Sampark Buniyadi Shaala

Sampark Buniyadi Shaala Sampark Buniyadi Shala Sampark Buniyadi Shaala is based on model of Gandhi's basic education. Shaala is a residential school for kids from 1 to 10th grade.

05/12/2025

सम्पर्क बुनियादी शाला हाई स्कूल रायपुरिया
शैक्षणिक भ्रमण नवंबर 2025-26
रायपुरिया---------------> चित्तौड़गढ़

10/11/2025

कक्षा 10वीं के छात्र समूह के साथ पुष्पित पौधों में जनन की विषय वस्तु सिखाते हुएं....

हमारी संस्था के कर्मठ कार्यकर्ता श्री धर्मेन्द्र सिंह सिसोदियाजी को आज श्रद्धांजलि दी गई। हमारे बीच से आठ रोज पहले चले ग...
06/11/2025

हमारी संस्था के कर्मठ कार्यकर्ता श्री धर्मेन्द्र सिंह सिसोदियाजी को आज श्रद्धांजलि दी गई। हमारे बीच से आठ रोज पहले चले गए।

04/11/2025

हमारी शाला में छात्रों के साथ विज्ञान के क्रियाकलाप,कर के देखना सरल समझ बनाना। जीवन और विज्ञान के बीच जुड़ाव खोजना।

सभी को मंगल कामना
22/10/2025

सभी को मंगल कामना

11/10/2025

संपर्क बुनियादी शाला में हस्त उद्योग और पाठ्यक्रम के अनुबंध...एक विचार का प्रयोग लगातार

08/10/2025

बुनियादी शिक्षा — हाथ, दिमाग और जीवन का संगम

आज शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि जीवन को समझना और समाज में सृजन करना होना चाहिए।
महात्मा गांधी का नैतिक और कार्यप्रधान शिक्षा का स्वप्न आज भी हमारे लिए उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था।

बुनियादी शिक्षा (Buniyadi Shiksha) का मूल विचार यह था कि सीखना सिर्फ़ किताबों से नहीं, बल्कि हाथों के श्रम और अनुभवों से हो।
जब उद्योग और पाठ्यक्रम की विषयवस्तु का जीवंत अनुबंध होता है —
तब शिक्षा केवल सैद्धांतिक नहीं रहती, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल में बदल जाती है।

छोटे स्तर की माइक्रो अर्थव्यवस्था का मॉडल — जैसे विद्यालय में चरखा, हस्तकला, खेती, पशुपालन, बढ़ईगिरी, या सिलाई-बुनाई — न केवल आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाता है, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और उत्पादकता भी विकसित करता है।

इस शिक्षा में हाथ और दिमाग का तालमेल ही असली सीख है —
जहाँ सोच और श्रम एक-दूसरे का पूरक बन जाते हैं।
जब बच्चे अपने हाथों से कुछ रचते हैं, तब उनका मन भी रचना की प्रक्रिया में परिपक्व होता है।

ऐसी शिक्षा जो जीवन से जुड़ी हो, वही सच में बुनियादी है।
वहीं से आत्मनिर्भर भारत की जड़ें पनपती हैं — विद्यालय के आंगन से लेकर ग्राम की धरती तक।

बुनियादी शिक्षा — हाथ, दिमाग और जीवन का संगमआज शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि जीवन को समझना और समा...
08/10/2025

बुनियादी शिक्षा — हाथ, दिमाग और जीवन का संगम

आज शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि जीवन को समझना और समाज में सृजन करना होना चाहिए।
महात्मा गांधी का नैतिक और कार्यप्रधान शिक्षा का स्वप्न आज भी हमारे लिए उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था।

बुनियादी शिक्षा (Buniyadi Shiksha) का मूल विचार यह था कि सीखना सिर्फ़ किताबों से नहीं, बल्कि हाथों के श्रम और अनुभवों से हो।
जब उद्योग और पाठ्यक्रम की विषयवस्तु का जीवंत अनुबंध होता है —
तब शिक्षा केवल सैद्धांतिक नहीं रहती, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल में बदल जाती है।

छोटे स्तर की माइक्रो अर्थव्यवस्था का मॉडल — जैसे विद्यालय में चरखा, हस्तकला, खेती, पशुपालन, बढ़ईगिरी, या सिलाई-बुनाई — न केवल आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाता है, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और उत्पादकता भी विकसित करता है।

