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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 99 वर्ष पूरे होने को हैं और विजयदशमी को शताब्दी वर्ष में कदम रखने को हैं। इसी खुशी में हरेक म...
07/09/2025

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 99 वर्ष पूरे होने को हैं और विजयदशमी को शताब्दी वर्ष में कदम रखने को हैं। इसी खुशी में हरेक मंडल में पद संचलन का कार्यक्रम होना चाहिए। आप जितनी ज्यादा से ज्यादा संख्या में इसमें शामिल हो, ऐसी आशा है। इसके लिए आपको सबसे पहले आपका गणवेश भी पूरा करना होगा। आप नीचे के चित्र में इसका आंकलन कर सकते है। जय मां भारती।

जय मॉं भारती
07/09/2025

जय मॉं भारती

07/09/2025

स्वयं अब जाग कर हमको , जगाना देश है अपना।
सरलार्थ - स्वयं जागकर समाज के सभी लोगों को जगाना है।
निहितार्थ - इस गीत की पंक्ति में एक स्वयंसेवक के कर्त्तव्य का उल्लेख किया गया है।

जब कोई व्यक्ति शाखा जाता है तथा स्वयंसेवक बनता है , तो उसके भीतर प्रथम यह बोध विकसित होता है - " भारत एक है। भारत भूमि की मिट्टी का प्रत्येक कण मेरे लिए पवित्र है। मैं और कुछ नहीं बल्कि हिंदू राष्ट्र का एक अंगमात्र हूं। समाज और मेरे बीच अनूठा अद्वितीय संबंध है। "
स्वामी विवेकानंद ने लाहौर में अपने प्रसिद्ध भाषण में कहा था - " आप तभी एक हिंदू हैं , जब अन्य किसी की पीड़ा से आपके हृदय में वैसी ही दुःख की लहर दौड़ जाती है , जैसी कि अपने पुत्र को तकलीफ में देखकर होती है। "
शाखा में निरंतर दिए जा रहे संस्कारों से स्वयंसेवकों मेंं सच्चे हिन्दू का बोध उत्पन्न होता है कि समाज के सामने खड़ी समस्त चुनौतियां मेरी हैं , तो उन चुनौतियों के निवारण की जिम्मेदारी भी मेरी है , समस्या चाहे कितनी भी जटिल क्यों न हो ? तब वह बिना किसी बाहरी आकर्षण के अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुसार सामाजिक गतिविधियों से जुड़ता है।

क्या मैं नित्य शाखा जाता हूं ?
दैनिक शाखा नहीं जा पाता, तो क्या सप्ताह में भी एक बार संघ-स्थान में मेरी प्रार्थना होती है ?
क्या मेरा पूर्ण गणवेश है ?
जब स्वयं मैं ऐसा कर पाऊंगा, तभी तो दूसरे को कह पाऊंगा।

संघ शताब्दी वर्ष में देश भर के स्वयंसेवक , चाहे राष्ट्र जीवन के जिस भी क्षेत्र में कार्यरत हों, पूर्ण गणवेश बनवाकर संघ-स्थापना दिवस अर्थात् विजयादशमी के अवसर पर पथ संचलन में भाग लेने के लिए तत्पर हो रहे हैं।
इस हेतु मेरी क्या तैयारी है ?
यदि पूर्ण गणवेश नहीं है, तो पूर्ण गणवेश के लिए अपने निकट के संघ के कार्यकर्ता को शुल्क जमा कर दें।
शाखा में जाकर पथ संचलन का अभ्यास भी कर लें।

हम सभी जानते है कि एक जलता हुआ दीपक सभी अन्य बुझे दीपकों को जला देता है।
ठीक इसी भांति हमें स्वयं जागकर बाकी स्वयंसेवकों को जगाना है।
हम जिस मोहल्ले तथा बस्ती में रहते हैं अथवा जिस गांव तथा पंचायत में रहते हैं , वहीं के लोगों को जगाना है। मोहल्ला , गांव , बस्ती या पंचायत का भौगोलिक क्षेत्र बहुत बड़ा नहीं होता। पैदल भी चलकर हम सभी लोगों से संपर्क कर सकते हैं। स्वयं पूर्ण गणवेश हो जाने के बाद बाकी स्वयंसेवको का भी पूर्ण गणवेश हो , इसके लिए घर-घर जाकर उनसे संपर्क करना है।
इस संदर्भ में " जगाना देश है अपना " का तात्पर्य यही है।
।। जय मॉं भारती ।।

