आजाद मंच

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आरक्षण नहीं अ? सवर्ण आयोग का गठन हो

24/03/2026

मोदी जी के भाषण से यह प्रतीत होता है भारत मे युद्ध के हालात बन रहे हैं??😢😢😢 #कोरोना ??

13/03/2026

आंदोलन जारी रहे
संकट अभी टला नहीं

07/03/2026

8 मार्च 11 बजे चलो जंतर मंतर दिल्ली ।
एक देश एक बिधान ,मांग रहा है हिन्दुस्तान

25/02/2026

इंकलाब आएगा आज नही तो कल जाएगा।
Scst एक्ट मुर्दाबाद; आजाद मंच

21/01/2026

सेवा में,

महामहिम श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी
राष्ट्रपति, भारतवर्ष,
राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली

श्री नरेंद्र भाई मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री महोदय
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
नई दिल्ली!

विषय: UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को तत्काल प्रभाव से वापस (Rollback) लेने के संबंध में।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जनवरी 2026 में जारी की गई UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026, जिसे दिनांक 15 जनवरी 2026 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित कर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है, अत्यंत गंभीर संवैधानिक एवं विधिक प्रश्न उत्पन्न करती है।
यह अधिसूचना उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से लाई गई बताई जा रही है तथा इसमें SC, ST, OBC एवं दिव्यांग छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है। इसके अंतर्गत सभी विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों में 90 दिनों के भीतर इक्विटी कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया है, जिन्हें शिकायतों की जांच का अधिकार दिया गया है।

महोदय, आजाद मंच का यह स्पष्ट एवं दृढ़ मत है कि उक्त अधिसूचना भारत के संविधान में प्रदत्त समानता के मूल अधिकार (अनुच्छेद 14, 15 एवं 21) की भावना के अनुरूप नहीं है। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है, किंतु यह अधिसूचना समानता की समग्र अवधारणा को स्थापित करने के स्थान पर केवल SC, ST एवं OBC वर्ग के छात्रों के अधिकारों पर केंद्रित है, जबकि सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों के अधिकारों एवं संवैधानिक संरक्षण को पूर्णतः नजरअंदाज करती है।

यह अधिसूचना एकतरफा दृष्टिकोण अपनाते हुए समान अवसर (Equal Opportunity) के सिद्धांत को कमजोर करती है, जो कि संविधान की मूल संरचना (Basic Structure of the Constitution) के प्रतिकूल है। किसी भी कानून या नियम का उद्देश्य सभी वर्गों के लिए न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि किसी एक वर्ग के पक्ष में असंतुलन उत्पन्न करना।

यह भी उल्लेखनीय है कि प्रारंभिक ड्राफ्ट में OBC वर्ग को शामिल न किए जाने तथा झूठी या फर्जी शिकायतों पर किसी प्रकार के दंडात्मक प्रावधान के अभाव को लेकर व्यापक विवाद उत्पन्न हुआ था। यद्यपि अंतिम संस्करण में OBC वर्ग को सम्मिलित कर लिया गया, तथापि दुर्भावनापूर्ण अथवा झूठी शिकायतों पर दंड का कोई प्रावधान न होना, इस अधिसूचना को और अधिक खतरनाक बनाता है तथा इसके दुरुपयोग की व्यापक संभावना उत्पन्न करता है।

महोदय, उत्तर प्रदेश सहित देश के अनेक राज्यों में यह अधिसूचना विश्वविद्यालयों पर लागू की जा चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप शैक्षणिक परिसरों में भय, असंतोष एवं असमानता का वातावरण उत्पन्न हो रहा है।

यह तथ्य भी विचारणीय है कि भारत की अनुमानित जनसंख्या लगभग 140 करोड़ है, जिसमें से लगभग एक-तिहाई जनसंख्या सामान्य वर्ग की है, अर्थात लगभग 40 से 50 करोड़ नागरिक। इस प्रकार की अधिसूचनाएँ सामान्य वर्ग के करोड़ों छात्रों एवं नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन करती हैं।

इसके अतिरिक्त, देश के विकास, प्रशासन, शिक्षा, उद्योग एवं राजस्व सृजन में सामान्य वर्ग का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण एवं अग्रणी रहा है। इसके बावजूद, इस प्रकार की अधिसूचनाओं के माध्यम से सामान्य वर्ग के अधिकारों एवं संवैधानिक संरक्षण का निरंतर हनन किया जाना, समाज में व्यापक असंतोष एवं नाराजगी को जन्म दे रहा है।

