सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद - पं.क्र.छग ४९६५

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सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद - पं.क्र.छग ४९६५ सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद - पं.क्र.छग ४९६५ छ्त्तीसगढ के सतनामी समाज का सोसल मिडिया के युवा

08/06/2026

सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद - पं.क्र.छग ४९६५

05/06/2026

सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद - पं.क्र.छग ४९६५

पर्यावरण को सुरक्षित रखना ही,
आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित करना है..

 पर्यावरण को सुरक्षित रखना ही,आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित करना है..
05/06/2026


पर्यावरण को सुरक्षित रखना ही,
आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित करना है..

25/05/2026

सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद - पं.क्र.छग ४९६५
सतनाम सतपुरुष पिता जी के अमर संदेश -
1. जीव बलि मत दो।
2. अंधविश्वास, रूढ़िवाद, परंपरावाद को मत मानो।
3. इष्ट के नाम मे जीव बलि मत दो।
4. सभी जीवों पर दया करो।
5. अपने जीव को जान रहे हो वैसे ही दूसरों का भी जानो।

गुरुओं के जन्म जयंती में जो भिन्नता है उसमें गुरु बालकदास जी के है,गुरु बालकदास जी के जयंती जो अष्टमी के है जिन्हें पुरख...
23/05/2026

गुरुओं के जन्म जयंती में जो भिन्नता है उसमें
गुरु बालकदास जी के है,
गुरु बालकदास जी के जयंती जो अष्टमी के है जिन्हें पुरखों से मनाते आ रहे है वे एकदम सटीक है , इसमे कोई छेड़छाड़ न हो तो ही बेहतर है, हमारे पुरखा भले ही कम पढ़े लिखे थे या पढ़े लिखे नही थे लेकिन सामाजिक धार्मिक क्षेत्र में बहुत ही उच्च विचार के रहे है जिनका पार आज के साहित्यकार लोग नही पा रहे है और उनके महत्व को नही समझ पा रहे है, जन्माष्टमी के दिन पूरा समाज कृष्ण जन्माष्टमी मनाते थे है लेकिन पहले और अब भी समाज गुरु बालकदास जयंती मनाते है और अपने धार्मिक आयोजन करते हुवे अपने धर्म संस्कृति को आगे बढ़ा रहे है...
अलग से तारिक निकाल कर कही हम पुरखों के विचारों का गला तो नही घोंट रहे है..? विचारणीय है।

गुरुमाता मां मिनीमाता जी,
माता जी के जन्म पुरखा लोग होलिका दहन को मनाते थे , इससे समाज होले होलिका छोड़ अपने पुरखों को याद करता था आरती मंगल कर, फिर समाज में पढ़े लिखे लोग आए और इसे होलिका दहन से 13 मार्च कर दिया.. फिर समाज 13 मार्च स्वीकार लिया...
अब पिछले दो वर्ष हो गए फिर समाज मे 13 मार्च के जगह अब 15 मार्च करने पर तुले हुवे है...
जबकि उचित और सटीक होलिका दहन को ही माता जी के जयंती मनानी चाहिए... इससे समाज अपने धर्म संस्कृति की ओर आगे बढ़ेगा दुनिया भर के दुसरो के तीज त्यौहार से दूर... नशा पान से दूर....

वीर सरहा - जोधाई जयंती,
दोनों जुड़वा भाई की जयंती 14 अप्रैल समाज स्वीकार कर लिए है और जमीनी स्तर में मना रहे है, इसमे कोई और छेड़छाड़ न हो...
ऐसा कही भी किसी भी धर्म ग्रंथ या कानून में नही लिखा है कि एक ही तिथि में सिर्फ एक व्यक्ति के जन्मदिन हो , कइयों का रहते है..
और न ही तो ऐसा कही पर लिखा है कि अपने पुरखों के जयंती हमारे पुरखा के जयंती के दिन नही मना सकते, इसीलिए समाज को सभी जगह आयोजन करने चाहिए.. 14 अप्रैल को ही...

ऐसे ही समाज के पुरखा लोग सोंच विचार कर सब तिथि मनाते आ रहे है, और हम लोग पढ़े लिखे लोग होने के परिचय देने के लिए समाज को भ्रम में डाल रहे है...
यदि आपके लिए समाज आगे है तो समाज हित में आगे आये अपने ईगो साइड में रखकर....

