IJAY ICHHA Foundation

IJAY  ICHHA  Foundation IJAY ICHHA FOUNDATION NPO Registered U/S 8 of the Companies Act 2013 & Rule 18 of the Companies

NON PROFITABLE, CHARITABLE & SOCIAL WELFARE ORGANISATION
REGISTERED U/S 8 OF THE COMPANIES ACT 2013 AND RULE 18 OF THE COMPANIES WORKING UNDER MOTIVE FOR promoting , , , , protection of facilitate, , , , , welfare, welfare, religion, age home, empowerment, , , , , and medical relief to the poor and downtrodden and advancement of any other charitable and developmental objects of general public

Provide lunch at Aashraya old age home Patliputra Patna…..
17/03/2023

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Medical support to a girl child in PMCH Patna, who fall down from train……
17/03/2023

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17/03/2023

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अपने दिन का आरम्भ कैसे करें ????* बड़ें भाग मानुष तनु पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा॥साधन धाम मोच्छ कर द्वारा। पाइ न...
03/05/2022

अपने दिन का आरम्भ कैसे करें ????

* बड़ें भाग मानुष तनु पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा॥
साधन धाम मोच्छ कर द्वारा। पाइ न जेहिं परलोक सँवारा॥

भावार्थ:-बड़े भाग्य से यह मनुष्य शरीर मिला है। सब ग्रंथों ने यही कहा है कि यह शरीर देवताओं को भी दुर्लभ है (कठिनता से मिलता है)। यह साधन का धाम और मोक्ष का दरवाजा है। इसे पाकर भी जिसने परलोक न बना लिया,॥

चौरासी लाख योनियों में मनुष्य योनि ही सर्वोत्तम है। कुछ लोग इसे भगवान की कृपा मानकर जीते हैं और कितने ही जीवन को बोझ समझकर काटते हैं। जिसने आठों प्रहर जीना सीख लिया उसने जीवन की शताब्दी (सौ वर्षों का सुखी जीवन) जीत ली और जिसने प्रभातकाल को जीत लिया उसने इहलोक और परलोक दोनों को जीत लिया।

भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता (६।५) में कहा है–’हे अर्जुन! अपना उद्धार स्वयं के सहारे ही करना चाहिए; क्योंकि हमारी आत्मा ही हमारी मित्र है और आत्मा ही हमारी शत्रु भी। हम ही अपने मित्र या शत्रु हैं।’

जीवन की साधारण-से-साधारण क्रियाओं पर भी शास्त्रों में लिखा गया है। भारतीय शास्त्रों में कही गयी बातें भगवान की आज्ञा होने से धार्मिक होने के साथ-साथ वैज्ञानिक भी हैं। इनके अनुसार चलने से शरीर स्वस्थ, मन शान्त और बुद्धि निर्मल होती है और जीवन सुख, शान्ति व समृद्धिपूर्ण हो जाता है; साथ ही पारलौकिक लाभ भी मिलता है।

ब्राह्ममुहुर्त को ‘आठों पहरों का राजा’ ‘ब्रह्मवेला’, ‘देवबेला’, ‘अमृतबेला’ या ‘मधुमय समय’ भी कहते हैं। इस समय मनुष्य को बिस्तर त्याग देना चाहिए। इस समय प्रकृति अमृत बरसाती है। इस समय जो वायु चलती है, उससे सारा वातावरण शान्त और सुन्दरता से भर जाता है। यह प्रकृति द्वारा दी गयी नि:शुल्क औषधि है–‘सौ दवा, भोर की एक हवा।’

उस समय यदि परमपिता परमात्मा का नाम-स्मरण कर लिया जाए तो वह मनुष्य के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है। यह समय परमात्मा से बातचीत करने का समय है। हमारे ऋषियों ने भी यह सिद्ध किया है कि आरोग्य, दीर्घजीवन, सौन्दर्य, प्रार्थना, ध्यान, आराधना व अध्ययन के लिए ब्राह्ममुहुर्त सबसे सुन्दर समय है। रामचरितमानस में बाबा तुलसीदास जी लिखते हैं,,,,

