Gouri Shankar Seva Dham

Gouri Shankar Seva Dham Gouri Shankar Seva Dham Trust 1.

President Param Pujya Acharya 108 Mahant Shri Sadhvi Rishi Giri Ji Maharaj

With Acharya Manish Ji – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
03/05/2026

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 #धैर्य नहीं जिसके पास ...    इन जन से आश ना विश्वास!!इस पर गुरु देव के वाक्य और हमारा कुछ शोध है..✍️धैर्य का एक लाभ यह ...
03/05/2026

#धैर्य नहीं जिसके पास ...
इन जन से आश ना विश्वास!!
इस पर गुरु देव के वाक्य और हमारा कुछ शोध है..
✍️धैर्य का एक लाभ यह है कि यह आपको अपने भीतर तनावग्रस्त महसूस करने के बजाय आराम करने की अनुमति देता है। जब आप धैर्य रखना सीख जाते हैं, तो आपको काफी अधिक शांति का अनुभव होता है। इसके अलावा, धैर्य आपको सहन करने और अधिक प्रभावी निर्णय लेने में मदद करता है, जिससे अधिक सफलता प्राप्त होती है।
जिसके पास धैर्य नहीं है, उसे समय और परिस्थितियाँ सिखाती हैं, क्योंकि अधीरता (lack of patience) अक्सर तनाव, गलत निर्णयों और असफलता का कारण बनती है। ऐसे लोग जीवन की चुनौतियों के सामने जल्दी हार मान लेते हैं, जबकि धैर्य सफलता की कुंजी है।
✍️अधीरता के नुकसान और धैर्य बढ़ाने के उपाय 🩸
परिणाम: बिना धैर्य वाले व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, तनाव और गलत निर्णय लेने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।
समय सिखाता है: जो व्यक्ति संयम नहीं रखता, उसे समय और कठिन परिस्थितियाँ कठोर सबक सिखाती हैं।
धैर्य क्यों जरूरी है !
धैर्य कमजोरी नहीं, बल्कि एक महान शक्ति है!
जो बड़ी समस्याओं को शांत करती है।
उपाय🩸 गहरी सांस लेने, ध्यान (meditation) करने और स्थिति को स्वीकार करने से धैर्य विकसित किया जा सकता है ! #साध्वी ऋषि गिरी जी महाराज ☀️




"उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् ।श्री नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ।।आप सभी  साधक उपासक सनातन...
30/04/2026

"उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् ।
श्री नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ।।
आप सभी साधक उपासक सनातनी भक्त श्रद्धालुओं को
श्री नरसिंह देव के प्राकट्य दिवस मंगलमय तिथि की हार्दिक शुभ कामनाएं 💐 जी🚩🚩🚩🏹💥☀️
#साध्वी ऋषि गिरी जी महाराज ☀️









#पुष्पांजलि

 #आदि गुरु शंकराचार्य की जयंती (शंकराचार्य जयंती) वर्ष 2026 में 21 अप्रैल, मंगलवार को मनाई जा रही है। यह हिंदू पंचांग के...
21/04/2026

#आदि गुरु शंकराचार्य की जयंती (शंकराचार्य जयंती) वर्ष 2026 में 21 अप्रैल, मंगलवार को मनाई जा रही है।
यह हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है।
मान्यतानुसार, अद्वैत वेदांत के महान दार्शनिक आदि शंकराचार्य का जन्म 8वीं शताब्दी में केरल के गांव कालड़ी में हुआ था।
#आदि शंकराचार्य की मुख्य प्रेरणा अद्वैत वेदांत
(ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है) की स्थापना, सनातन धर्म की पुनर्संरचना और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से जनसामान्य को मोक्ष के मार्ग पर ले जाना था।
उन्होंने मोह-माया से ऊपर उठकर आत्म-साक्षात्कार, वेदों की सर्वोच्चता और देश भर में मठों की स्थापना कर सांस्कृतिक एकता को प्रेरित किया।
#आदि गुरु शंकराचार्य जी ने सनातन धर्म को संगठित करने के लिए दशनामी संन्यासी परंपरा की स्थापना की, जिसमें 10 प्रकार के सन्यासियों के नाम शामिल हैं!
गिरी, पुरी, भारती, वन, अरण्य, सागर, आश्रम, सरस्वती, तीर्थ, और पर्वत। ये शैव संन्यासी 4 मठों और 10 अखाड़ों में बंटे हैं और गेरुआ वस्त्र धारण करते है •
उनके पुनर्गठित ये आध्यात्मिक धरोवर हम सभी साधु संत, सनातनी साधक उपासक श्रद्धालुओं को अत्यधिक मान्य होनी चाहिए....
#आचार्य साध्वी ऋषि गिरी जी महाराज ☀️








