय को सभी मत पन्थों के पूज्य आचार्यों ने संबोधित किया,
सबकी वाक्य रचना भिन्न रही होगी ,
भाषा विलग रही होगी लेकिन भाव एक ही था
"मैं इस विराट हिन्दू समाज का अंगभूत घटक हूं,
मेरे प्रथम पुरुष ने इस समाज के संगठन और परिष्कार के लिये हमारे पंथ की स्थापना की भविष्य में भी हमारा पंथ इसी कार्य को करता रहेगा। "
हिंदवः सोदराः सर्वे,न हिन्दू पतितो भवेत।
मम दीक्षा हिन्दू रक्षा,मम मन्त्र समानता।।
1969 उडूपी कर्नाटक,हिन्दू सम्मेलन,मंच पर प्रमुख पूज्य संतगण और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक पूज्य श्री गुरुजी की गरिमामयी उपस्थिति में पूज्य संतों द्वारा हिन्दू समाज में पराधीनता के लम्बे कालखण्ड के दुष्परिणाम से व्याप्त अश्पृश्यता के विरुद्ध प्रस्ताव स्वीकार किया यह हिन्दू समाज के लिये ऐतिहासिक क्षण था पूज्य संतो ने घोषणा की छुआछूत शास्त्रसम्मत नहीं है जन्म के आधार पर कोई बड़ा नहीं कोई छोटा नहीं,कोई पावन नहीं कोई अपवित्र नहीं,हम सब भारतमाता की
सन्तान हैं सहोदर भाई हैं।
परिषद की ध्येययात्रा सतत चलती रही गिरीवासी वनवासी अभावग्रस्त क्षेत्रों में छात्रावास शिक्षा और चिकित्सा के प्रकल्प परिषद ने खड़े किये आज देश भर में सेवा कार्यों की अपनी एक मजबूत श्रृंखला है। हिन्दू समाज से बिछुड़े बंधुओं की घरवापसी और तथा धर्मांतरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध
परावर्तन के क्षेत्र में परिषद का एक एक पग मजबूती से बढ़ रहा है। गोरक्षा के लिये परिषद ने अपने जन्म के कुछ वर्षों बाद ही एक विराट आंदोलन खड़ा किया इस क्षेत्र में आज देशी गऊ की संवर्धन
गऊ रक्षा तथा गऊ आधारित कृषि के क्षेत्र में परिषद का गोरक्षा विभाग सतत प्रयत्नशील है।
1979 में तीर्थराज प्रयाग में संगम के पावन तट पर आयोजित द्वितीय विश्व हिन्दू सम्मेलन में देश विदेश के प्रतिनिधियों
की सहभागिता हुई। 1981तमिलनाडु प्रदेश के रामनाथपुरम जिले में मीनाक्षीपुरम गांव में 1345 अपने वंचित समाज के हिन्दू बन्धुओं ने सामूहिक रूप से इस्लाम मत को अपना लिया,स्वाधीन भारत में यह अपने तरह की पहली दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी,विश्व हिन्दू परिषद ने पूज्य संतों के आदेश से,देश में एक व्यापक जागरण का अभियान लिया "संस्कृति रक्षा निधि अभियान"
हिन्दू समाज में व्यापक जागरण के महायज्ञ का श्रीगणेश हुआ,
दिग दिगंत से ललकार उठी"धोखा लालच पेट्रो डालर नहीं चलेगा नहीं चलेगा" देश भर के हिन्दू समाज से उसके पसीने की कमाई का कुछ अंश प्राप्त कर, एक सेवा निधि एकत्रित की गयी जिसके माध्यम से देश के गिरिवासी और वनवासी क्षेत्र में सेवकार्यों की एक लंबी श्रृंखला आरम्भ हुई।
1983 परिषद द्वारा "एकात्मता यात्रा "के नाम से एक अभिनव कार्यक्रम किया। उत्तर से दक्षिण,पूर्व से पश्चिम सम्पूर्ण देश की श्रद्धाकेन्द्र भारतमाता के विग्रह तथा विशाल कुम्भों में अवस्थित पवित्र गंगामाता रथारूढ़ निकल पड़ीं,अपने सुप्त, आपस में संघर्षरत तथा आत्मगौरव को विस्मृत कर चुके अपने कोटि कोटि पुत्रों को जागृत करने हेतु एकात्मता के सूत्र में आबद्ध करने के हेतु तीन मुख्य यात्राएं तथा देश के सभी विकासखंडों को स्पर्श करती हुई लघु यात्राएं निकालीं गईं पूरा देश अपने द्वार पर स्वयं चल कर आईं अपनी दोनों माताओं के दर्शन कर कृतार्थ हो गया।
