Save The Nation

Save The Nation Save The Nation is a community of Indians (Bhartiya, Hindustani's) who are committed for the pride of this great nation. What you have done if you realize this?

Save The Nation page invites all Indians to join and strengthen our struggle against Non-Governance, Mismanagement & Corruption which is crime against our Democratic System. We sought answers to very simple questions from all Political parties, people running the Govt at Center or State level & people sitting at opposition benches:
1) When will you realize the plight of this Nation?
2) If

you are already aware of what corrective action you have taken?
3) When will you learn the art of management & governance? Governance does not mean enjoying the power.
4) You are there to serve the people, do you realize this?

सोनम वांगचुक की भूख-हड़ताल सोनम वांगचुक द्वारा 28 जून को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने के बाद आंदोलन को व्यापक समर्थ...
24/07/2026

सोनम वांगचुक की भूख-हड़ताल

सोनम वांगचुक द्वारा 28 जून को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने के बाद आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलना शुरू हुआ। यह समर्थन एक दिन में नहीं बल्कि दिन-प्रतिदिन क्रमशः मिला। अगले तीन हफ्तों में वामपंथी छात्र संगठन, विपक्ष के नेता और भाजपा-विरोधी अधिवक्ता और फिल्म जगत से जुड़ीं हस्तियाँ इस आंदोलन में शामिल हुए और सोशल मीडिया पर समर्थन करने लगे।
इस बीच वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य की भावनात्मक वीडियो वारयल की गयी। इसी दौरान संसद के सत्र से एक दिन पहले - 20 जुलाई को “संसद मार्च” का आह्वान किया गया। इसके लिए एक व्यवस्थित तरीके से सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया गया।
सोनम वांगचुक की पृष्ठभूमि
1988 में छात्रों के एक समूह के साथ मिलकर 'स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख' (SECMOL) की स्थापना की। उन्हें 2018 में रैमन मैगसेसे पुरस्कार (Ramon Magsaysay Award) से सम्मानित किया गया था।
एक जनसभा को संबोधित करते हुए उनके द्वारा भगवान राम और माता सीता को लेकर दिए गए एक आपत्तिजनक बयान पर भारी विवाद हुआ था। भारत के गृह मंत्रालय ने विदेशी योगदान नियमन अधिनियम (FCRA) के नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए उनकी संस्था SECMOL का विदेशी फंड लेने का लाइसेंस रद्द कर दिया था।
विरोध-प्रदर्शन को अर्बन नक्सलियों और अलगाववादियों का समर्थन
वामपंथी छात्र संगठनों – AISA, SFI और AISF ने आंदोलन में पूरी ताकत से अपमी मौजूदगी बनाये रखी। CPI के नेताओं जैसे डी. राजा और दिनेश सी. वार्ष्णेय ने भी इस आन्दोलन को अपना समर्थन दिया।
आन्दोलन को गैर-राजनैतिक लेकिन अर्बन नक्सल से जुड़े कई एक्टिविस्ट जैसे अरुंधति रॉय, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, जयंती घोष, निवेदिता मेनन, तनिका सरकार और संजय काक का व्यापक समर्थन मिला।
सैयद कासिम रसूल इलियास का भी इस आन्दोलन को समर्थन मिला। वे उमर खालिद (Umar Khalid) के पिता है जोकि वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया (Welfare Party of India) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य, पूर्व में वे प्रतिबंधित संगठन 'स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया' (SIMI) से जुड़े रहे।
विपक्षी दलों का समर्थन
● 14 जुलाई - उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और महुआ मोइत्रा ने आंदोलन का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया। अरविंद केजरीवाल ने घोषणा कर कहा कि विरोध स्थल का दौरा करेंगे। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। अभिनेता ओमी वैद्य और ज़ीनत अमान ने इस मुद्दे का समर्थन किया।
● 15 जुलाई - सपा सांसद प्रिया सरोज, कांग्रेस सांसद प्रशांत पडोले और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने विरोध प्रदर्शन का दौरा किया। स्वरा भास्कर और कुणाल कामरा जंतर-मंतर पर शामिल हुए। शबाना आजमी, सोनी राजदान और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी अपने बयान जारी किये।
