02/02/2026
“कुछ सपने बहुत महंगे नहीं होते… बस हालात उन्हें दूर कर देते हैं।”
भावना साहू का सपना भी ऐसा ही था — डॉक्टर बनने का।
लेकिन घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कोचिंग की फीस सिर्फ एक संख्या नहीं, एक दीवार थी।
माता-पिता चाहते थे कि बेटी आगे बढ़े, पर साधन साथ नहीं थे।
यहीं से PRAYAS की शुरुआत हुई।
ना कोई फीस, ना कोई दिखावा —
100% स्कॉलरशिप, 100% भरोसा।
PRAYAS ने भावना को सिर्फ किताबें नहीं दीं,
उसने ये यकीन दिया कि गरीबी टैलेंट की सीमा नहीं होती।
दिन-रात की मेहनत, सही मार्गदर्शन और निरंतर मेंटरशिप ने
एक सपने को दिशा दी।
NEET में 567 अंक।
यह सिर्फ एक रिज़ल्ट नहीं है,
यह उस बच्चे की जीत है जो हालातों से नहीं डरा।
अगर PRAYAS न होता,
तो शायद ये सपना कागज़ों में ही रह जाता।
आज भावना साहू हर उस बच्चे की आवाज़ है
जिसके पास काबिलियत है, पर संसाधन नहीं।
हर मेहनती बच्चे की आस — “PRAYAS”।