Akhil Bhartiya Sant Samaj

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आप सभी को अनंत चतुर्दशी एवं गणेश विसर्जन के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ! गणपति बप्पा मोरया!जय श्री हरि !
25/09/2026

आप सभी को अनंत चतुर्दशी एवं गणेश विसर्जन के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ!

गणपति बप्पा मोरया!
जय श्री हरि !

भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री, दुनिया के सबसे लोकप्रिय राजनेता आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक बधा...
17/09/2026

भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री, दुनिया के सबसे लोकप्रिय राजनेता आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

बोलते प्रभु आ रहा माँ!, गर्भ में बन लाल मैं।धर्म की स्थापना को, बन रहा हूँ काल मैं॥भाद्रपद की अष्टमी को, जन्म मेरा हो रह...
04/09/2026

बोलते प्रभु आ रहा माँ!, गर्भ में बन लाल मैं।
धर्म की स्थापना को, बन रहा हूँ काल मैं॥
भाद्रपद की अष्टमी को, जन्म मेरा हो रहा।
इस तिथी से कंस का है, भाग्य जग में सो रहा॥

इस दिवस को गाँव गोकुल, हर्ष छायेगा सुनो।
नन्द के घर जन्म लेगी, योगिनी माया सुनो॥
पुत्र अपना रख वहां पर, साथ लाना तुम उसे।
कंस के निज हाथ में फिर, सौंप देना है जिसे॥

आ गया दिन वो सुहावन, देवकी बेहाल सी।
सह रही थी पीर भारी, हो रही है निहाल भी॥
पुण्य तिथि थी रोहिणी की, थी अँधेरी रात भी।
गरजती थीं सब दिशायें, हो रही बरसात भी॥

वेग युमना का बढ़ा था, सूझता कर को न कर।
अवतरित होते तभी प्रभु, बाल का है रूप धर॥
खुल गये फिर द्वार कारा,टूटते सब बंध भी।
आह! नियती गढ़ रही थी, अब नवल संबंध भी॥

सूप में रख पुत्र को निज, वसुदेव बढ़ते जा रहे।
देखकर विकराल यमुना,कुछ समझ कब पा रहे॥
पार कर जाऊँ इसे मैं, राह पर दिखती नही।
भाग्य से विपदा हमारे, हाय! क्यों मिटती नही ?

बाल भगवन पाँव से फिर, छू दिए सरि धार को।
वेग यमुना का हुआ कम, बस नमन प्रभु प्यार को॥
नन्द के घर पहुंच कर वो, पुत्र अपना रख दिये।
लौटते मथुरा को' वापस, नंद पुत्री को लिए॥

कंस को जब ज्ञात होता, देवकी पुत्री जनी।
आ गया लेने उसे वो,भाग्य का समझे धनी॥
मार देता हूँ इसे मैं, काल मेरी है यही।
छूट कर माया उडी औ, बोलती वो भी वही।

सुन रे मूरख! इस धरा पर, पाप तूने है किया।
आ गया है काल तेरा, जनम उसने ले लिया॥
मार सकता है उसे यदि, मार कर तू देख तो।
देख सकता है यदि तो, देख नियती रेख को॥

हो गई अदृश्य कन्या, कंस पागल हो गया।
क्या करे क्या ना करे अब, धैर्य उसका खो गया॥
देवकी वसुदेव दोनों, बंद अब यूँ ही रहो।
काल को जब तक न मारूँ, दर्द सारे तुम सहो॥

ये कथा अब पूर्ण होती, कृष्ण के अवतार की।
सुन जिसे सब धन्य होते, है अमिट संसार की॥
धर्म के प्रसार की...
प्रेम के अभिसार की..

आप सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं ❤🙏🏻

🚩जय श्री कृष्ण।।🚩

#श्री_कृष्ण_जन्माष्टमी

"गायन्ति देवाः किल गीतकानि धान्यास्तु ये भारतभूमिभागे ।स्वर्गापवर्गास्पदहेतुभूते भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात ।।आप सभी क...
15/08/2026

"गायन्ति देवाः किल गीतकानि धान्यास्तु ये भारतभूमिभागे ।
स्वर्गापवर्गास्पदहेतुभूते भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात ।।
आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
#स्वतंत्रता_दिवस

सावन शिवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य जीव और परमात्मा के मिलन, मन के विकारों के नाश और प्रकृति के साथ चेतना के संतुलन से जु...
11/08/2026

