29/03/2026
Day 1 of Divya Satsang Mala organised by Chinmaya Mission Ponda to mark the 17th Vardhapan day celebrations of Chinmaya Aradhana Ashram Ponda Goa on 28th March 2026.
Pravachan On the topic Bhagawat Sandesh was conducted by Swamini Gopikananda ji of Chinmaya Mission Madgaon center. Welcome address was given by Swami Sughoshananda ji he reminded everyone Poojya Guruji's words 'भवन निर्माण मानव निर्माण के लिए होना चाहिए'. He said C M Ponda is the most active center of Goa and is conducting sustained activities for past 22 years in his tenure.
Mrs. Gauri Nayak introduced Swamini Gopikananda ji. Compering was done by Miss Puja. Guru Daxina was offered by Mrs. Pratibha Prabhudesai.
The Satsang was well received. Swamini ji said 1st do God's वरण (choose), then remove the आवरण(veiling)of अविद्या etc and then do रमण (reveling) in His experience.
जब साधक तैयार होता है, तब भगवान उसे मार्गदर्शन के लिए गुरु भेजते हैं, और जब उसका मन, चित्त और बुद्धि एकाग्र हो जाते हैं, तब भगवान स्वयं उसे दर्शन देते हैं।
जब तक हम दूसरों से भगवान की महिमा सुनकर प्रेरित नहीं होते, तब तक हमारे भीतर सच्ची साधना का भाव जागृत नहीं होता।
भौतिक सफलता को स्थिर और सार्थक बनाए रखने के लिए आंतरिक संपत्ति—अर्थात ज्ञान—का होना अत्यंत आवश्यक है।
बाह्य विषयों में रमण छोड़कर भगवान का वरण करो, तो अज्ञान का आवरण स्वयं हट जाएगा।
इन्द्रियों (आंख, कान, जिह्वा) से मन में आने वाली अशुद्धियों को दूर करने के लिए भगवान की भक्ति ही सच्चा शुद्धिकरण करती है।
भगवत का प्रत्येक श्लोक ब्रह्म के समान पवित्र और दिव्य है, इसलिए इसका नित्य पाठ करना चाहिए।
जब हम बाहरी संसार में भटकना छोड़ देते हैं, तब हमें सही गुरु और सज्जन संग मिलते हैं, जो हमें सही मार्ग दिखाते हैं।
संक्षेप में आज के प्रवचन का सार यह है कि भगवत संदेश के माध्यम से हमें भक्ति, श्रद्धा और सही जीवन जीने का मार्ग मिला। जब साधक तैयार होता है, तब भगवान उसे गुरु के रूप में मार्गदर्शन देते हैं, और मन, चित्त व बुद्धि एकाग्र होने पर स्वयं दर्शन देते हैं।
सत्संग से प्रेरणा लेकर, श्रवण के साथ-साथ मनन और समर्पण भी आवश्यक हैं; आंतरिक ज्ञान, इन्द्रिय संयम और भगवान का वरण करने से अज्ञान का आवरण दूर होता है तथा साधक भगवान की ओर अग्रसर होता है। Bhagwat का प्रत्येक श्लोक ब्रह्म के समान पवित्र है, इसलिए उसका नित्य पाठ करना चाहिए। भगवत नाम ही हमारे सभी कष्टों का समाधान है।