04/09/2023
मधुपुर में दो दिवसीय ‘झारखंड जतरा’ शुरू
सामुहिक अभिव्यक्ति का नाम हैं झारखंड जतरा: घनश्याम
संवाद द्वारा दो दिवसीय ‘झारखंड जतरा’ के तहत ‘अखड़ा का सांस्कृतिक समागम’ पारंपरिक रिति-रिवाज से स्थानीय बावन बीघा, मंगलम रिसोर्ट परिसर में सोमवार को किया गया। जिसमे घनश्याम, ऐनी टुडू, ललिता, सालगे मार्डी, सुमित्रा कुजुर, आनंद मरांडी, भीखराम भगत, जमुना टुडू, बड़का मरंडी ने संयुक्त रूप् से दीप प्रज्जवलित कर नगाड़ा-टमाक बजा कर ‘झारखंड जतरा’ का आगाज किया। विषय प्रवेश कराते हुए घनश्याम जी ने कहा कि सामुहिक अभिव्यक्ति का नाम झारखंड जतरा है। हर आदिवासी गांव में अखड़ा है जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम, पर्व-त्योहार, ग्रामीण समस्याओं के विमर्श के लिए ग्रामीण जुटते है। सभी अखड़ा को मिला कर जतरा या जतरा मेला का आयोजन किया जाता है। अखड़ा और जतरा दोनो खतरे में है। आधुनिक तकनीक ने परंपरागत तकनीक को समाप्त कर बाजारवाद को बढ़ावा देने का काम किया है। नृत्य, गीत हमारे उर्जा को बढ़ाता है मानवीय रिश्ते को मजबूत बनाता है। प्रकृति से जोड़ता है। समग्र प्रक्रिया के अंदर ग्राम सभा को मजबूत कर स्वशासन, स्वालंबन और अपनी संस्कृति को मजबूत करना है। संस्कृति, रिति, रिवाज खान, पान को बचाने की जरूरत है। ग्राम सभा, अखड़ा और जतरा में समन्वय स्थापित कर नया समाज बनाना है। जिसमें महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी हो। ग्राम सभा को मजबूत करके ही अखड़ा और जतरा को मजबूत किया जा सकेगा। अखड़ा और जतरा नाच-गान के साथ जल, जंगल, जमीन और प्रकृति से जुड़ी है। इस अवसर पर ऐनी जी, आनंद ने भी अपने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में पाकुड़ दुमका, सिंहभूम, रांची, मधुपुर की अखड़ा टीम के कलाकार झारखंड जतरा में शामिल है।