अतः आजाद मंच , भारत सरकार से यह स्पष्ट एवं सशक्त मांग करती है कि उक्त UGC अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस (Rollback) लिया जाए तथा सभी वर्गों के छात्रों के अधिकारों को समान रूप से ध्यान में रखते हुए एक निष्पक्ष, संतुलित एवं संविधानसम्मत नीति का निर्माण किया जाए।

हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि जब तक इस अधिसूचना को वापस नहीं लिया जाता, आजाद मंच लोकतांत्रिक, संवैधानिक एवं विधिक तरीकों से इसका विरोध करती रहेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर अपने संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत विधिक उपाय अपनाने के लिए भी बाध्य होगी।

आशा है कि माननीय प्रधानमंत्री महोदय इस गंभीर एवं संवेदनशील विषय पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए न्यायोचित एवं राष्ट्रहित में निर्णय प्रदान करेंगे।

सधन्यवाद।

भवदीय,
यू. यस. राणा (राष्ट्रीय अध्यक्ष) आजाद मंच
शैलेंद्र आजाद त्रिपाठी (राष्ट्रीय महासचिव) आजाद मंच 9311037872

#ऑपरेशन_बगावत

यूजीसी के ताजा भीम नोटिफिकेशन के बाद अपने बच्चे को यूनिवर्सिटी में एडमिशन दिलाते ही लैपटाप नहीं body camera दिलाएं। उसके...
19/01/2026

यूजीसी के ताजा भीम नोटिफिकेशन के बाद अपने बच्चे को यूनिवर्सिटी में एडमिशन दिलाते ही
लैपटाप नहीं body camera दिलाएं।
उसके पास हर समय की वीडियो फुटेज होनी चाहिए कि उसने कब किससे क्या बातचीत की। मुफ्त की कानूनी सलाह है।
ले लीजिए।
नहीं लेंगे तो अपने बच्चे की जमानत लेनी पड़ेगी।‌ कैरियर शुरू होने से पहले खत्म हो जाएगा। या फिर सरकारी मान्यता प्राप्त भीम आर्मी कैंपस एडिशन को हर महीने protection money देना होगा कि आपके बच्चे को किसी केस में ना फंसाए।
रेट हाई रहेगा क्योंकि 5000 साल का बकाया है। बच्चा छोटा है तो अभी से सेविंग्स शुरू कर दें। जय हिंद जय भारत
🙏🙏🙏
#एससीएसटी_एक्ट_मुर्दाबाद Shailendra Azad Tripathi एक देश एक बिधान ,मांग रहा है हिन्दुस्तान

08/01/2026

बहुत बड़ा खुलासा !

#ग्वालियर से बहुत बड़ी खबर बड़ा खुलासा ।🔥

थोड़े दिन पहले अनिल मिश्रा जी को एक मंदिर में आयोजन करने से रोकने वाली DSP हिना खान अपने शादी में मकरंद बौद्ध को निमंत्रण देती हैं ।😆 😂

जी हां ये वही #मकरंद_बौद्ध है जिसे कोर्ट ने फरार घोषित किया था और इतना ही नहीं मकरंद पुलिस अधिकारियों से सम्मानित भी हो रहा है और उसके बाद उसी फरार व्यक्ति से FIR दर्ज कराई गई अनिल मिश्रा जी के खिलाफ मकरंद से साठ साथ मे हिना खान की भी जांच हो ।: आजाद मंच

मेरे मानवाधिकार की मौत हो चुकी हैं ?? आजाद भारत का गुलाम सवर्ण हिन्दू  :  राना ठाकुर
11/12/2025

मेरे मानवाधिकार की मौत हो चुकी हैं ?? आजाद भारत का गुलाम सवर्ण हिन्दू : राना ठाकुर

10/11/2025

बिना रामराज्य के क्या हिन्दू राष्ट्र की कल्पना कर सकते हैं?? सरकार हिन्दुओ को चार भागों में बांट रखी है । SC/ST हिन्दू, ओबीसी हिन्दू , माइनॉरिटी हिन्दू और आजाद भारत का गुलाम सवर्ण हिन्दू ?? एक देश एक बिधान ,मांग रहा है हिन्दुस्तान

