24/07/2026
सोनम वांगचुक की भूख-हड़ताल
सोनम वांगचुक द्वारा 28 जून को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने के बाद आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलना शुरू हुआ। यह समर्थन एक दिन में नहीं बल्कि दिन-प्रतिदिन क्रमशः मिला। अगले तीन हफ्तों में वामपंथी छात्र संगठन, विपक्ष के नेता और भाजपा-विरोधी अधिवक्ता और फिल्म जगत से जुड़ीं हस्तियाँ इस आंदोलन में शामिल हुए और सोशल मीडिया पर समर्थन करने लगे।
इस बीच वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य की भावनात्मक वीडियो वारयल की गयी। इसी दौरान संसद के सत्र से एक दिन पहले - 20 जुलाई को “संसद मार्च” का आह्वान किया गया। इसके लिए एक व्यवस्थित तरीके से सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया गया।
सोनम वांगचुक की पृष्ठभूमि
1988 में छात्रों के एक समूह के साथ मिलकर 'स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख' (SECMOL) की स्थापना की। उन्हें 2018 में रैमन मैगसेसे पुरस्कार (Ramon Magsaysay Award) से सम्मानित किया गया था।
एक जनसभा को संबोधित करते हुए उनके द्वारा भगवान राम और माता सीता को लेकर दिए गए एक आपत्तिजनक बयान पर भारी विवाद हुआ था। भारत के गृह मंत्रालय ने विदेशी योगदान नियमन अधिनियम (FCRA) के नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए उनकी संस्था SECMOL का विदेशी फंड लेने का लाइसेंस रद्द कर दिया था।
विरोध-प्रदर्शन को अर्बन नक्सलियों और अलगाववादियों का समर्थन
वामपंथी छात्र संगठनों – AISA, SFI और AISF ने आंदोलन में पूरी ताकत से अपमी मौजूदगी बनाये रखी। CPI के नेताओं जैसे डी. राजा और दिनेश सी. वार्ष्णेय ने भी इस आन्दोलन को अपना समर्थन दिया।
आन्दोलन को गैर-राजनैतिक लेकिन अर्बन नक्सल से जुड़े कई एक्टिविस्ट जैसे अरुंधति रॉय, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, जयंती घोष, निवेदिता मेनन, तनिका सरकार और संजय काक का व्यापक समर्थन मिला।
सैयद कासिम रसूल इलियास का भी इस आन्दोलन को समर्थन मिला। वे उमर खालिद (Umar Khalid) के पिता है जोकि वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया (Welfare Party of India) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के सदस्य, पूर्व में वे प्रतिबंधित संगठन 'स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया' (SIMI) से जुड़े रहे।
विपक्षी दलों का समर्थन
● 14 जुलाई - उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और महुआ मोइत्रा ने आंदोलन का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया। अरविंद केजरीवाल ने घोषणा कर कहा कि विरोध स्थल का दौरा करेंगे। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। अभिनेता ओमी वैद्य और ज़ीनत अमान ने इस मुद्दे का समर्थन किया।
● 15 जुलाई - सपा सांसद प्रिया सरोज, कांग्रेस सांसद प्रशांत पडोले और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने विरोध प्रदर्शन का दौरा किया। स्वरा भास्कर और कुणाल कामरा जंतर-मंतर पर शामिल हुए। शबाना आजमी, सोनी राजदान और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी अपने बयान जारी किये।
● 16 जुलाई - CJP ने एक दिवसीय एकजुटता उपवास का आयोजन किया। अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और डिंपल यादव इसमें शामिल हुए। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह, ज्यां द्रेज और रीतिका खेरा, शिक्षक आशु घई और 100 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व सांसद पंडित राम किशन ने धरना स्थल का दौरा किया।
● 17 जुलाई: पवन खेड़ा और अन्य कांग्रेस प्रतिनिधियों ने विरोध प्रदर्शन का दौरा किया। आमिर खान और किरण राव ने चिंता व्यक्त की। CJP ने अपनी वेबसाइट, मिस्ड कॉल और सोशल मीडिया के माध्यम से “चलो संसद” अभियान तेज कर दिया।
हिन्दू और देश-विरोधी पारिस्थितिकी तंत्र
इस विरोध-प्रदर्शन में हिन्दू और देश-विरोधी पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी पूरी ताकत के साथ मौजूदगी दिखाई। इसके प्रमुख नाम इस प्रकार है :
● रघु राम - विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए। महिलाओं के बारे में की गई टिप्पणियों की वजह से रघु राम काफी विवादों में घिर गए थे। उन्होंने कहा था कि पुरुषों की शारीरिक और मानसिक बीमारियों की मुख्य वजह महिलाएं ही हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि पुरुष महिलाओं के सामने अपने मन की बात कहने के बजाय हार्ट अटैक झेलना ज़्यादा पसंद करेंगे।
● कुणाल कामरा - सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा “सीता के पति का नाम लेकर नीता के पति का काम करने” जैसी अशोभनीय टिप्पणी कर हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाया।
● अरुंधति रॉय - विरोध-प्रदर्शन में भागीदारी ने अरुंधति के देश-विरोधी रुख और अन्य विवादों की ओर लोगों का ध्यान फिर से खींचा। जम्मू और कश्मीर पर 2010 में दिए गए उनके उस भाषण, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह इलाका कभी भी भारत का अभिन्न अंग नहीं रहा है। इस भाषण के बाद, अलगाववाद को बढ़ावा देने के आरोपों के तहत दिल्ली के उप-राज्यपाल ने उन पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत मुकदमा चलाने की मंज़ूरी दे दी थी।
● प्रो. नंदिता नारायण - उन्होंने पाकिस्तानी कवि फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की उर्दू नज़्म हम देखेंगे की पंक्तियाँ पढ़ीं, विशेष रूप से विवादित पंक्ति "बस नाम रहेगा अल्लाह का"।
● प्रो. आभा देव हबीब - इसने विवादित भाषण दिया था। जिसमे ये बोला गया कि “भारत माता है तो पिता कौन है”।
● संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) - सीजेपी के साथ संयुक्त विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ और न्यूज़क्लिक (NewsClick) एफआईआर से जोड़े जाने का विरोध करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन की घोषणा की।
वांगचुक अस्पताल में भर्ती और व्यापक राजनीतिक समर्थन
उपवास के 21वें दिन चिकित्सीय सलाह और दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद माकपा (CPI-M) नेता बृंदा करात, सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज, योगेंद्र यादव और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। अन्ना हजारे ने तत्काल बातचीत की अपील की।
राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, के.सी. वेणुगोपाल, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल, शरद पवार, उद्धव ठाकरे और चंद्रशेखर आजाद ने वांगचुक को हटाए जाने की निंदा की।
वास्तविकता यह भी थी कि सोनम वांगचुक भूख हड़ताल से धीरे-धीरे तंग आ चुके थे और वहां से सम्मानजनक रूप से बच निकलने का रास्ता तलाश रहे थे। इसी बीच अचानक एक 'टूलकिट' सक्रिय हुई जिसके माध्यम से देश-विदेश के कई बड़े लोग उनके समर्थन में बयानबाजी करने लगे और याचिका के माध्यम से अदालत का हस्तक्षेप भी करवाया गया। पुलिस ने वांगचुक को अस्पताल में इसलिए भर्ती करवाया क्योंकि यदि वहां उनकी मृत्यु हो जाती, तो स्थिति और भी गंभीर तथा अनियंत्रित हो सकती थी।