● 16 जुलाई - CJP ने एक दिवसीय एकजुटता उपवास का आयोजन किया। अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और डिंपल यादव इसमें शामिल हुए। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह, ज्यां द्रेज और रीतिका खेरा, शिक्षक आशु घई और 100 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व सांसद पंडित राम किशन ने धरना स्थल का दौरा किया।
● 17 जुलाई: पवन खेड़ा और अन्य कांग्रेस प्रतिनिधियों ने विरोध प्रदर्शन का दौरा किया। आमिर खान और किरण राव ने चिंता व्यक्त की। CJP ने अपनी वेबसाइट, मिस्ड कॉल और सोशल मीडिया के माध्यम से “चलो संसद” अभियान तेज कर दिया।
हिन्दू और देश-विरोधी पारिस्थितिकी तंत्र
इस विरोध-प्रदर्शन में हिन्दू और देश-विरोधी पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी पूरी ताकत के साथ मौजूदगी दिखाई। इसके प्रमुख नाम इस प्रकार है :
● रघु राम - विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए। महिलाओं के बारे में की गई टिप्पणियों की वजह से रघु राम काफी विवादों में घिर गए थे। उन्होंने कहा था कि पुरुषों की शारीरिक और मानसिक बीमारियों की मुख्य वजह महिलाएं ही हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि पुरुष महिलाओं के सामने अपने मन की बात कहने के बजाय हार्ट अटैक झेलना ज़्यादा पसंद करेंगे।
● कुणाल कामरा - सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा “सीता के पति का नाम लेकर नीता के पति का काम करने” जैसी अशोभनीय टिप्पणी कर हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाया।
● अरुंधति रॉय - विरोध-प्रदर्शन में भागीदारी ने अरुंधति के देश-विरोधी रुख और अन्य विवादों की ओर लोगों का ध्यान फिर से खींचा। जम्मू और कश्मीर पर 2010 में दिए गए उनके उस भाषण, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह इलाका कभी भी भारत का अभिन्न अंग नहीं रहा है। इस भाषण के बाद, अलगाववाद को बढ़ावा देने के आरोपों के तहत दिल्ली के उप-राज्यपाल ने उन पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत मुकदमा चलाने की मंज़ूरी दे दी थी।
● प्रो. नंदिता नारायण - उन्होंने पाकिस्तानी कवि फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की उर्दू नज़्म हम देखेंगे की पंक्तियाँ पढ़ीं, विशेष रूप से विवादित पंक्ति "बस नाम रहेगा अल्लाह का"।
● प्रो. आभा देव हबीब - इसने विवादित भाषण दिया था। जिसमे ये बोला गया कि “भारत माता है तो पिता कौन है”।
● संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) - सीजेपी के साथ संयुक्त विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ और न्यूज़क्लिक (NewsClick) एफआईआर से जोड़े जाने का विरोध करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन की घोषणा की।
वांगचुक अस्पताल में भर्ती और व्यापक राजनीतिक समर्थन
उपवास के 21वें दिन चिकित्सीय सलाह और दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद माकपा (CPI-M) नेता बृंदा करात, सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज, योगेंद्र यादव और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। अन्ना हजारे ने तत्काल बातचीत की अपील की।
राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, के.सी. वेणुगोपाल, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल, शरद पवार, उद्धव ठाकरे और चंद्रशेखर आजाद ने वांगचुक को हटाए जाने की निंदा की।
वास्तविकता यह भी थी कि सोनम वांगचुक भूख हड़ताल से धीरे-धीरे तंग आ चुके थे और वहां से सम्मानजनक रूप से बच निकलने का रास्ता तलाश रहे थे। इसी बीच अचानक एक 'टूलकिट' सक्रिय हुई जिसके माध्यम से देश-विदेश के कई बड़े लोग उनके समर्थन में बयानबाजी करने लगे और याचिका के माध्यम से अदालत का हस्तक्षेप भी करवाया गया। पुलिस ने वांगचुक को अस्पताल में इसलिए भर्ती करवाया क्योंकि यदि वहां उनकी मृत्यु हो जाती, तो स्थिति और भी गंभीर तथा अनियंत्रित हो सकती थी।

आंदोलन का राजनीतिकरण, सरकार का पक्ष और निष्कर्षदिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन जो मूल रूप से NEET-UG 202...
24/07/2026