23/05/2026

सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद - पं.क्र.छग ४९६५
गुरुओं के जन्म जयंती में जो भिन्नता है उसमें
गुरु बालकदास जी के है,
गुरु बालकदास जी के जयंती जो अष्टमी के है जिन्हें पुरखों से मनाते आ रहे है वे एकदम सटीक है , इसमे कोई छेड़छाड़ न हो तो ही बेहतर है, हमारे पुरखा भले ही कम पढ़े लिखे थे या पढ़े लिखे नही थे लेकिन सामाजिक धार्मिक क्षेत्र में बहुत ही उच्च विचार के रहे है जिनका पार आज के साहित्यकार लोग नही पा रहे है और उनके महत्व को नही समझ पा रहे है, जन्माष्टमी के दिन पूरा समाज कृष्ण जन्माष्टमी मनाते थे है लेकिन पहले और अब भी समाज गुरु बालकदास जयंती मनाते है और अपने धार्मिक आयोजन करते हुवे अपने धर्म संस्कृति को आगे बढ़ा रहे है...
अलग से तारिक निकाल कर कही हम पुरखों के विचारों का गला तो नही घोंट रहे है..? विचारणीय है।

गुरुमाता मां मिनीमाता जी,
माता जी के जन्म पुरखा लोग होलिका दहन को मनाते थे , इससे समाज होले होलिका छोड़ अपने पुरखों को याद करता था आरती मंगल कर, फिर समाज में पढ़े लिखे लोग आए और इसे होलिका दहन से 13 मार्च कर दिया.. फिर समाज 13 मार्च स्वीकार लिया...
अब पिछले दो वर्ष हो गए फिर समाज मे 13 मार्च के जगह अब 15 मार्च करने पर तुले हुवे है...
जबकि उचित और सटीक होलिका दहन को ही माता जी के जयंती मनानी चाहिए... इससे समाज अपने धर्म संस्कृति की ओर आगे बढ़ेगा दुनिया भर के दुसरो के तीज त्यौहार से दूर... नशा पान से दूर....

वीर सरहा - जोधाई जयंती,
दोनों जुड़वा भाई की जयंती 14 अप्रैल समाज स्वीकार कर लिए है और जमीनी स्तर में मना रहे है, इसमे कोई और छेड़छाड़ न हो...
ऐसा कही भी किसी भी धर्म ग्रंथ या कानून में नही लिखा है कि एक ही तिथि में सिर्फ एक व्यक्ति के जन्मदिन हो , कइयों का रहते है..
और न ही तो ऐसा कही पर लिखा है कि अपने पुरखों के जयंती हमारे पुरखा के जयंती के दिन नही मना सकते, इसीलिए समाज को सभी जगह आयोजन करने चाहिए.. 14 अप्रैल को ही...

ऐसे ही समाज के पुरखा लोग सोंच विचार कर सब तिथि मनाते आ रहे है, और हम लोग पढ़े लिखे लोग होने के परिचय देने के लिए समाज को भ्रम में डाल रहे है...
यदि आपके लिए समाज आगे है तो समाज हित में आगे आये अपने ईगो साइड में रखकर....

17/05/2026

सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद - पं.क्र.छग ४९६५
जब तक बताओगे नही तब तक दुनिया जानेगा कैसे..?
अपने पुरखों को छोड़कर दूसरे के गुणगान करते हो,
जब प्रताड़ित होते हो तब पुरखों के कार्यो को याद करते हो..?
वाह सतनामी समाज ... वाह..👌

16/05/2026

सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद - पं.क्र.छग ४९६५
मैं समस्त चौका वाले संत कड़िहार जनों से निवेदन करना चाहूंगा कि आप लोग सतनाम चौका में पंथी भजन के अलावा
गुरु घासीदास जी के 7 संदेश, 27 मुक्तक, 42 अमृतवाणी पर प्रकाश डालते हुवे विस्तार करिये, गुरु अमरदास जी के संदेश व त्याग को बताए, गुरु बालकदास जी के जीवन गाथा बलिदान व उनके कार्य को भी बताए, गुरुमां सहोद्रा माता जी के कुटेला धाम में ज्ञान उपदेशों को भी बताएं, अध्यात्म मार्ग बताएं...

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