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🇮🇳 राजस्थान सरकार की बड़ी पहल: सभी मेडिकल स्टोर होंगे ऑनलाइन जस्ट आज भी आप को दे रहा है ऑनलाइन सुविधा  www.justaaj.in पर...
07/04/2020

🇮🇳 राजस्थान सरकार की बड़ी पहल: सभी मेडिकल स्टोर होंगे ऑनलाइन जस्ट आज भी आप को दे रहा है ऑनलाइन सुविधा www.justaaj.in पर

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ना कोई घर से बाहर निकलेगा, ना कोरोना फैलने का खतरा होगा

अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस मनाने की शुरूआत 1 मई 1886 से मानी जाती है जब अमेरिका की मज़दूर यूनियनों नें काम का समय 8 घंटे...
01/05/2019

अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस मनाने की शुरूआत 1 मई 1886 से मानी जाती है जब अमेरिका की मज़दूर यूनियनों नें काम का समय 8 घंटे से ज़्यादा न रखे जाने के लिए हड़ताल की थी। इस हड़ताल के दौरान शिकागो की हेमार्केट में

बम धमाका हुआ था। यह बम किस ने फेंका किसी का कोई पता नहीं। इसके निष्कर्ष के तौर पर पुलिस ने मज़दूरों पर गोली चला दी और सात मज़दूर मार दिए। "भरोसेमंद गवाहों ने तस्दीक की कि पिस्तौलों की सभी फलैशें गली के केंद्र की तरफ से आईं जहाँ पुलिस खड़ी थी और भीड़ की तरफ़ से एक भी फ्लैश नहीं आई। इस से भी आगे वाली बात, प्राथमिक

अखबारी रिपोर्टों में भीड़ की तरफ से गोलीबारी का कोई ज़िक्र नहीं। मौके पर एक खंबा गोलियों के साथ हुई छेद से पुर हुआ था, जो सभी की सभी पुलिस वाले तरफ़ से आईं थीं।चाहे इन घटनाओं का अमेरिका पर एकदम कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा था लेकिन कुछ समय के बाद अमेरिका में 8 घंटे काम करने का समय निश्चित कर दिया गया था। मौजूदा समय भारत और अन्य मुल्कों में मज़दूरों के 8 घंटे काम करने से संबंधित क़ानून लागू है। मजदूर दिवस की सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं !

इंजीनियर वसीम अकरम मेव
राष्टीय अध्यक्ष
ह्यूमन राइट्स जस्टिस एसोसिएशन
Whatt- 9413310150
www.hrja.org.in

जनवरी से जोइनिंग ओपनजुड़ने के लिए व्हाट्सएप करे9413310150
15/12/2018

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छावनी भारतीय वायुसेना भारतीय सशस्त्र सेना का एक अंग है जो वायु युद्ध, वायु सुरक्षा, एवं वायु चौकसी का महत्वपूर्ण काम देश...
08/10/2018

छावनी भारतीय वायुसेना भारतीय सशस्त्र सेना का एक अंग है जो वायु युद्ध, वायु सुरक्षा, एवं वायु चौकसी का महत्वपूर्ण काम देश के लिए करती है। इसकी स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को की गयी थी। आजादी से पूर्व इसे रॉयल इंडियन एयरफोर्स के नाम से जाना जाता था और १९४५ के द्वितीय विश्वयुद्ध में इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
स्थापना: 8 अक्तूबर 1932, भारत
मुख्यालय: नई दिल्ली

इंजि. वसीम अकरम मेव
राष्ट्रीय अध्यक्ष
ह्यूमन राइट्स जस्टिस एसोसिएशन

हर इंसान की जिंदगी में दो अहम पहलू है.. हुक़ूक व फरायज़ यानी अधिकार तथा कर्तव्य, Right & Duties… लेकिन ये सच है कि हम अप...
10/09/2018

हर इंसान की जिंदगी में दो अहम पहलू है.. हुक़ूक व फरायज़ यानी अधिकार तथा कर्तव्य, Right & Duties… लेकिन ये सच है कि हम अपने अधिकारों के बारे में जागरुक तो है..लेकिन उसे हासिल करने के लिए अपनी ज़िम्मेदारी से बिलकुल बेखबर है..या चाहते है कि कोई दूसरा ही उनका सारा काम कर दे. जबकि ख़ुद बदकिस्मती से अपना काम बेकार की बातों या लोगों की बुराई-भलाई करने को ही समझने लगे है और यही हमारी सारी परेशानियों की जड़ है। ऐसें में “ह्यूमन राइट्स जस्टिस एसोसिएशन ” देश के हर शहर के अच्छे लोगों की कारकर्दगी की बुनियाद पर “बोर्ड ऑफ ह्यूमन राइट्स” के गठन का फैसला लिया गया है। अतः अधिक जानकारी के लिए 9413310150 पर मिस्डकाल दीजियें या 15 अच्छे लोगों के लोगो की टीम अपनी ब्लॉक, जिला,राज्य में बनाए

Human Rights Justice A
ह्यूमन राइट्स जस्टिस एसोसिएशन
Join.call 9413310150 [email protected]

20/08/2018

मुकदमों के शीघ्र निपटारे का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट का फैसला

मेनका गांधी के मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को यह मौलिक अधिकार देता है कि कानून द्वारा निश्चित की गयी प्रक्रिया के अनुसार ही किसी व्यक्ति को जीवन से या मुक्ति से वंचित किया जा सकता है और यह प्रक्रिया संगतपूर्ण , उचित और निष्पक्ष होनी चाहिए न कि कोई अनुच्छेद 21 से मिलती जुलती प्रक्रिया हो । यदि कोई व्यक्ति ऐसी प्रक्रिया से अपनी स्वतंत्रता खो देता है जो संगतपूर्ण , उचित व निष्पक्ष नहीं है , ऐसी स्थिति में अनुच्छेद 21 के तहत उसके मौलिक अधिकार का खंडन माना जायेगा और वह अपने मौलिक अधिकार को लागू करने का अधिकार रखता है औऱ रिहाई ले सकता है। कोई भी प्रक्रिया जो शीघ्र मुकदमा सुनिश्चित नहीं करती संगतपूर्ण, उचित और निष्पक्ष नहीं कहलाई जा सकती।

