Rajput's Of BIHAR

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जय राजपुताना!🚩

भारतीय वीरता, स्वाभिमान और पराक्रम के अद्वितीय प्रतीक, महान योद्धा महाराज पृथ्वीराज चौहान जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नम...
16/05/2026

भारतीय वीरता, स्वाभिमान और पराक्रम के अद्वितीय प्रतीक, महान योद्धा महाराज पृथ्वीराज चौहान जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन !🙏

मातृभूमि की रक्षा हेतु समर्पित उनका अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अतुलनीय बलिदान युगों-युगों तक प्रत्येक पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। उनकी गौरवशाली गाथाएँ हमें राष्ट्र की एकता, अखंडता और सम्मान की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने का संदेश देती हैं।।🏹 #भारतीय_इतिहास

09/05/2026

अडिग साहस, स्वाभिमान और अदम्य पराक्रम के प्रतीक महाराणा प्रताप की जयंती पर शत्-शत् नमन।🙏

चेतक पर चढ़ जिसने भाले से दुश्मन संहारे थे,मातृभूमि के खातिर जंगल में कई साल गुजारे थे।।शौर्य, साहस और पराक्रम की जीवंत ...
09/05/2026

चेतक पर चढ़ जिसने भाले से दुश्मन संहारे थे,
मातृभूमि के खातिर जंगल में कई साल गुजारे थे।।

शौर्य, साहस और पराक्रम की जीवंत मिसाल, स्वाभिमान और स्वाधीनता के रक्षक, परम प्रतापी योद्धा, वीरता की मूरत, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।🙏🚩

मातृभूमि और धर्मरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले इस महान योद्धा की गौरवगाथा सदैव हमें कर्तव्य, आत्मसम्मान और त्याग की प्रेरणा देती रहेगी।❣️

दानवीरता, राष्ट्रभक्ति और त्याग के अद्वितीय प्रतीक भामाशाह जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। 🙏🚩 #भामाशाह_जयंती  #राष्...
30/04/2026

दानवीरता, राष्ट्रभक्ति और त्याग के अद्वितीय प्रतीक भामाशाह जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। 🙏🚩

#भामाशाह_जयंती #राष्ट्रभक्ति #त्याग #प्रेरणा #श्रद्धांजलि #भारतीय_इतिहास #गौरव

मनोज सिंह का भांजा हर्ष कद काठी से लंबा था। सूचना है कि हर्ष अकेले चारों बदमाशों से अकेले भीड़ गया था। हाथापाई में भारी ...
30/04/2026

मनोज सिंह का भांजा हर्ष कद काठी से लंबा था। सूचना है कि हर्ष अकेले चारों बदमाशों से अकेले भीड़ गया था। हाथापाई में भारी पड़ रहा था। पिता चंदन सिंह शांत स्वभाव के हैं वो बीच बचाव कर रहे थे। एक हर्ष से चार पीट रहे थे। पिटाई पड़ने पर छोटू यादव हथियार निकलता है सीधे गोली मार देता है। वह भी तीन गोली। फिर चंदन सिंह को मारता है। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है। जिसमें सबसे आगे हर्ष इनलोगों से लड़ते दिख रहा है।

जानकार बताते हैं कि छोटू यादव और उसके साथी। शायद चंदन सिंह और उनके बेटे को पहचान नहीं पाए। नहीं तो मनोज सिंह के परिवार पर गोली चलाने की हिम्मत नहीं करते। मनोज सिंह वह हैं जो शहाबुद्दीन से भी भीड़ जाते थे।

बाबू वीर कुंवर सिंह जी की पुण्यतिथि 26 अप्रैल 1858 है। वह एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने 1857 के सिपाही विद्रोह ...
26/04/2026

बाबू वीर कुंवर सिंह जी की पुण्यतिथि 26 अप्रैल 1858 है। वह एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने 1857 के सिपाही विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी वीरता और नेतृत्व क्षमता ने देश के लोगों को प्रेरित किया और उनकी कहानी आज भी प्रेरणा का स्रोत है। 80 वर्ष की उम्र में भी उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अपनी वीरता का प्रदर्शन किया। उनकी मृत्यु 26 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर में हुई थी, जब वह अंग्रेजों से लड़ते हुए घायल हो गए थे और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।बाबू वीर कुंवर सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन। उनकी वीरता, साहस और देशभक्ति को हमेशा याद रखा जाएगा। #अंग्रेज_विजेता_कुँवर_सिंह