सावन शिवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य जीव और परमात्मा के मिलन, मन के विकारों के नाश और प्रकृति के साथ चेतना के संतुलन से जुड़ा है। यह रात्रि अज्ञान और अहंकार के अंधकार को मिटाकर भीतर के दिव्य प्रकाश (शिव) को जागृत करने का प्रतीक मानी जाती है।शिव और प्रकृति का मिलनसावन मास: यह महीना प्रकृति के सृजन और हरियाली का है। शिव चेतना हैं और प्रकृति शक्ति (पार्वती) हैं।संतुलन: सावन शिवरात्रि का पर्व शिव और प्रकृति के शाश्वत मिलन और उनके आपसी तालमेल का आध्यात्मिक संदेश देता है।जलाभिषेक और आंतरिक शुद्धिजल समर्पण: शिवलिंग पर जल या गंगाजल चढ़ाना केवल एक कर्मकांड नहीं है।अहंकार का विसर्जन: इसका आंतरिक अर्थ यह है कि जिस प्रकार जल धाराओं के रूप में अर्पित होता है, उसी प्रकार भक्त को अपना अहंकार और मलिन विचार ईश्वर को समर्पित कर खुद को निर्मल करना चाहिए।बेलपत्र और त्रिगुणात्मक चेतनातीन पत्तियां: बेलपत्र की तीन पत्तियां त्रिगुणात्मक प्रकृति (सत, रज, तम) या इच्छा, क्रिया और ज्ञान का प्रतीक हैं।समर्पण: इन तीनों वृत्तियों को भगवान को सौंप देना ही सच्चा आध्यात्मिक समर्पण है।रात्रि जागरण (निशीथ काल)अंधकार पर विजय: 'रात्रि' अज्ञान का प्रतीक है। शिवरात्रि की रात में जागरण यह सिखाता है कि साधक को मोह-माया और अज्ञान की नींद से जागकर अपनी आंतरिक चेतना को स्थिर रखना चाहिए।यदि आप सावन शिवरात्रि की पूजा विधि या इसके व्रत के नियमों के बारे में और जानना चाहते हैं, तो कृपया बताएं।
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अज्ञान तिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जन शलाकया, चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः। आप सभी को गुरु पूर्णिमा पावन पर्व की हा...
29/07/2026

अज्ञान तिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जन शलाकया, चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः।
आप सभी को गुरु पूर्णिमा पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

आपको भगवान महाप्रभु जगन्नाथ स्वामी की पावन रथयात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं।जय जगन्नाथ।
16/07/2026

आपको भगवान महाप्रभु जगन्नाथ स्वामी की पावन रथयात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं।
जय जगन्नाथ।

महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले से लगभग ३५ किलोमीटर दूर, एलोरा की गुफाओं से सिर्फ १ किलोमीटर की दूरी पर भगवान शिव का १२वां ज...
14/07/2026

महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले से लगभग ३५ किलोमीटर दूर, एलोरा की गुफाओं से सिर्फ १ किलोमीटर की दूरी पर भगवान शिव का १२वां ज्योतिर्लिंग श्री घृष्णेश्वर महादेव स्थित है। यहाँ से आठ किलोमीटर दूर दौलताबाद के किले में भी श्री धारेश्वर शिवलिंग स्थित है। औरंगाबाद, जो मुग़ल सल्तनत के क्रूर बादशाह औरंगजेब की राजधानी थी, इस ज्योतिर्लिंग के संघर्ष की साक्षी है।

मुग़ल साम्राज्य में अन्य हजारों मंदिरों की तरह इस ज्योतिर्लिंग के पुराने मंदिर को भी चौदहवी शताब्दी में निर्ममता पूर्वक तोडा गया किन्तु मूल ज्योतिर्लिंग आज तक सुरक्षित है। बाद में छत्रपति शिवजी के दादा श्री मालोजी भोसले द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और फिर १६वी शताब्दी में आधुनिक मंदिर का निर्माण महान शिव-भक्तिनी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया। इसका निर्माण लाल पत्थरों से हुआ है और इसकी शिल्पकला दक्षिण भारत के मंदिरों से मिलती जुलती है। २४ खम्भों पर टिका ये मंदिर सबसे छोटा ज्योतिर्लिंग मंदिर है। लाल पत्थरों पर उकेरी गई भगवान विष्णु के दशावतार की कारीगरी इसकी सुंदरता में चार चाँद लगाती है। इस मंदिर में पुरुष अपना अंगवस्त्र (कुर्ता, बनियान) उतार कर ही अंदर जा सकते हैं।

सभी ज्योतिर्लिंगों में इस ज्योतिर्लिंग की कथा सर्वाधिक मानवीय है। पौराणिक कथा के अनुसार देवगिरि पर्वत के समीप भरद्वाज कुल में उत्पन्न सुधर्मा निवास करते थे जो सदैव भगवत्भक्ति में डूबे रहते थे। उनकी पत्नी सुदेहा थी जो सभी प्रकार से अपने पति का ध्यान रखते हुए अपने पतिव्रत धर्म का पालन करती थी।

उन दोनों के जीवन में बस एक ही कष्ट था कि उनकी कोई संतान नहीं थी क्यूंकि सुदेहा सन्तानोत्त्पत्ति में असमर्थ थी। अपने कुल के उद्धार और पुत्र प्राप्ति के लिए सुदेहा ने सुधर्मा का दूसरा विवाह अपनी छोटी बहन घुश्मा से करवाने पर बल दिया। सुधर्मा ने उसे बहुत समझाया कि जिस प्राण से प्यारी बहन से वो उसका विवाह करवाना चाह रही है, पुत्र प्राप्ति के बाद उसे ही अपनी बहन से सबसे अधिक ईर्ष्या होगी। इतना समझाने के बाद भी सुदेहा ने सुधर्मा का विवाह घुश्मा से करवा दिया।