अदालत का अधिकार

यदि अभियोग पक्ष बार-बार अवसर मिलने पर भी अपने गवाहों को भी पेश नहीं कर पाता है तो मजिस्ट्रेट क्रिमिनल प्रोसीजर के तहत अभियोग को समाप्त कर सकता है ।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अगर दो वर्षों और साथ में तीन और महीनों के बाद भी यदि पुलिस चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाती तो यह माना जा सकता है कि गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं है, सरकार ऐसे केसों को वापस ले सकती है ।
क्रिमिनल प्रोसीजर 1973 की धारा 468 की उपधारा 2 के मुताबिक वे कैदी जिनके खिलाफ पुलिस चार्जशीट दाखिल नहीं करती उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता और उन्हें तुरंत छोड़ दिया जाना चाहिए, क्योंकि उन्हें जेल में रखना गैरकानूनी होगा और साथ ही अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए उनके मूलभूत अधिकारों का खंडन भी होगा ।
क्रिमिनल प्रोसीजर 1973 की धारा 167 (5) में कहा गया है कि यदि किसी मुकदमे के बारे में मजिस्ट्रेट सोचता है कि यह सम्मन मुकदमा है और जिस तारीख से अभियुक्त गिरफ्तार हुआ है उससे 6 महीने के अंदर तहकीकात समाप्त नही होती, मजिस्ट्रेट अपराध के बारे में और तहकीकात को रुकवा सकता है , लेकिन अगर जो अधिकारी तहकीकात कर रहा है वह मजिस्ट्रेट को इस बात के लिए संतुष्ट कर दे कि विशेष कारणों से और न्याय के हित में तहकीकात 6 महीनों के बाद चालू रहे तो तहकीकात चालू रह सकती है ।
क्रिमिनल प्रोसीजर 1973 (2) में दी गयी शर्त के मुताबिक मजिस्ट्रेट अभियुक्त को 15 दिन से ज्यादा जेल में रखने का आदेश दे सकता है अगर वह इस बात से संतुष्ट है कि ऐसा करने के पर्याप्त कारण हैं । कैदियों को समय-समय पर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करते रहना चाहिए।
हाईकोर्ट को यह अधिकार है कि वो विचाराधीन कैदियों के मुकदमों का निरीक्षण करे यह देखने के लिए कि किसी राज्य में मजिस्ट्रेट संहिता के प्रावधानों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक यदि किसी बच्चे के अपराध की सजा सात साल से अधिन न हो , शिकायत दर्ज होने की तारीख या एफआईआर दर्ज होने की तारीख से तीन महीने का समय तहकीकात के लिए अधिकतम समय माना जायेगा और चार्जशीट दाखिल करने के बाद 6 महीने का समय है जिसमें बच्चे का मुकदमा हर हाल में पूरा हो जाना चाहिए । यदि ऐसा नही किया जाता है तो बच्चे के खिलाफ अभियोग रद्द किया जा सकता है ।
अनुच्छेद 21 के अनुसार यदि मृत्युदण्ड को पूरा करने में देरी हो जाती है , जिससे मृत्युदण्ड पाने वाले को मानसिक कष्ट व यंत्रणा मिलती है तो यह अनुच्छेद 21 का खंडन है । इसलिए मृत्युदण्ड को आजीवन कारावास में बदला जा सकता है ।
सरकार का कर्तव्य

अनुच्छेद 39-A के मुताबिक सरकार समान अवसर के आधार पर न्याय को बढ़ावा दे तथा उचित कानून व योजना बनाकर नि:शुल्क कानूनी सहायता दे और यह भी देखे कि आर्थिक विपन्नता या दूसरी कमियों के कारण किसी भी नागरिक को न्याय मिलने के अवसर से वंचित नहीं रहना पड़े ।
गरीबों को नि:शुल्क कानूनी सेवा न केवल संविधान का समान न्याय का आदेश है जो अनुच्छेद 14 में दिया गया है और जीवन व स्वतंत्रता का अधिकार जो अनुच्छेद 21 में दिया गया है बल्कि संवैधानिक निर्देश है जो अनुच्छेद 39-A में दिया गया है ।

07/08/2018

मानवाधिकार (What are Human Rights)

मानवाधिकार की स्थापना 2 अक्टूबर 1993 में हुई। जिसके उद्देश्य नौकरशाही पर रोक लगाना, मानव अधिकारों के हनन को रोकना तथा लोक सेवक द्वारा उनका शोषण करने में अंकुश लगाना। मानवाधिकार की सुरक्षा के बिना सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आज़ादी खोखली है मानवाधिकार की लड़ाई हम सभी की लड़ाई है। विश्वभर में नस्ल, धर्म, जाति के नाम मानव द्वारा मानव का शोषण हो रहा है। अत्याचार एवम जुल्म के पहाड़ तोड़े जा रहे हैं। हमारे देश में स्वतंत्रता के पश्चात् धर्म एवम जाति के नाम पर भारतवासियों को विभाजित करने का प्रयास किया जा रहा है। आदमी गौर हो या काला, हिन्दू हो या मुस्लमान, सिख हो या ईसाई, हिंदी बोले या कोई अन्य भाषा सभी केवल इंसान हैं और संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित मानवाधिकारों को प्राप्त करने का अधिकार है। मानव अधिकार का मतलब ऐसे हक़ जो हमारे जीवन और मान-सम्मान से जुड़े हैं। ये हक़ हमें जन्म से मिलते हैं, हम सब आज़ाद हैं। साफ़ सुथरे माहौल मैं रहना हमारा हक़ है । हमें इलाज़ की अच्छी सहूलियत मिले। हमें और हमारे बच्चों को पढाई-लिखाई की अच्छी सहूलियत मिले। पीने का पानी साफ मिले। जाति, धर्म, भाषा-बोली के कारण हमारे साथ भेदभाव न हो। हमें हक़ है की हम सम्मान के साथ रहें। कोई हमें अपना दस या गुलाम नहीं बना सके। प्रदेश में हम कहीं भी बेरोकटोक आना-जाना कर सकते हैं। हम बेरोकटोक बोल सकते हैं, लेकिन हमारे बोलने से किसी के मान-सम्मान को चोट नहीं पहुंचनी चाहिए। हमें आराम करने का अधिकार है। हमें यह तय करने का अधिकार है की हमारे बच्चे को किस तरह की शिक्षा मिले। हर बच्चे को जीने का अधिकार है, उसे अच्छी तरह की शिक्षा मिले। यदि हमें हमारा हक़ दिलाने मैं सरकारी महकमा हमारी मदद नहीं कर रहा है तो हम मानव अधिकार आयोग में शिकायत कर सकते हैं। आयोग में सीधे अर्जी देकर शिकायत कर सकते हैं।इसके लिए वकील की जरूरत नहीं है। शिकायत किसी भी भाषा या बोली में कर सकते हैं हिंदी में हो तो अच्छा है। शिकायत लिखने के लिए कैसे भी कागज़ का इस्तेमाल करें, स्टैम्प पेपर की कोई जरूरत नहीं होती। आयोग के दफ्तर में टेलीफोन नम्बर पर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