आंदोलन का राजनीतिकरण, सरकार का पक्ष और निष्कर्ष

दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन जो मूल रूप से NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई अनियमितताओं के खिलाफ जवाबदेही मांगने के लिए शुरू हुआ था, समय के साथ अपने मुख्य उद्देश्य से भटक गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसे नए मंचों और विभिन्न वामपंथी व विपक्षी दलों के प्रवेश ने छात्रों के जायज़ आक्रोश को एक राजनीतिक और सरकार विरोधी एजेंडे में बदल दिया। आंदोलन के दौरान अरुंधति रॉय, कुणाल कामरा और उमर खालिद के समर्थकों जैसी विवादित हस्तियों को मंच मिलना, इस बात का प्रमाण है कि इस धरने को अर्बन नक्सलियों और देश-विरोधी पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा हाईजैक कर लिया गया था। 20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च के दौरान पुलिस बैरिकेड्स तोड़ना और हिंसक झड़पें यह साबित करती हैं कि भीड़ का नेतृत्व छात्रों के हाथ से निकलकर अराजक तत्वों के नियंत्रण में आ गया था।
सरकार का रुख:
यद्यपि परीक्षा में पेपर लीक एक प्रशासनिक चूक थी, लेकिन सरकार ने मामले की गंभीरता को समझते हुए CBI जांच के आदेश दिए और मुख्य आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारियां कीं। यदि पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल को देखा जाए, तो सरकार ने AIIMS सहित कई नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण किया है, मेडिकल सीटों में भारी वृद्धि की है, जो पिछले 50 वर्षों के किसी भी प्रयास से कहीं अधिक है। सरकार स्टार्ट-अप, स्कॉलरशिप और विभिन्न समिट्स के माध्यम से युवाओं की प्रतिभा को लगातार समर्थन दे रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार कभी भी छात्रों के विरुद्ध नहीं रही है।
हालांकि, इस पूरे प्रकरण में यह जरूर महसूस किया गया कि प्रधानमंत्री मोदी जी को इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया बहुत पहले देनी चाहिए थी, जिसमें उन्होंने काफी देरी कर दी।

आगे की राह:
निष्कर्षतः भारत के युवाओं और छात्रों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के साथ-साथ यह भी विवेकपूर्ण तरीके से समझना होगा कि कुछ लोग अड़ोस-पड़ोस के देशों की तरह युवाओं और छात्रों को भड़काकर सत्ता प्राप्त करने का षड्यंत्र रच रहे हैं। भविष्य में इस प्रकार के आंदोलनों से बचने के लिए परीक्षा प्रणाली में अभूतपूर्व पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि भावी पीढ़ी के भविष्य (misuse न हो) और देश की आंतरिक सुरक्षा दोनों

