Agricon Samiti

Agricon Samiti A Step Towards Well Being Chhattisgarh Agricon Samiti is a non-governmental organization, registered under the Societies Registration Act (1860). D.

It works with more than 25000 families in over 500 villages in 12 districts of Chhattisgrah. CG Agricon works for ensuring agriculture based livelihoods support to poor and marginalized people. Nearly three-fourths of the families Agricon works with belong to Schedule Tribes. Agricon is in the process of expanding its activities in remote area of tribal districts. Agricon’s mission is to develop

income generating opportunities at village level through integration of natural resources. Grassroots action to promote and strengthen livelihoods for the rural poor is Agricon’s primary work focus. In all places women are central to the project interventions. The activities of the CG Agricon focus towards developing entrepreneurial skill among farmers and income generating opportunities at village level through integration of natural resources. The CG Agricon has members from different disciplines of agriculture including Agriculture graduates, post graduate and Ph. Agricon works in entire Chhattisgarh at different capacity like Resource Orgaisation for Training & Capacity building under National Horticulture Mission; PIA for NABARD Wadi project & Watershed development; Facilitator for NABARD Farmers Clubs; etc.

Some things feel “normal” only because we’ve seen them all our lives.But what if we stopped for a moment and asked: Who ...
14/08/2026

Some things feel “normal” only because we’ve seen them all our lives.

But what if we stopped for a moment and asked: Who decided what women and men are “supposed” to do?

On 11–12 August, a two-day Gender Training at DPRC Bhavan, Kawardha brought participants together to explore exactly this.

Through interactive games, group discussions, activities and shared reflections, participants looked at how gender norms shape everyday roles, responsibilities, choices and expectations.

The conversations went beyond understanding gender as a concept. They created space to question familiar norms, reflect on lived experiences, and look at equality from a different perspective.

Because change doesn’t always begin with an answer.

Sometimes, it begins with a better question.

Two days of learning. New perspectives. One more step towards a more equal and inclusive society.

Change in Progress.

21 साल।हजारों कदम।अनगिनत कहानियाँ।और बदलाव, जो आज भी आगे बढ़ रहा है।Happy Agricon Foundation Day!Here's to the people wh...
14/08/2026

21 साल।
हजारों कदम।
अनगिनत कहानियाँ।
और बदलाव, जो आज भी आगे बढ़ रहा है।

Happy Agricon Foundation Day!

Here's to the people who didn't just witness change,
they led it.

21 Years. Communities Leading Change.

They didn’t wait for change to happen. They stepped forward to make it happen.From a conversation in a village to a voic...
12/08/2026

They didn’t wait for change to happen. They stepped forward to make it happen.

From a conversation in a village to a voice that reaches a wider community, Kavir and Yuvoday volunteers are showing what youth leadership can look like on the ground.

They bring people together.
They start conversations.
They listen, learn and act.
And most importantly, they turn their energy into something their communities can build on.

This International Youth Day, we celebrate the young people who are choosing to show up, take responsibility and create change where they live.

Because when young people lead, change doesn’t stay an idea.

It moves.

Change in Progress.

क्या किसान कम लागत में मिट्टी को फिर से ज़िंदा कर सकते हैं?इंद्रावती–शबरी लैंडस्केप रेस्टोरेशन कार्यक्रम के तहत बस्तानार...
11/08/2026

क्या किसान कम लागत में मिट्टी को फिर से ज़िंदा कर सकते हैं?

इंद्रावती–शबरी लैंडस्केप रेस्टोरेशन कार्यक्रम के तहत बस्तानार और तोकापाल विकासखंडों के किसानों के लिए प्राकृतिक खेती पर व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

किसानों ने सीखा:
• बीजामृत, जीवामृत और घनजीवामृत का उपयोग
• प्राकृतिक कीट एवं रोग प्रबंधन
• जैविक घोलों की तैयारी
• मृदा स्वास्थ्य संरक्षण
• स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग

प्राकृतिक खेती सिर्फ एक तकनीक नहीं है,यह मिट्टी को स्वस्थ रखने, स्थानीय संसाधनों को सहेजने और किसान की आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में एक कदम है।

किसानों की सक्रिय भागीदारी और इन तरीकों को अपनाने की रुचि इस बदलाव की एक मजबूत शुरुआत है।

