Vishwas Sansthan

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क्षय रोगियों को वितरित की गई पोषण पोटली, टीबी मुक्त भारत अभियान को मिला नया बलबिरला कॉरपोरेशन लिमिटेड, यूनिट रायबरेली के...
24/07/2026

क्षय रोगियों को वितरित की गई पोषण पोटली, टीबी मुक्त भारत अभियान को मिला नया बल
बिरला कॉरपोरेशन लिमिटेड, यूनिट रायबरेली के सहयोग एवं विश्वास संस्थान, रायबरेली द्वारा संचालित इंटीग्रेटेड कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम (ICDP) के अंतर्गत क्षय रोग मुक्त भारत अभियान के तहत आज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अमावा परिसर में 65 क्षय रोगियों को पोषण पोटली वितरित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य टीबी रोगियों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराकर उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ में सहयोग करना तथा समाज में क्षय रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम सिंह ने टीबी से पीड़ित 60 मरीजों को पोषण पोटली वितरित करते हुए कहा कि टीबी एक पूरी तरह से उपचार योग्य बीमारी है, बशर्ते रोगी नियमित रूप से दवाइयों का सेवन करें और संतुलित एवं पौष्टिक आहार लें। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा संचालित टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ सामाजिक संस्थाओं और कॉर्पोरेट संस्थानों का सहयोग अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने उपस्थित रोगियों से अपील की कि वे उपचार बीच में न छोड़ें तथा अपने आसपास के लोगों को भी टीबी के लक्षणों के प्रति जागरूक करें, जिससे समय पर जांच और उपचार सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमावा के अधीक्षक डॉ. कटिहार ने कहा कि बिरला कॉरपोरेशन और विश्वास संस्थान द्वारा संचालित यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता और संस्थाओं के सहयोग से ही रायबरेली को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रयास भविष्य में भी निरंतर जारी रहने चाहिए।
बिरला कॉरपोरेशन लिमिटेड, यूनिट रायबरेली की ओर से उपस्थित शिव गोविंद सिंह ने बताया कि बिरला कॉरपोरेशन अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के अंतर्गत स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सामुदायिक विकास के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी पिछले कई वर्षों से क्षय रोगियों को पोषण पोटली उपलब्ध कराकर उनके उपचार में सहयोग करती आ रही है और भविष्य में भी यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।
क्षय रोग प्रदेश अध्यक्ष करुणा शंकर मिश्रा ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज, स्वास्थ्य विभाग एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सामूहिक प्रयासों से ही रायबरेली को क्षय रोग मुक्त जनपद बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्वास संस्थान लगातार स्वास्थ्य जागरूकता एवं पोषण सहायता के माध्यम से जनसेवा के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
कार्यक्रम में 60 क्षय रोगी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी, विश्वास संस्थान के परियोजना अधिकारी प्रशांत शुक्ला, सहायक अनिल प्रजापति तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

महिलाओं ने सीखा आधुनिक बकरी पालन, आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदमग्रामीण महिलाओं के सपनों को सशक्त बनाने की दिशा में विश्वा...
02/03/2026

महिलाओं ने सीखा आधुनिक बकरी पालन, आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
ग्रामीण महिलाओं के सपनों को सशक्त बनाने की दिशा में विश्वास संस्थान, रायबरेली द्वारा एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल की गई। पशुधन विकास, ग्रामीण आजीविका एवं स्वावलम्बन कार्यक्रम के अंतर्गत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु चार दिवसीय 25 फ़रवरी 2026 से 28 फरवरी 2026 तक जनपद रायबरेली के विकास खंड सताव की 21 महिला बकरी पालकों सहित कुल 25 प्रतिभागियों का शैक्षणिक भ्रमण पं. दीन दयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान, दुवासु, मथुरा एवं केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मकदूम, मथुरा, मथुरा में कराया गया।
इस अवसर पर संस्था के सचिव बिपिन बाजपेई एवं परियोजना निदेशक रेखा सिंह ने प्रतिभागियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। महिलाओं की आंखों में आत्मविश्वास, चेहरे पर मुस्कान और मन में कुछ नया सीखने की ललक साफ दिखाई दे रही थी।
केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG) में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करते हुए डॉ ए. के. दीक्षित ने कहा कि यह भ्रमण केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के भविष्य को संवारने का अवसर है। उन्होंने महिलाओं को आधुनिक तकनीकों, नस्ल सुधार, वैज्ञानिक देखभाल एवं कृत्रिम गर्भाधान के महत्व के बारे में विस्तार से बताया।
वहीं दुवासु, मथुरा में डॉ. मुकुल आनंद ने उन्नत बकरी प्रजातियों एवं उनसे होने वाले लाभों की जानकारी देते हुए महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
इस भ्रमण का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं था, बल्कि महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास जगाकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना भी था। विशेषज्ञों ने बताया कि अच्छे नस्ल के बकरों की कमी के कारण कई बार बकरियां गर्भधारण नहीं कर पातीं, जिससे परिवार की आमदनी पर असर पड़ता है। कृत्रिम गर्भाधान जैसी तकनीकें इस समस्या का स्थायी समाधान बन सकती हैं।
भ्रमण से लौटने के बाद अब ये महिलाएं अपनी बकरियों की बेहतर देखभाल, संतुलित आहार, सुरक्षित बाड़ा, समय पर टीकाकरण एवं नियमित स्वास्थ्य जांच कर सकेंगी। साथ ही, पशु चिकित्सकों से सलाह लेकर पशुओं की मृत्यु दर कम कर सकेंगी और बकरियों की संख्या बढ़ाकर अपनी आमदनी में वृद्धि कर सकेंगी।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विकास कुमार, ओम प्रकाश गुप्ता, अमन कुमार यादव, हिमांशु वर्मा एवं विवेकानन्द अवस्थी सहित अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
यह शैक्षणिक भ्रमण ग्रामीण महिलाओं के लिए केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ाया गया एक मजबूत कदम है। विश्वास संस्थान की यह पहल निश्चित रूप से क्षेत्र की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य करेगी।

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