Palam Sewa Mandal

Palam Sewa Mandal By the Grace of SHRI SAINATH MAHARAJ JI-we respect every Religion and really wants to help people via serving them services from our end at Free Of Cost...

26/02/2025

वर्ष 2011 में आरक्षी पद पर भर्ती एवं वर्तमान में जनपद बांदा में तैनात स्व0 अरविन्द कुमार के दुःखद निधन पर उ0प्र0 पुलिस परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।

दिवंगत मुख्य आरक्षी को सद्गति व उनके परिजनों/प्रियजनों के संबल हेतु हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।

शत् शत् नमन🙏

26/02/2025

#शोर्य - 5 वर्ष पूर्व 21 जून 2020 को भारतीय जवानों ने 18 चीनी सैनिको की उड़ा दी गर्दन, चीनी कर्नल को जिंदा पकड़ा...💪....🚩भारतीय जवानों की शौर्यगाथा हमेशा अमर रही हैं, सामने कैसा भी बड़ा दुश्मन हो और धोखे से वार करे लेकिन भारतीय जवानों में ऐसा जोश होता है कि दुश्मन के दांत खट्टे कर देते है, ऐसे कई युद्धों में हुआ है और आज भी हमारे जवानों के सामने किसी की ताकत नही है कि आँख उठाकर देखे।

🚩आपको बता दे कि गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत भारतीय जवानों पर हमला किया। हालांकि चीन की पीएलए आर्मी की तरफ से अचानक हुए इस हमले में पहले भारत को बड़ा नुकसान हुआ, लेकिन उसके बाद जिस तरह से बिहार रेजीमेंट के जवानों ने मोर्चा संभाला, उसके बाद चीनी सैनिक भाग खड़े हुए ।

🚩उस रात बिहार रेजीमेंट के जवानों की बहादुरी की कहानी, पूरी दुनिया में सैन्य अभियानों के लिए मिसाल बन गयी है। उस रात चीनी सैनिकों की तादाद भारतीय सेना की तुलना में पांच गुणा ज्यादा थी, लेकिन फिर भी हमारे बहादुर जवानों ने चीनी सेना को ऐसा मारा कि अब वह शांति से बातचीत को सुलझाने की बात कर रहा है।

🚩चीन को पता चल गया कि उसके सैनिकों में इतना दम नहीं है कि वह भारतीय फौज का मुकाबला कर सके, क्‍योंकि युद्ध हमेशा जज्‍बे से लड़ा जाता है, शौकिया नहीं।

🚩जानिए उस रात की पूरी कहानी...

🚩अखबार डेक्कन हेराल्ड ने सैन्य सूत्रों के हवाले से बिहार रेजीमेंट की जवानों की शौर्यगाथा की पूरी कहानी छापी है। इस लड़ाई में बिहार रेजीमेंट के जवानों ने प्राचीन युद्ध कला का प्रयोग किया। भारत के जवानों को ऑर्डर मिले थे कि वह गलवान में बनाए गए चीनी सैनिकों द्वारा टेंट को हटाने की पुष्टि करें। इसी को देखते हुए कर्नल बी संतोष बाबू जवानों के साथ घटना स्‍थल पर पहुंचे। उन्‍होंने देखा कि चीनी सेना ने वहां से टेंट को नहीं हटाया तो उन्‍होंने इसका विरोध किया। इसी बीच बड़ी तादाद में वहां पर मौजूद चीनी सैनिकों ने उन पर हमला कर दिया। जिसके बाद भारतीय सैनिकों ने भी मोर्चा संभालते हुए उनको जवाब देना शुरू किया।

🚩हालांकि इसी हिंसक झड़प में कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी. संतोष बाबू शहीद हो गए। जिसके बाद बिहार रेजीमेंट के सैनिकों के सब्र का बांध टूट गया। चीनी सैनिकों की तादाद बहुत ज्‍यादा थी, जिसके बाद भारतीय फौज ने पास की टुकड़ी को इस बारे में जानकारी दी और मदद मांगी। सूचना मिलने के तुरंत बाद ही भारतीय सेना का 'घातक' दस्ता मदद के लिए वहां पहुंचा। बिहार रेजीमेंट और घातक दस्ते के सैनिकों की कुल तादाद सिर्फ 60 थी, जबकि दूसरी तरफ दुश्मनों की तादाद काफी ज्यादा थी।