7 अक्टूबर 1984 को श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर की पुनर्प्रतिष्ठा का 77वां संघर्ष पूज्य संतों के आदेश से परिषद ने आरंभ किया कालांतर यह संघर्ष सहस्त्राब्दी का सबसे विराट जनांदोलन बन गया आज उस संकल्प की सिद्धि हुई रामलला अपने जन्मभूमि पर भव्य मंदिर में विराजमान हैं।
पूज्य श्री गुरुजी की प्रेरणा से स्थापित विश्व हिन्दू परिषद जिसे दादा साहब आप्टे,श्रद्धेय मोरोपन्त पिंगले,हिन्दू हृदय सम्राट माननीय अशोक जी,माननीय सूर्यनारायण राव, पूज्य आचार्य गिरिराज किशोर,श्रद्धेय सदानन्द काकड़े,स्वर्गीय ओंकार भावे मा.रामफल सिंह जी,मा.मोहन जोशी,आचार्य रामनाथ जी सुमन,बहन मन्दाकिनी दाड़ी, श्री सीताराम जी अग्रवाल जैसे अनेकानेक महापुरुषों ने अपनी श्रम साधना से पुष्पित और पल्लवित किया , जो परिषद पूज्य संत महात्माओं के आशीर्वाद से प्रभु की योजना का वाहक है आगे आने वाले दिनों में सात्विक शक्तियों के पुनरोदय का कारक भी है।
हिन्दू समाज के सम्मान के प्रत्येक संघर्ष में परिषद का अनूठा योगदान रहा ,अमरनाथ यात्रा का पुनर्जीवन,रामसेतु आन्दोलन,गऊ रक्षा हिन्दू समाज की श्रद्धा के बल पर परिषद ने अग्रणी भूमिका निभायी ।
- महर्षि देवल, परशुरामाचर्य,स्वामी रामानन्द तथा स्वामी दयानन्द की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए परिषद अपने स्थापना काल से ही धर्मान्तरित बंधुओं के घर वापसी के सत्कार्य में लगा है।
- मठ मंदिर,अर्चक पुरोहित ,तीर्थ और संस्कृत की पुनर्प्रतिष्ठा का कार्य भी परिषद् सफलता पूर्वक कर रहा है।
-गिरिवासी वनवासी अञ्चल में अपने बंधुओं के बीच सेवा कार्यों के माध्यम से परिषद समाज देवता की साधना में निरन्तर लगा हुआ है।
-संगठन बढ़ा कार्य बढ़ा लेकिन 62 वर्ष में हिन्दु समाज और देश के समक्ष चुनोतियाँ भी बढ़ी हैं -
- गऊ माँ के देश में उसका बहता हुआ रक्त , अपने ही देश में शरणार्थी हिन्दू, बांग्लादेशी घुसपैठिये,जेहादी आतंकवाद,लव जेहाद, नक्सलवाद, विदेशी धन से ईसाईकरण, सिमटती पतितपावनी गंगा तथा पर्यटन केंद्र में बदल रहा देवतात्मा हिमालय ,राष्ट्रहित की भी कीमत पर मुस्लिम तुष्टिकरण तथा एक ही देश में दो विधान जनसंख्या का असंतुलन,हिन्दू घरों में वैभव का विस्तार लेकिन संस्कारों का क्षरण,युवा वर्ग में बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति आज हिन्दू समाज के सामने बड़ी चुनौतियां है।
इन चुनौतियों का सामना करने के लिये हमें अनथक श्रम कर गिरिवासी वनवासी,नगरवासी,ग्राम वासी हिन्दू समाज में से लक्षाधिक कार्यकर्त्ता खड़ा कर गांव गांव तक संगठन के तंत्र को फैला देने का परिषद ने संकल्प लिया है आज परिषद अपने तंत्र और विभिन्न अभियान और कार्यक्रमों के माध्यम से अपने
ध्येयपथ पर निरंतर अग्रसर है।
हमारा लक्ष्य संगठित ,आग्रही, सक्रिय, जागरूक श्रद्धालु और आक्रामक हिन्दू।
हम सफल ही होंगे हमारी ध्येयनिष्ठा और श्रम के साथ हमारे रामजी की कृपा हमारे साथ है ।