Kavi g aashray trust

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30/07/2026

हमें कमज़ोर न समझो

हमें कमज़ोर न समझो,हमने संघर्षों में राह बनाई है,बिना किसी सहारे के भीअपनी पहचान जग में कमाई है।

आरक्षण से आगे बढ़े हैं हम,मेहनत को अपना मान बनाया है,जब ठान लिया अपने मन से,हर मुश्किल को भी झुकाया है।

आज भी उन ऊँचे पदों परहमने जिम्मेदारियाँ सँभाल रखी हैं,जहाँ पहुँचने का कई लोग सपना देखते हैं,वहाँ हमने अपनी छाप लिखी है।

देश ही नहीं, विदेशों तकहमारी मेहनत का सम्मान है,हमें आँकने वाले याद रखें,हम किसी से कम नहीं — यही हमारी पहचान है।

संस्कारों से बँधे हैं हम,वरना इतिहास के हर पन्ने पर,त्याग, पराक्रम और कर्म की गाथा मेंहमारा ही उज्ज्वल नाम है।
Writer
Kavipriti singh

29/07/2026
29/07/2026

गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌼🙏

मुझे लगता है,हम सबके जीवन का पहला गुरु माँ होती है।जो जन्म के प्रथम क्षण से हीअपने स्पर्श से प्रेम सिखाती है,अपनी गोद से सुरक्षा सिखाती है,और अपने संस्कारों से जीवन जीना सिखाती है।

वह हर कदम पर हमें थामे रहती है,अच्छाइयों की छाँव में रखती है,और बुराइयों की आँधी से बचाती है।उसकी सीख ही हमारे जीवन की पहली पाठशाला होती है,जिससे बड़ा कोई ज्ञान नहीं।

फिर समय के साथजीवन के हर मोड़ परजो भी हमें सही राह दिखाए,गिरने पर संभाले,अंधेरे में उजाला बन जाए,वह भी गुरु का ही रूप होता है।

चाहे वह शिक्षक हो,कोई सच्चा मित्र हो,या कोई ऐसा व्यक्तिजिसकी बातें हमारे विचारों को बेहतर बना दें।

गुरु केवल किताबों का ज्ञान देने वाला नहीं,बल्कि वह है जोजीवन को सही दिशा देना सिखा दे।

माँ पहली गुरु,शिक्षक जीवन का प्रकाश,और हर वह व्यक्ति गुरु हैजो हमें इंसानियत का रास्ता दिखा जाए।

माँ को प्रणाम, सभी गुरुओं
Writer
Kavipriti singh

27/07/2026

लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत हमारी वोट है, न कि देश की संपत्ति को नुकसान पहुँचाना।
अगर अपने अधिकारों की आवाज़ बुलंद करनी है, तो उसे वोट की ताकत से कीजिए। जिस दिन हम सब जागरूक होकर एकजुट होंगे और अपने वोट की शक्ति को समझेंगे, उसी दिन हमारी असली आवाज़ की पहचान बनेगी।
देश हमारा है, इसे नुकसान नहीं, बदलाव देना हमारी जिम्मेदारी है।

इन बादलों की तरह उड़ने की इच्छा है,इन आसमानों की तरह सजने की इच्छा है।इन जामुनों का मीठा स्वाद चखने की इच्छा है,हर पल को...
29/06/2026

इन बादलों की तरह उड़ने की इच्छा है,
इन आसमानों की तरह सजने की इच्छा है।
इन जामुनों का मीठा स्वाद चखने की इच्छा है,
हर पल को हँसकर जीने की इच्छा है।
हवाओं संग दूर कहीं खो जाने की इच्छा है,
सपनों के रंगों से दुनिया सजाने की इच्छा है।
पेड़ों की छाँव में बचपन फिर से पाने की इच्छा है,
छोटी-छोटी खुशियों में मुस्काने की इच्छा है।
इन बादलों की तरह उड़ने की इच्छा है,
खुले गगन में अपने सपनों को गढ़ने की इच्छा है।
जामुनों की मिठास-सी जीवन में रस भर जाए,
बस यूँ ही हर दिन नया सवेरा करने की इच्छा
Writer
Kavipriti singh

13/06/2026

अब मन में ही बातें करना अच्छा लगता है,
अब चुप रहना भाने लगा है।
अब साँसें तेज़ चलने लगती हैं,
जब ज़ुबाँ से कोई शब्द निकलने लगता है।
कभी जो मन खुली किताब था,
अब बंद पन्नों-सा रहने लगा है।
हर एहसास की अपनी एक दुनिया है,
जो भीतर ही भीतर बसने लगा है।
दिल में कितनी बातें ठहरी हैं,
जैसे बरसों से कोई नदी समंदर तक न पहुँची हो।
कितने सवाल हैं जो जवाब माँगते हैं,
पर खामोशी उन्हें सीने से लगाए बैठी हो।
अब शिकायतें भी नहीं करता किसी से,
न ही उम्मीदों का कोई मेला सजाता हूँ।
जो समझ सके बिना कहे मुझे,
बस उसी की तलाश में नज़रें झुकाता हूँ।
आँखें अक्सर भीग जाती हैं,
पर अश्कों को बहने नहीं देता हूँ।
हर दर्द को मुस्कानों की चादर ओढ़ाकर,
दुनिया से अपना हाल छुपा लेता हूँ।
अजीब-सी दोस्ती हो गई है तन्हाई से,
अब उसका साथ सुकून देने लगा है।
जो कभी बहता था नदी की तरह,
वो अब गहराइयों में उतरने लगा है।
अब मन में ही बातें करना अच्छा लगता है,
अब चुप रहना भाने लगा है।
क्योंकि कुछ दर्द शब्दों में नहीं ढलते,
उन्हें सिर्फ़ महसूस किया जाता है। 🌿🖋️🌼❤️
Writer kavi Priti

कहाँ हो तुम, पता नहीं,कहाँ हैं हम, पता नहीं।पर जितना सुकून चाहा था,उससे कहीं अधिक दिया तुमने।कैसे करूँ तुम्हारा धन्यवाद,...
06/06/2026

कहाँ हो तुम, पता नहीं,
कहाँ हैं हम, पता नहीं।
पर जितना सुकून चाहा था,
उससे कहीं अधिक दिया तुमने।
कैसे करूँ तुम्हारा धन्यवाद,
शब्द भी आज कम पड़ जाते हैं।
कोई तो ज़रिया हो ऐसा,
जिससे मैं तुम्हें देख पाऊँ।
तेरी इस अपार मेहरबानी का,
कैसे मैं गुणगान करूँ।
हर दरिया-सा प्रेम दिया तुमने,
हर राह को आसान किया तुमने।
गिरने पर संभलने की ताकत भी,
तुमने ही मुझे बख्शी है।
मैंने तो बस बेख़ुदी में मोहब्बत की,
पर हर नेमत तुमने ही दी है।
कहाँ हो तुम, पता नहीं,
कहाँ हैं हम, पता नहीं।
बस इतना जानती हूँ,
मेरे हर सुकून में नाम तुम्हारा ही कहीं है।
Writer
Kavipriti singh

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Vatikapuri Colony
Patna

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