विवाह के पश्चात वो एक दासी की भांति अपनी बड़ी बहन सुदेहा की सेवा किया करती थी। सुदेहा भी उससे अपनी पुत्री की भांति स्नेह करती थी। घुश्मा अनन्य शिव भक्त थी। वो प्रतिदिन मिटटी के १०१ शिवलिंग बना कर उसे पास के तालाब में विसर्जित कर दिया करती थी। समय आने पर घुश्मा के गर्भ से एक अत्यंत तेजस्वी पुत्र ने जन्म लिया जिससे तीनों आनंद से भर गए।

आरम्भ में सब प्रेमपूर्वक चलता रहा किन्तु जैसे-जैसे समय बीता, घुश्मा का सौभाग्य देख सुदेहा ईर्ष्या की अग्नि से जलने लगी। उसके मन में इस कुविचार ने जन्म ले लिया कि घुश्मा ने उसके पति पर अधिकार जमा लिया और अब पुत्र होने पर वो सुधर्मा की प्रिय हो गयी है। समय बीता और घुश्मा का पुत्र युवा हुआ और उसका विवाह कर दिया गया। अब तो सुदेहा की ईर्ष्याग्नि और भी भड़क उठी। उसे पाप-पुण्य का ध्यान ना रहा और एक दिन उसने सोते हुए घुश्मा के पुत्र की हत्या कर दी और उसके शव के टुकड़े-टुकड़े कर उसी तालाब में फेंक दिया जिसमे घुश्मा प्रतिदिन शिवलिंगों का विसर्जन किया करती थी।

अगले दिन सवेरे जब उसकी पत्नी ने अपने पति को ना पाया और उसकी शय्या को रक्तरंजित देखा तो वो रोते-रोते अपनी सास घुश्मा के पास गयी और सब बात बताई। घर में दुःख का माहौल हो गया। अब तक सुदेहा को भी अपनी गलती का आभास हुआ और वो भी पश्चाताप की अग्नि में जलकर रोने लगी किन्तु उसने मारे भय के किसी को कुछ नहीं बताया। इतने कठिन समय में भी घुश्मा का भगवान रूद्र से विश्वास ना उठा। उसने कहा - "हे महादेव! अगर मैंने मन से सदैव आपकी भक्ति की है तो मुझे विश्वास है कि मेरा पुत्र वापस आ जाएगा।" ये कहकर वो प्रतिदिन की भांति १०१ शिवलिंगो को लेकर तालाब की ओर चली। उसके पीछे-पीछे सुधर्मा, सुदेहा और उसकी पुत्रवधु भी तालाब पर पहुँच गए।

जैसे ही घुश्मा ने उन शिवलिंगों का विसर्जन किया, महादेव की कृपा से तालाब में से उसका पुत्र हँसते हुए निकल आया और उसके चरण स्पर्श किये। साथ ही महादेव ने उन सबों के अपने दर्शन दिए और सबको सत्य से अवगत करवाया। सुदेहा के पापकर्म से क्रोधित महारुद्र उसका वध करने को उद्धत हुए तब घुश्मा ने उनके पैर पकड़ते हुए उनसे अपनी बड़ी बहन के लिए क्षमादान माँगा।

उसकी भक्ति देख कर भगवान शिव प्रसन्न हुए, सुदेहा को क्षमा कर दिया और घुश्मा को वर माँगने को कहा। घुश्मा ने वर के रूप में उनसे वहीँ स्थित होने की प्रार्थना की। तब महादेव वहाँ घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थित हो गए। घुश्मा की शिव भक्ति के कारण ये महान ज्योतिर्लिंग "घुश्मेश्वर" के नाम से भी जाना जाता है। जो भी इस ज्योतिर्लिंग की कथा सुनता है और इसके दर्शन करता है उसे निश्चय ही शिवलोक की प्राप्ति होती है।

माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:आप सभी को विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।स्वच्छ, हरित और स्वस्थ वातावरण आने वाल...
05/06/2026

माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:

आप सभी को विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

स्वच्छ, हरित और स्वस्थ वातावरण आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आइए, प्रकृति के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का संकल्प लें।
#अखिल_भारतीय_संत_समाज
#सनातन_भारत

गाङ्गं वारि मनोहारि मुरारि-चरण-च्युतम्।त्रिपुरारि-शिरश्चारि पापहारि पुनातु माम्॥मोक्षदायिनी, जीवनदायिनी माँ गंगा के पृथ्...
25/05/2026

गाङ्गं वारि मनोहारि मुरारि-चरण-च्युतम्।
त्रिपुरारि-शिरश्चारि पापहारि पुनातु माम्॥

मोक्षदायिनी, जीवनदायिनी माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण दिवस 'गंगा दशहरा' की आप सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!

माँ गंगा अपने भक्तों पर कृपा बनाएं रखें, अपनी अमृत धारा से मनुष्यता को पोषित करती रहें; यही प्रार्थना करते हैं।

जय माँ गंगे!
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