Shakti Club Kali Puja Committee

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Shakti Club Kali Puja Committee Puja committee

2026 Kali puja meeting
15/09/2026

2026 Kali puja meeting

15/09/2026

First meeting of 2026 kali puja

Jai maa Kamakhya
01/08/2026

Jai maa Kamakhya

मां कामाख्या नज़दीकी मंदिर
1. उमानंद मंदिर – ब्रह्मपुत्र नदी के टापू पर स्थित है।
2. नवग्रह मंदिर – नवग्रहों को समर्पित प्रसिद्ध ज्योतिष मंदिर।
3. बशिष्ठ आश्रम – ऋषि बशिष्ठ से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल।
4. भूबनेश्वरी मंदिर – नीलांचल पहाड़ी पर ही एक और देवी मंदिर।
5. बालाजी मंदिर – तिरुपति स्टाइल का आधुनिक मंदिर।

@top fans

09/05/2026

कामाख्या को अक्सर तीन आँखों और दस भुजाओं के साथ चित्रित किया जाता है। वह बुराई की शक्ति और विनाश का प्रतीक विभिन्न हथियार धारण करती हैं। कमल का फूल पवित्रता और सुंदरता का प्रतीक है जो कामाख्या से जुड़ा है। प्रजनन क्षमता और जीवन शक्ति का प्रतीक लाल फूल अक्सर पूजा के दौरान उन्हें अर्पित किए जाते हैं। शेर को कामाख्या का वाहन माना जाता है। यह ताकत, साहस और भय पर प्रभुत्व का प्रतीक है। @top fans

09/05/2026

6. छिन्नमस्ता महाविद्या

महाविद्या छिन्नमस्ता छठी महाविद्या मानी जाती है जो माँ सती के शरीर से प्रकट हुई थी। इनका रूप मातारानी के सभी रूपों में सबसे अलग है क्योंकि इसमें मातारानी अपने एक हाथ में किसी राक्षस की खोपड़ी नहीं बल्कि अपना ही मस्तक पकड़े हुए खड़ी हैं।

महाविद्या छिन्नमस्ता का रूप
• वर्ण: गुड़हल के समान लाल
• केश: खुले हुए
• वस्त्र: नग्न, केवल आभूषण पहने हुए
• नेत्र: तीन
• हाथ: दो
• अस्त्र-शस्त्र व हाथों की मुद्रा: खड्ग व अपना कटा हुआ सिर
• मुख के भाव: अपना ही रक्त पीते हुए
• अन्य विशेषता: धड़ में से तीन रक्त की धाराएँ निकल रही है जिसमें से दो रक्त की धाराएँ पास में खड़ी सेविकाएँ पी रही हैं। मैथुन करते हुए जोड़े के ऊपर खड़ी हैं। गले में नरमुंडों की माला पहने हुए हैं।
महाविद्या छिन्नमस्ता का उद्देश्य
जब माता पार्वती अपनी दो सेविकाओं जया व विजया के साथ मंदाकिनी नदी पर स्नान करने गई तब स्नान करने के पश्चात तीनों को भूख लगी। दोनों सेविकाओं के द्वारा बार-बार भोजन की विनती करने पर माता ने अपना ही मस्तक धड़ से काटकर अलग कर दिया व उसके रक्तपान से सभी की भूख शांत की।
महाविद्या छिन्नमस्ता पूजा के फायदे
• शत्रुओं का समूल नाश
• भय का दूर होना
• विपत्तियों का समाप्त होना इत्यादि।
@top fansMAA Kamakhya

09/05/2026

मां कामाख्या नज़दीकी मंदिर
1. उमानंद मंदिर – ब्रह्मपुत्र नदी के टापू पर स्थित है।
2. नवग्रह मंदिर – नवग्रहों को समर्पित प्रसिद्ध ज्योतिष मंदिर।
3. बशिष्ठ आश्रम – ऋषि बशिष्ठ से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल।
4. भूबनेश्वरी मंदिर – नीलांचल पहाड़ी पर ही एक और देवी मंदिर।
5. बालाजी मंदिर – तिरुपति स्टाइल का आधुनिक मंदिर।

@top fans

09/05/2026

कामाख्या मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं के लिए भी मशहूर है। यहां देवी की मूर्ति नहीं है, बल्कि गर्भगृह में एक प्राकृतिक योनिकुंड है, जिसे जलधारा से सिंचित किया जाता है। भक्त इसे ही शक्ति स्वरूपा कामाख्या देवी मानकर पूजते हैं। इस मंदिर में तंत्र विद्याओं की भी साधना की जाती है। कामाख्या देवी के मंदिर के अलावा, यहां दस महाविद्यायों के मंदिर भी स्थापित हैं, जो देवी के दस स्वरूप हैं।

हर साल यहां अंबुबाची मेले का आयोजन होता है, जो पूरे देश में जाना जाता है। यह मेला देवी के वार्षिक मासिक धर्म का प्रतीक माना जाता है। तीन दिनों तक मंदिर के पट बंद रहते हैं और चौथे दिन देवी के दर्शन के लिए अपार भीड़ उमड़ती है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से यहां आते हैं।
इसके अलावा, मंदिर की वास्तुकला भी बेहद खास है। नीलांचल पर्वत पर स्थित इस मंदिर में मध्यकालीन उत्तर-पूर्वी शैली की झलक देखने को मिलती है। लाल रंग की गुंबदनुमा संरचना, नक्काशीदार मूर्तियां और मंदिर परिसर का शांत वातावरण आध्यात्मिकता की अनुभूति कराता है। @top fans

09/05/2026

9. मातंगी महाविद्या1

महाविद्या मातंगी नौवीं महाविद्या मानी जाती है जो माँ सती के शरीर से प्रकट हुई थी। मातारानी का यह रूप सबसे अनोखा है क्योंकि आपने कभी नहीं सुना होगा कि भगवान को झूठन का भोग लगाया जाता हो लेकिन मातारानी के इस रूप को हमेशा झूठन का भोग लगाया जाता है।
महाविद्या मातंगी का रूप
• वर्ण: गहरा हरा
• केश: खुले हुए व व्यवस्थित
• वस्त्र: लाल
• नेत्र: तीन
• हाथ: चार
• अस्त्र-शस्त्र व हाथों की मुद्रा: तलवार, फंदा, अंकुश व अभय मुद्रा
• मुख के भाव: शांत व आनंदमयी
• अन्य विशेषता: माँ सरस्वती के समान सामने वीणा रखी हुई है जिस कारण इन्हें तांत्रिक सरस्वती भी कहा जाता है।

महाविद्या मातंगी का उद्देश्य
एक बार जब भगवान शिव व माता पार्वती विष्णु व लक्ष्मी का दिया हुआ भोजन कर रहे थे तब उनके हाथ से भोजन के कुछ अंश नीचे गिर गए। उसी झूठन में से माँ मातंगी का प्राकट्य हुआ। इसी कारण मातारानी के इस रूप को हमेशा झूठन का भोग लगाया जाता है।
महाविद्या मातंगी पूजा के फायदे
• बुद्धि व विद्या का विकास होना
• कला व संगीत के क्षेत्र में उन्नति
• वाणी पर नियंत्रण व मधुर बनना
• जादू टोना या माया के प्रभाव से मुक्ति इत्यादि।
@top fansMAA Kamakhya

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12/01/2026

I've just reached 100 followers! Thank you for continuing support. I could never have made it without each one of you. 🙏🤗🎉

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