Jeevan Sawaro Subh Vivah Yojna

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Jeevan Sawaro Subh Vivah Yojna is being run by Jeevan Sawaro Welfare Society Regd(NGO).Our aim is to provide help to poor families for their daughter marriages.

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24/07/2025

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27/02/2025
पाँच साल की बेटी बाज़ार में गोल गप्पे खाने के लिए मचल गई। “किस भाव से दिए भाई?” पापा नें सवाल् किया। “10 रूपये के 8 दिए ...
24/10/2024

पाँच साल की बेटी बाज़ार में गोल गप्पे खाने के लिए मचल गई। “किस भाव से दिए भाई?” पापा नें सवाल् किया। “10 रूपये के 8 दिए हैं। गोल गप्पे वाले ने जवाब दिया… पापा को मालूम नहीं था गोलगप्पे इतने महँगे हो गये है…. जब वे खाया करते थे तब तो एक रुपये के 10 मिला करते थे। पापा ने जेब मे हाथ डाला 15 रुपये बचे थे। बाकी रुपये घर की जरूरत का सामान लेने में खर्च हो गए थे। उनका गांव शहर से दूर है 10 रुपये तो बस किराए में लग जाने है। “नहीं भई 5 रुपये में 10 दो तो ठीक है वरना नही लेने।”

यह सुनकर बेटी नें मुँह फुला लिया… “अरे अब चलो भी, नहीं लेने इतने महँगे। ” पापा के माथे पर लकीरें उभर आयीं… “अरे खा लेने दो ना साहब…” अभी आपके घर में है तो आपसे लाड़ भी कर सकती है… कल को पराये घर चली गयी तो पता नहीं ऐसे मचल पायेगी या नहीं. … तब आप भी तरसोगे बिटिया की फरमाइश पूरी करने को… गोलगप्पे वाले के शब्द थे तो चुभने वाले पर उन्हें सुनकर पापा को अपनी बड़ी बेटी की याद आ गयी…

जिसकी शादी उसने तीन साल पहले एक खाते -पीते पढ़े लिखे परिवार में की थी……

उन्होंने पहले साल से ही उसे छोटी छोटी बातों पर सताना शुरू कर दिया था…

दो साल तक वह मुट्ठी भरभर के रुपये उनके मुँह में ठूँसता रहा पर उनका पेट बढ़ता ही चला गया ….

और अंत में एक दिन सीढियों से गिर कर बेटी की मौत की खबर ही मायके पहुँची….

आज वह छटपटाता है कि उसकी वह बेटी फिर से उसके पास लौट आये..? और वह चुन चुन कर उसकी सारी अधूरी इच्छाएँ पूरी कर दे…

पर वह अच्छी तरह जानता है कि अब यह असंभव है. “दे दूँ क्या बाबूजी

गोलगप्पे वाले की आवाज से पापा की तंद्रा टूटी…

“रुको भाई दो मिनिट …. पापा पास ही पंसारी की दुकान थी उस पर गए जहाँ से जरूरत का सामान खरीदा था। खरीदी गई पाँच किलो चीनी में से एक किलो चीनी वापस की तो 40 रुपये जेब मे बढ़ गए।

फिर ठेले पर आकर पापा ने डबडबायी आँखें पोंछते हुए कहा अब खिलादे भाई। हाँ तीखा जरा कम डालना। मेरी बिटिया बहुत नाजुक है…. सुनकर पाँच वर्ष की गुड़िया जैसी बेटी की आंखों में चमक आ गई और पापा का हाथ कस कर पकड़ लिया।

जब तक बेटी हमारे घर है उनकी हर इच्छा जरूर पूरी करे,...

क्या पता आगे कोई इच्छा पूरी हो पाये या ना हो पाये ।

ये बेटियां भी कितनी अजीब होती हैं जब ससुराल में होती हैं तब मायके जाने को तरसती हैं….

सोचती हैं कि घर जाकर माँ को ये बताऊँगी पापा से ये मांगूंगी बहन से ये कहूँगी भाई को सबक सिखाऊंगी और मौज मस्ती करुँगी…

लेकिन

जब सच में मायके जाती हैं तो एकदम शांत हो जाती है किसी से कुछ भी नहीं बोलती….

