15/10/2026
शिवाशा फाउंडेशन के LEAD-36GARH Program के अंतर्गत आयोजित 'विचार निर्माण सत्र' का उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा से परे समाज, नीति और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार करने का अवसर प्रदान करना है।
इसी क्रम में आज हमें जैकब नेल्लिथानम का स्वागत करने का अवसर मिला। वे बीज संरक्षण और किसानों के अधिकारों के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक समय से कार्यरत एक वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं।
पिछले तीन दशकों से अधिक समय से वे देशी बीजों के संरक्षण, जैव विविधता, टिकाऊ कृषि और किसानों के अधिकारों के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उनका कार्य केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से कई महत्वपूर्ण प्रश्नों को सामने लाता है।
कृषि केवल खाद्यान्न उत्पादन का माध्यम नहीं है। यह पीढ़ियों से संचित स्थानीय ज्ञान, बीजों की विविधता, किसानों की आजीविका और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध का भी आधार है।
बीजों पर अधिकार किसका होना चाहिए? किसान अपने बीजों और कृषि संबंधी निर्णयों में कितने स्वायत्त हैं? अधिक उत्पादन की हमारी कोशिशों के बीच पारंपरिक ज्ञान और जैव विविधता का क्या स्थान रह जाता है?
ये प्रश्न केवल किसानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हमारे खाद्य तंत्र, पर्यावरण और पूरे समाज के भविष्य से जुड़े हुए हैं।
आज का यह सत्र कृषि को केवल उत्पादन और लाभ के पारंपरिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि किसानों की स्वायत्तता, स्थानीय समुदायों और पारिस्थितिकीय स्थिरता के व्यापक संदर्भ में समझने और उस पर विचार करने का एक महत्वपूर्ण अवसर रहा।
हम जैकब नेल्लिथानम का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने अपना समय, अनुभव और विचार हमारे साथ साझा किए।