24/07/2026

'चलो संसद' मार्च - 20 जुलाई

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के “चलो संसद” अभियान ने आंदोलन को अबतक के सबसे बड़े पैमाने पर पहुंचा दिया। पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने के बावजूद हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर एकत्र हुए और संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया।
इसके परिणामस्वरूप सुरक्षा बलों के साथ कई झड़पें हुईं; प्रदर्शनकारियों को उच्च-सुरक्षा वाले संसद क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने बैरिकेड्स, आंसू गैस और लाठीचार्ज का प्रयोग किया। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना था कि संसद के मानसून सत्र के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये उपाय आवश्यक थे।
इसी दौरान, केंद्र सरकार ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और CJP प्रतिनिधियों के बीच बैठक की। मगर अब यह आंदोलन राजनीतिक रूप से भी अपना विस्तार ले चुका था। बिशेष रूप से विपक्षी दलों ने इस संसद मार्च को अपना समर्थन दिया।
प्रमुख मुख्य बिंदु (Major Highlights)
● दिल्ली पुलिस के अनुसार CJP के “चलो संसद” मार्च के लिए जंतर-मंतर पर लगभग 8,000 प्रदर्शनकारी एकत्र हुए।
● सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो इस मार्च में शामिल हुईं।
● जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया, पुलिस ने व्यापक बैरिकेडिंग करके मार्च को रोक दिया। प्रदर्शनकारी बेकाबू होकर हिंसक माध्यमों से बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने लगे। अतः दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुई।
● शाम तक दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास की सड़कों को खाली करा लिया। हालांकि सीजेपी नेताओं ने केरल हाउस के पास अपना प्रदर्शन जारी रखा।
● अहमदाबाद, सूरत, भावनगर, जूनागढ़ और लखनऊ सहित कई शहरों में भी प्रदर्शन आयोजित किए गए। जहां पुलिस ने बिना अनुमति के प्रदर्शन करने का प्रयास कर रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
● इस आंदोलन को कई राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों का समर्थन मिला। जिनमें कांग्रेस, आप (AAP), समाजवादी पार्टी, टीएमसी (TMC), द्रमुक (DMK), राजद (RJD), शिवसेना (यूबीटी), सांसद चंद्रशेखर आजाद, अभिनेता शबाना आजमी और प्रकाश राज सहित अन्य शामिल थे।
संसद भवन की तरफ छात्रों का कूच करना एक बेहद संवेदनशील विषय था, क्योंकि पूर्व में संसद पर आतंकी हमले हो चुके हैं और हाल ही में लाल किले के पास भी ब्लास्ट की घटना हुई थी। इस भीड़ में बड़ी संख्या में ऐसे अराजक तत्व घुस गए थे जो वीडियो में कहीं से भी छात्र नहीं लग रहे थे।
पुलिस लगातार उन्हें रोकने का प्रयास कर रही थी, परंतु इस उग्र भीड़ ने पहले वहां मौजूद मीडिया कर्मियों पर हमला किया और उसके बाद पुलिस को निशाना बनाया। इसके परिणामस्वरूप पुलिस को विवश होकर लाठीचार्ज करना पड़ा। इस लाठीचार्ज का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि इसमें कई निर्दोष छात्र पिट गए, जबकि उन्हें भड़काने वाले CJP के कर्ताधर्ता एक ट्रक के अंदर सुरक्षित बैठकर पूरा तमाशा देखते रहे।

अभिजित की शुरुआती जमीनी लामबंदीइस पूरी प्रक्रिया के बाद दीपके ने ऑनलाइन वीडियो बनाकर ऐलान किया कि वह केंद्रीय शिक्षा मंत...
24/07/2026

अभिजित की शुरुआती जमीनी लामबंदी
इस पूरी प्रक्रिया के बाद दीपके ने ऑनलाइन वीडियो बनाकर ऐलान किया कि वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने भारत आयेंगे। साथ ही उसने लोगों को उकसाया कि सरकार उसे जान से मरवा सकती है इसलिए सबलोग एयरपोर्ट पर आये और वही से सभी जंतर मंतर पर एकसाथ चलें। परन्तु सब उसके उल्टा निकला और एयरपोर्ट पर कोई नहीं पहुंचा।
अमेरिका से अभिजीत दीपके भारत आया और 6 जून को जंतर-मंतर पर एक विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व किया। पुणे, लखनऊ, अमृतसर, हैदराबाद, बेंगलुरु और जयपुर में उसने विरोध-प्रदर्शन किये।
प्रमुख मांगों में NEET-UG, CUET, CBSE और SSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही मांगी गयी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
इस दौरान दीपके को सोनम वांगचुक और भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य का समर्थन मिला। वामपंथी छात्र संगठन आइसा (AISA) और एसएफआई (SFI) भी उपस्थित रहे। जबकि आप नेता सौरभ भारद्वाज, शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी और टीएमसी (TMC) सांसद सागरिका घोष ने प्रदर्शनकारी युवाओं को अपना समर्थन दिया।
भारत के विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शन
● पुणे (11 जून): सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन। सोनम वांगचुक कार्यक्रम में शामिल हुए। उद्धव ठाकरे ने ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपना समर्थन दिया।
● लखनऊ (12 जून): दीपके इको गार्डन में चल रहे भर्ती परीक्षा विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ। एडटेक शिक्षक और एग्जामपुर के संस्थापक विवेक कुमार इस विरोध प्रदर्शन में मौजूद रहे।
● अमृतसर, हैदराबाद और बेंगलुरु (13-14 जून): परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखा। सोनम वांगचुक हैदराबाद और बेंगलुरु के कार्यक्रमों में शामिल हुए, जबकि अभिनेता प्रकाश राज ने बेंगलुरु में भाग लिया।
● जयपुर (15 जून): शहीद स्मारक पर विरोध प्रदर्शन हुआ।
दिल्ली में स्थाई विरोध प्रदर्शन
20 जून 2026 से अभिजीत दीपके की अगुवाई में CJP ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। इस प्रदर्शन में तीन प्रमुख मांगें रखी गयी : (1) शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। (2) परीक्षा घोटालों की न्यायिक जांच। और (3) परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार।
वामपंथियों से गठबंधन
दीपके ने पहले से ही विभिन्न वामपंथी संगठनो जैसे AISA (CPIML), SFI (CPIM), AISF (CPIM) तथा अन्य रैडिकल छात्र संगठनों से समर्थन के लिए बात कर ली थी। इस प्रकार दीपके को आन्दोलन के लिए भीड़ मिल गई तथा आन्दोलनजीवी वामपंथियों को एक नया प्लेटफॉर्म मिल गया।
यह स्पष्ट है कि CJI की एक सामान्य टिप्पणी को राजनीतिक षड्यंत्र के तहत सरकार के विरुद्ध मोड़ दिया गया था। जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर शुरू हुआ आंदोलन पहले ही दिन विफल हो गया था, लेकिन इसके बाद तमाम देश-विरोधी ताकतों ने इसे पुनर्जीवित कर दिया।
धरना स्थल पर धीरे-धीरे खालिस्तानी समर्थकों ने मुफ्त में खाना बांटना शुरू कर दिया। वहां JNU की 'टुकड़े-टुकड़े गैंग', उमर खालिद के समर्थक, CAA-NRC और धारा 370 के विरोधी तथा भगवान राम के विरोधियों को मंच उपलब्ध करवाया गया, जो छात्रों के कंधों पर बंदूक रखकर अपना एजेंडा चला रहे थे।
यह सब देखकर जो सच्चे छात्र अपने वास्तविक मुद्दों के लिए वहां आए थे, उन्हें सच्चाई समझ आने लगी और वे वहां से पीछे हटने लगे। अंततः वह स्थान बहुत से अराजक लोगों के लिए मुफ्त का भोजन और सुविधाएं भोगने तथा एन्जॉय करने का अड्डा मात्र बन कर रह गया।