बस माँ बाप भाई बहन से गले मिलती है। बहुत बहुत खुश होती है। भूल जाती है कुछ पल के लिए पति ससुराल सब…..

क्योंकि एक अनोखा प्यार होता है मायके में एक अलग ही कशिश होती है मायके में….. ससुराल में कितना भी प्यार मिले…..

माँ बाप की एक मुस्कान को तरसती है ये बेटियां….

ससुराल में कितना भी रोएँ पर मायके में एक भी आंसूं नहीं बहाती ये बेटियां….

क्योंकि बेटियों का सिर्फ एक ही आंसू माँ बाप भाई बहन को हिला देता है रुला देता है…..

कितनी अजीब है ये बेटियां कितनी नटखट है ये बेटियां भगवान की अनमोल देंन हैं ये बेटियां ……

हो सके तो बेटियों को बहुत प्यार दें उन्हें कभी भी न रुलाये क्योंकि ये अनमोल बेटी दो परिवार जोड़ती है दो रिश्तों को साथ लाती है। अपने प्यार और मुस्कान से।

हम चाहते हैं कि सभी बेटियां खुश रहें हमेशा.... भले ही हो वो मायके में या ससुराल में।

खुशकिस्मत है वो जो बेटी के बाप हैं,

उन्हें भरपूर प्यार दे, दुलार करें और यही व्यवहार अपनी पत्नी के साथ भी करें क्यों की वो भी किसी की बेटी है और अपने पिता की छोड़ कर आपके साथ पूरी ज़िन्दगी बीताने आयी है। उसके पिता की सारी उम्मीदें सिर्फ और सिर्फ आप से हैं

एक अमीर आदमी की शादी बुद्धिमान स्त्री से हुई।अमीर हमेशा अपनी बीवी से तर्क और वाद-विवाद में हार जाता था।बीवी ने कहा की स्...
14/09/2024

एक अमीर आदमी की शादी बुद्धिमान स्त्री से हुई।
अमीर हमेशा अपनी बीवी से तर्क और
वाद-विवाद में हार जाता था।

बीवी ने कहा की स्त्रियां मर्दो से कम नहीं..
अमीर ने कहा मैं दो वर्षो के लिये परदेश चला जाता हूं ।

तुम ,
एक महल ,बिजनेस में मुनाफा और एक बच्चा पैदा करके दिखा दो।
आदमी परदेश चला गया...
बीवी ने सारे कर्मचारियों में ईमानदारी का बोध जगा के और मेहनत का गुण भर दिया।
पगार भी बढ़ा दी।
सारे कर्मचारी खुश होकर दिल लगा के काम करने लगे।
मुनाफा काफी बढ़ा...
बीवी ने महल बनवा दिये..
बीवी ने दस गाय पाले..
काफी खातिदारी की...
गाय का दूध काफी अच्छा हुआ..
दूध से दही जमा के परदेश में दही बेचने चली गई वेश बदल के..
अपने पति के पास बदले वेश में दही बेची..
और रूप के मोहपाश में फँसा कर संबंध बना ली।
फिर एक दो बार और संबंध बना के अँगुठी उपहार में लेकर घर लौट आई।
बीवी एक बच्चे की माँ भी बन गई।
दो साल पूरे होने पर पति घर आया।
महल और शानो-शौकत देखकर पति दंग और प्रसन्न रह गया।
मगर जैसे बीवी की गोद में बच्चा देखा क्रोध से चीख उठा किसका है ये?
बीवी ने जब दही वाली गूजरी की याद दिलाई और उनकी दी अँगुठी दिखाई तो अमीर काफी खुश हुआ।
बीवी ने कहा-ः
अगर वो दही वाली गुजरी मेरी जगह कोई और होती तो???
इस ''तो'' का उत्तर तो पूरी पुरूष जाति के पास नही है।

नारी नर की सहचरी, उसके धर्म की रक्षक,
उसकी गृहलक्ष्मी तथा उसे देवत्व तक
पहुँचाने वाली साधिका है।

Address

Jeevan Sawaro Welfare Society Regd. , Jeevan Sawaro Building, Plot No. 1, Near Mcd School, New Delhi
New Delhi
110043

Opening Hours

Monday 9am - 5pm
Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm
Saturday 9am - 5pm
Sunday 9am - 5pm

Telephone

+19716527090

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