04/09/2026
बोलते प्रभु आ रहा माँ!, गर्भ में बन लाल मैं।
धर्म की स्थापना को, बन रहा हूँ काल मैं॥
भाद्रपद की अष्टमी को, जन्म मेरा हो रहा।
इस तिथी से कंस का है, भाग्य जग में सो रहा॥
इस दिवस को गाँव गोकुल, हर्ष छायेगा सुनो।
नन्द के घर जन्म लेगी, योगिनी माया सुनो॥
पुत्र अपना रख वहां पर, साथ लाना तुम उसे।
कंस के निज हाथ में फिर, सौंप देना है जिसे॥
आ गया दिन वो सुहावन, देवकी बेहाल सी।
सह रही थी पीर भारी, हो रही है निहाल भी॥
पुण्य तिथि थी रोहिणी की, थी अँधेरी रात भी।
गरजती थीं सब दिशायें, हो रही बरसात भी॥
वेग युमना का बढ़ा था, सूझता कर को न कर।
अवतरित होते तभी प्रभु, बाल का है रूप धर॥
खुल गये फिर द्वार कारा,टूटते सब बंध भी।
आह! नियती गढ़ रही थी, अब नवल संबंध भी॥
सूप में रख पुत्र को निज, वसुदेव बढ़ते जा रहे।
देखकर विकराल यमुना,कुछ समझ कब पा रहे॥
पार कर जाऊँ इसे मैं, राह पर दिखती नही।
भाग्य से विपदा हमारे, हाय! क्यों मिटती नही ?
बाल भगवन पाँव से फिर, छू दिए सरि धार को।
वेग यमुना का हुआ कम, बस नमन प्रभु प्यार को॥
नन्द के घर पहुंच कर वो, पुत्र अपना रख दिये।
लौटते मथुरा को' वापस, नंद पुत्री को लिए॥
कंस को जब ज्ञात होता, देवकी पुत्री जनी।
आ गया लेने उसे वो,भाग्य का समझे धनी॥
मार देता हूँ इसे मैं, काल मेरी है यही।
छूट कर माया उडी औ, बोलती वो भी वही।
सुन रे मूरख! इस धरा पर, पाप तूने है किया।
आ गया है काल तेरा, जनम उसने ले लिया॥
मार सकता है उसे यदि, मार कर तू देख तो।
देख सकता है यदि तो, देख नियती रेख को॥
हो गई अदृश्य कन्या, कंस पागल हो गया।
क्या करे क्या ना करे अब, धैर्य उसका खो गया॥
देवकी वसुदेव दोनों, बंद अब यूँ ही रहो।
काल को जब तक न मारूँ, दर्द सारे तुम सहो॥
ये कथा अब पूर्ण होती, कृष्ण के अवतार की।
सुन जिसे सब धन्य होते, है अमिट संसार की॥
धर्म के प्रसार की...
प्रेम के अभिसार की..
आप सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं ❤🙏🏻
🚩जय श्री कृष्ण।।🚩
#श्री_कृष्ण_जन्माष्टमी