आपको यह जानकर खुशी होगी कि मानव अधिकार की टीम लगातार समाज से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य कर रही है जिनमें से प्रमुख हैं-
1. सभी गरीब बच्चों, महिला, बुजुर्ग व विक्लांग व्यक्तियों के लिऐ समान शिक्षा, मुफ्त स्वास्थ्य जांच कैम्प लगाना और दवाईयां तथा उपकरण उपलब्ध कराना।
2. सामाजिक बुराई के खिलाफ पहल करना और बुलंद आवाज उठाना तथा पीड़ितों को बुराई से निज़ात दिलाना।
3. बाल व बन्धुआ मजदूरी के अत्याचार से मुक्ति दिलाना।
4. बच्चों, महिलाओं तथा बुजुर्गो की रक्षा के लिये काम करना।
5. समाज के लिये योगदान करने वाली हस्तियों को समय-समय पर पुरूस्कृत करके उनका सम्मान करना।
6. समाज व हर वर्ग के लोगो के साथ मिलकर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करना।
7. जनता तथा पुलिस के बीच में सहयोग का पुल बनाना तथा पीड़ितों को न्याय दिलाना।
8. नए शिक्षा संस्थान, अस्पताल व अनाथ आश्रम खोलना और अन्य आश्रमों की देख-रेख करना।
9. भ्रूण हत्या पर हर सम्भव रोक लगाना व उनके खिलाफ आवाज उठाना।
10. हर वर्ग के कमज़ोर व्यक्ति को समाज में न्याय दिलाना।

हमारी समाज के हर व्यक्ति से अपील व प्रार्थना है कि-

आइये, हमारे साथ जुड़िये और समाज सेवा का हिस्सा बनिये। हम और हमारी टीम हर वक्त, हर समय आपकी सेवा में तत्पर है और हम सबके सहयोग के साथ काम करेगें। हमारा हर सम्भव प्रयास रहेगा कि हर वर्ग का व्यक्ति भय एवं भूख से मुक्त होकर सुख शांती और सम्मान से जी सके। यही मानव अधिकार है।

मानवाधिकार क्या है:-

प्राकृतिक अधिकार जो मानव को जन्म लेते ही प्राप्त होता है उसे हम मानव अधिकार कहते है. दुसरे शब्दों में एसे अधिकार जो प्रतेक व्यक्ति को मानव होने के नाते प्राप्त होते है उसे हम मानव अधिकार कहते है. जैसे;

भोजन, वस्त्र, आवास आदि. मनवा अधिकार में आमलोगों को बेहतर और सुरक्षित जीवन के लिए कुछ मुलभुत अधिकार दिए गए है. पुलिसकर्मी आपने कर्तव्य के कर्म में प्रायः एसी गलतिय कर बैठते है जिससे लोगो के मानवाधिकार का हनन हो जाता
मानवाधिकार की जरुरत क्या है.
१, शारीरिक स्वतंत्रता के लिए. २, गिरफ्तारी व अन्य वेवजह रोककर रखने के प्रविर्ती में मुक्ति के लिए. ३, मनुष्य के आत्म सम्मान को बचाकर रखने के लिए. ४,न्याय के रक्षा के लिए. ५, मनुष्य के मौलिक अधिकारों को बचके रखने के लिए. ६,जीवन स्तर को उच्च बनाने के लिए.७,अधिकारों के अतिकर्मन को रोकने के लिए. ८,रास्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय गौरव एवं शांति बनाने के लिए, ९,मानव के सर्वागीण विकाश के लिए,

मानवाधिकार को बचाए रखने के लिए पुलिस को को क्या नहीं करना चाहिए?(To protect human right police personals should not do)

गिरफ्तारी के समय 🙁at the time of arrest)
i. अनावश्यक बल का प्रयोग नहीं करना चाहिए.
ii. गिरफ्तारी के दौरान अभियुक्त तथा उसके परिवारजनों के साथ गली गलौज नहीं करना चाहिए.
iii. मारपीट व अन्य अमन्नीय व्यवहार नहीं करना चाहिए.
iv. गलत गिरफ्तारी नहीं करना चाहिए.
v. अनावश्यक रोक कर नहीं रखना चाहिए.
vi. गिरफ्तार व्यक्ति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुचने का प्रयास नहीं करना चाहिए.
vii. व्यक्तिगत फायदे के लिए गिरफ्तार व्यक्ति के विरुद्ध अनावश्यक करवाई नहीं करनी चाहिए.

तलाशी के समय 🙁While search)
i. तलाशी के समय स्थान के मालिक या व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार नहीं करना चैये.
ii. सामान्य स्तिथियों में रात्रि कल में तलाशी नहीं लेना चाहिए.
iii. किसी भी जगह अनधिकृत प्रवेश नहीं करना चाहिए.
iv. महिला एवं बच्चो के साथ दुर्व्वाहर नहीं करना चाहिए.
v. किसी भी संदिग्ध या वांछित वास्तु के आलावा उस जगह की अन्य वस्तुओ के साथ छेड़ छड या उठाने की कोसिस नहीं करना चाहिए.- जप्ती सूचि में दर्ज किये वैगर सामग्रियों को नहीं उठाना चाहिए.