"स्वस्थ मिट्टी | टिकाऊ खेती | मजबूत आजीविका"

एक सही शुरुआत, स्वस्थ बचपन की ओर पहला कदम | Breastfeeding Week 2025ग्राम नौडीह में स्तनपान सप्ताह के अवसर पर स्वयंसेवक र...
10/08/2026

एक सही शुरुआत, स्वस्थ बचपन की ओर पहला कदम | Breastfeeding Week 2025

ग्राम नौडीह में स्तनपान सप्ताह के अवसर पर स्वयंसेवक रागिनी ने माताओं के साथ दो दिवसीय जागरूकता संवाद किया।

इस दौरान चर्चा हुई-
✅ जन्म के पहले एक घंटे में स्तनपान का महत्व
✅ माँ के पहले दूध (कोलोस्ट्रम) के पोषण लाभ
✅ शिशु के लिए 6 माह तक केवल स्तनपान की आवश्यकता
✅ सही स्तनपान तकनीक और शिशु के स्वस्थ विकास में इसकी भूमिका

स्तनपान केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शिशु के जीवन की "सबसे मजबूत शुरुआत" है। यह न केवल बच्चे को पोषण देता है, बल्कि उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और समग्र विकास को भी मजबूत करता है।

💚 सही जानकारी, स्वस्थ निर्णय और मजबूत भविष्य यही है स्तनपान जागरूकता का उद्देश्य।

क्या आपका गाँव बच्चों के लिए सुरक्षित और सहयोगपूर्ण है?हर बच्चे का सुरक्षित और खुशहाल बचपन सिर्फ परिवार की नहीं, बल्कि प...
03/08/2026

क्या आपका गाँव बच्चों के लिए सुरक्षित और सहयोगपूर्ण है?

हर बच्चे का सुरक्षित और खुशहाल बचपन सिर्फ परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की जिम्मेदारी है।

इसी सोच के साथ समुदाय ने मिलकर ग्राम स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति में ऐसे स्थानीय स्वयंसेवकों को जोड़ा गया है जिन्होंने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आगे आने का संकल्प लिया है। ये स्वयंसेवक अपने गाँव में सकारात्मक बदलाव लाने का काम कर रहे हैं और बच्चों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

बैठक के दौरान अभिभावकों ने भी इस बात पर जोर दिया कि बच्चों की शिक्षा, घर में पढ़ाई का अच्छा माहौल, नियमित स्कूल उपस्थिति और सुरक्षित वातावरण बनाना उनकी भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। सभी ने मिलकर यह समझा कि बच्चों की सुरक्षा किसी एक संस्था का काम नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।

जब समुदाय, अभिभावक और स्वयंसेवक एक साथ काम करते हैं, तब बच्चों के लिए ऐसा माहौल बनता है जहाँ वे सुरक्षित महसूस करते हैं, बेहतर सीखते हैं और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं।

एक सुरक्षित बचपन, एक मजबूत समाज की नींव है।

आपके अनुसार बच्चों की सुरक्षा और बेहतर भविष्य के लिए गाँव या समुदाय क्या सबसे महत्वपूर्ण कदम उठा सकता है?

नीचे कमेंट में जरूर बताएं।

ग्राम मांडवा में हरित भविष्य की नई शुरुआतग्राम मांडवा के किसानों ने उद्यान विभाग से प्राप्त "300 आम के पौधों" का अपनी व्...
31/07/2026

ग्राम मांडवा में हरित भविष्य की नई शुरुआत

ग्राम मांडवा के किसानों ने उद्यान विभाग से प्राप्त "300 आम के पौधों" का अपनी व्यक्तिगत भूमि पर पौधारोपण किया। यह पहल केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में फल उत्पादन, आय के नए अवसरों और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

जब किसान अपनी भूमि पर फलदार वृक्ष लगाते हैं, तो वे केवल आज के लिए नहीं, बल्कि अपने परिवार और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी निवेश करते हैं। समय के साथ ये आम के पौधे आजीविका को सशक्त बनाने के साथ-साथ गाँव के हरित आवरण को भी समृद्ध करेंगे।

आज लगाया गया एक पौधा, कल की समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ भविष्य की मजबूत नींव बन सकता है।