इस शिक्षा में हाथ और दिमाग का तालमेल ही असली सीख है —
जहाँ सोच और श्रम एक-दूसरे का पूरक बन जाते हैं।
जब बच्चे अपने हाथों से कुछ रचते हैं, तब उनका मन भी रचना की प्रक्रिया में परिपक्व होता है।

ऐसी शिक्षा जो जीवन से जुड़ी हो, वही सच में बुनियादी है।
वहीं से आत्मनिर्भर भारत की जड़ें पनपती हैं — विद्यालय के आंगन से लेकर ग्राम की धरती तक।

“मेरा स्कूल – मेरी ज़िम्मेदारी”: गांधी जयंती पर छात्रों की शपथझाबुआ, 2 अक्टूबर। संपर्क बुनियादी शाला में इस वर्ष गांधी ज...
03/10/2025

“मेरा स्कूल – मेरी ज़िम्मेदारी”: गांधी जयंती पर छात्रों की शपथ

झाबुआ, 2 अक्टूबर। संपर्क बुनियादी शाला में इस वर्ष गांधी जयंती का आयोजन कुछ अलग अंदाज़ में हुआ। विषय था “मेरा स्कूल – मेरी ज़िम्मेदारी” और पूरी रूपरेखा छात्रों ने स्वयं बनाई।

कार्यक्रम की शुरुआत सर्वधर्म प्रार्थना और सफाई अभियान से हुई। बच्चों ने गीले-सूखे कचरे को अलग रखने, पानी और बिजली की बचत करने तथा अनुशासन बनाए रखने का संकल्प लिया। बड़े छात्रों ने छोटे साथियों को सहयोग और मार्गदर्शन देने की जिम्मेदारी उठाई।

सबसे प्रेरक क्षण तब आया जब कक्षा 10 के एक छात्र ने मंच पर आकर धूम्रपान की गलती स्वीकार की और दोबारा ऐसा न करने की शपथ ली। इसके बाद रोशनी, तीक्ष्ण, उन्नीसा, अखिलेश, निर्भय और पीयूष सहित अन्य छात्रों ने भी अपनी-अपनी गलतियाँ स्वीकार कर सुधार का संकल्प लिया। कक्षा 8 की छात्रा मुनिया और उसकी सहेलियों ने भी अपनी भूलों को स्वीकार किया और नियमों का पालन करने की शपथ ली।

छात्रों द्वारा प्रस्तुत लघु नाटक में स्वच्छता, ऊर्जा बचत और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। अंत में सभी बच्चों ने मिलकर यह शपथ ली कि वे विद्यालय को दूसरा घर मानेंगे, स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखेंगे तथा गांधी जी के आदर्शों का पालन करेंगे।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्रीमती सुषमा देसाई (मुंबई) ने बच्चों के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि मंच पर अपनी गलतियाँ स्वीकार करना साहस और प्रेरणा का कार्य है। प्राचार्य प्रक्षाली देसाई ने अपने उद्बोधन में बच्चों के उत्साह को आगे क्रियान्वयन और व्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। संस्था निदेशक नीलेश देसाई ने इस आयोजन को गांधी जयंती को सही अर्थों में जीने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि आत्म-निरीक्षण की प्रक्रिया ही व्यक्ति के सुधार की पहली कड़ी है, और इसी से मोहन से महात्मा बनने की यात्रा आरंभ होती है। उन्होंने बच्चों और अध्यापकों को इस अनूठे आयोजन के लिए बधाई दी।

संपर्क बुनियादी शाला में गांधी जयंती का यह आयोजन आत्मचिंतन, साहस और आत्म-सुधार की मिसाल बन गया। विद्यालय समुदाय का मानना है कि जब बच्चों को जिम्मेदारी दी जाती है, तो वे न केवल उसे निभाते हैं बल्कि समाज के लिए एक प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत करते हैं। शाला के छात्र सरपंचों ने कार्यक्रम का संचालन किया।

संपर्क परिसर में समूह प्रार्थना आज ...
02/10/2025

संपर्क परिसर में समूह प्रार्थना आज ...

15/09/2025

Our school 's classrooms going to upgrade with Smart Black bord

04/09/2025

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