गिरफ्तारी एवं तलाशी के दौरान पुलिस को क्या क्या करना चाहिए(to protect human right police should do following while search and arrest)
गिरफ्तारी के दौरान:
i. गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को गिरफ्तारी का कारन बताना चाहिए.
ii. उसको जमानत सम्बन्धी सुचना देना चाहिए.
iii. गिरफ्तारी के बाद अपराधी का डाक्टरी जाँच करना चाहिए.
iv. २४ घंटे के अन्दर गिरफ्तार व्यक्ति को न्यायलय में पेश करना चाहिए.
v. महिला, बच्चो, बीमार तथा वृद्ध व्यक्तियों का ध्यान रखना चाहिए.
vi. गिरफ्तारी एवं विरोध के सम्बन्ध में अन्य कानूनी प्रावधानों का पालन करना चाहिये.
vii. न्यायालयों द्वारा जरी दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए.
तलाशी के दौरान:
i. कानूनी प्रावधानों का पालन करना चाहिए.
ii. तलाशी के समय मकान मालिक को तलाशी का कारण बताना चाहिए.
iii. जप्त किये गए सामानों की सही सही सूचि बनाकर उसकी एक प्रति मकान मालिक को देनी चाहिए.
iv. घर या बंद स्थान की तलाशी के क्रम में किसी महिला की तलाशी महिला पुलिस या दूसरी महिला के द्वारा ही होनी चाहिए
v. अन्य स्तिथि में महिला की शालीनता का पूर्ण ख्याल करना चाहिए.

रोजगार व्यवस्था करवाना व् क़ानूनी मद्त देना:- एक बार रोटी देकर किसी की भूख केवल एकबार मिटाई जा सकती है इस लिए संगठन मानव कल्याण हेतु सभी को रोजगार उपलब्ध करवाना हमारा मकसद है ताकि व्यक्ति किसी की मद्त का मोहताज ना हो वह सक्षम हो खुद की मद्त करने में ओर कानून की जानकारी हर व्यक्ति को हो इसके लिए संगठन समय समय पर कैडर कैम्प लगाता है लोगों को कानून के प्रति जागरूक करने के लिए व् समय समय पर प्रतिभाओं को निखारने के लिए युवाओ को खेल जगत, मिडिया जगत,शिक्षा एवं टेक्नोलॉजी इत्यादि विभागों में मंच उपलब्ध करवाता है व् संगठन के द्वारा समय समय पर नशा मुक्ति अभियान चलाया जाता है जिस से मानव जाति को नशे से दूर रखा जा सके इसलिए लिए मेडिकल चेकप कैम्प भी लगाये जाते है लोगों को फ्री मेडिकल चेकप की सुविधा दी जाती है व् बहूत कम कीमतों पर बड़ी से बड़ी बीमारी की दवाइयां व् इलाज उपलब्ध करवाया जाता है संगठन लोगों को् देश भक्ति की भावना को बढ़ावा देने के लिए युवाओं को प्रेरित भी करता है

क्या नहीं करना चाहिए;(to protect human right police should avoid following while search and arrest)
i. आम आदमी के साथ अभद्रता का व्यवहार नहीं करना चाहिए.
ii. गिरफ्तारी के समय अनावश्यक बल प्रयोग नहीं करना चाहिए.
iii. गिरफ्तारी के समय आपराधि एवं उसके परिवार के लोगो के साथ गली गलौज नहीं करना चाहिए.
iv. गलत आदमी को गिरफ्तार नहीं करना चाहिए..
v. गिरफ्तार व्यक्ति का प्रतिष्ठा का ठेस नहीं पहुचना चाहिए.
vi. व्यक्तिगत दुश्मनी या किसी स्वार्थ की पूर्ति के लिए किसी को गिरफ्तार नहीं करना चाहिए.
vii. पद या वर्दी का दुरूपयोग नहीं करना चाहिए.
viii. सामान्य स्तिथि में रात्रि कल में तलाशी नहीं लेना चाहिए.
ix. किसी जगह में अनाधिकार प्रवेश नहीं करना चाहिए.
x. किसी व्यक्ति को लाकअप में हथकड़ी नहीं लगनी चाहिये.
अपने अधिकारों को जाने
ह्यूमन राइट्स जस्टिस एसोसिएशन
9413310150

https://hindi.careerindia.com/tips/careers-in-human-rights-and-social-justice-000126.htmlJoinHuman Rights Justice Associ...
07/08/2018

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ह्यूमन राइट्स आज सिर्फ समाज सेवा नही रह गया है, बल्कि आज ह्यूमन राइट्स ने एक करियर ऑप्शन का रूप ले लिया है। आज इस क्ष....

वो वक़्त वो लम्हे कुछ अजीब होंगे!दुनिया में हम खुश नसीब होंगे!दूर से जब इतना याद करते है आपको!क्या होगा जब आप हमारे करीब...
13/07/2018

वो वक़्त वो लम्हे कुछ अजीब होंगे!
दुनिया में हम खुश नसीब होंगे!
दूर से जब इतना याद करते है आपको!
क्या होगा जब आप हमारे करीब होंगे?

👌👌👍💙💎👬तोहफा मैं तुझे आज मेरा दिल ही देता हूँ,ये हसीन मोका गवाना नहीं चाहता हूँ,अपने दिल की बात तुम्हारे सामने बतलाता हूँ...
06/07/2018

👌👌👍💙💎👬
तोहफा मैं तुझे आज मेरा दिल ही देता हूँ,
ये हसीन मोका गवाना नहीं चाहता हूँ,
अपने दिल की बात तुम्हारे सामने बतलाता हूँ,
और चाहने वालो को शुभ कामनाये देता हूँ.
👌👌👍💙💎👬

भगवान ने अपने आखिरी पैगंबर मुहम्मद  को कई चमत्कारों और बहुत से सबूतों के साथ समर्थन दिया जो साबित हुए कि वह एक सच्चे प...
23/06/2018



भगवान ने अपने आखिरी पैगंबर मुहम्मद  को कई चमत्कारों और बहुत से सबूतों के साथ समर्थन दिया जो साबित हुए कि वह एक सच्चे पैगंबर भगवान द्वारा भेजे गए हैं। इसके अलावा, भगवान ने अपनी आखिरी प्रकट पुस्तक, पवित्र कुरान का समर्थन किया, जिसमें कई चमत्कार हुए जो साबित करते हैं कि यह कुरान भगवान का शाब्दिक शब्द है, जो उसके द्वारा प्रकट किया गया है, और यह कि किसी भी इंसान द्वारा लिखा नहीं गया था। इस अध्याय में से कुछ सबूतों पर चर्चा की गई है।

