31/03/2026
कल जनाब अशरफ़ मेवाती साहेब के रिटायरमेंट का दिन था; एक ऐसा दिन जिसमें फख़्र और ख़ामोश उदासी, दोनों शामिल थीं।
करीब साढ़े तीन दशकों तक उन्होंने तालीम के इस पाक और मुक़द्दस मिशन को अपनी ज़िंदगी का मक़सद बनाया। उन्होंने न सिर्फ़ इल्म दिया, बल्कि अपने छात्रों का किरदार बनाया, उनमें कॉन्फिडेंस पैदा किया और बेइंतहा बच्चों के लिए राह रोशन की, जो उनकी सीख को ता-उम्र साथ लेकर चलेंगे।
ऐसा नहीं कि उनकी ख़िदमत सिर्फ़ क्लासरूम या नौकरी तक महदूद रही हो, बल्कि हक़ीक़त तो यह है कि उनकी ज़िंदगी सच्चाई और लगन की एक मिसाल है।
हालाँकि मुझे कभी उनके अंडर पढ़ने का मौक़ा तो नसीब नहीं हुआ, लेकिन फिर भी मैं अपने आपको ख़ुशनसीब समझता हूँ कि मुझे उनकी ज़िंदगी के तजुर्बों से बहुत कुछ सीखने को मिला। मेरे लिए वह हमेशा एक टीचर से बढ़कर रहे हैं; एक मेंटर, एक खैरख़्वाह, जो हमेशा साथ खड़े रहते हैं; और एक दोस्त जो मोहब्बत से सुख-दुःख सुनते हैं।
पिछले चार-पाँच सालों में उनसे मेरी जो मुलाक़ातें और बातचीत होती रही हैं, वह मेरे लिए बहुत क़ीमती और सीख देने वाली रही हैं। चाहे बात खेलों की हो, तालीम की हो या समाजी मसलों की; वह हमेशा अपने उसूलों पर क़ायम, अपनी सोच में वाज़ेह और अपने अमल में मिसाल नज़र आए। उनसे होने वाली हर बातचीत अपने पीछे कोई न कोई सीख छोड़ जाती थी, जो अक्सर बिना कहे ही दिल में उतर जाती थी।
जनाब अशरफ़ मेवाती साहेब को अल्लाह त'आला ने एक असरदार और खूबसूरत अंदाज़ में तक़रीर करने की ख़ास क़ाबिलियत अता की है। उनकी शायरी और उनकी स्पीच लोगों का सिर्फ़ ध्यान ही नहीं खींचती, बल्कि दिलों को भी जोड़ती है। अनगिनत सरकारी प्रोग्रामों और तक़रीबों में, चाहे स्टेज संभालना हो या माइक... उनकी मौजूदगी सिर्फ़ अहम नहीं, बल्कि पूरी महफ़िल की जान हुआ करती थी।
आज जब अशरफ़ साहेब ज़िंदगी के एक नए मरहले में क़दम रख रहे हैं, तो हमें एहसास होता है कि रिटायरमेंट सिर्फ़ एक रस्मी बात है; क्योंकि ऐसे लोग असल में कभी रिटायर ही नहीं होते। मुझे यक़ीन है कि उनकी विरासत उन छात्रों की ज़िंदगी में हमेशा ज़िंदा रहेगी, जिन्हें उन्होंने पढ़ाया है और जिनमें उन्होंने क़ीमती उसूल और क़दरें पैदा की हैं।
अल्लाह त'आला हाजी अशरफ साहेब को लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुकून भरी ज़िंदगी अता फरमाए। उनकी हिकमत और तजुर्बा हमें आगे भी राह दिखाता रहे, और उनकी विरासत आने वाली नस्लों को हमेशा प्रेरित करती रहे, आमीन। 🤲
शुक्रिया।
डॉ. मोहम्मद रफ़ीक़