15/04/2026
बालिका शिक्षा केन्द्रो में धूमधाम से मनाई गयी डॉ. बी.आर. अंबेडकर जयंती
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी इम्पैक्ट बालिका शिक्षा केन्द्रो मे उत्तर प्रदेश वनवासी सेवा संस्थान द्वारा संचालित 65 गाँवो में "बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती" मनाई गयी। जिसमे टाइटन कंपनी के 20 बालिका शिक्षा केन्द्रो में मातृ शिक्षा कार्यक्रम के तहत 600 महिलाओं को प्रमाण पत्र वितरित किया गया। जिसको पाकर महिलाओं का चेहरा खिलाफ उठा साथ ही इंडस टावर के 45 केन्द्रो की महिलाओं को भी प्रमाण पत्र वितरित किये गए। इस अवसर उत्तर प्रदेश वनवासी सेवा संस्थान द्वारा बालिका शिक्षा केन्द्रो में "शिक्षा ही मुक्ति का मार्ग" थीम पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।
जिसमें बालिका शिक्षा केंद्र के प्रोजेक्ट इंचार्ज पुष्पेंद्र सिंह ने "पढ़ो और संघर्ष करो" का संदेश देते हुए बताया कि डॉ. अंबेडकर मानते थे कि शिक्षा ही दलित, वंचित और पिछड़े वर्गों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान की सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने कहा था - "शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो। वे भारतीय संविधान के निर्माता होने के साथ-साथ अर्थशास्त्र में पीएच.डी. और कानून में बैरिस्टर थे।
पुष्पेंद्र सिंह ने बालिका शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि डॉ. अंबेडकर ने हमेशा बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता दी। उनका मानना था - "मैं किसी समुदाय की प्रगति उस समुदाय की महिलाओं की प्रगति से मापता हूँ।"
परियोजना सचिव अमित कुमार ने बताया कि बाबा साहेब का जीवन बताता है कि शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है। उनके प्रयासों से ही आज शिक्षा का अधिकार संविधान के मूल अधिकारों में शामिल है। इस जयंती को 65 बालिका शिक्षा केन्द्रो की शिक्षिकाओं ने अपने - अपने केन्द्रो में हर्षोल्लास के साथ गांव में रैली निकलकर लोगो को बालिका शिक्षा के बारे में जागरूक किया। इस दौरान पर्यवेक्षक आसिफ अली, अनिल कुमार, विकास जायसवाल व नेहा तिवारी, अकाउंटेंट आशना उपस्थित रही।