*प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा॥
आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा॥

भावार्थ:-श्री रघुनाथजी प्रातःकाल उठकर माता-पिता और गुरु को मस्तक नवाते हैं और आज्ञा लेकर नगर का काम करते हैं। उनके चरित्र देख-देखकर राजा मन में बड़े हर्षित होते हैं॥

अमृतबेला में उठने का एक अनोखा उपाय
इस अमृतबेला में उठने का एक अनोखा उपाय है कि सोने से पूर्व अपने मन को आज्ञा दें कि प्रात:काल अमुक समय पर उठना हैं। मनुष्य का मन उसको उसी समय पर जगा देगा। आयुर्वेद में कहा गया है कि प्रात:काल उठने से सौन्दर्य, धन, विद्या, बल और तेज बढ़ता है।

प्रात:काल उठते ही सबसे पहले दोनों हथेलियों का दर्शन करते हुए यह श्लोक बोलना चाहिए-

कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्।। (आचारप्रदीप)
कहीं पर यह श्लोक इस प्रकार मिलता है–
कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविन्द: प्रभाते करदर्शनम्।। (आचारप्रदीप)

इस श्लोक में धन की देवी लक्ष्मी, विद्या की देवी सरस्वती तथा कर्म के अधिष्ठाता देव ब्रह्मा की स्तुति की गयी है। इस मन्त्र का आशय है कि मेरे हाथ के अग्रभाग में लक्ष्मी, मध्यभाग में सरस्वती तथा मूलभाग में ब्रह्मा (गोविन्द) निवास करते हैं। प्रभातकाल में मैं हथेलियों में इनका दर्शन करता हूँ।

इस श्लोक से धन और विद्या की प्राप्ति के साथ-साथ कर्तव्यकर्म करने की प्रेरणा प्राप्त होती है। हम अपनी विवेकशक्ति से सदैव सत्कर्म करते रहें। करदर्शन करने का आशय यह भी है कि प्रात:काल उठते ही मेरी दृष्टि कहीं और न जाकर अपने ही हाथ में देवताओं का दर्शन करे; जिससे दिनभर मेरे में सुबुद्धि बनी रहे और मेरे द्वारा कोई बुरा कार्य न हो।

करदर्शन के बाद भूमि पर पांव रखने से पहले विष्णुपत्नी भूदेवी से क्षमा मांगनी चाहिए। पृथ्वीमाता ने सबको धारण कर रखा है। अत: वे सभी के लिए पूज्य हैं। भूमिवन्दना का श्लोक है–

समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे।।

अर्थात्–समुद्ररूपी वस्त्रों को धारण करने वाली, पर्वतरूपी स्तनों से शोभित विष्णुपत्नी, मेरे द्वारा होने वाले पादस्पर्श के लिए आप मुझे क्षमा करें।

मंगल-दर्शन एवं बड़ों का अभिवादन!!!!!!

इसके बाद मांगलिक वस्तुओं (भगवान, गौ, तुलसी, गंगा, पीपल, चन्दन, सोना, शंख, दर्पण व मणि ) का दर्शन करें। माता-पिता, गुरु, सूर्य व अपने से बड़ों को प्रणाम करें। इससे आयु, विद्या, कीर्ति तथा बल की वृद्धि होती है। वृद्ध पुरुषों के पैर छूने से उनके शरीर की विद्युत-शक्ति का प्रवेश पैर छूने वाले व्यक्ति के शरीर में हो जाता है जिससे वृद्ध पुरुषों के ज्ञान व सद्गुण पैर छूने वाले व्यक्ति में आ जाते हैं।

त्रिदेवों के साथ नवग्रह का स्मरण!!!!!!
ब्रह्मा मुरारिस्रिपुरान्तकारी
भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव:
कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।

अर्थात्–ब्रह्मा, विष्णु, शिव, सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु–इन सभी का स्मरण करते हुए प्रार्थना करें कि सभी मेरे प्रात:काल को मंगलमय करे।

प्रात:काल में विभिन्न उद्देश्यों के लिए विभिन्न देवताओं का नाम-स्मरण!!!!!!!!

