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निराशावादी उसे कहते हैं, जिसे लगता है कि हर कोई उतना ही बुरा है जितना वह स्वयं है, और इसी कारण वह सबसे घृणा करता है। • ज...
21/05/2026

निराशावादी उसे कहते हैं, जिसे लगता है कि हर कोई उतना ही बुरा है जितना वह स्वयं है, और इसी कारण वह सबसे घृणा करता है।

• जॉर्ज बर्नार्ड शॉ
(अनुवाद : मनोज चौधरी)

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एक दिन उसने धीरे से अपना नाम पुकारा और उसे लगा कि बहुत देर बाद, जब वह लगभग भूल चुका था कि उसने कुछ कहा भी था, नीचे से वह...
20/05/2026

एक दिन उसने धीरे से अपना नाम पुकारा और उसे लगा कि बहुत देर बाद, जब वह लगभग भूल चुका था कि उसने कुछ कहा भी था, नीचे से वही नाम लौटा, पर वह वैसा नहीं था, उसमें थकान थी, जैसे किसी ने उसे बहुत दूर से उठाकर भेजा हो। स्वल्प-वासी घबरा गया, फिर भी…

• पीयूष दईया

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20/05/2026

निराला, महादेवी और बच्चन के बारे मे सुमित्रानंदन पंत…

हिंदी के वृहत पाठक-वर्ग के लिए ‘दिनमान’ नया नाम नहीं है। ‘दिनमान’ सत्तर के दशक की एक महत्त्वपूर्ण साप्ताहिक पत्रिका थी। ...
20/05/2026

हिंदी के वृहत पाठक-वर्ग के लिए ‘दिनमान’ नया नाम नहीं है। ‘दिनमान’ सत्तर के दशक की एक महत्त्वपूर्ण साप्ताहिक पत्रिका थी। इसके संपादक अज्ञेय और रघुवीर सहाय सरीखे कवि-लेखक रहे। ‘हिन्दवी’ इस शीर्षक को यहाँ साभार ग्रहण करते हुए आज से अपना दैनिक सोशल-मीडिया-स्तंभ शुरू कर रहा है। इसके तहत हम प्रतिदिन उन व्यक्तित्वों और विचारों को याद करेंगे जिनसे उस दिन-विशेष के मान-मूल्य में वृद्धि होती है।

प्रस्तुत है—दिनमान : 20 मई

उद्धरण अनुवाद : रचित
कविता अनुवाद : तोमोको किकुची

जब तक तुममें किनारों को छोड़ देने का साहस नहीं होगा, तब तक तुम समुद्र पार नहीं कर सकते।• क्रिस्टोफ़र कोलंबस(अनुवाद : रुक...
20/05/2026

जब तक तुममें किनारों को छोड़ देने का साहस नहीं होगा, तब तक तुम समुद्र पार नहीं कर सकते।

• क्रिस्टोफ़र कोलंबस
(अनुवाद : रुकैया)

बिहारी
20/05/2026

बिहारी

19/05/2026

“कुटज पर नज़र पड़ते ही उन्हें अपना जीवन याद आया। कहाँ मैं रवींद्रनाथ…”

#हज़ारीप्रसाद_द्विवेदी

बात करने की उनकी शैली भी अतिविशिष्ट थी। छात्राओं से बात करने में तो, वह बिल्कुल ही तकल्लुफ़ भूल जाते थे। बड़े प्रेम से स...
19/05/2026

बात करने की उनकी शैली भी अतिविशिष्ट थी। छात्राओं से बात करने में तो, वह बिल्कुल ही तकल्लुफ़ भूल जाते थे। बड़े प्रेम से सभी को मित्रवत ‘ऐ लड़की!’ जैसे संबोधन से विभूषित करते रहते। कृष्णा सोबती का उपन्यास ‘ऐ लड़की’ शायद उन्हें बहुत प्रिय रहा होगा। उनके द्वारा ऐसे संबोधन भी, हमें उनकी श्रेष्ठता तथा अपनी तुच्छता का बोध कराते थे। अब सम्मान प्राप्त करने के लिए, हमने उनके जितनी मशक़्क़त तो की नहीं थी न।

• ईशा झा

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वह एक साधारण बुधवार हो सकता था, अगर वह 29 अप्रैल 2020 का बुधवार न होता।..‘The Last Tenant’ फ़िल्म भी इसी दिन यूट्यूब पर ...
19/05/2026

वह एक साधारण बुधवार हो सकता था, अगर वह 29 अप्रैल 2020 का बुधवार न होता।
..‘The Last Tenant’ फ़िल्म भी इसी दिन यूट्यूब पर हम सबके सामने आई। इरफ़ान की बरसी पर उनके चाहने वालों को उन्हें याद करने का एक और कारण मिला। यह तोहफ़ा फ़िल्म निर्माता सार्थक दासगुप्ता की तरफ़ से आया है। फ़िल्म से ज़्यादा इंटरेस्टिंग, उसके इतने लंबे समय बाद रिलीज़ होने की कहानी है जो आपके मन में आ रहे सवालों का जवाब देगी।

• शशांक मिश्र

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जन्मदिन मैं किताबों और दोस्तों पर ख़र्च करता हूँ। ईंट-पत्थरों के लिए मेरे पास कुछ नहीं है।• रस्किन बॉण्ड (अनुवाद : नीलम)...
19/05/2026

जन्मदिन

मैं किताबों और दोस्तों पर ख़र्च करता हूँ। ईंट-पत्थरों के लिए मेरे पास कुछ नहीं है।

• रस्किन बॉण्ड
(अनुवाद : नीलम)

कबीर
19/05/2026

कबीर

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