🚩सरकार की तरफ से जवानों को फायरिंग की मनाई थी, लेकिन कमांडिंग ऑफिसर की हत्या से आहत बिहार रेजीमेंट के जवान किसी भी हाल में चीनी सेना को सबक सीखाना चाहते थे। इसके लिए उन्‍होंने प्राचीन युद्ध शैली का प्रयोग करते हुए पत्थर, डंडा और भाले को हथियार बनाया।

🚩18 चीनी सैनिकों की तोड़ दी गर्दन

🚩बिहार रेजीमेंट के जवानों ने एक ही झटके में 18 चीनी सैनिकों की गर्दन तोड़ दी। एक सैन्य अधिकारी ने बताया, 'कम से कम 18 चीनी सैनिकों की गर्दन की हड्डी टूट चुकी थी और सर झूल रहा था। कुछ के चेहरे इतनी बुरी तरह से कुचल दिये गये थे कि उन्हें पहचान पाना संभव नहीं था। भारतीय सैनिकों का हमला इतना भयानक था कि चीनी भाग खड़े हुए और घाटियों में छिपने लगे।'

🚩ये लड़ाई लगभग चार घंटे तक चलती रही। चीनियों के पास तलवार और रॉड थे, जिनको छीनकर भारतीय सैनिकों ने उनपर हमला करना शुरू कर दिया। बिहार रेजीमेंट के जवानों का यह रौद्र रूप देखकर सैकड़ों की तादाद में मौजूद चीनी भागने लगे और घाटियों में जा छिपे, जिसके बाद भारतीय जवानों ने उनका पीछा करते हुए उन्‍हें चुन-चुनकर मारा। हालांकि वह इतने आगे चले गए थे कि उनमें से ही कुछ पकड़ लिये गए, जिन्हें शुक्रवार को चीन ने रिहा किया।

🚩सूत्रों ने ये भी बताया कि जब सोमवार को दोनों देश के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, उसमें भारत के जवान एक चीनी कर्नल को जिंदा पकड़कर लेकर आ गए थे। हालांकि बाद में शीर्ष अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद उसे छोड़ दिया गया।

🚩केंद्रीय मंत्री और जनरल विक्रम सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं है कि चीन ने हमारे 20 जवानों को घेरकर मार दिया। चीन कभी नहीं बताएगा कि उनके कितने जवान हताहत हुए हैं। लेकिन मुझे पूरा विश्‍वास हैं कि उनके जवानों के मरने की संख्‍या हमसे दोगुनी है।

आपको बता दे कि चीन और भारत के सैनिको द्वारा 11 सितंबर 1967 को धक्का मुक्की की एक घटना का संज्ञान लेते हुए नाथू ला से सेबु ला के बीच में तार बिछाने का फैसला लिया। जब बाड़बंदी का कार्य शुरु हुआ तो चीनी सैनिकों ने विरोध किया। इसके बाद चीनी सैनिक तुरंत अपने बंकर में लौट आए। कुछ देर बाद चीनियों ने मेडियम मशीन गनों से गोलियां बरसानी शुरु कर दी। प्रारंभ में भारतीय सैनिकों को नुकसान उठाना पड़ा पहले 10 मिनट में 70 सैनिक मारे गए।

लेकिन इसके बाद भारत की ओर से जो जवाबी हमला हुआ, उसमें चीन का इरादा चकनाचूर हो गया। सेबू ला एवं कैमल्स बैक से अपनी मजबूत रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाते हुए भारत ने जमकर आर्टिलरी पावर का प्रदर्शन किया । कई चीनी बंकर ध्वस्त हो गए और खुद चीनी आकलन के अनुसार भारतीय सेना के हाथों उनके 400 से ज्यादा जवान मारे गए। भारत की ओर से लगातार तीन दिनों तक दिन रात फायरिंग जारी रही। भारत चीन को कठोर सबक दे चुका था। चीन की मशीनगन यूनिट को पूरी तरह तबाह कर दिया गया था। 15 सितंबर को वरिष्ठ भारतीय सैन्य अधिकारियों के मौजूदगी में शवों की अदला बदली हुई।

🚩भारतीय जवानों के पास अन्य देशों के मुकाबले में पूरे साधन न होते हुए भी, माईनस टेम्परेचर में भी ऐसा शोर्य दिखाते है कि हर भारतीय अपने जवानों पर गर्व करने लगता है। हमारा कर्तव्य है कि कही भी भारतीय जवान दिखे तो उसका सम्मना करे उनको यथायोग्य मदद करें।