प्रात:काल में यदि मनुष्य विभिन्न देवताओं का नाम-स्मरण कर लेता है तो वह जीवन की विभिन्न परेशानियों से उबर सकता है। जैसे–

रोग नाश के लिए रोज सुबह सोमनाथ, वैद्यनाथ, धन्वन्तरि तथा दोनों अश्विनीकुमारों का नाम-स्मरण करना चाहिए।

सौभाग्य की वृद्धि के लिए उमा, उषा, सीता, लक्ष्मी तथा गंगा इन पांच नामों का प्रात:काल पाठ करना चाहिए।

संकटनाश के लिए भगवान शिव, भगवान विष्णु, हरिश्चन्द्र, हनुमान तथा बलराम का सुबह नाम-स्मरण करना चाहिए।

अकालमृत्यु से बचने व दीर्घायु के लिए सात चिरंजीवी–अश्वत्थामा, बलि, वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और परशुराम–तथा मार्कण्डेयजी का स्मरण करना चाहिए।

घोरबाधा से मुक्ति के लिए राम, लक्ष्मण, सीता, सुग्रीव तथा हनुमानजी–इन पांचों का रोज सुबह नाम लेना चाहिए।

घोर पापों के नाश के लिए प्रतिदिन प्रात: और सन्ध्या समय बारह ज्योतिर्लिंगों का नाम लेना चाहिए। ज्योतिर्लिंगों के नाम हैं–(१) श्रीसोमनाथ, (२) श्रीमल्लिकार्जुन, (३) श्रीमहाकाल, (४) ॐकारेश्वर अथवा अमलेश्वर, (५) वैद्यनाथ, (६) श्रीभीमशंकर, (७) श्रीरामेश्वर, (८) श्रीनागेश्वर, (९) श्रीविश्वनाथ, (१०) श्रीत्र्यम्बकेश्वर, (११) श्रीकेदारनाथ और (१२) श्रीघुश्मेश्वर।

सभी प्रकार के विषों से रक्षा के लिए कपिला गौ, कालिय, अनन्त, वासुकि तथा तक्षक नाग का नित्य सुबह नाम-स्मरण करना चाहिए।

संयमपूर्ण जीवन के लिए प्रतिदिन सनत्कुमार, नारदजी, शुकदेव, भीष्म तथा हनुमानजी का नाम लेना चाहिए।

सुबह उठने पर इस सब क्रियाओं को करने से बहुत लाभ मिलता है– दिन अच्छा बीतता है। दु:स्वप्न, शत्रु, पाप और भय का नाश होता है। धर्म की वृद्धि होती है। रोग आदि नहीं सताते हैं। अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। मनुष्य पूरी आयु प्राप्त करता है।

घर में सुख-समृद्धि रहती है। सभी कार्यों में विजय प्राप्त होती है। सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

इसके बाद रात को तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल (क्षमतानुसार 2-4 गिलास) पीना चाहिए। इससे कफ, वायु और पित्त (त्रिदोष) का नाश होता है। पेट के विकार दूर हो जाते हैं और बुढ़ापा मनुष्य के पास नहीं फटकता। बवासीर, प्रमेह, सिर की पीड़ा आदि रोग दूर हो जाते हैं।

प्रात:काल खुली, ताजी और शुद्ध हवा में अपनी शक्ति अनुसार टहलना चाहिए और व्यायाम और योगासन करना चाहिए। स्वस्थ रहने का अर्थ है–अपने-आप में स्थित होकर शान्त और प्रसन्न रहना।

जीवन जीना समय को ढोना नहीं बल्कि एक कला है। जीते तो सभी हैं पर जिसने अपना जीवन सार्थक बना लिया, उसी का जीना सही मायने में जीना है।

छल-प्रपंच से दूर हो, जन-मंगल की चाह।
आत्मनिरोगी जन वही गहे सत्य की राह।।

01/04/2022

We can not help everybody but, Everybody can help somebody
Hands together for each other

01/04/2022

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