17/07/2026
🚨 जानीपुर थाना में खुलेआम मिली जान से मारने की धमकी, फिर भी कार्रवाई नहीं! आखिर आम नागरिक जाए तो जाए कहाँ?
आज भारतीय मानव अधिकार रक्षक की संस्थापिका श्रीमती रीता सिन्हा जी के नेतृत्व में संस्था की एक टीम जानीपुर थाना पहुँची। टीम का उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद बढ़ाना नहीं, बल्कि दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर कानूनी एवं शांतिपूर्ण समाधान निकालना था।
संस्थापिका रीता सिन्हा जी ने दोनों पक्षों को समझाया कि यदि जमीन को लेकर कोई विवाद है तो उसका समाधान न्यायालय और कानून के माध्यम से किया जाए, न कि धमकी, मारपीट या हिंसा के रास्ते से। संस्था ने हरसंभव प्रयास किया कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से मामले का समाधान करें।
लेकिन स्थिति तब गंभीर हो गई जब द्वितीय पक्ष राजू राय ने समझौता करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। संस्था के अनुसार, जानीपुर थाना परिसर में पुलिस एवं संस्था की पूरी टीम के सामने उन्होंने कहा कि उन्हें मौका मिलेगा तो वे मारपीट करेंगे और हत्या करके जेल जाने से भी नहीं डरते, चाहे इसके लिए 8–10 लाख रुपये ही क्यों न खर्च करने पड़ें।
इतने गंभीर कथित बयान के बावजूद मौके पर कोई ठोस कार्रवाई होती दिखाई नहीं दी। इससे पीड़ित परिवार में भय और असुरक्षा की भावना और बढ़ गई है। यदि किसी नागरिक को खुलेआम ऐसी धमकियां मिलें और उसके बाद भी वह स्वयं को असुरक्षित महसूस करे, तो यह कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
आज की बैठक में संस्थापिका श्रीमती रीता सिन्हा जी के साथ पटना जिला महासचिव शुभम प्रकाश, HRS News से संतोष अग्रवाल, मशरख ग्राम उपाध्यक्ष रवि सिंह, महिला सदस्य राजकुमारी जी, महिला सदस्य सीमा जी तथा सक्रिय सदस्य राम अयोध्या जी उपस्थित रहे। सभी ने शांतिपूर्ण एवं कानूनी समाधान का भरसक प्रयास किया।
अब अगला कदम
इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए भारतीय मानव अधिकार रक्षक की संस्थापिका श्रीमती रीता सिन्हा जी सोमवार को प्रातः 11:00 बजे डीजीपी कार्यालय, पटना जाकर पूरे मामले से अवगत कराएंगी। साथ ही, पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने, मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई कराने तथा जानीपुर थाना द्वारा शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई न किए जाने संबंधी तथ्यों को भी अपने आवेदन में प्रस्तुत करेंगी और उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध करेंगी।
भारतीय मानव अधिकार रक्षक का उद्देश्य किसी पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के मानवाधिकार, सुरक्षा और न्याय की रक्षा करना है। संस्था को विश्वास है कि उच्च स्तर पर मामले की निष्पक्ष सुनवाई होगी और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
न्याय तभी सार्थक है जब नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस करे।