(1) वैज्ञानिक चमत्कार
पवित्र कुरान में

कुरान भगवान का शाब्दिक शब्द है, जिसे उसने अपने पैगंबर मुहम्मद Angel एंजेल गेब्रियल के माध्यम से प्रकट किया था। Muhammad यह मुहम्मद  द्वारा याद किया गया था, जिसने इसे अपने सहयोगियों को सौंपा। उन्होंने बदले में, इसे याद किया, इसे लिखा, और पैगंबर मुहम्मद  के साथ इसकी समीक्षा की। इसके अलावा, पैगंबर मुहम्मद  ने प्रत्येक वर्ष एक बार कुरान की समीक्षा एंजेल गेब्रियल के साथ की और उसके जीवन के पिछले वर्ष में दो बार की। कुरान का खुलासा होने तक, इस दिन तक, हमेशा मुसलमानों की एक बड़ी संख्या रही है जिन्होंने सभी कुरान, पत्र द्वारा पत्र याद किया है। उनमें से कुछ दस साल की उम्र तक सभी कुरान को याद रखने में भी सक्षम हैं। सदियों से कुरान का एक पत्र नहीं बदला गया है।

कुरान, जिसे चौदह सदियों पहले प्रकट किया गया था, ने हाल ही में वैज्ञानिकों द्वारा हाल ही में खोज या साबित तथ्यों का उल्लेख किया है। यह बिना किसी संदेह के साबित होता है कि कुरान भगवान के शाब्दिक शब्द होना चाहिए, जो उसके द्वारा पैगंबर मुहम्मद revealed तक प्रकट हुआ था, और कुरान मुहम्मद  या किसी अन्य इंसान द्वारा लिखित नहीं था। यह भी साबित करता है कि मुहम्मद  वास्तव में भगवान द्वारा भेजे गए एक भविष्यवक्ता हैं। यह कारण से परे है कि चौदह सौ साल पहले किसी भी व्यक्ति ने इन तथ्यों को हाल ही में उन्नत उपकरणों और परिष्कृत वैज्ञानिक तरीकों से खोजा या सिद्ध किया होगा। कुछ उदाहरणों का पालन करें

बलात्कार पर कानून (धारा 375, 376, 376क, 376ख, 376ग, 376घ भारतीय दंड संहिता) धारा 375 भारतीय दंड संहिता :-समाज में चारों ...
08/06/2018

बलात्कार पर कानून

(धारा 375, 376, 376क, 376ख, 376ग, 376घ भारतीय दंड संहिता)

धारा 375 भारतीय दंड संहिता :-

समाज में चारों ओर गुंडा-गर्दी, दहशत का माहौल है। बलात्कार व हिंसा की घटनाएँ बढ़ रही हैं। विशेषकर महिलाएँ इन घटनाओं का अधिक शिकार होती हैं। गुंडे दफ्तर में, सड़क पर यहाँ तक की मंदिर में भी छिछोरी हरकत करने से बाज नहीं आते, आए दिन बलात्कार की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। गुंडातत्व से तो जैसे-तैसे निपटा जा सकता है लेकिन वासना के पुजारी पुरुष सगे संबंधियों से कैसे निपटे बेचारी नारी। घरेलू-यौन शौषण के अधिकांश मामले लज्जावश दबा दिए जाते हैं। नारी घर की चारदिवारी में भी सुरक्षित नहीं है।

नए कानून में महिलाओं को हिम्मत मिलने की उम्मीद जताई गई है, इस कानून के अनुसार महिलाओं के साथ बलात्कार के मुकद्दमों की सुनवाई सिर्फ महिला जजों से कराने का प्रावधान है। इससे एक अच्छी, असरदार और मानवीय न्याय प्रणाली चलाने में मदद मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बलात्कार के मामलों में चिकित्सा सबूत अपर्याप्त भी हैं, तो भी महिला का ब्यान ही काफी समझा जाना चाहिए। देश में बलात्कार के लगभग 80 प्रतिशत मामलों में सबूतों के अभाव, धीमी पुलिस जाँच में अभियुक्तों को सज़ा नहीं मिल पाती है। बहुत-सी महिलाएँ ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट भी कराने से कतराती हैं। भारतीय महिलाओं में इस तरह की घटनाओं को छुपाने की प्रवृति होती है क्योंकि इससे उनका और उनके परिवार का सम्मान जुड़ा होता है।

अभी तक ऐसा होता था कि पुरुष वकील बलात्कार की शिकार किसी महिला को डराने और धमकाने में कामयाब हो जाते थे, अब महिला जज सहानुभूति वाला माहौल बनाने में मदद करेंगी।

बलात्कार की शिकार कोई महिला अदालत में जिरह के दौरान अपने वकील को अपने साथ रख सकेगी। अभी तक ऐसा कैमरे के सामने होता था जिसमें असहजता होती थी।

बलात्कार की शिकार महिला को महिला वकील देने का प्रावधान किया जा रहा है क्योंकि सिर्फ महिला ही एक महिला को सही तरह से समझ सकती है।

अगर कोई महिला चाहे तो अपनी पसंद का वकील चुन सकती है। अभी तक सिर्फ सरकारी वकील ही ऐसे मामलों में जिरह करते थे।

साथ ही ऐसे मामलों में गवाहों के ब्य़ान पुलिस के सामने देने की प्रथा भी बंद करने का प्रस्ताव किया गया है

बलात्कार पर कानून

(धारा 375, 376, 376क, 376ख, 376ग, 376घ भारतीय दंड संहिता)

धारा 375 भारतीय दंड संहिता :-

जब कोई पुरुष किसी स्त्री के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध सम्भोग करता है तो उसे बलात्कार कहते हैं। सम्भोग का अर्थ - पुरुष के लिंग का स्त्री की योनि में प्रवेश होना ही सम्भोग है। किसी भी कारण से सम्भोग क्रिया पूरी हुई हो या नहीं वह बलात्कार ही कहलायेगा। बलात्कार तब माना जाता है यदि कोई पुरुष किसी स्त्री साथ निम्नलिखित परिस्थितियों में से किसी भी परिस्थिति में मैथुन करता है वह पुरुष बलात्कार करता है, यह कहा जाता है-