23/04/2026

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह जी के विजयोत्सव पर शत्-शत् नमन ।🙏

उनका अदम्य साहस, वीरता और देशभक्ति आज भी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।
आइए, उनके दिखाए मार्ग पर चलकर राष्ट्र की सेवा और एकता के संकल्प को मजबूत करें।

#अंग्रेज_विजेता_कुँवर_सिंह

 ाता_पंचरत्न_देवी और पिता राजा साहबजादा सिंह के घर बिहार भोजपुर की मिट्टी पर एक शेर का जन्म 13 नवंबर 1777 को हुआ था। उस ...
23/04/2026

ाता_पंचरत्न_देवी और पिता राजा साहबजादा सिंह के घर बिहार भोजपुर की मिट्टी पर एक शेर का जन्म 13 नवंबर 1777 को हुआ था। उस लाडले पुत्र का नाम माता-पिता ने #कुँवर रखा ।

उज्जैनी के महान सम्राट विक्रमादित्य के वंशावली में महान राजा भोज की वंश की वीरता की परंपरा को इन्हीं कुँवर ने आगे बढ़ाया और भारतीय #इतिहास में #रणबांकुडा_बाबू_वीर_कुँवर_सिंह के नाम से प्रसिद्धि पाई थी।

बचपन से ही #शस्त्रों और शिकार का शौख रखने वाले बाबू वीर कुँवर सिंह क्षत्रिय गुणों से भरे थे। अंग्रेज उनको कभी नहीं भाते थे,,इसलिए उनके पिता ने उन्हें #जगदीशपुर से राँची भेज दिया था।

परंतु जब 1846 से अंग्रजों के विरुद्ध भारतीय खड़े होने लगे। तभी वीर कुँवर सिंह ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। जब 1857 में सिपाही विद्रोह बैरकपुर,,रामगढ़,,दानापुर में हुआ तो कुँवर सिंह ने उनका नेतृत्व किया था।

इस विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने सिख रेजिमेंट को भेजा था। जिसे बाबू वीर कुँवर सिंह ने करारी शिकस्त दी थी।

इस युद्ध के बाद बाबू वीर कुँवर सिंह का आरा शहर पर पूण नियंत्रण हो गया था। इसके बाद आरा लंबे समय तक स्वतंत्र रहा था। इस बीच अंग्रेजों ने बीबीगंज और बिहिया के रास्ते पुनः आरा को लेने की कोशिश की थी। परंतु यहाँ भी अंग्रजों के हाथ नाकामी लगी।

इस बीच बाबू वीर कुँवर सिंह ने पच्छिम(उत्तर प्रदेश) की तरफ विजय अभियान चलाया। रीवा,,बाँदा,, आजमगढ,,,बनारस,,बलिया,, गाजीपुर,,,गोरखपुर आदि में भी अंग्रेजों की सत्ता कमजोर पड़ गई।

परंतु इसी बीच मेजर जनरल विंसेंट आयर ने आरा सहित जगदीशपुर पर कब्जा कर लिया था।पूरे भोजपुर में भारी नरसंघार किया ।बाबू वीर कुँवर सिंह पुनः अपनी धरती पर लौटे और उन्होंने विंसेंट आयर को पराजित कर के उसे मार डाला और जगदीशपुर के किले से यूनियन जैक उतार कर फेंक दिया और अपना झंडा लहरा दिया था। परंतु इस घमासान युद्ध के तुरंत बाद ही जनरल लुग्गार्ट आ पहुँचा था।

घमासान युद्ध हुआ और सेना को कमजोर पड़ता देख,,सेना को पुनः गठित करने के उद्देश्य से कुँवर सिंह ने मोर्चा छोड़ने का निर्णय लिया। 80 वर्ष की आयु में लड़ते लड़ते थके हुए वीर कुँवर सिंह और लगातार युद्ध से सैनिक भी घायल हो चुके थे। उन्हें इकठ्ठा होने के लिए थोड़ा समय चाहिए था।