ज्ञान अमृत की अद्भुत धारा का बहाव 🌏पूज्य श्री के द्वारा 🚩🚩🚩
18/04/2026

ज्ञान अमृत की अद्भुत धारा का बहाव 🌏
पूज्य श्री के द्वारा 🚩🚩🚩








🔴Day -2 Shrimad Bhagwat Mahapuran Katha || 108 Acharya Mehant Shri Sadhvi Rishi Giri Ji Maharaj || Baddi Himachal Prades...
14/04/2026

🔴Day -2 Shrimad Bhagwat Mahapuran Katha || 108 Acharya Mehant Shri Sadhvi Rishi Giri Ji Maharaj || Baddi Himachal Pradesh...



जय श्री कृष्णा जय श्री राधे श्याम 🔱🔱
05/04/2026

जय श्री कृष्णा जय श्री राधे श्याम 🔱🔱

 #सेवा, सत्संग, साधना, सहयोग __ये भक्ति के अंग है !पूरे अंग स्वस्थ ना हो तो  #भक्ति अपंग है!श्रीमद्भागवत के अनुसार भक्ति...
07/03/2026

#सेवा, सत्संग, साधना, सहयोग __ये भक्ति के अंग है !
पूरे अंग स्वस्थ ना हो तो #भक्ति अपंग है!
श्रीमद्भागवत के अनुसार भक्ति के मुख्य रूप से नौ अंग हैं, जिन्हें नवधा भक्ति कहा जाता है। ये ईश्वर प्राप्ति के लिए मन, कर्म और वचन से की जाने वाली साधना के नौ चरण हैं, जो भक्त के समर्पण को दर्शाते हैं।
📙✍️नवधा भक्ति (भक्ति के नौ अंग ) हैं!!
श्रवण🩸🩸ईश्वर की लीलाओं, कथाओं और गुणों को सुनना (जैसे परीक्षित ने किया)।
कीर्तन🩸🩸ईश्वर के नाम, गुणों और महिमा का गान करना (जैसे नारद जी ने किया)।
स्मरण🩸🩸निरंतर ईश्वर के नाम और रूप का ध्यान करना (जैसे प्रह्लाद ने किया)।
पादसेवन🩸🩸 ईश्वर के चरणों की सेवा करना (जैसे लक्ष्मी जी ने किया)।
अर्चन🩸🩸पूजन, पुष्प, धूप, दीप आदि से ईश्वर की पूजा करना (जैसे पृथु महाराज ने किया)।
वंदन🩸🩸ईश्वर को प्रणाम और स्तुति करना (जैसे अक्रूर जी ने किया)।
दास्य🩸🩸 स्वयं को भगवान का सेवक मानकर सेवा करना (जैसे हनुमान जी ने किया)।
सख्य🩸🩸ईश्वर को मित्र मानकर प्रेमपूर्ण संबंध बनाना (जैसे अर्जुन ने किया)।
आत्मनिवेदन🩸🩸 स्वयं को ईश्वर को पूरी तरह से समर्पित कर देना (जैसे बलि राजा ने किया)।
इसके अतिरिक्त, भक्तिरसामृतसिंधु में भक्ति के 64 अंगों का भी वर्णन है, जिसमें साधु संग, नाम कीर्तन और भागवत श्रवण प्रमुख हैं!!!!
#साध्वी ऋषि गिरी जी महाराज ☀️






#ऋषिसंजीवनी

गौरी शंकर सेवा धाम संस्था की सामाजिक विकास कार्यक्रम सेवाएं... जन जागृति शंखनाद की कुछ छाया प्रतियां..
18/02/2026

गौरी शंकर सेवा धाम संस्था की सामाजिक विकास कार्यक्रम
सेवाएं... जन जागृति शंखनाद की कुछ छाया प्रतियां..







08/02/2026








07/02/2026

विचारों की शुद्धता #ऋषि संजीवनी






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