18/08/2026
सुप्रीम कोर्ट के वकील #ध्रुव_कुमार_साह जी का नाम इन दिनों आरक्षण की बहस में काफी वायरल है।
''-ध्रुव कुमार साह जी ने क्या कहा?
मुख्य तर्क था कि आरक्षण का मकसद सामाजिक-आर्थिक बराबरी लाना था, लेकिन अब इसका राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने भीम आर्मी जैसी संस्थाओं की आलोचना की और कहा कि आरक्षण पर सिर्फ "चिल्लाना" नहीं, बल्कि संविधान और डेटा के आधार पर बात होनी चाहिए। 5977
नोट: वायरल क्लिप का पूरा कानूनी बयान कोर्ट में नहीं, बल्कि मीडिया इंटरव्यू/डिबेट में था। 5977
आरक्षण और SC-ST को लेकर आम तौर पर जो तर्क दिए जाते हैं
आरक्षण खत्म करने के पक्ष में तर्क:
1. योग्यता vs आरक्षण: कहा जाता है कि 75 साल बाद भी जाति के आधार पर आरक्षण से "योग्य" लोग पीछे रह जाते हैं।
2. क्रीमी लेयर: जिन SC-ST/OBC परिवारों की स्थिति सुधर गई है उन्हें आरक्षण का लाभ न मिले। बार-बार एक ही परिवार लाभ ले रहा है।
3. आर्थिक आधार: गरीबी जाति से नहीं देखी जाती। इसलिए आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए।
4. सामाजिक एकता: जातिगत आरक्षण से समाज में बंटवारा बढ़ता है।
आरक्षण जारी रखने के पक्ष में तर्क:
1. सामाजिक भेदभाव अभी खत्म नहीं हुआ: सिर्फ गरीबी हटाने से जातिगत भेदभाव खत्म नहीं होता।
2. प्रतिनिधित्व: नौकरी, शिक्षा, राजनीति में सभी वर्गों की बराबर भागीदारी के लिए आरक्षण जरूरी है।
3. संविधानिक अधिकार: बाबा साहेब ने सामाजिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए इसे दिया था।
> "आरक्षण नफरत का मुद्दा नहीं, समाधान का मुद्दा है। 75 साल में बहुत कुछ बदला है। अब जरूरत है - गरीब को मदद मिले, चाहे वो किसी भी जाति का हो। और जो सक्षम हो गए हैं, वो रास्ता दूसरों के लिए छोड़ें। यही बाबा साहेब और भामाशाह जी दोनों की सोच थी।"
: #तेली समाज के नजरिए से
> "तेली समाज मेहनत और व्यापार से आगे बढ़ा है। हम मानते हैं कि कमजोर की मदद होनी चाहिए। लेकिन मदद ऐसी हो कि वो बैसाखी न बने, सीढ़ी बने। आरक्षण की समीक्षा हो, पारदर्शिता हो, और अंतिम लक्ष्य एक भारत, एक समाज हो।"
जरूरी बात: आरक्षण को खत्म करना या रखना ये फैसला संसद, सुप्रीम कोर्ट और संविधान के तहत ही होगा। बहस में शब्दों की मर्यादा रखें ताकि समाज जुड़े, न टूटे। cc91
बिल्कुल सही बात उठाई आपने 👇
EWS आरक्षण - 2019 में 103वें संविधान संशोधन से आया।
किसके लिए: आर्थिक रूप से कमजोर "सामान्य वर्ग" यानी स्वर्ण समाज के लिए। आय 8 लाख से कम, 10% आरक्षण।
SC/ST/OBC आरक्षण: ये सामाजिक + शैक्षिक पिछड़ेपन के आधार पर है।
> "अगर आरक्षण खत्म करना है तो सबका करो।
> अगर देना है तो सबको दो।
> EWS हो या SC-ST-OBC, नियम एक होना चाहिए।
> देश एक, कानून एक, मौका एक।"
> "स्वर्ण समाज को EWS मिला तो विरोध नहीं हुआ।
> OBC/तेली समाज को आरक्षण मिला तो विरोध क्यों?
> गरीब हर जाति में है। भेदभाव मत करो, समाधान निकालो।"
शॉर्ट और तगड़ा
> "EWS भी आरक्षण है, SC-ST भी आरक्षण है।
> खत्म करना है तो पूरा सिस्टम खत्म करो।
> सुधारना है तो सबके लिए सुधारो।"
असल मुद्दा क्या है?
बहस का मुद्दा "आरक्षण हां या ना" नहीं है। मुद्दा है
"पारदर्शिता और समीक्षा"।
1. क्रीमी लेयर लागू हो
2. आर्थिक आधार भी जुड़े
3. एक परिवार को बार-बार लाभ न मिले
तब जाकर सबको लगेगा कि न्याय हो रहा है।