10/06/2026
क्षत्रिय कुलभूषण, असली करणी सैनिक स्वर्गीय दादा सुखदेव सिंह गोगामेड़ी जी की कमी आज समाज को बहुत खल रही है। लेकिन उन्होंने जीते जी निश्चित रूप से कई हजार असली करणी सैनिक तैयार किए और अपनी प्रेरणा छोड़कर इस दुनिया को अलविदा कह गए। अगर कुछ लोग उनके साथ घात नहीं किए होते तो शायद आज सुखदेव सिंह गोगामेड़ी दादा हमारे बीच होते।
खैर, आज यह देखकर बहुत दुख और निराशा होती है कि स्वर्गीय दादा सुखदेव सिंह गोगामेड़ी जी के देहावसान के बाद कई सारे करणी सेना जैसे संगठन बनाकर कुछ लोग अपना प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं। इससे समाज को बदनाम करने और दूसरे समाजों के सामने कमजोर दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। करणी सैनिक के नाम पर संगठन बनाकर दूसरे समाज के लोगों को जोड़कर अपना और समाज का उपहास उड़ाया जा रहा है।
सूरजपाल सिंह अम्मू समाज के मुद्दों पर हमेशा मूक दर्शक बने रहते हैं। कई सामाजिक मुद्दों पर उनके मुंह से कुछ नहीं निकलता। समाज की बहू-बेटियों, बच्चों और युवाओं पर अत्याचार या परेशानी की बात आती है, तब भी उनकी आवाज नहीं उठती। लेकिन विडंबना देखिए कि उत्तर प्रदेश में अपने करणी सैनिक के बैनर तले चुनाव लड़ने की बात कर रहें हैँ और उनके संगठन में दूसरे समाज के लोग भी शामिल हैं। यह अवसरवादिता सामाजिक संगठन के नाम पर बहुत घातक है।
करणी सेना के नाम पर राजनीति करना और फिर किसी दूसरे व्यक्ति पर टीका-टिप्पणी करना, जिसका खामियाजा पूरे समाज को भुगतना पड़ता है। कुछ लोग, जिनकी कोई सामाजिक हैसियत और औकात नहीं है, वे भी पूरे समाज को निशाना बनाने लगते हैं।
सूरजपाल सिंह सिंह अम्मू को स्व• दादा सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के संघर्षो और जीवन परिचय से सीखना चाहिए कि समाज को कैसे संगठित करना है, कैसे एकजुट करना है और कैसे मजबूत बनाना है। इसके लिए उन्हें स्वर्गीय सुखदेव सिंह गोगामेड़ी जी के आदर्शों और संघर्षों से प्रेरणा लेनी चाहिए। सुखदेव सिंह गोगामेड़ी जी और लोकेंद्र सिंह कालवी जी जब तक जीवित रहे, तब तक उन्होंने सामाजिक संगठनों को एकजुट रखने का प्रयास किया।
आज समाज को चिंतन करने की जरूरत है कि छोटे-छोटे संगठनों को एक मंच पर कैसे लाया जाए और एक सार्थक उद्देश्य के साथ हम सभी मिलकर समाज को मजबूत कैसे बनाएं
✒️मृगेंद्र प्रताप सिंह✒️