12/08/2026
मीडिया का काम सच्चाई दिखाना है, किसी की छवि खराब करना नहीं।
बिहार न्यूज टुडे नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वालों से मेरा सीधा सवाल है—मीडिया का काम क्या है? कहीं से कोई वीडियो फुटेज भेज दे और बिना पूरी सच्चाई जाने उसे खबर बनाकर चला देना?
ANI, PTI जैसी प्रतिष्ठित समाचार एजेंसियां भी किसी घटना को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों और उपलब्ध पुष्टि को महत्व देती हैं। क्योंकि वीडियो में कुछ सेकंड के लिए क्या दिखाई दे रहा है, यह पूरी घटना की सच्चाई नहीं हो सकती। उसके पीछे की परिस्थिति, दोनों पक्षों की बात और वास्तविक घटनाक्रम जानना पत्रकारिता की बुनियादी जिम्मेदारी है।
दुर्भाग्य से अधूरी जानकारी और एकतरफा वीडियो के आधार पर खबर चलाने से कई निर्दोष और सम्मानित लोगों की छवि खराब हो जाती है। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, इसलिए उसकी जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है।
वरुण विजय जी के संबंध में जिस तरह खबर चलाई गई, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। खबर में लगाए गए आरोप गलत हैं और इसी मामले को लेकर मानहानि का कानूनी मामला भी दायर किया जा चुका है। अब इस पूरे मामले का फैसला तथ्यों और कानून के आधार पर होगा।
वरुण भैया वहां किसी विवाद को बढ़ाने नहीं, बल्कि पंचायत कराने और दोनों पक्षों के बीच बात रखने गए थे। उन्होंने दोनों पक्षों को CO के पास जाकर अपनी बात रखने की बात कही। बातचीत के दौरान अगर किसी समय बहस या गर्मागर्मी हुई भी हो, तो उस कुछ सेकंड के वीडियो को पूरी घटना का सच बताकर प्रस्तुत करना कितना उचित है?
क्या यही पत्रकारिता है कि वीडियो का एक हिस्सा दिखाकर पूरी कहानी अपने हिसाब से तय कर दी जाए?
और जब किसी खबर में किसी वरिष्ठ व्यक्ति का नाम तक सही तरीके से नहीं बताया जा रहा हो, तो कम-से-कम अपनी तथ्यात्मक जानकारी की जांच करना जरूरी है। MLA और MLC के बीच अंतर तक स्पष्ट नहीं है, फिर किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल उठाना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है।
अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है, तो केवल एक अधूरे वीडियो के आधार पर उसके चरित्र और प्रतिष्ठा पर सवाल उठाना कहां तक उचित है?
आरोप गलत हैं और मामला अब कानून के सामने है। इसलिए बेहतर होगा कि फैसला सोशल मीडिया की बहस या अधूरे वीडियो से नहीं, बल्कि तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया से होने दिया जाए।
वरुण भैया बहुत अच्छे दिल के इंसान हैं, शायद व्यक्तिगत स्तर पर माफ भी कर दें। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि किसी शरीफ और सम्मानित व्यक्ति की प्रतिष्ठा के साथ कोई भी खिलवाड़ करता रहे।
पत्रकारिता की असली ताकत जनता का भरोसा है।
उस भरोसे को बचाइए।
खबर चलाने से पहले तथ्य जांचिए, दोनों पक्षों को सुनिए और पूरी सच्चाई जनता के सामने रखिए।
मीडिया चौथा स्तंभ है—किसी की प्रतिष्ठा कुचलने का हथियार नहीं।