कुछ सपने स्कूल की घंटी के साथ नहीं, बल्कि उसके छूट जाने के बाद भी इंतज़ार करते रहते हैंहर बच्चा जो स्कूल से दूर हो जाता ...
27/07/2026

कुछ सपने स्कूल की घंटी के साथ नहीं, बल्कि उसके छूट जाने के बाद भी इंतज़ार करते रहते हैं

हर बच्चा जो स्कूल से दूर हो जाता है, उसके साथ शिक्षा, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य के कई अवसर भी पीछे छूटने लगते हैं।

इसी उम्मीद को फिर से जगाने के लिए विकासखंड भैरमगढ़ में बीजादूतीर स्वयंसेवकों ने शाला त्यागी एवं अप्रवेशी बच्चों की पहचान की। उन्होंने परिवारों से संवाद किया, शिक्षा के महत्व पर चर्चा की और बच्चों को दोबारा विद्यालय से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए।

धीरे-धीरे भरोसा बना... और वही भरोसा 12 बच्चों को फिर से स्कूल के दरवाज़े तक ले आया।

आज ये 12 बच्चे केवल कक्षा में वापस नहीं लौटे हैं, बल्कि उन्होंने सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को फिर से जीने की एक नई शुरुआत की है।

क्योंकि जब एक बच्चा स्कूल लौटता है, तो बदलता सिर्फ उसका आज नहीं
उसका पूरा भविष्य बदलने लगता है

💬 आपके अनुसार किसी बच्चे की शिक्षा जारी रखने में समाज की सबसे बड़ी भूमिका क्या हो सकती है?

क्या केवल अधिक रासायनिक उर्वरक ही बेहतर फसल का रास्ता हैं?शायद नहीं।स्वस्थ मिट्टी और टिकाऊ खेती की शुरुआत ऐसे विकल्पों स...
25/07/2026

क्या केवल अधिक रासायनिक उर्वरक ही बेहतर फसल का रास्ता हैं?
शायद नहीं।

स्वस्थ मिट्टी और टिकाऊ खेती की शुरुआत ऐसे विकल्पों से भी हो सकती है, जो प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलें।

इसी सोच के साथ आयोजित "जैव उर्वरक प्रशिक्षण" में किसानों ने जैव उर्वरकों के महत्व, उनके वैज्ञानिक उपयोग और फसलों में प्रभावी अनुप्रयोग की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। प्रदर्शन आधारित सत्रों के माध्यम से उन्होंने समझा कि जैव उर्वरक मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को सक्रिय करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में सहायक हो सकते हैं।

प्रशिक्षण के अंत में किसानों को "जैव उर्वरक किट" भी प्रदान की गई, ताकि वे अपने खेतों में सीखी गई तकनीकों को आज़मा सकें और अधिक टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल एवं लागत प्रभावी खेती की दिशा में कदम बढ़ा सकें।

हर स्वस्थ खेत की शुरुआत एक सही निर्णय से होती है।
आपके अनुसार टिकाऊ खेती की दिशा में सबसे बड़ा बदलाव क्या हो सकता है? अपनी राय कमेंट में साझा करें।

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प्राकृतिक खेती का आधार केवल तकनीक नहीं, बल्कि अपने आसपास उपलब्ध संसाधनों पर भरोसा भी है।जैविक आदानों पर आयोजित प्रशिक्षण...
24/07/2026

प्राकृतिक खेती का आधार केवल तकनीक नहीं, बल्कि अपने आसपास उपलब्ध संसाधनों पर भरोसा भी है।

जैविक आदानों पर आयोजित प्रशिक्षण में किसानों ने जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक जैविक आदानों को तैयार करने और उनके उपयोग की व्यावहारिक प्रक्रिया को समझा। संवाद और प्रायोगिक प्रदर्शन के माध्यम से यह भी जाना कि स्थानीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

जब किसान अपने ज्ञान और स्थानीय संसाधनों के साथ आगे बढ़ते हैं, तब खेती केवल उत्पादन का माध्यम नहीं रहती

वह आत्मनिर्भरता, प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ भूमि का आधार बनती है।

परिवर्तन छोटे कदमों से शुरू होता है, और हर खेत उस बदलाव की एक नई शुरुआत बन सकता है।

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