हम सोये चैन की नींद वो सीमा पर जागें,
देख के उनकी हिम्मत, मुश्किलें भी डर के भागे..... िंद_की_सेना🇮🇳🙏

22/09/2024
22/09/2024

अमेरिका का थिंक टैंक बहुत जोर शोर से भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की वकालत कर रहा है.
उनका कहना है कि भारत को अगर अभी रोका नहीं गया तो आने वाले समय में भारत चीन से भी ज्यादा खतरनाक साबित होगा.

क्योंकि, उनका मानना है कि जिस गति से भारत प्रगति कर रहा है...

अगले 5 से 10 वर्षों में वह चीन को पीछे छोड़कर अमेरिका के टक्कर में आ जाएगा..
और, उस समय भारत को काबू करना बहुत मुश्किल हो जाएगा.

अतः , भारत पर अभी से प्रतिबंध लगाने अति आवश्यक हैं.

परंतु, पूरी दुनिया को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्रियों की धौंस देने वाले अमेरिका की ये भी चिंता है कि भारत पर प्रतिबंध लगाने से भारत का बहुत कुछ नहीं बिगड़ेगा.

क्योंकि, अब भारत 1960 वाला भारत नहीं है जिसे अपनी जनता के पेट भरने के लिए भी अमेरिका या विदेशों से अनाज मंगवाना पड़ता था.

इसका कारण ये है कि... भारत मुख्यतः तेल का आयात करता है जो उसे हर हालत में रूस, यूएई, और ईरान से मिल ही जाएगा.

वैसे भी, भारत अगले एक-दो वर्षों में तेल के बारे में भी आत्मनिर्भर हो जाएगा.

तथा, हथियारों को बनाने में भारत लगभग आत्मनिर्भर हो ही चुका है.

सिर्फ इतना ही नहीं...
बल्कि, मोदी द्वारा प्रस्तावित ब्रिक्स करंसी और भारत के यूपीआई का मेल डॉलर की छाती पर नासूर का जख्म साबित होगा क्योंकि इससे 75 वर्षों से दुनिया पर राज कर रहे डॉलर की औकात दो कौड़ी की भी नहीं रह जाएगी.

और, ऐसी चिंता सिर्फ अमेरिका की ही नहीं है..
क्योंकि, खबरों के अनुसार.. चीन की बिगड़ते हालात एवं भारत के आर्थिक विकास की गति को देखते हुए हाल के दिनों में चीन में जाने वाला अधिकतर विदेशी निवेश अब चीन के बजाए भारत आ रहा है.

इसके इतर... पिग्गिस्तान का अलग ही दुख है कि... विदेशी रोटी खा कर कल तक शेर की दहाड़ने वाला पिग्गिस्तान आज दाने-दाने को मुंहताज है.

और, इन सबका का कारण सिर्फ एक है..... मोदी.

इसीलिए, वे लोग अच्छी तरह जानते हैं कि जबतक भारत में मोदी है... तबतक किसी भी तरह का कोई प्रतिबंध भारत पर कारगर नहीं होगा..

अतः.... उनका सिंपल कैलकुलेशन है कि भारत में प्रतिबंध वगैरह लगा कर झमेला बढ़ाने से बेहतर है कि इसके कारण अर्थात मोदी को ही हटा दिया जाए.

लेकिन, भारत की जनसंख्या है 140 करोड़ और यहाँ सत्ताधीश लोकतंत्र के माध्यम से चुने जाते हैं.

इसीलिए, अगर मोदी को हटाना है तो फिर उन्हें वोटिंग के जरिए ही हटाया जा सकता है.

लेकिन, ये बात वे लोग अच्छी तरह जानते हैं कि... जबतक मोदी के साथ यहाँ का बहुसंख्यक समाज है तबतक उन्हें सत्ता से हटा पाना हद से भी ज्यादा मुश्किल है.

इसीलिए, अगर मोदी को हटाना है तो पहले यहाँ की बहुसंख्यक जनता के मन में मोदी के प्रति असंतोष भरना होगा.

तथा, ये असंतोष कोई मुसरिम, हिसाई या वामपंथी बनकर नहीं कर सकता है क्योंकि ऐसा बनकर हिंदुओं का विरोध करने पर हिन्दू और भी ज्यादा एकजुट हो जाएंगे...

