18/08/2026
पिता की मौत भी नहीं तोड़ सकी नाराजगी, करोड़पति की अंतिम यात्रा में बेटे नही हुए शामिल
इटावा में इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है।
सैफई मेडिकल कॉलेज में 70 वर्षीय कारोबारी राजकुमार सक्सेना की करीब एक महीने तक इलाज चलने के बाद मौत हो गई। बताया जा रहा है कि राजकुमार सक्सेना मूल रूप से गाजियाबाद के रहने वाले थे और कभी करोड़ों की संपत्ति के मालिक रहे थे।
सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि उनकी मौत की खबर मिलने के बाद भी अंतिम संस्कार के लिए पत्नी, बेटा और बेटी सामने नहीं आए। परिवार की ओर से बताया गया कि राजकुमार सक्सेना से वर्षों पहले ही रिश्ते खत्म हो चुके थे। उनकी पत्नी ने कथित तौर पर करीब 20 साल पहले संबंध समाप्त होने की बात कही।
राजकुमार की मौत के बाद जब उनके गाजियाबाद स्थित घर पर टीम पहुंची तो वहां ताला लगा मिला। इस बीच अस्पताल की मोर्चरी में उनका शव करीब 72 घंटे तक रखा रहा। इंतजार इस बात का था कि शायद कोई अपना अंतिम विदाई देने पहुंच जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
बताया गया कि जिंदगी के एक दौर में करोड़ों की संपत्ति रखने वाले राजकुमार सक्सेना के अंतिम दिन आर्थिक तंगी और अकेलेपन के बीच बीते। वह वृद्धाश्रम में रह रहे थे और इलाज के दौरान भी उनके साथ परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था।
आखिरकार जब परिवार की ओर से कोई अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचा, तो पुलिस और रक्तदाता समूह से जुड़े लोगों ने जिम्मेदारी उठाई। एक स्थानीय NGO और सहयोगियों की मदद से राजकुमार सक्सेना का अंतिम संस्कार कराया गया।
यह घटना सिर्फ एक बुजुर्ग की मौत की कहानी नहीं है, बल्कि रिश्तों और बदलते सामाजिक सरोकारों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद अगर जीवन के अंतिम पड़ाव पर इंसान अकेला रह जाए, तो यह समाज के लिए सोचने का विषय है।
राजकुमार सक्सेना को अंतिम विदाई भले ही उनके अपनों ने न दी हो, लेकिन अनजान लोगों ने इंसानियत का फर्ज निभाया। अब यह मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर दौलत से भरी जिंदगी के बाद भी एक इंसान को अंतिम समय में अपनों का साथ क्यों नहीं मिल सका।