12/06/2026
गांवों में बदलाव की नई इबारत लिख रहे हैं युवा....राजगढ़ जिले के 20 गांवों में 20 पीस वॉलेंटियर युवा अपने-अपने स्तर पर परिवर्तन के छोटे-छोटे लेकिन सार्थक प्रयास कर रहे हैं। ये प्रयास केवल गतिविधियां नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे बेहतर भविष्य की नींव हैं, जहां गांव केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि संवेदनशील, जागरूक और जिम्मेदार समुदाय के रूप में विकसित हों।
इन युवाओं के मन में एक नई सोच आकार ले रही है-"मेरा गांव सबसे अच्छा, स्वच्छ, स्वस्थ और खुशहाल बने।" एक ऐसा गांव जहां हर बच्चा सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में आगे बढ़ सके, हर युवा अपनी सकारात्मक भूमिका को पहचान सके, महिलाओं को समान अवसर और सम्मान मिले, तथा समाज में प्रेम, भाईचारा और सहयोग की भावना मजबूत हो।
इसी परिवर्तनकारी सोच को आगे बढ़ा रही हैं पीस वॉलेंटियर रानू, जो हीरनखेड़ा (घोघड़िया) गांव में युवाओं को संगठित कर बदलाव की एक सुंदर पहल कर रही हैं। रानू ने गांव के युवाओं की टोली तैयार की है, जो नियमित रूप से गांव के विकास, सामाजिक मुद्दों, स्वच्छता, शिक्षा, नशामुक्ति, बच्चों की सुरक्षा और सामुदायिक सहभागिता जैसे विषयों पर चर्चा कर रही है। यह टोली केवल समस्याओं की बात नहीं करती, बल्कि उनके समाधान की दिशा में भी सामूहिक प्रयास कर रही है।
रानू का मानना है कि किसी भी बड़े परिवर्तन की शुरुआत लोगों के विचारों में बदलाव से होती है। यही कारण है कि वे सादगी, प्रेम, संवाद और भाईचारे को अपने प्रयासों का आधार बना रही हैं। उनके नेतृत्व में युवा एक-दूसरे को प्रेरित कर रहे हैं कि गांव का विकास केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।
आज हीरनखेड़ा (घोघड़िया) में जो चर्चा शुरू हुई है, वह केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी गांवों के लिए प्रेरणा है जो अपने भविष्य को बेहतर बनाने का सपना देख रहे हैं। जब युवा सकारात्मक सोच के साथ आगे आते हैं, तो बदलाव केवल दिखाई नहीं देता, बल्कि स्थायी रूप से समाज का हिस्सा बन जाता है।
सचमुच, परिवर्तन की यह छोटी-छोटी पहलें ही कल के स्वच्छ, स्वस्थ, सुरक्षित और खुशहाल गांवों की मजबूत नींव बन रही हैं।