21/01/2026
सेवा में,
महामहिम श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी
राष्ट्रपति, भारतवर्ष,
राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली
श्री नरेंद्र भाई मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री महोदय
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
नई दिल्ली!
विषय: UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को तत्काल प्रभाव से वापस (Rollback) लेने के संबंध में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जनवरी 2026 में जारी की गई UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026, जिसे दिनांक 15 जनवरी 2026 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित कर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है, अत्यंत गंभीर संवैधानिक एवं विधिक प्रश्न उत्पन्न करती है।
यह अधिसूचना उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से लाई गई बताई जा रही है तथा इसमें SC, ST, OBC एवं दिव्यांग छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है। इसके अंतर्गत सभी विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों में 90 दिनों के भीतर इक्विटी कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया है, जिन्हें शिकायतों की जांच का अधिकार दिया गया है।
महोदय, आजाद मंच का यह स्पष्ट एवं दृढ़ मत है कि उक्त अधिसूचना भारत के संविधान में प्रदत्त समानता के मूल अधिकार (अनुच्छेद 14, 15 एवं 21) की भावना के अनुरूप नहीं है। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है, किंतु यह अधिसूचना समानता की समग्र अवधारणा को स्थापित करने के स्थान पर केवल SC, ST एवं OBC वर्ग के छात्रों के अधिकारों पर केंद्रित है, जबकि सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों के अधिकारों एवं संवैधानिक संरक्षण को पूर्णतः नजरअंदाज करती है।
यह अधिसूचना एकतरफा दृष्टिकोण अपनाते हुए समान अवसर (Equal Opportunity) के सिद्धांत को कमजोर करती है, जो कि संविधान की मूल संरचना (Basic Structure of the Constitution) के प्रतिकूल है। किसी भी कानून या नियम का उद्देश्य सभी वर्गों के लिए न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि किसी एक वर्ग के पक्ष में असंतुलन उत्पन्न करना।
यह भी उल्लेखनीय है कि प्रारंभिक ड्राफ्ट में OBC वर्ग को शामिल न किए जाने तथा झूठी या फर्जी शिकायतों पर किसी प्रकार के दंडात्मक प्रावधान के अभाव को लेकर व्यापक विवाद उत्पन्न हुआ था। यद्यपि अंतिम संस्करण में OBC वर्ग को सम्मिलित कर लिया गया, तथापि दुर्भावनापूर्ण अथवा झूठी शिकायतों पर दंड का कोई प्रावधान न होना, इस अधिसूचना को और अधिक खतरनाक बनाता है तथा इसके दुरुपयोग की व्यापक संभावना उत्पन्न करता है।
महोदय, उत्तर प्रदेश सहित देश के अनेक राज्यों में यह अधिसूचना विश्वविद्यालयों पर लागू की जा चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप शैक्षणिक परिसरों में भय, असंतोष एवं असमानता का वातावरण उत्पन्न हो रहा है।
यह तथ्य भी विचारणीय है कि भारत की अनुमानित जनसंख्या लगभग 140 करोड़ है, जिसमें से लगभग एक-तिहाई जनसंख्या सामान्य वर्ग की है, अर्थात लगभग 40 से 50 करोड़ नागरिक। इस प्रकार की अधिसूचनाएँ सामान्य वर्ग के करोड़ों छात्रों एवं नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन करती हैं।
इसके अतिरिक्त, देश के विकास, प्रशासन, शिक्षा, उद्योग एवं राजस्व सृजन में सामान्य वर्ग का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण एवं अग्रणी रहा है। इसके बावजूद, इस प्रकार की अधिसूचनाओं के माध्यम से सामान्य वर्ग के अधिकारों एवं संवैधानिक संरक्षण का निरंतर हनन किया जाना, समाज में व्यापक असंतोष एवं नाराजगी को जन्म दे रहा है।
अतः आजाद मंच , भारत सरकार से यह स्पष्ट एवं सशक्त मांग करती है कि उक्त UGC अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस (Rollback) लिया जाए तथा सभी वर्गों के छात्रों के अधिकारों को समान रूप से ध्यान में रखते हुए एक निष्पक्ष, संतुलित एवं संविधानसम्मत नीति का निर्माण किया जाए।
हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि जब तक इस अधिसूचना को वापस नहीं लिया जाता, आजाद मंच लोकतांत्रिक, संवैधानिक एवं विधिक तरीकों से इसका विरोध करती रहेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर अपने संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत विधिक उपाय अपनाने के लिए भी बाध्य होगी।
आशा है कि माननीय प्रधानमंत्री महोदय इस गंभीर एवं संवेदनशील विषय पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए न्यायोचित एवं राष्ट्रहित में निर्णय प्रदान करेंगे।
सधन्यवाद।
भवदीय,
यू. यस. राणा (राष्ट्रीय अध्यक्ष) आजाद मंच
शैलेंद्र आजाद त्रिपाठी (राष्ट्रीय महासचिव) आजाद मंच 9311037872
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