07/09/2025

Sangh Ke Sangharsh purn 100 varsh

30/01/2023
04/11/2022
*शरद पूर्णिमा*राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शिवाजी प्रभात शाखा, परसाबाद के स्वयंसेवकों के द्वारा देवी मड़ई (रेलवे फाटक परसाब...
10/10/2022

*शरद पूर्णिमा*
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शिवाजी प्रभात शाखा, परसाबाद के स्वयंसेवकों के द्वारा देवी मड़ई (रेलवे फाटक परसाबाद के बगल) में मनाया गया। सह खंड कार्यवाह संतोष कुमार ने शाखा लगाकर इसकी शुरुआत करी। खंड कार्यवाह सुनील यादव जी ने सामूहिक गीत के बाद मुख्य अतिथि का परिचय करवाया। पीयूष और आयुष गुप्ता जी ने सुभाषित और अमृत वचन का वाचन किया। तत्पश्चात, मुख्य अतिथि श्री बिंदेश्वरी बिहारी जी का बौद्धिक हुआ। उन्होंने शरद पूर्णिमा के विषय में बताया कि ऐसी मान्यता ही नहीं बल्कि सच्चाई है कि आश्विन पूर्णिमा की रात्रि की चाँदनी रात में खुले आसमान के नीचे खीर रखने से चंद्रमा के औषधीय गुण इसमें आ जाते हैं, क्योंकि इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण रहता है तथा धरती के नजदीक भी होता है। खीर का सेवन करने से जातक की रोगप्रतिरोधक क्षमता दोगुनी हो जाती है। शरद पूर्णिमा के समय चंद्रमा की किरणें अमृत की वर्षा करती हैं। समापन संबोधन वर्तमान जिला परिषद सदस्य केदारनाथ यादव जी ने की।उन्होंने संघ की शाखा को सुचारू रूप से चलाने पर जोर दिया। इस साल शरद पूर्णिमा आज ही 09 अक्टूबर को पड़ रही है। आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तिथि रविवार दिन, 09 अक्टूबर 2022 को चांदनी रात में रखा खीर का सेवन करने से असाध्य रोगों से निदान पा सकते हैं।
कुछ समय के लिए पूर्व प्रमुख, जयनगर पूर्वी जय प्रकाश राम जी ने भी अपनी दृष्टिकोण से बातें रखते हुए कहा कि आज के वैज्ञानिकों तथा सनातन वैदिक साहित्य में हज़ारों वर्ष पहले लिखी बातों की तुलनात्मक बातें बताते हुए शरद पूर्णिमा का महत्व बताया। ऐसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सत प्रतिशत खरी उतरने वाली बातें दुनिया की किसी भी पवित्र पुस्तक में नही मिलती जितनी सनातन के शास्त्रों में मिलता है। इसलिए अपने संस्कृति को बचाते हुए इसे सहजता से पालन करते रहने की आवश्यकता है जिसे धीरे धीरे पूरी दुनिया भी स्वीकार रही है।
अंत में सभी ने एकसाथ बैठकर शीत रूपी अमृत मिला प्रसाद 'खीर' को सामूहिक भोजन मंत्र के बाद ग्रहण किया। इस कार्यक्रम में शाखा कार्यवाह ओमप्रकाश वैशख़्यार जी,जिला धर्म जागरण प्रमुख मुकेश राणा जी, विभाग धर्म जागरण संजोजक किसुन यादव जी, ओमप्रकाश जी, महेंद्र जी, आशीष जी, मानवाधिकार अध्यक्ष चंद्रभूषण मिश्र, रितेश जी, अविनाश जी, शशिकांत जी, शुभांकर, शोभित, आयुष, प्रिंस, उज्जवल सहित कई बाल, तरुण व बड़े स्वयंसेवक उपस्थित थे।

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