कॉकरोच जनता पार्टी का उदय15 मई 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश ( ) सूर्यकांत और न्यायाधीश जोयमाल्या बागची की पीठ ने एक व...
24/07/2026

कॉकरोच जनता पार्टी का उदय

15 मई 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश ( ) सूर्यकांत और न्यायाधीश जोयमाल्या बागची की पीठ ने एक वकील द्वारा “वरिष्ठ अधिवक्ता” (सीनियर एडवोकेट) का दर्जा पाने के लिए तीसरी बार दायर की गई एक “निराधार” याचिका को खारिज कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा एक अर्जित सम्मान है, न कि कोई स्टेटस सिंबल जिसे कानूनी रूप से हासिल करने की कोशिश की जाए। दिल्ली के स्थानीय न्यायालयों, जैसे तीस हजारी में “फर्जी वकीलों” को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) पर मिलीभगत का आरोप लगाया और कहा कि वह स्थानीय अदालतों में कानून की डिग्रियों की प्रामाणिकता की जांच के लिए सीबीआई ( ) जांच पर विचार कर रहे हैं।
इस आलोचना के दौरान, मुख्य न्यायाधीश ने कुछ “विवादित” शब्दों इस्तेमाल किया। उन्होंने न्यायपालिका पर हमला करने वाले कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” (तिलचट्टों) और “परजीवियों” से की। जो केवल सिस्टम को निशाना बनाने के लिए मीडिया, सोशल मीडिया या आरटीआई ( ) सक्रियता का सहारा लेते हैं।
यह टिप्पणियां तुरंत एक्स (X), इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल गईं। जिससे छात्रों, नौकरी के उम्मीदवारों और युवा पेशेवरों के बीच व्यापक बहस छिड़ गई।
24 घंटे के भीतर, बोस्टन यूनिवर्सिटी से जनसंपर्क (पब्लिक रिलेशंस) में स्नातक अभिजीत दीपके ने X पर “कॉकरोच जनता पार्टी ( )” के गठन की घोषणा कर दी। इसके पीछे तर्क जैसा कुछ नहीं दिया गया था। अभिजीत दीपके, आम आदमी पार्टी ( ) के पूर्व सोशल मीडिया कार्यकर्ता थे। और उन्होंने यह “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम से एक व्यंग्यात्मक (मीम) अकाउंट बनाया था।
16 मई 2026 को CJP ने औपचारिक रूप से अपना डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च की। CJP की सबसे बड़ी विशेषता उसका तेज़ digital expansion था। इसके गठन के पहले 48 घंटों में ही इसे 40,000 followers मिल गए थे। दो दिनों के भीतर जुड़ने वालों की संख्या 80,000 से अधिक हो गई और पहले सप्ताह में यह एक लाख के पार पहुँच गई। अब इसकी मौजूदगी X, Instagram, YouTube, Telegram और Facebook पर हो चुकी थी।
इस सोशल मीडिया पेज का आधिकारिक उद्देश्य – “आलसी और बेरोजगारों की आवाज (Voice of the Lazy & Unemployed)” था।

