13/07/2026
संस्थापक संविधान एवं घोषणापत्र
(Founding Charter – Version 1.0)
संस्थापक घोषणा
हम, विश्व के विभिन्न देशों के नागरिक, विद्वान, वैज्ञानिक, न्यायविद, मानवाधिकार विशेषज्ञ, शिक्षाविद, पर्यावरणविद, चिकित्सक, अभियंता, पत्रकार, दार्शनिक तथा विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि, यह स्वीकार करते हैं कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक निरंतर विकसित होने वाली व्यवस्था है और पृथ्वी पर विद्यमान समस्त जीवन उसी विकास-क्रम का अभिन्न भाग है।
हम मानते हैं कि मानव सभ्यता को प्रकृति, पृथ्वी तथा ब्रह्माण्ड से असंख्य उपहार प्राप्त हुए हैं। अतः केवल मानवाधिकारों की रक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि समस्त जीवन, पर्यावरण तथा भविष्य की पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व भी उतना ही आवश्यक है।
इसी उद्देश्य से हम विश्व सर्वाधिकार एवं ब्रह्माण्डीय न्याय परिषद (World Council on Cosmic Rights and Universal Justice – WCHRCJ) की स्थापना करते हैं।
ध्येय वाक्य
"समस्त अस्तित्व का सम्मान • समस्त जीवन का संरक्षण • समस्त मानवता के लिए न्याय • भविष्य की पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व।"
दृष्टि (Vision)
एक ऐसे विश्व का निर्माण जिसमें मानव, प्रकृति और समस्त जीवन के बीच संतुलन, न्याय, शांति, वैज्ञानिक प्रगति और उत्तरदायित्व स्थापित हो तथा पृथ्वी और भविष्य की पीढ़ियों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बने।
मिशन
मानवाधिकारों का संरक्षण।
प्रकृति और जैव विविधता का संरक्षण।
पर्यावरणीय न्याय को बढ़ावा देना।
भावी पीढ़ियों के हितों की रक्षा।
वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करना।
शांति एवं न्याय की स्थापना।
विज्ञान, नीति और नैतिकता के समन्वय को प्रोत्साहित करना।
मूल दर्शन
परिषद ब्रह्माण्डीय ज्ञान-परम्पराओं, विभिन्न सभ्यताओं की श्रेष्ठ मानवीय शिक्षाओं तथा आधुनिक विज्ञान—सभी का सम्मान करती है।
परिषद अण्डज, जरायुज, स्वेदज, उद्भिज्ज तथा समस्त जैव विविधता सहित प्रत्येक जीवन-रूप के संरक्षण को मानवता का नैतिक दायित्व मानती है।
परिषद पंचमहाभूत—पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश—को जीवन की आधारभूत प्रणालियाँ मानते हुए उनके संतुलन और संरक्षण हेतु कार्य करेगी।
परिषद किनके अधिकारों की रक्षा हेतु कार्य करेगी
• मानव
• बालक
• महिला
• वरिष्ठ नागरिक
• दिव्यांग
• अण्डज
• जरायुज
• स्वेदज
• उद्भिज्ज
• पशु
• पक्षी
• जलीय जीवन
• वन
• पर्वत
• नदियाँ
• महासागर
• पृथ्वी
• जल
• वायु
• अग्नि
• आकाश
• जैव विविधता
• भविष्य की पीढ़ियाँ
• अंतरिक्ष पर्यावरण एवं उससे संबंधित वैश्विक उत्तरदायित्व पर शोध और नीति-विकास
प्रमुख उद्देश्य
मानवाधिकार संरक्षण।
पर्यावरण संरक्षण।
वैज्ञानिक एवं नैतिक नीति विकास।
वैश्विक शोध को प्रोत्साहन।
विधिक सहायता प्रदान करना।
जनजागरूकता बढ़ाना।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना।
मॉडल कानूनों एवं नीति मसौदों का निर्माण।
ब्रह्माण्डीय उत्तरदायित्व (Cosmic Responsibility) की अवधारणा पर वैश्विक विमर्श को बढ़ावा देना।
वर्तमान अंतरराष्ट्रीय कानून में जहाँ उपयुक्त हो, प्रकृति, भविष्य की पीढ़ियों और ब्रह्माण्डीय उत्तरदायित्व से संबंधित अवधारणाओं के विकास हेतु शांतिपूर्ण एवं वैधानिक प्रयास करना।
कार्य क्षेत्र
