08/08/2026
आज हमारे "साहित्य सुमन मंच" पर प्रेषित है मंच की वरिष्ठ सम्मानित व लोकप्रिय रचनाकार प्रमिला त्रिवेदी जी की लिखी हुई एक बहुत ही सुंदर भावपूर्ण रचना।
आशा है आप सभी को भी प्रमिला जी की लिखी रचना अवश्य अच्छी लगेगी🙏🌹😊
फूलों की डोर से...
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फूलों की डोर से जब
मन का उपवन सज जाता है,
हर पत्ती पर ओस का मोती
प्रेम का संदेश सुनाता है।
मंद समीर की मीठी सरगम,
कलियों का मधुर मुस्काना,
आते-जाते हर पंछी को
अपना-सा घर लग जाना।
हथेली पर बैठता नहीं
केवल नन्हा-सा एक परिंदा,
विश्वास भी पंख पसारकर
हृदय में नीड़ बना लेता है।
नदी की निर्मल धारा जैसे
चुपचाप बहती जाती है,
वैसे ही सच्चे मन की ममता
बिन बोले सब कह जाती है।
जब मुस्कान में स्वार्थ न हो,
शब्द स्वयं झुक जाते हैं,
नयनों के निर्मल दर्पण में
अनगिन भाव उतर आते हैं।
जिस मन में प्रेम का दीप
अविरल, अविचल जलता है,
वहीं प्रभात की प्रथम किरण संग
ईश्वर स्वयं उतरता है।
आओ ऐसा जग रचें,
जहाँ हर मन मधुबन बन जाए,
हर धड़कन में करुणा महके,
हर रिश्ता चंदन बन जाए।
प्रेम, विश्वास और अपनापन ही
जीवन का सबसे सुंदर श्रृंगार है;
जिस हृदय में प्रकृति बसती है,
वहीं साक्षात् ईश्वर का द्वार है।
— प्रमिला त्रिवेदी✍️