23/05/2026
बैठकी पर टिप्पणी | सुमन कुमार सिंह, कलाकार एवं कला लेखक:
ललित कला को लेकर एक धारणा सी बन गई है कि इसके लिए किसी समूह चर्चा की जरूरत नहीं है। क्योंकि चित्र रचना हो या शिल्प निर्माण, कलाकार इसके लिए एकांत को ही प्राथमिकता देता है। शायद इसीलिए हमारे ज़ेहन में किसी कलाकार की छवि एकांत प्रिय सर्जक की ही बनती है। किंतु सच तो यह है कि रचना कर्म से संवाद और परिचर्चा कम महत्वपूर्ण नहीं है। अनीश अंकुर और रविशंकर उपाध्याय बतौर संस्कृति कर्मी बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं। ऐसे में युवा कलाकारों के साथ यह संवाद कार्यक्रम, अच्छी पहल साबित होनी चाहिए। इस आयोजन के लिए Folkartopedia; Archive of Folk Arts और iccr का हार्दिक आभार>
बैठकी | कला संबंधी विविध विषयों पर चर्चाओं का एक नया सिलसिला "फोकार्टोपीडिया बैठकी" जिसके केंद्र में है कला शिक्षा और युवा कलाकार। एक ऐसी बैठकी, जहां वरिष्ठ कलाकारों, कला विशेषज्ञों और युवा कलाकारों के बीच कायम हो सके संवाद, मिल सके उन्हें मार्गदर्शन। जहां कर सकें हम अपनी-आपकी कलाओं पर बात, कर पाएं हम चर्चा-परिचर्चा। कविताएं-कहानियां, गाथाएं-कथाएं गीत-संगीत बन सके जिसका अभिन्न अंग, एक ऐसी बैठकी। शुरुआत आज शाम, 5 बजे, आईसीसीआर, पटना, नेहरू पार्क से पीछे, बेली रोड। युवा कलाकारों के साथ पहली बैठकी, भाई अनीश अंकुर और रविशंकर उपाध्याय जी के साथ। आइये, स्वागत है।