परिषद विश्व की विधायिकाओं, कार्यपालिकाओं, न्यायपालिकाओं, विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक संस्थानों, मीडिया, उद्योगों, वित्तीय संस्थानों, नागरिक समाज और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ संवाद, शोध, नीति-सुझाव, प्रशिक्षण और सहयोग के माध्यम से ऐसे निर्णयों और नीतियों को प्रोत्साहित करेगी जिनमें दीर्घकालिक सार्वजनिक हित, पर्यावरणीय संतुलन और समस्त जीवन का संरक्षण प्रमुख आधार हों।
संगठनात्मक संरचना
विश्व महासभा
↓
अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी परिषद
↓
वैश्विक अध्यक्ष
↓
महासचिव
↓
वैश्विक विशेषज्ञ परिषद
↓
महाद्वीपीय परिषद
↓
राष्ट्रीय परिषद
↓
राज्य परिषद
↓
जिला परिषद
↓
स्थानीय इकाई
सदस्यता
संस्थापक सदस्य
आजीवन सदस्य
विशेषज्ञ सदस्य
सामान्य सदस्य
छात्र सदस्य
मानद सदस्य
संस्थागत सदस्य
प्रमुख आयोग
मानवाधिकार आयोग
पर्यावरण आयोग
जैव विविधता आयोग
विज्ञान एवं अनुसंधान आयोग
कानून एवं न्याय आयोग
महिला आयोग
बाल अधिकार आयोग
भविष्य पीढ़ी आयोग
डिजिटल एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आयोग
अंतरराष्ट्रीय सहयोग आयोग
आचार संहिता
परिषद सत्य, पारदर्शिता, वैज्ञानिक प्रमाण, नैतिकता, विधि के शासन, उत्तरदायित्व और अहिंसक साधनों का पालन करेगी।
परिषद किसी भी प्रकार के जातीय, धार्मिक, भाषाई, नस्लीय या लैंगिक भेदभाव का समर्थन नहीं करेगी।
वित्त
सदस्यता शुल्क
वैध दान
अनुसंधान अनुदान
प्रकाशन
प्रशिक्षण कार्यक्रम
सम्मेलन
सभी आय-व्यय का स्वतंत्र लेखा-परीक्षण कराया जाएगा।
संविधान संशोधन
यह संस्थापक प्रारूप (Version 1.0) एक जीवंत दस्तावेज़ है।
विश्व के विभिन्न देशों के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, न्यायविदों, शिक्षाविदों, पर्यावरणविदों तथा अन्य संबंधित क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के सुझावों के आधार पर समय-समय पर लोकतांत्रिक एवं पारदर्शी प्रक्रिया से इसमें संशोधन, विस्तार और परिष्कार किया जाएगा।
परिषद यह स्वीकार करती है कि जिस प्रकार प्रकृति और ब्रह्माण्ड निरंतर विकासशील हैं, उसी प्रकार यह संविधान भी निरंतर विकसित होने वाला दस्तावेज़ रहेगा।
अंतिम घोषणा
यह परिषद किसी राष्ट्र की संप्रभुता का स्थानापन्न बनने का दावा नहीं करती, बल्कि विश्व स्तर पर न्याय, मानवाधिकार, पर्यावरणीय संतुलन, वैज्ञानिक सहयोग और समस्त जीवन के संरक्षण के लिए एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक, ज्ञान-आधारित और जनहितकारी वैश्विक मंच के रूप में कार्य करेगी।
हमारा लक्ष्य ऐसी विश्वव्यापी चेतना का निर्माण करना है जिसमें मानव अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने उत्तरदायित्वों को भी समान महत्व दे तथा पृथ्वी और समस्त जीवन के प्रति दीर्घकालिक दायित्व का निर्वहन करे।
संस्थापक टिप्पणी:
यह दस्तावेज़ विश्व सर्वाधिकार एवं ब्रह्माण्डीय न्याय परिषद (WCHRCJ) का प्रथम संस्थापक प्रारूप (Version 1.0) है। परिषद के विस्तार, विभिन्न देशों के विशेषज्ञों की सहभागिता, वैज्ञानिक प्रगति, विधिक विकास और वैश्विक अनुभवों के आधार पर इस संविधान का क्रमिक विस्तार किया जाएगा। परिषद मानती है कि जैसे ब्रह्माण्ड निरंतर विकसित होता है, वैसे ही ज्ञान, संस्थाएँ और उनके संविधान भी समय के साथ विकसित होते हैं। इसलिए यह संविधान एक जीवंत दस्तावेज़ है, जिसका विकास निरंतर जारी रहेगा।