शुरूआती दिनों की गतिविधियाँ
16 मई ● एक्स (X) पर “कॉकरोच जनता पार्टी” हैंडल और एक पंजीकरण पोर्टल (cockroachjantaparty.org) लॉन्च किया।● पंजीकरण के लिए वेबसाइट और गूगल फॉर्म लाइव हुए; कुछ ही घंटों में हजारों लोगों ने साइन अप किया।
17 मई ● शुरुआती 5-सूत्रीय घोषणापत्र जारी किया गया।
● मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक स्पष्टीकरण में कहा कि उनकी टिप्पणियों का गलत अर्थ निकाला गया। फिर भी अभिजित के सोशल मीडिया पेज पर followers की संख्या बढ़ती रही।
18-19 मई ● टीएमसी ( ) सांसदों महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद सहित अन्य विपक्षी राजनेताओं का समर्थन मिलना शुरू हुआ।● प्रशांत भूषण वैसे कट्टर वामपंथियों का समर्थन मिला।● अभिजित के आम आदमी पार्टी से संबंधों और राजनीतिक मंशा को लेकर भी बहस तेज हुई।
20 मई ● दीपके ने मीडिया के साथ बातचीत शुरू की। बोस्टन से ही ऑनलाइन माध्यम से इंटरव्यू देने शुरू किये। ● CJP के सोशल मीडिया अकाउंट्स को निशाना बनाकर की गई कथित हैकिंग की ख़बरें भी सामने आई।

प्रवक्ताओं की घोषणा
3 जून 2026 को CJP ने अपने आधिकारिक प्रवक्ताओं की घोषणा की।
1. सौरभ दास – पेशे से वामपंथी पत्रकार। मूलतः पश्चिम बंगाल से है। इनके लेख ‘द कारवां’, ‘आर्टिकल 14’, ‘अल जज़ीरा’, ‘द वायर’, ‘द हिंदू’ और ‘न्यू लाइन्स मैगज़ीन’ जैसे प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं। वह ‘क्लाइमेट एक्शन फ्रंट’ का सह-संस्थापक भी है। सौरभ दास ने 20 जून 2021 को ब्राह्मणों को लेकर एक टिप्पणी की, “क्या ब्राह्मणों को हत्या या हिंसा नहीं करनी चाहिए? यह कैसा नकली ब्राह्मण है?” और इस पर हंसते हुए प्रतिक्रिया दी थी। इसके अलावा सौरभ और उमर खालिद की एकसाथ एक तस्वीर भी सामने आ चुकी है।
2. आशुतोष रांका - आईआईटी कानपुर से पढाई की। लंदन स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स से भी डिग्री हासिल की है। बीते कुछ महीनों से CJP से जुड़ने के बाद चर्चा में है। जयपुर निवासी रांका भी दीपके की तरह आम आदमी पार्टी से जुडा हुआ है। दिसंबर 2025 में आप ने रांका को पार्टी में जिम्मेदारी दी थी।
3. विजेता दहिया - लेखक, कंटेंट क्रिएटर, फिल्मकार। यूट्यूबर ध्रुव राठी के लिए रिसर्चर और स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर काम किया। फिलहाल जंतर-मंतर पर पार्टी के हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान बर्गर खाते हुए वीडियो वायरल होने के कारण CJP ने 21 जून को विजेता को प्रवक्ता पद से हटा दिया है। हिन्दू देवी-देवताओं तथा साधु-संतों पर अपमानजनक टिप्पणी सहित अपने अजीबोगरीब डांस के चलते विजेता चर्चा में बने रहे। प्रवक्ता पद से हटाने के बाद से अब ये अभिजित के खिलाफ भी बयानबाजी करते हुए दिखाई देते है

A satirical youth movement with public demands, a live petition, and a community-driven membership platform.

