10/06/2026
जहानाबाद के निसरपुरा गांव में जो हुआ, वह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि बिहार की कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। 23 मई 2026 को सुभाष कुमार दांगी की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी जाती है। परिवार नामजद FIR दर्ज कराता है, न्याय की गुहार लगाता है, लेकिन आरोप है कि अधिकांश आरोपी खुलेआम घूमते रहते हैं। पीड़ित परिवार लगातार धमकियों की बात कहता है, मुकदमा वापस लेने का दबाव बताया जाता है, फिर भी सुरक्षा नहीं मिलती। आखिर क्यों?
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इतने गंभीर मामले में आज तक कोई कठोर और निर्णायक कार्रवाई दिखाई नहीं देती। यदि प्रशासन समय रहते सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लेता, यदि पीड़ित परिवार की शिकायतों और सुरक्षा संबंधी मांगों को गंभीरता से लिया जाता, तो क्या दूसरी घटना होती? क्या मुन्ना कुमार दांगी की जान बचाई जा सकती थी?
सुभाष कुमार दांगी की हत्या के बाद न्याय की लड़ाई लड़ रहे उनके चाचा मुन्ना कुमार दांगी को भी गोलियों से भून दिया जाता है और इलाज के दौरान उनकी मौत हो जाती है। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि कानून के राज को खुली चुनौती है। एक ही परिवार के दो लोगों की जान चली गई, लेकिन अब तक अपराधियों के खिलाफ वैसी कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई जिसकी जनता अपेक्षा कर रही है?
मुख्यमंत्री, गृह विभाग और जिला प्रशासन को जवाब देना चाहिए कि आखिर एक परिवार को बार-बार निशाना बनाए जाने के बावजूद सुरक्षा क्यों नहीं दी गई? अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो गए कि पहले हत्या की, फिर धमकियां दीं और उसके बाद एक और जान ले ली? यदि न्याय मांगने वालों की सुरक्षा नहीं हो सकती, तो आम नागरिक किस पर भरोसा करे?
आज जहानाबाद ही नहीं, पूरा बिहार पूछ रहा है क्या अपराधियों में कानून का कोई डर बचा है? क्या पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए दो-दो जानें जाना जरूरी था? और सबसे बड़ा सवाल, दोहरी हत्या के बाद भी अब तक कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सरकार को जवाब देना होगा। सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच, स्पीडी ट्रायल, पीड़ित परिवार को सुरक्षा, उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी सुनिश्चित की जानी चाहिए। न्याय केवल आश्वासन से नहीं, कार्रवाई से मिलता है।
जहानाबाद न्याय मांग रहा है। बिहार जवाब मांग रहा है।
Samrat Choudhary Bihar Police