26/08/2026
...क्या आप जानते हैं रायपुर महानगर का वर्तमान सुंदर प्रशाशनिक व्यवस्थित महानगर किसकी वजह से है? ❤️
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का सौंदर्यीकरण करने वाले थे - सारंगढ़ के गोंड महाराजा जवाहर सिंह जी!
आज का रायपुर कॉलोनी हो, राजकुमार कॉलेज की आर्थिक सहायता में - हजारों एकड़ जमीन और लाखों रुपये उन्होंने गुप्त दान के रूप में दिए थे, बिना नाम की चाह के।
और मालवीय रोड वाला वो ऐतिहासिक गेट... जी हाँ, जवाहर बाजार गेट!
आपको बता दें कि गोंड महाराजाओं की प्राचीन राजधानी गढा राज्य (जबलपुर महानगर) के अधीन गोंड राजा या राय के गोंडो पर नियंत्रण था जो : इतिहासकार कनिंघम और लोक मान्यताओं के अनुसार, इन 36 गढ़ों में से 30 से अधिक गढ़ों/किलों पर मूल रूप से गोंड राजाओं और उनके सामंतों का नियंत्रण था।
ब्रिटिश काल में जब रायपुर में Political Agent बैठते थे, तो गोंडवाना के सारे 30 राजा जो राय नाम से जाने जाते थे, और उनकी रियासत के जमींदार, पटेल, महाजनों को सरकारी काम से रायपुर आना पड़ता था। ओड़िसा और महाराष्ट्र के सीमान्त स्टेट दूर दूर से आते थे तो रुकने में दिक्कत होती थी।
तब सारंगढ़ नरेश जवाहर सिंह जी ने ये विशाल बाजार बनवाया - जिसका नाम जवाहर नगर रखा गया और गौड़ बाडा नाम से भी इस नगर को जाना जाता था जिसे अंग्रेज ने 'फिलिप्स मार्केट' नाम में बदल दिया जैसे के वर्तमान समय में बूढ़ादेव तालाब का नाम विवेकानंद सरोवर कर दिया इससे इसका मूल इतिहास का अस्तित्व ही मिट गया और सभी 30 गोंड राजा या रायों ने 500 एकड़ जमीन दान देकर राजकुमार कॉलेज बनवाया था। जो आज खरबो कीमत की जमीन है.
आज वही विशाल जवाहर स्मारक उपेक्षा का शिकार है। जो बहुत ही सुन्दर शैली का बना हुआ है. और बहुत से तालाब कुए और सुंदर इमारते रायपुर में गोंड राजाओं की देन है जिसको आज अंदेखा किया जा रहा है। खील-खूंटी लगाकर असभ्य लोग कपड़े टांग रहे हैं, अंदर नगर निगम स्टैंड से कमाई कर रहा है, पर इसके उद्धार की कोई नहीं सोच रहा।
ये सिर्फ एक गेट नहीं, हमारे इतिहास की शान है!
क्या आपने कभी इस गेट को ध्यान से देखा है? कमेंट में बताइए 👇
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