इसीलिए, हिन्दूओं को तोड़ने के लिए तुम्हें उससे भी बड़ा कट्टर हिन्दू बन जाना है.

इसके लिए हमारे दुश्मन देशों (जैसे कि जॉर्ज सोरोस, पिग्गिस्तान, चीन, अमेरिका आदि) से देश के गद्दारों (टूलकिट / स्लीपर सेल) को पैसा आता है कि तुम्हें किसी भी मुद्दे को धार्मिक भावना का एंगल देना है और उसमें ये प्रूफ करना है कि...
मोदी, हिंदुओं का सबसे बड़ा दुश्मन है.

इसके लिए, तुम्हें असली देशभक्तों से भी ज्यादा अधिक कट्टर हिन्दू बनकर तुम्हे मोदी का विरोध करना है.

जैसे, मान लो कि.... मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर बनवा दिया तो उन्हें इसमें एंगल निकालना है कि...
ये मोदी ने नहीं बल्कि... कोर्ट ने किया है.
मोदिया तो इसको लटकाना ही चाहता था..
वो तो सुप्रीम कोर्ट के कारण मोदी मंदिर बनवाने को मजबूर हो गया.

इसके बाद फिर, अगर मोदी ने मंदिर में पूजा की तो इसमें हल्ला मचाना है कि मोदी ने पूजा के दौरान गेंदा का फूल क्यों चढ़ाया ..?
पारिजात क्यों नहीं चढ़ाया क्योंकि भगवान राम को पारिजात का फूल पसंद है.

मान लो.. पारिजात का फूल भी चढ़ा दिया तो फिर एंगल होगा... सिर्फ भगवान राम को क्यों चढ़ाए ... सीता जी पर क्यों नहीं चढ़ाए ???

उसी तरह से... अगर उन्होंने वक्फ बोर्ड को JPC को भेज दिया तो फिर तुम्हे ये बोलना है कि इसको वक्फ बोर्ड खत्म ही नहीं करना है इसीलिए इसने इसे JPC को भेज दिया.

हटाने के लिए वोटिंग करवाये या फिर सलाह मांगे तो तुम्हे ये कहना है कि... खांग्रेस ने इसे लागू करते समय सलाह मांगा था जो अब खत्म करते समय सलाह मांग रहे हो ?
इसीलिए, हम सलाह या समर्थन देबे नहीं करेंगे.

अगर मान लो कि मोदी ने उसे किसी तरह उसे खत्म कर भी दिया तो तुम्हें ये बोलना है कि वक्फ बोर्ड खत्म करके क्या होना है ??
उससे सब जमीन क्यों नहीं छीने.
मान लो कि... जमीन भी छीन लिया तो भी बोलना है कि... जमीन छीनने से क्या होता है ?
वो जगह हम हिंदुओं के मंदिर को काहे नहीं दे दिए ??

कहने का मतलब है कि... अब टूलकिट द्वारा हिंदुओं का खुला विरोध नहीं किया जाता है कि... मोदी, हिंदुओ एवं देश के लिए इतना काम क्यों कर रहा है.
बल्कि... अब ये प्रूफ किया जाता है कि...
मोदी, हिंदुओं के लिए "कितना कम काम" या फिर "नहीं के बराबर" काम कर रहा है.

ताकि... हिंदुओं के दिमाग में ये ठूंस ठूंस कर बिठाया जा सके कि... मोदी को हरवाने से ही हिन्दू सुरक्षित रह पाएगा.

और, ये सब एंगल.... बड़े बड़े शातिर लोग बाकायदा अपने टीम के साथ बैठ कर खोजते हैं और अपने टूलकिट के जरिए उसे ट्रेंड में लाते हैं.

इधर... हमारे कुछ बेहद शातिर मठाधीश (जो पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं) योजनानुसार उस टूलकिट के पॉइंट को उठा कर पोस्ट करते रहते हैं.

और... जियो पॉलिटिक्स से अनजान भोले भोले हिन्दू (उनके फॉलोवर) को भी लगता है कि बात तो हमारे दद्दा सही ही बोल रहे हैं.
बाप रे... हमारे दद्दा कितने होशियार हैं कि इन्होंने इतनी बारीक बात भी पकड़ ली.

