09/05/2026
अंधविश्वास को पाल रही औरत
औरतें ही ज्यादातर अंधविश्वास का सबसे अच्छा सुचालक है जो घर परिवार को तबाह कर देती है। ढोंगी बाबा की दुकान चलती है तो औरत के सौदे पर। मर्द कमाता है, औरत लुटाती है। इस समाज में अंधविश्वास की सबसे पक्की ग्राहक, सबसे बड़ी एजेंट औरत ही है।
मर्द फैक्ट्री में हड्डी गलाता है, औरत मंदिर में इज्जत-पैसा दोनों गलाती है।
सुबह से ही अंधविश्वास शुरू
सुबह उठते ही शुरू हो जाता है कि सोमवार शिव का, मंगल हनुमान का, बुध गणेश का, गुरुवार साईं का, शुक्रवार संतोषी माता का, शनिवार शनि का, रविवार सूर्य का। हफ्ते में 7 दिन, 7 दुकान। कौन खड़ा है लाइन में? 90% औरत।
ढोंगी साधु-महात्मा का एटीएम कार्ड औरत
ढोंगी साधु-महात्मा का एटीएम कार्ड औरत है। बाबा बोलता है- कष्ट है। औरत तुरंत पर्स खोल देती है। बेटे की नौकरी नहीं लग रही? 21 हजार का अनुष्ठान करवा दो। पति शराब पीता है? 11 हजार की महामृत्युंजय करवा दो। ग्रह खराब है? ये 50 हजार का पुखराज पहन लो। औरत पूछती नहीं बाबा तेरा बेटा कौन से कलक्टर लगा है? सीधा कहती है महाराज जो हुक्म। घर में आटा हो न हो, बाबा की थाली में 500 का नोट पहले जाएगा।
बिना सोचे औरत कर लेती है कबूल
कुछ भी होता है औरत कबूल कर लेती है। बच्चा बीमार तो माता नाराज है, बकरा काटो। धंधा मंदा तो सवा लाख का जागरण करवाओ। शादी नहीं हो रही है तो 16 सोमवार, 16 शुक्रवार, 9 गुरुवार सब कर लो। मर्द अगर बोले इतना पैसा कहां से आएगा? औरत जवाब देती है भगवान दे देगा, तुम चुप रहो। तुम नास्तिक हो। मतलब मर्द कमाकर दे, औरत लुटाकर आए और ऊपर से मर्द को ही बेईमान बोले।
देवी-देवता को बली, घर को खाली
नवरात्रि में 9 दिन फलाहार पर 5000 रुपए का फल और ड्राई-फ्रूट। करवा चौथ पर 7000 रुपए की साड़ी, मेकअप, थाली, छलनी। जागरण-कीर्तन पर 50,000 रुपए मन्नत थी। तीर्थ-यात्रा पर गुरुजी के आश्रम में 30,000 रुपए चढ़ावा।
रिजल्ट क्या?
बेटा फिर भी बेरोजगार, पति फिर भी दारू पीता है, घर की छत फिर भी टपकती है। पर पंडे की गाड़ी नई आ जाती है, बाबा का आश्रम 2 मंजिल और उठ जाता है। मेहनत मर्द की, मलाई बाबा की और बिचौलिया औरत।
आज आश्रम वाली सेवादार
इतिहास से आज तक रेट वही, रसीद नई। पहले सती होती थी। पति के साथ जल जाओ, स्वर्ग मिलेगा। औरत जल जाती थी। फिर देवदासी बनी। भगवान की सेवा करो। पूजारी की सेवा करती रही। आज आश्रम वाली सेवादार बनी है। आसाराम, राम-रहीम, रामपाल, नित्यानंद के केस भरे पड़े हैं।
हर जगह कॉमन क्या?
औरत अपना तन-मन-धन सब समर्पित कर देती है।
बाबा जेल जाता है, पर औरत तब भी बोलती है
हमारे गुरु तो निर्दोष हैं। सबसे खतरनाक बात है कि वह अगली पीढ़ी को भी वही जहर देती है। मां बेटी को सिखाती है कि करवा चौथ रखना, नहीं तो पति की उम्र कम होगी। सास बहू को धमकाती है कि हमारे घर में ये व्रत होता है, करना पड़ेगा। मतलब औरत ही औरत की दुश्मन बनकर अंधविश्वास की फैक्ट्री चलाती है।
मर्द तो बाहर है, पर घर के अंदर धर्म का पुलिस थाना औरत चला रही है।
निचोड़: कड़वा है पर सच है
अंधविश्वास का ट्रक अगर चल रहा है तो ड्राइवर सीट पर औरत बैठी है। ढोंगी बाबा-पंडा-पुजारी का धंधा औरत के बिना 1 दिन नहीं चलेगा। फिजूलखर्ची की मशीन औरत है। त्यौहार, व्रत, उपवास, मन्नत, बली सबमें पैसा पानी की तरह बहाती है। मर्द खून-पसीना बहाता है, औरत उस पसीने से बाबा का महल चिनवाती है। और जो औरते ख़ुद भी काम करती है वह भी ऐसा ही कर रही है उनको तो अपने बंदे से पैसे भी मांगने की जरूरत नहीं पड़ती कि पैसा दो मैंने इस उस बाबे के पास जाना है।
इलाज एक ही है
औरत जब तक अपनी अक्ल इस्तेमाल नहीं करेगी, जब तक भगवान भरोसे बैठेगी तब तक घर बिकते रहेंगे। जिस दिन औरत पूछेगी बाबा, तू अपने दुख के लिए कौन सा अनुष्ठान करता है? उस दिन दुकान बंद।
उससे पहले नहीं। सच कड़वा है, पर औरत की अंधभक्ति से ज्यादा कड़वा नहीं। अंधविश्वास मुर्दाबाद। फिजूलखर्ची मुर्दाबाद।
-सविता सहोता
Anti Superstition Organization (A*O)
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