Kavi g aashray trust

Kavi g aashray trust Our Trust is intended to help all kind of needy people

02/10/2026

अजीब विडंबना है समाज की—
ट्रेंड हो तो हर कोई स्टेटस लगाता है,
कोई समाज के लिए अच्छा करे तो
लोग उसकी अच्छाई नहीं,
उसमें हजार बुराइयाँ ढूँढ लाते हैं।
अनदेखी बातों की कहानियाँ बना देंगे,
मगर सामने दिखती अच्छाई
फिर भी स्वीकार नहीं कर पाएँगे।

अजीब विडंबना है हमारे समाज की,जब किसी चीज़ का ट्रेंड चलता है,तो हर हाथ में वही स्टेटस नज़र आता है।लेकिन जब कोई समाज के ल...
02/10/2026

अजीब विडंबना है हमारे समाज की,
जब किसी चीज़ का ट्रेंड चलता है,
तो हर हाथ में वही स्टेटस नज़र आता है।
लेकिन जब कोई समाज के लिए
कुछ अच्छा करने निकलता है,
तो न जाने लोग कहाँ गुम हो जाते हैं—
उसकी अच्छाइयों को देखने से पहले
उसमें कमियाँ तलाशने लगते हैं।
जिसमें बुराई निकालनी हो,
उसमें हजार कहानियाँ गढ़ दी जाती हैं,
अनदेखी बातों को भी
अपने मनगढ़ंत किस्सों से सच साबित कर दिया जाता है।
मगर जब दुनिया उसकी अच्छाई देखती है,
तो हमारा समाज उसे स्वीकार करने में
इतना पीछे क्यों रह जाता है?
शायद हम अच्छाई को अपनाने से ज्यादा
दूसरे की कमी खोजने के आदी हो गए हैं।
Writer
kavipriti singh

29/09/2026

वो बारिश की बूँदें,
वो भँवरों का गुनगुनाना,
वो हँसते हुए बच्चों के चेहरे,
वो भीगते हुए बचपन का मुस्कुराना।
कभी इन लम्हों में ज़िंदगी बसा करती थी,
हर बूँद में खुशियों की धुन बजा करती थी।
आज वही मौसम खिड़कियों से झाँकता है,
हर कोई मोबाइल में कैद नज़र आता है।
न बारिश की बूँदों में वो मस्ती रही,
न बच्चों की हँसी में वो कशिश रही।
कितना कुछ खो दिया हमने इस दौर में,
कुदरत तो आज भी वही है, बस हम खो गए मोबाइल की दुनिया के शोर में।
Writer
Kavipriti singh

01/09/2026

हम नब्बे की लड़कियों ने
पापा की परी से लेकर,
पिया के घर की चार हाथों वाली कामवाली तक—
न जाने कितने रूप देख लिए हमने।
इस युग की लड़कियाँ
चाँद तक पहुँच गईं,
जेब में अपनी दुनिया रख ली,
फिर भी जाने क्या-क्या देखना बाकी है।
कभी हिमाचल, कभी कश्मीर,
कभी अरुणाचल, कभी नेपाल—
कुदरत भी रोज़ कोई नया सवाल पूछती है।
कहीं अठारह महीने के मासूमों के साथ
वो हुआ, जिसे सोचकर भी दिल काँप जाए…
और हम बस यही पूछते रह जाते हैं—
हे समय!
अब और क्या-क्या दिखाएगा?
हम नब्बे की लड़कियों को
आख़िर कितना बदलता संसार देखना बाकी है?
Writer kavipriti singh

Happy independence day
14/08/2026

Happy independence day

30/07/2026

हमें कमज़ोर न समझो

हमें कमज़ोर न समझो,हमने संघर्षों में राह बनाई है,बिना किसी सहारे के भीअपनी पहचान जग में कमाई है।

आरक्षण से आगे बढ़े हैं हम,मेहनत को अपना मान बनाया है,जब ठान लिया अपने मन से,हर मुश्किल को भी झुकाया है।

आज भी उन ऊँचे पदों परहमने जिम्मेदारियाँ सँभाल रखी हैं,जहाँ पहुँचने का कई लोग सपना देखते हैं,वहाँ हमने अपनी छाप लिखी है।

देश ही नहीं, विदेशों तकहमारी मेहनत का सम्मान है,हमें आँकने वाले याद रखें,हम किसी से कम नहीं — यही हमारी पहचान है।

संस्कारों से बँधे हैं हम,वरना इतिहास के हर पन्ने पर,त्याग, पराक्रम और कर्म की गाथा मेंहमारा ही उज्ज्वल नाम है।
Writer
Kavipriti singh

29/07/2026

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Vatikapuri Colony
Patna

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