और... उनके वे दद्दा और फॉलोवर लाइक्स और वाहवाही के लालच में जाने अनजाने ही उस टूलकिट का हिस्सा बन जाते हैं.

उन्हें अंत तक यही लगते रहता है कि... वे ये सब अपने हिन्दू धर्म और देश के लिए कर रहे हैं.

मतलब कि... वे खुशी खुशी उसी डाल को काटने लगते हैं जिसपर वे बैठे हुए हैं.
और, उन्हें इस बात की खुशी भी होती है कि वे अपनी पूरी बुद्धि और बल लगाकर धर्मकार्य में जुटे हैं.

और.. ऐसे मठाधीश एक दो नहीं सैकड़ों हजारों में हैं.

ऐसा आप हजारों मठाधीशों को कहते सुन सकते हैं कि... मोदिया बेकार है.
मोदिया, हिंदुओं के लिए ये गलत कर दिया.
मोदिया को नोबल चाहिए इसीलिए ऐसा कर दिया.
ये पूजा ठीक नहीं हुआ.
मंदिर का मुंह उधर क्यों कर दिया.
इस बार के चुनाव में .. बीजेपी को हरवा के उसको सबक सिखाना है... आदि आदि..

इसीलिए... ऐसे पोस्ट और ऐसे पोस्टकर्ता से सावधान रहने की जरूरत है.

अगर उतना कॉम्प्लिकेटेड पॉलिटिक्स नहीं भी समझना है तो सिंपल समझ लें...

भारत के कटेशर.. और, भारत के दुश्मन देश पिग्गिस्तान, चीन, अमेरिका, जॉर्ज सोरोस, खांग्रेस आदि किसी भी मोदी को हरवाना चाहते हैं.

और, अगर आप भी वही चाहते हैं तो फिर आपको इस बात पर फिर से सोचने की जरूरत है कि... आपकी पसंद कटेशरों से , पिग्गिस्तान से, चीन से और खांग्रेस इतनी ज्यादा क्यों मिल रही है ???

कहीं ऐसा तो नहीं है कि... आप चीजों को समझने में गलती कर रहे हैं ???

अतः... दिमाग की बत्ती जलाएँ तथा उस बत्ती की रोशनी में देश और धर्म के गद्दारों को पहचानें...!

जय महाकाल...!!!

22/09/2024

मस्जिद से पहले मन्दिर था
उस मन्दिर से पहले क्या था
एक खेत था शायद
धान का होगा या गेहूँ का
सबकी भूख से रिश्ता था
भूख का कोई मज़हब नहीं है
वो खेत कब का ज़ब्त हुआ
उस खेत के लिए कौन लड़ेगा ?

खेत से भी पहले क्या था
अल्लाह राम के नाम से पहले
क़ाबा काशी धाम से पहले
राम-राम सलाम से पहले
शायद घना एक जंगल था
जँगल में सब मंगल था
आदम अभी आदमी नहीं था
उसे आग लगानी नहीं आती थी
आग का कोई मज़हब नहीं है
वो जँगल जल कर राख़ हुआ
उस जँगल के लिए कौन लड़ेगा ?

जंगल से भी पहले क्या था
साँ साँ करता कहकशाँ था
हरसूँ सिर्फ़ धुआँ धुआँ था
तूँ कहाँ था, मैं कहाँ था
ना को हिन्दू ना मुसलमाँ था
ना किसी का नामो निशाँ था
बेनामोनिशाँ का कोई मज़हब नहीं था
वो कहकशाँ अब दैरो हरम हुआ
कहकशाँ के लिए कौन लड़ेगा !

(सरबजीत सिंह बहल)

20/11/2023

सभी श्याम प्रेमियों को सुबह की जय श्री श्याम

|| JAI MATA DI ||
20/11/2023

|| JAI MATA DI ||

• ᴶᵃⁱ ᴹᵃ ᴰʰᵃʳⁱ ᴷᵃˡⁱⁿᵏᵃ •
🪻 ||• सर्व मंगल मांगल्ये,शिव सवार्थ सादिके,
शरण्ये त्र्यंबके माँ धारी नारायणी नमोस्तुते •|| 🧘🪔

27/07/2023

In , DCW chief meets two women who were stripped and paraded‼️

It is deeply distressing to know that neither the CM nor any govt functionary has meet them. No support has been given to them by the govt. If I cud travel all the way from Delhi & meet them, why can’t CM⁉️

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