-उसकी इच्छा के विरुद्ध

-उसकी सहमति के बिना

-उसकी सहमति डरा धमकाकर ली गई हो

-उसकी सहमति नकली पति बनकर ली गई हो जबकि वह उसका पति नहीं है

-उसकी सहमति तब ली गई हो जब वह दिमागी रूप से कमजोर या पागल हो

-उसकी सहमति तब ली गई हो जब वह शराब या अन्य नशीले पदार्थ के कारण होश में नहीं हो

-यदि वह 16 वर्ष से कम उम्र की है, चाहे उसकी सहमति से हो या बिना सहमति के

-15 वर्ष से कम उम्र की पत्नी के साथ पति द्वारा किया गया सम्भोग भी बलात्कार है

सवाल : आप लोगो के गाँव मे बाहर से कितनी लड़कियों को लाकर बहु बनाया गया है सभी अपने अपने गाँव के बारे में  बताय,हो सकता है...
22/03/2018

सवाल : आप लोगो के गाँव मे बाहर से कितनी लड़कियों को लाकर बहु बनाया गया है सभी अपने अपने गाँव के बारे में बताय,हो सकता है वो खरीद कर लाई गई हो

,किडनैप की गई हो,बहला फुसला कर लाई गई,गरीबी में आकर यहां पर मंदबुद्धि, जुआरी, सत्तारी को बेच दिया उनके परिवार,रिस्तेदार ने बेच दिया हो ,नॉकरी के लालच में लाई गई हो किया कभी आप लोगो ने उनसे उनका दर्द पूछा कि आसाम,हैदराबाद, बंगाल,कर्नाटक से मीलों दूरी

क सफर करके किस तरह यहाँ तक पहुँची है किया कभी वो अपने परिवार से दोबारा मिली है ,किया वो यहाँ पर सुखी है,किया उनके साथ अत्तियाचर नही किया जाता है ,किया शोषण नही किया जाता है ,किया वो बालिग है बहुत से सवाल है बस आप लोग अपने अपने गाँव के बारे में बताए कितनी कितनी ओरत बाहर की है उनका पूरा एड्रस भी लिखे
इंजी. वसीम अकरम मेव
राष्ट्रीय अध्यक्ष
ह्यूमन राइट्स जस्टिस एसोसिएशन

20/03/2018

भ्रूण का लिंग जाँचः-

भारत सरकार ने कन्या भ्रूण हत्या पर रोकथाम के उद्देश्य से प्रसव पूर्व निदान तकनीक के लिए 1994 में एक अधिनियम बनाया। इस अधिनियम के अनुसार भ्रूण हत्या व लिंग अनुपात के बढ़ते ग्राफ को कम करने के लिए कुछ नियम लागू किए हैं, जो कि निम्न अनुसार हैं:

-गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जाँच करना या करवाना।

- शब्दों या इशारों से गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग के बारे में बताना या मालूम करना।

- गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जाँच कराने का विज्ञापन देना।

- गर्भवती महिला को उसके गर्भ में पल रहे बच्चें के लिंग के बारे में जानने के लिए उकसाना गैर कानूनी है।

-कोई भी व्यक्ति रजिस्टे्रशन करवाएँ बिना प्रसव पूर्व निदान तकनीक(पी.एन.डी.टी.) अर्थात अल्ट्रासाउंड इत्यादि मशीनों का प्रयोग नहीं कर सकता।

-जाँच केंद्र के मुख्य स्थान पर यह लिखवाना अनिवार्य है कि यहाँ पर भ्रूण के लिंग (सैक्स) की जाँच नहीं की जाती, यह कानूनी अपराध है।

-कोई भी व्यक्ति अपने घर पर भ्रूण के लिंग की जाँच के लिए किसी भी तकनीक का प्रयोग नहीं करेगा व इसके साथ ही कोई व्यक्ति लिंग जाँचने के लिए मशीनों का प्रयोग नहीं करेगा।

- गर्भवती महिला को उसके परिजनों या अन्य द्वारा लिंग जाँचने के लिए प्रेरित करना आदि भू्रण हत्या को बढ़ावा देने वाली अनेक बातें इस एक्ट में शामिल की गई हैं।

-उक्त अधिनियम के तहत पहली बार पकड़े जाने पर तीन वर्ष की कैद व पचास हजार रूपये तक का जुर्माना हो सकता है।

- दूसरी बार पकड़े जाने पर पाँच वर्ष कैद व एक लाख रूपये का जुर्माना हो सकता है।

लिंग जाँच करने वाले क्लीनिक का रजिस्टे्रशन रद कर दिया जाता है।
जॉइन
ह्यूमन राइट्स जस्टिस एसोसिएशन
9413310150

18/03/2018

सभी साथी 2 ,3 मिनट्स निकाल कर जरूर पढ़ें

पंचायत राज अधिनियम 2006 के धारा

विषय वस्तु: ग्राम कचहरी में क्रिमनल मामलों का दायर किया जाना एवं ट्रायल ( पंचायत राज अधिनियम 2006 के धारा 101, 102, 103, 104, एवं 105 तथा ग्राम कचहरी संचालन नियमावली 2007 का नियम 32-40)

धारा 101 फौजदारी वाद या मामला को दायर करना और उसकी सुनवाई। ( नोट उक्त धारा के बारे में आपलोगों की प्रथम दिन ही 2 बजे अपराह्न से 4 बजे उपराह्न के बीच विस्तृत रूप से जानकारी दी गई है।

धारा 102 नोट इसके बारे प्रथम दिन जानकारी दी गई है।

धारा 103 नोट इसके बारे में प्रथम दि नही जानकारी

धारा 104 नोट इसके बारे में भी आपलोगों को प्रथम दिन 2 बजे से 4 बजे के बीच विस्तृत से व्याख्या की गयी है।

धारा 105 निर्णय का रूप-ग्राम कचहरी की किसी न्यायपीठ का निर्णय लिखित रूप में होगा और उस पर न्यायपीठ के सभी सदस्यों का हस्ताक्षर होगा। उसमें इस निमित सरकार द्वारा बनाये गये नियमों द्वारा यथाविहित विशिष्टयाँ अन्तर्विष्ट होगी:

परन्तु न्यायपीठ के किसी सदस्य द्वारा निर्णय पर हस्ताक्षर नहीं करने की विधि मनयता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

नियम: 32 अधिनियम धारा 106 के अध्याधीन दायर किया जाने वाला कई मामला सरपंच के पास लिखकर दायर किया जाएगा और जहाँ सरपंच की सेवाएँ उपलब्ध न हो वहाँ उप-सरपंच के समक्ष दायर किया जायेगा।

