सर्वप्रथम सम्पूर्ण विश्व की माँ कामधेनु गौ माँ के चरणों में सादर वंदन
वर्तमान परिदृश्य में हो रहे संस्कृति के विनाश को सामान्य समझ कर इस भारत वर्ष के समस्त मूर्ध्य जन अपने जीवन यापन में व्यस्त है सभी को यह सामान्य प्रतीत हो रहा है ,लोग बिना मुद्दों के आपस में लड़कर,दुसरो की समस्या से मुह चुराकर ,अपने माता पिता को बुढ़ापे में त्यागकर ,उनकी नक़ल करके जो आजकल योग,ध्यान ,दर्शन में हमारी संस्कृति को श
िरोधार्य कर रहे है ,अपने आपको संपन्न मान रहे है
सावधान हो जाओ
जैसा दिख रहा है वैसा है नहीं
हमारी संस्कृति को अक्षुण रखने वाले हर तत्त्व को सुनियोजित तरीके से नष्ट किया जा रहा है
गौ माँ,
माँ गंगा ,
पर्वतराज हिमालय,
नारीशक्ति ,
हमारे संस्कार ,
हमारे संत,
हमारी प्रकृति पर्यावरण
आखिर क्यों
कैसे हमारा देश जगद गुरु कहलाता था
जब हमारे देश में उपरोक्त लिखित तत्वो का यथोचित सम्मान था ,हमने उनका तिरस्कार किया अब उसका परिणाम भोग रहे है ,समय रहते नहीं सम्हले तो बाद में रोने से भी बदलाव नहीं आने वाला
वर्तमान समय में कामधेनु माँ के वंशजो के साथ हो रहे अत्याचार ,व् उनकी दुष्कर स्तिथि का आरोपी हम और हमारा समाज है जिसने चंद अंग्रेजो द्वारा हमारी संस्कृति को नष्ट कर हमें नष्ट करने की उनकी चाल को ना समझ कर अपने संस्कारो को छोड़कर उनकी ऐसी नक़ल की जिसका परिणाम अभी से इतना घातक है ,की आने वाले १० सालो में हमारी सनातन संस्कृति तो इस पृथ्वी के परिदृश्य से पूरी तरह साफ़ हो जायेगी
गौवंश व् अन्य मूक प्राणियों की सेवा के नाम पर समाज में प्रचारित ढोंगी और पाखंडियो की सेवा की असलियत पता चलने पर ह्रदय में तीव्र वेदना हुई ,अपने मानव जीवन में हमने क्या किया इसका आभास हुआ
और इसी के साथ "अखिल विश्व गौ सेना " की नींव रखी गई ,की एक ऐसा श्रेष्ठ,सार्थक उदाहरण विश्व के सामने प्रस्तुत करना है जहाँ सेवा भावना और सार्थक कार्यो का समावेश हो
धीरे धीरे ही सही लेकिन संगठन अपने मिशन में आगे बढ़ रहा है ,अनेक उतार चढाव ,परेशानियों ,तोड़ देनी वाली परिस्तिथियों का सामना करते हुए ,मानसिक ,शारीरिक परीक्षाओ को देते हुए
संगठन की कार्यशैली " समाज के लिए -समाज के द्वारा" पर आधारित है ,कोई शासकीय अनुदान नहीं ,समाज से प्राप्त अंशदान ,गौसैनिको द्वारा अपनी आय के हिस्से से संगठन का आर्थिक आधार चलता है
घायल गौवंश व् प्राणियों का उपचार।
घायल गौवंश व् प्राणियों का उपचार करने का प्रशिक्षण।
गौलोक गमन कर गये गौवंश्व व अन्य प्राणियों का ससम्मान गौलोक गमन संस्कार।
गौ वंश जनजागरूकता अभियान।
गौ ग्राम तीर्थ पदयात्रा अभियान।
कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम।
गौवंश की तस्करी रुकवाना।
गौशालाओं की निगरानी।
गौ उत्पादित पदार्थो को बढ़ावा।
जैविक उत्पादों का प्रचार प्रसार।
साथियो यह कोई आसान कार्य नहीं है ,सेवा की भावना ह्रदय से आती है हम और आप उसे खरीद नहीं सकते ,ज़माने के हवा के विपरीत वाला कार्य है यह
सहयोग भी ऐसे नहीं मिलता ,काले अंग्रेजो से आये दिन सामना उनसे वैचारिक लड़ाईया
लेकिन इन सभी अवरोधों के बाद भी हम रुकेंगे नही ,चलते चलेंगे
क्यूकि हमने अपनी माँ का भी दूध पिया है और गौ माँ का दूध भी
ऐसा कार्य हर कोई कर भी नहीं सकता पात्रता,पूर्व जन्मो के सत्कर्म,पवित्रता ,धैर्यवान ,साहसी यही सभी गुण होने चाहिए
तो सम्मान और सहयोग करे हर उस सत्पात्र और सार्थक कार्य करने वालो का क्योंकि आप वो काम नहीं कर पा रहे है जो वह कर रहे है
""जो गौ हत्या बंद करवाएगा -हमारा वोट पायेगा ""
गौ हत्यारों का बिलकुल वही हश्र करेंगे जो गौवंश का किया जाता है
गौ हत्यारे-
१ जिन्होंने गौ हत्या का कानून बनाया
२ गौवंश तस्करों को बेचा
३ जिसने गौवंश की हत्या की
४ जिसने गौ मॉस खाया
५ गौ द्रोही = जिनको गौ माँ की उपस्थिति से समस्या होती है ,जिनके धर्म में गौ माँ की सेवा ,सरंक्षण की बात होती है लेकिन ये नपुंसक उसके उल्टा काम करते है