03/05/2026
कहां थे रेस्क्यू बोट, सुरक्षा स्क्वायड, कौन देगा जवाब, कौन लेगा इसकी जिम्मेदारी..कोई नेता होता तो 4 रेस्क्यू बोट के साथ दौर रही होती, पर इन्हें बचाने कोई नहीं आया क्योंकि ये आम लोग थे.
बरगी का क्रूज जब डूबने लगा तो इस माँ ने बेटे को लाइफ जैकेट के अंदर लिपटा लिया ताकि वो डूबने न पाए...दुर्भाग्य ये कि दोनों ही ऐसे लिपटे लिपटे मौत की बाहों में समा गए...बहुत गंभीर सवाल खड़े किए हैं इस घटना ने... जिस कैटामारन क्रूज के बारे में कहा जाता था कि इसका डूबना असंभव है..ये समंदर में भी तैरता है वो अपेक्षाकृत छोटी लहरों के थपेड़ों में ही पलट गया... ये कैसी लाइफ जैकेट थी, जो बचाने के बजाय डुबो रही थी... टूरिज्म डिपार्टमेंट ने वहां कमाई के लिहाज़ से गतिविधियाँ तो शुरू कर दीं लेकिन सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए.. बॉडी मिलना तब शुरू हुईं जब आगरा से सेना के गोताखोर पहुंचे... जहां नर्मदा मैया एक हज़ार फीट तक गहरी हों, वहां इतनी बड़ी लापरवाही कैसे कर सकता है
ज़िम्मेदार विभाग...हादसे की असली वज़ह चाहे जो हो...जिसकी भी गर्दन नापकर भी ये प्रचारित किया जाए कि " दोषी बख्शे नहीं नहीं जाएंगे" मगर ये तस्वीर सालों भुलाई नहीं जा सकती....और न ही इसे देखकर फटते हुए कलेजे की पीर... बहुत दुखद
अगर आप भारत में हैं ,
किसी क्रूज़ पर मत जाइए,
राफ्टिंग मत करिए,
ऊंचे झूलों पर मत जाइए,
कोई एडवेंचर स्पोर्ट मत करिए ,
क्योंकि यहां किसी की कोई जवाबदेही नहीं है ।
चंद रुपयों के लिए आपकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो सकता है ।
यही हमारे देश का भयानक सच है।