नियम 33 नियम 32 के अधीन अर्जी देने के समय कोई व्याक्ति ग्राम -कचहरी के सचिव के पास एक सौ रूपये की नकद फीस जमा करेगा।

नियम 34 :- यदि अर्जी लिखित रूप से दी गई हो तो यथा स्थिति सरपंच अर्जीदार की शपथ दिलाकर उसका परीक्षण अविलम्ब करेगा और शपथ लेकर निष्ठापूर्वक वह अपने बयान में कुछ कहेगा उसका सारांश-लिखित रूप में अर्जी की पीठ पर दर्ज कर दिया जायेगा जो ऐसे मुकदमें के लिए खोला जाय परन्तु दोनों में से किसी स्थिति मैं शपथ लेकर या निष्ठापूर्वक अर्जीदार ने जो ब्यान दिया हो उसे पढ़कर सुनाए जाने और समझा जाने के बाद वह उस ब्यान के नीचे अपना हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान लगा देगा।

नियम 35 :- यदि नियम 32 के अधीन अर्जीदार द्वारा शपथ लेकर या निष्ठापूर्वक किए गए ब्यान पर सरपंच की यह राय हो कि (क) उस बयान से किसी अपराध का पता नही चलता है अथवा अगर अपराध का पता भी चलता है तो ऐसे अपराध का जो ग्राम कचहरी की न्यायपीठ के क्षेत्राधिकार के बाहर हो तो ऐसी अर्जी को वह तुरंत खारिज कर देगा और अर्जीदार को अपने आदेश की सूचना तुरंत दे देगा। (ख) यदि अर्जीदार द्वारा दिये गये बयान से ऐसा अपराध का होना मालूम पड़े जो ग्राम कचहरी के न्यायपीठ द्वारा संज्ञेय (Cognizable) है तो अपराध का संज्ञान (कांग्निजेंस) लेगा और उसके बाद सबसे पहले वह मुद्दालय के नाम सम्मन जारी करेगा जिसमें यह बताया रहेगा कि उस पर किस अपराध का आरोप बनता है या लगाया गया है उस सम्मन में दर्शा गयी तारीख एवं नियत समय पर ग्राम कचहरी की न्यायपीठ के समक्ष उपस्थित रहेगा यदि उक्त नियम समय तारीख तक सम्मन तामिल न हो तो उसे फिर मानय कर दिया जायेगा।

नियम 36 :- ग्राम कचहरी नयायपीठ द्वारा विचारण किए जाने वाले सभी प्रकार के फौजीदारी मामलों में ग्राम कचहरी न्यायपीठ किसी अभियुक्त की उपस्थिति उसी विहित रीति से सुनिश्चित करायेगी जैसा कि नियम 13 में निर्धारित है।

नियम 37 :- जब मुदालय ग्राम कचहरी के समक्ष हाजिर होगा या अन्य विहित रीति से हाजिर किया जायेगा तो मुद्दालय अपने ऊपर लगाये गये अपराधों के संबंध में अपनी इच्छानुसार बयान न्यायपीठ के समक्ष देगा।

नियम 38 :- यदि धारा 102 की अपेक्षानुसार ग्राम कचहरी के न्यायपीठ दोने पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समझौता कराने में असफल हो जाय और मुद्दालय कोई बयान दिया हो तो उसे लिख लिया जायेगा। अगर मुद्दालय अपने ऊपर अपराध न्यायपीठ के द्वारा संज्ञेय है तो न्यायपीठ इस अपराध के अनुसार अपना निर्णय लिखित करेगी और न्यायपीठ के सदस्यों के बीच असहमति होने पर बहुमत का निर्णय ही मान्य होगा।

नियम 39 :-

(i) यदि पूर्वगामी नियम के अनुसार न्यायपीठ मुदालय को सजा न दे या मुदालय अपना अपराध कबूल न करे
तो न्यायपीठ मुदई की बातों की सुनवाई कर देगी और मुकदमें में जो कुछ भी साक्ष्य पेश करेगा उसे ले लेने के बाद न्यायपीठ मुदालय की सूनवाई करेगी तथा मुदालय अपनी सफाई मैं जो कुछ भी कहेगा प्रमाण पेश करेगा। उसे न्यायपीठ मुद्दालय के प्राप्त कर लेगा।
(ii) यदि न्यायपीठ ठीक समझे तो मुदई या मुदालय के आवेदन करने पर किसी गवाह का नाम इस आशय का सम्मन में बताई तारीख को ग्राम कचहरी में हाजिर हो और यदि कोई प्रमाण कागजात या और अन्य चीज हो तिो उसे न्यायपीठ के समक्ष प्रस्तुत करें।
(iii) इस तरह के आवेदन पर किसी गवाह पर सम्मन करने के पूर्व न्यायपीठ यह आपेक्षा करेगी कि प्रति सम्मन दो (2) रूपये की दर से तलवाना-शुल्क (प्रोसेस-फीस) जमा कर करवाा ले।
नियम 40 :-
(i) नियम 39 में बताये गये साक्ष्य प्राप्त करने के बाद या न्यायपीठ अपनी इच्छानुसार जो कुछ भी साक्ष्य पक्षों से लेना चाहती हो, उसे लेने के बाद और मुदालय की जाँच कर लेने के बाद न्यायपीठ अगर इस निष्कर्ष पर पहुँचती है कि मुदालय दोषी नहीं तो वह धारा 103 की रीति से अपना निर्णय लिखित करेगी।

(ii) यदि न्यायपीठ मुदालय को दोषी पाएगी तो वह उससे सिध्द दोष करार देगी और अधिनियम की धारा 107 के अध्याधीन अपराध की विधि सम्मत उसे सजा देगी, लेकिन ग्राम कचहरी की कोई पीठ, साधारण अथवा सख्त किसी कारावास की सजा नहीं देगी। उपराधी को ऐसे उपराध के लिए जुर्माना कर सकती है जिसकी की जुर्माना राशि एक हजार से अधिक नहीं होगी।