पेपर लीक और गिरफ्तारियां दिल्ली में छात्र आंदोलन का तात्कालिक कारण NEET-UG 2026 का पेपर लीक होना था। 3 मई 2026 को आयोजित...
24/07/2026

पेपर लीक और गिरफ्तारियां

दिल्ली में छात्र आंदोलन का तात्कालिक कारण NEET-UG 2026 का पेपर लीक होना था। 3 मई 2026 को आयोजित परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के साथ छेड़छाड़ की आशंकाओं के बाद शिक्षा मंत्रालय ने मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी।
ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। इस सिलसिले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मुख्य आरोपियों की डिटेल्स निम्नलिखित हैं:
● पी.वी. कुलकर्णी (P.V. Kulkarnney): पूर्व केमिस्ट्री लेक्चरर और एनटीए ( ) पेपर-सेटर, जिन्हें केमिस्ट्री पेपर लीक का मुख्य मास्टरमाइंड माना गया।
● मनीषा गुरुनाथ मांढरे (Manisha Gurunath Mandhare): एनटीए द्वारा नियुक्त वरिष्ठ बॉटनी शिक्षिका और परीक्षा विशेषज्ञ, जिन्हें बायोलॉजी के प्रश्नों को लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
● शिवराज मोटेगांवकर (Shivraj Motegaonkar): लातूर स्थित आरसीसी (RCC) कोचिंग इंस्टीट्यूट के संस्थापक।
● मनीषा वाघमारे (Manisha Waghmare / Wagmare): सैलून मालिक और बिचौलिया, जिन पर छात्रों को जुटाने और प्रश्नों के वितरण को सुगम बनाने का आरोप है।
● मनोज शिरूरे (Manoj Shirure): पेपर सेटर्स से लीक हुए प्रश्नों को छात्रों तक पहुंचाने में मदद करने का आरोपी।
● तेजस हर्षदकुमार शाह (Tejas Harshadkumar Shah): पुणे की एक कोचिंग अकादमी में फिजिक्स के शिक्षक।
● धनंजय लोखंडे और शुभम खैरनार (Dhananjay Lokhande & Shubham Khairnar): महाराष्ट्र से गिरफ्तार।
● मांगीलाल, विकास और दिनेश बिवाल (Mangilal, Vikas & Dinesh Biwal): जयपुर, राजस्थान से गिरफ्तार।
● यश यादव (Yash Yadav): गुरुग्राम, हरियाणा से गिरफ्तार।
पेपर लीक निस्संदेह एक गंभीर चूक का मुद्दा था, जिसके दुखद परिणामस्वरूप लगभग 20 बच्चों ने अपनी जान गंवा दी। हालांकि, इस मामले में कुछ प्रोफेसरों और स्टाफ की मिलीभगत ही सामने आई है, जिन्हें तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इसमें किसी मंत्री या सीधे तौर पर सरकार की संलिप्तता का कोई प्रमाण अभी तक नहीं मिला है।
एक कड़वा सच यह भी है कि लीक हुए पेपर को खरीदने वाले भी NEET की तैयारी कर रहे छात्र ही थे। लगभग 20 लाख बच्चें NEET की स्नातक परीक्षा में फार्म भरते है, MBBS की सीटें है 1 लाख 36 हजार. 2014 में 387 मेडिकल कॉलेज थे जिनकी संख्या अब 823 हो गई है. फिर भी परीक्षार्थी और प्रत्यक्ष सीटें इनका अनुपात ज्यादा होने के कारण, किसी भी मार्ग से NEET परीक्षा उत्तीर्ण होने का मानसिक दबाव छात्रों पर बनाया जाता है. इन सबके बीच, सकारात्मक कदम उठाते हुए सरकार ने NEET की परीक्षा दोबारा आयोजित करवाई, जिसके परिणाम भी घोषित हो चुके हैं और अब काउंसलिंग की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

19/03/2026

वर्ष प्रतिपदा:, नवरात्रि और राम नवमी का अद्भुत संयोग।
विक्रम संवत 2083 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा व हिंदू नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।
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