🔥 7 हजार की फीस… और एक जिंदगी राख! 🔥मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना DAV कॉलेज में उज्ज्वल राणा ने क्लासरूम में खुद पर पेट्रोल डालक...
10/11/2025

🔥 7 हजार की फीस… और एक जिंदगी राख! 🔥

मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना DAV कॉलेज में उज्ज्वल राणा ने क्लासरूम में खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली…
क्यों? क्योंकि फीस नहीं भर पाया।

शिक्षा माफिया और व्यवस्था के क्रूर संवेदनहीन कृत्य से उपजी एक बच्चे की चीख जिसे पूरे देश को झकझोर देना चाहिए था। परंतु सत्ता और धन्नासेठों के इशारों पर नाचती मीडिया को इतनी फुरसत कहाँ कि वो ग़रीब मासूम बच्चे की गूँजी चीख़ों का हिसाब तथाकथित राहनुमाओं से पूंछ सके?

मात्र सात हजार रुपये की फीस, एक रकम जो शहर के किसी अमीर बाप के बेटे के लिए चाय-पानी का खर्च भी न हो।उस गरीब छात्र उज्ज्वल राणा के लिए मौत का पैगाम बन गई। बुढ़ाना के डीएवी पीजी कॉलेज के क्लासरूम में पेट्रोल छिड़ककर खुद को आग लगाने वाला यह 24 वर्षीय युवक, जो बीए द्वितीय वर्ष का छात्र था, दिल्ली के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ चुका है।

मरने से पहले उसने वीडियो में प्रिंसिपल, मैनेजर, क्लर्क, एक दरोगा और चार पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार ठहराया।उनके अपमान, मारपीट और अभद्र व्यवहार के लिए। लेकिन क्या यह सिर्फ एक कॉलेज का मामला है? नहीं, यह हमारी शिक्षा व्यवस्था की सड़ांध, सत्ता की उदासीनता और प्रशासन की कुटिल चालबाजी का आईना है। एक ऐसा आईना, जो हमें अपनी संवेदनशून्यता पर शर्मिंदा करने के बजाय, और भी गहरी नींद में धकेल देता है।

😡 सवाल 1:
“फीस नहीं तो आत्महत्या कर लो, हमने धर्मशाला नहीं खोली” ये प्रिंसिपल प्रदीप के शब्द हैं या शिक्षा व्यवस्था का असली चेहरा?

😡 सवाल 2:
उज्ज्वल ने टीचर, प्रिंसिपल, SDM तक ज्ञापन दिए…
फिर भी कोई नहीं सुना। क्या सत्ता सिर्फ़ वोट मांगने के लिए गरीबों को याद करती है?

😡 सवाल 3:
पुलिस ने उज्ज्वल के साथ मारपीट की, अपमान किया मरते दम तक उसने नाम लिए: प्रिंसिपल, क्लर्क, दरोगा,
4 कांस्टेबल। क्या पुलिस कॉलेज की प्राइवेट आर्मी है?

😡 सवाल 4:
7 हजार रुपये…
इतनी सी रकम पर एक सपना जल गया।
क्या शिक्षा अब सिर्फ़ अमीरों का हक है?

😡 सवाल 5:
उज्ज्वल के 2 वीडियो वायरल हुए, देश हिल गया…
फिर भी कोई मंत्री, कोई MLA, कोई अफसर नहीं बोला।
क्या गरीब की चीखें अब वायरल भी नहीं होतीं?

अब एक आखिरी सवाल:
क्या हम इतने पत्थर हो चुके हैं कि एक बच्चे की लाश भी हमें नहीं झकझोरती?
उज्ज्वल अब नहीं है… लेकिन उसके सवाल जिंदा हैं।
उठाओ आवाज! शेयर करो! टैग करो!
ताकि हमारे बच्चे इस बेशर्म व्यवस्था की भेंट न चढ़ें।अब कोई अगला उज्ज्वल न जले।

@ Yogi Adityanath PMO India राना ठाकुर Pushkar Singh Dhami Rajnath Singh
#फीस_की_आग_में_जला_सपना
साभार राज त्रिपाठी
अगर यह सत्य घटना है तो सभ्य समाज के लिए अत्यंत शर्मनाक और डूब मरने की बात है।

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