दूसरा दिन: 2 अपराह्न से 3 अपराह्न

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18/03/2018

----- राजस्थान के बहुचर्चित भंवरी देवी दुष्कर्म और हत्याकांड के बाद भरतपुर जिले का सहरुना सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड फिर सुर्खियों में,
---अश्लील वीडियो बनाकर सामूहिक दुष्कर्म और फिर हत्या के आरोपी घूम रहे खुलेआम,
--- दुष्कर्म के दवंग आरोपी उपधीक्षक कार्यालय में बैठकर खाते है अंगूर,
---- पीड़ित मृतका का पति परिजनों सहित न्याय पाने के लिए खा रहा दर दर की ठोकर,
--- पुलिस अधीक्षक सहित पुलिस महानिरीक्षक तक से लगा चुका है गुहार,
---- जिले में हुई ताबड़तोड़ ACB की कार्यवाहियों व रंगे हाथों रिश्वत लेते पकते जाने के बाबजूद भी कामां पुलिस के उपाधीक्षक नामजद आरोपियों को नही कर रहे जानबूझ कर गिरफ्तार,
एंकर--- भरतपुर जिले के कामां पुलिस सर्किल के थाना कैथवाड़ा के गांव गढ़ीझीलपट्टी में करीबन 2 माह पूर्व 18 जनवरी 18 को समय रात्रि 8 बजे जिस महिला की सामूहिक दुष्कर्म कर हत्या की गई थी और संदिग्ध परिस्थितियों में मौत बताई जा रही थी ,उसमे बेहद चौकाने वाले खुलासे सामने आ रहे है ।
मामला यह है कि खाने कमाने के लिए मृतका का पति जुबेर 4 साल पहले सऊदी अरब गया तो गांव के कुछ दबंग लोगों की निगाह गांव के सबसे गरीब परिवार की उसकी पत्नी सहरुना पर आ टिकी। जिसके चलते सहरुना की अश्लील वीडियो क्लिप बनाई गई ।जिसको लेकर सभी लोग उसे ब्लैक मेल करने लगे ।जिसके चलते जब भी मौका लगता दबंग अपनी दंबगई के चलते महिला को उठा ले जाते और उससे सामूहिक ज्यादती करते ।इसके बाद जब महिला जब ज्यादा परेशान रहने लगी तो उसने इसकी जानकारी अपने भाई को भी दी थी।इसी बीच ज्यादती के चलते परेशान होकर महिला ने पुलिस में जाने की धमकी दे दी ।इससे बौखलाये दबंगों ने अपने कुछ और साथियों को बुला लिया और महिला की सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद हत्या कर शव को मृतक महिला के घर में ही फैंक दिया ।जिसके बाद मृतका के भाई ने पुलिस में आठ जनो के विरुद्ध नामजद करते हुए हत्या और दुष्कर्म की धाराओं में मामला दर्ज करा दिया ।जिस पर थानाधिकारी योगेंद्र सिंह ने शव का पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया।मृतका के भाई मोहम्मद जुबेर खान ने गांव गढ़ीझीलपट्टी के रहने वाले मुश्ताक उर्फ हण्डल,रूक्कू, सरफराज,रज़ाक ,वर्तमान ग्राम पंचायत सरपंच इस्लाम उर्फ खड्डी, राहीन, इकबाल,अकबर व लल्लू के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म व हत्या करने का मामला दर्ज कराया था।क्योंकि मामला 376-D में दर्ज किया गया था तो उसकी जांच भी पुलिस उपाधीक्षक रेंक का अधिकारी ही करता ।पीड़ित परिवार को स्थानीय पुलिस प्रशासन से आमजन की तरह न्याय की बहुत बड़ी उम्मीद थी ।लेकिन मृतका के परिजनों को यह नही पता था कि राजस्थान में भरतपुर जिले का कामां पुलिस सर्किल भ्रष्टाचार के चलते सबसे बदनाम है।जहां दबंगों के कार्य भ्रष्टाचार के चलते पैसे से खुलेआम होते है ।गौरतलब है कि अब से कुछ दिन पूर्व भी दुष्कर्म के आरोपियों का मुकदमे से नाम निकालने की एवज में इसी सर्किल के SI वसंत सिंह व एक कांस्टेविल को एसीबी की टीम ने 1 लाख रुपये लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।मृतका की दुष्कर्म कर हत्या हुए 2 माह हो गए है परंतु पुलिस उपाधीक्षक कार्यालय में नामजद दुष्कर्म व हत्या के आरोपी चाय पीते या कुर्सियों पर बैठकर अंगूर खाते आमजन को तो नजर आ जाते है लेकिन जांच अधिकारी को आरोपी नही दिखाई दे रहे ।जिसके चलते पीड़ित पक्ष पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार टांक व रेन्ज के पुलिस महानिरीक्षक आलोक वशिष्ठ से मिल कर न्याय के लिए गुहार लगा चुके है ।उक्त मामले के चश्मदीद और मुख्य गवाह होने के बाबजूद पुलिस द्वारा आरोपियों को गिरफ्तार नही करना अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है । कुछ लोगो का भी मानना है कि मृतका के भाई ने पहले हिम्मत दिखाई होती और आरोपियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत कर दी होती तो आज यह स्थिति नही होती ।पीड़ित परिवार की ओर से समय रहते पुलिस में शिकायत नही करने से ही आरोपियों के हौंसले बुलंद हो गए और वह बार बार सामूहिक दुष्कर्म जैसे जघन्य जुर्म को अंजाम देते रहे।
लेकिन अब क्षेत्र की जनता के जहन में कई सवाल खड़े हो गए है कि ACB के हत्थे के थानेदारों के चढ़ जाने के बाबजूद भी क्या भ्रष्टाचार इतना हावी हो गया कि आरोपी जांच अधिकारी के कार्यालय में ही बैठकर अंगूर खाते रहे और पीड़ित पक्ष उसी जांच अधिकारी से न्याय की उम्मीद लगाए कार्यालय के वाहर खड़ा होकर इंतजार करता रहे ?
क्या सर्किल के भ्रष्ट अधिकारी से जिले व रेंज के बड़े साहब दुष्कर्म व हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर दर दर की ठोकर खाने को मजबूर पीड़ित व गरीब परिवार को न्याय दिला पाएंगे?
लेकिन वही कुछ समाजसेवियों का मानना है कि जब राजस्थान के बहुचर्चित भंबरी देवी हत्याकांड के आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच सकते है तो हो सकता है कि माननीय उच्च न्यायालय की दखल देने के बाद व मामले की CBI से जांच होने के बाद सहरुना दुष्कर्म व हत्याकांड के आरोपी भी एक दिन जेल अवश्य जाएंगे ।

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