12/03/2026
सुधरा हुआ रूप:
औरत को समझना आसान नहीं,
क्योंकि वह जो है, वैसा कोई और हो ही नहीं सकता।
वह कभी बेटी बनकर घर में खुशियाँ लाती है,
कभी बहन बनकर स्नेह निभाती है,
कभी पत्नी बनकर जीवन का साथ देती है,
और सबसे गहरी पहचान — माँ बनकर दुनिया को जन्म देती है।
कहने को वह सिर्फ एक औरत है,
लेकिन उसके बिना न घर पूरा होता है,
न जीवन।
वह ही तो है जो
आसमान और ज़मीन के बीच
जीवन को सजा कर रखती है।
औरत के बिना
पानी भी पानी नहीं लगता,
भोजन भी भोजन नहीं लगता।
हम जो हर साँस लेते हैं,
उसमें भी कहीं न कहीं
एक औरत का ही योगदान होता है।
अपने घर की ही नहीं,
समाज की हर औरत उतनी ही आदरणीय है —
क्योंकि वह भी किसी की माँ है,
किसी की बहन है,
किसी की बेटी है।
ईश्वर ने इस दुनिया में
सबसे सुंदर रचना अगर बनाई है,
तो वह औरत है,
जो खेतों को, घरों को,
फूलों को, बच्चों को
और पूरे समाज को
अपने प्रेम और त्याग से सँवार कर रखती है। 🌸
Writer
Kavipriti singh