29/09/2025
ख़ाकज़ादा हूँ मगर अर्श-ए-बरीं चाहता हूँ.
सजदा करने के लिए उसकी ज़मीं चाहता हूँ.
मेरे पीछे भी मेरी लोग बुराई न करें,
इतना अच्छा तो मैं होना भी नहीं चाहता हूँ.
~सलमान ज़फ़र