23 अप्रैल 1858 को गंगा नदी पार करते हुए एक #विषैला तोप का गोला उनके बाह से टकरा गया था। विष पूरे शरीर में न फैल जाए । इस कारण से उन्होंने अपना हाथ काटकर गंगा माता को भेंट में दे दिया।

कुछ इतिहासकार का मानना है कि 23 अप्रैल को ही बाबू वीर कुँवर सिंह ने अंतिम सांस ली थी। परंतु सर्वमान्य मान्यता के अनुसार 26 अप्रैल 1858 को उन्होंने अंतिम सांस ली थी।

प्रसिद्ध अंग्रेज इतिहाकार ""हॉप्स"" ने लिखा कि ---

"""उस बूढ़े राजपूत ने ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध अद्वितीय वीरता और आन-बान-शान की लड़ाई इस शान से लड़ी कि ये मनना होगा कि अगर वो 80 साल के विर्द्ध(बुजुर्ग) नहीं होकर अगर जवान होते तो ब्रिटिश सत्ता का अंत उसी समय हो जाता"""

महान स्वतंत्रता सेनानी,,,अदुतीय वीर और महान सेनानायक #बाबू_कुँवर_सिंह की 23 अप्रैल को विजयोत्सव की हार्दिक बधाई !💐

#अंग्रेज_विजेता_कुँवर_सिंह
ानी🙏

|| परशुराम जयंती 2026 — हार्दिक मंगलकामनाएं || 🔱19 अप्रैल 2026 — यह तिथि सामान्य नहीं है।इस दिन अक्षय तृतीया और परशुराम ...
19/04/2026

|| परशुराम जयंती 2026 — हार्दिक मंगलकामनाएं || 🔱

19 अप्रैल 2026 — यह तिथि सामान्य नहीं है।

इस दिन अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती का दुर्लभ महासंयोग बन रहा है — एक ऐसा शुभ मुहूर्त जो युगों में एक बार आता है। जब शस्त्र और शास्त्र एक साथ मिलते हैं, तब धर्म की स्थापना होती है!

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🪷 कौन हैं भगवान परशुराम?

विष्णु के छठे अवतार। ऋषि जमदग्नि के पुत्र। महादेव के परम शिष्य। सप्त चिरंजीवियों में से एक। स्वयं शिवजी ने उन्हें दिव्यास्त्र ‘विद्युदभि परशु’ प्रदान किया था — जो शस्त्र और शास्त्र दोनों का अद्वितीय प्रतीक है।

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⚡ कल्कि अवतार के गुरु — परशुराम जी!

कल्कि पुराण के अनुसार, त्रेता युग से आज तक अमर परशुराम जी, कलयुग के अंत में भगवान कल्कि के गुरु बनेंगे। यह महासंयोग उस भविष्य से जुड़ा है जो आने वाला है।

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✨ यह जयंती केवल एक उत्सव नहीं —

यह आपके जीवन में साहस, सत्य और अक्षय ऊर्जा के संचार का अवसर है। इस पावन दिन पर पूजा करें, दान करें और अभिजित मुहूर्त का लाभ उठाएं।

🙏 परशुराम जी का यह प्राकट्य उत्सव आपके जीवन में सुख, समृद्धि और धर्म का प्रकाश लाए।

जय परशुराम! 🔱

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"विपरीत परिस्थितियों में भी जो अकेले खड़े होने का साहस करते हैं, वही इतिहास का निर्माण करते हैं।"सर्वश्रेष्ठ साँसद, प्रखर...
17/04/2026

"विपरीत परिस्थितियों में भी जो अकेले खड़े होने का साहस करते हैं, वही इतिहास का निर्माण करते हैं।"

सर्वश्रेष्ठ साँसद, प्रखर वक़्ता, राष्ट्रचिंतक, कामरेड, शाश्वत विद्रोही-युवा तुर्क, सतत् पदयात्री, आम आदमी की खास आवाज, विचारक, संत, स्नेही मित्रता धर्म की अद्वितीय मिशाल स्वाभिमान और सिद्धांत के प्रतीक, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय #चंद्रशेखर_सिंह जी को जयंती पर नमन।🙏💐

#चंद्रशेखर

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