Brahman ekta

Brahman ekta ब्राह्मण जोड़ो

26/02/2026

*सुंदरकांड में एक प्रसंग अवश्य पढ़ें !*

*“मैं न होता, तो क्या होता?”*
“अशोक वाटिका" में *जिस समय रावण क्रोध में भरकर, तलवार लेकर, सीता माँ को मारने के लिए दौड़ पड़ा*
, तब हनुमान जी को लगा, कि इसकी तलवार छीन कर, इसका सर काट लेना चाहिये!

किन्तु, अगले ही क्षण, उन्हों ने देखा
*"मंदोदरी" ने रावण का हाथ पकड़ लिया !*
यह देखकर वे गदगद हो गये! वे सोचने लगे, यदि मैं आगे बड़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि
*यदि मै न होता, तो सीता जी को कौन बचाता?*

बहुधा हमको ऐसा ही भ्रम हो जाता है, मैं न होता, तो क्या होता ?
परन्तु ये क्या हुआ?
सीताजी को बचाने का कार्य प्रभु ने रावण की पत्नी को ही सौंप दिया! तब हनुमान जी समझ गये,
*कि प्रभु जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं!*

आगे चलकर जब "त्रिजटा" ने कहा कि "लंका में बंदर आया हुआ है, और वह लंका जलायेगा!" तो हनुमान जी बड़ी चिंता मे पड़ गये, कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नहीं है
, *और त्रिजटा कह रही है कि उन्होंने स्वप्न में देखा है, एक वानर ने लंका जलाई है! अब उन्हें क्या करना चाहिए? *जो प्रभु इच्छा!*

जब रावण के सैनिक तलवार लेकर हनुमान जी को मारने के लिये दौड़े, तो हनुमान ने अपने को बचाने के लिए तनिक भी चेष्टा नहीं की, और जब "विभीषण" ने आकर कहा कि दूत को मारना अनीति है, तो
*हनुमान जी समझ गये कि मुझे बचाने के लिये प्रभु ने यह उपाय कर दिया है!*

आश्चर्य की पराकाष्ठा तो तब हुई, जब रावण ने कहा कि बंदर को मारा नहीं जायेगा, पर पूंछ मे कपड़ा लपेट कर, घी डालकर, आग लगाई जाये, तो हनुमान जी सोचने लगे कि लंका वाली त्रिजटा की बात सच थी, वरना लंका को जलाने के लिए मै कहां से घी, तेल, कपड़ा लाता, और कहां आग ढूंढता? पर वह प्रबन्ध भी आपने रावण से करा दिया! जब आप रावण से भी अपना काम करा लेते हैं, तो

*मुझसे करा लेने में आश्चर्य की क्या बात है !*

इसलिये *सदैव याद रखें,* कि *संसार में जो हो रहा है, वह सब ईश्वरीय विधान* है!
हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं!
इसीलिये *कभी भी ये भ्रम न पालें* कि...
*मै न होता, तो क्या होता ?*

*ना मैं श्रेष्ठ हूँ,*
*ना ही मैं ख़ास_हूँ,*
*मैं तो बस छोटा सा,*
*भगवान का दास हूँ॥*
🙏🌹👏

04/02/2026
नोनहरा थाना (गाजीपुर) पर धरना दे रहे सीताराम उपाध्याय की पुलिस द्वारा लाइट बंद करके लाठियों से पीट पीटकर हत्या कर देने क...
14/09/2025

नोनहरा थाना (गाजीपुर) पर धरना दे रहे सीताराम उपाध्याय की पुलिस द्वारा लाइट बंद करके लाठियों से पीट पीटकर हत्या कर देने की घटना घोर निंदनीय व हृदयविदारक हैं। इस जघन्य एवं अमानवीय कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ।

ब्राह्मणों का हितैषी बनने वाली भाजपा की सरकार में अब देखना हैं कि शोकाकुल परिजनों की मदद में किस स्तर की आर्थिक मदद और परिवार की आजीविका के लिए कौन सी सरकारी नौकरी सुनिश्चित कराई जाती हैं।

सरकार से आग्रह है कि धरना-प्रदर्शन की घटना की निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और समाज में ऐसे दुस्साहस करने वालों के लिए कड़ी नजीर स्थापित हो।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें। मेरी गहन संवेदनाएँ इस दुःखद घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ हैं।

शक्ति दुबे, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश की रहने वाली एक आईएएस अधिकारी हैं जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में अखि...
03/09/2025

शक्ति दुबे, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश की रहने वाली एक आईएएस अधिकारी हैं जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में अखिल भारतीय रैंक 1 हासिल की है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से बायोकेमिस्ट्री में स्नातकोत्तर किया। 2018 से यूपीएससी की तैयारी शुरू की और पांच प्रयासों के बाद सफलता प्राप्त की। congratulations

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में मौजूद एक ऐसी जगह है जिसका नाम भदैया कुंड़ है। इसे प्यार बढ़ाने वाले कुंड के नाम से भी जान...
21/07/2025

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में मौजूद एक ऐसी जगह है जिसका नाम भदैया कुंड़ है। इसे प्यार बढ़ाने वाले कुंड के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि जो भी प्रेमी जोड़े इस कुंड में नहाते हैं, वो हमेशा के लिए एक दूजे के हो जाते हैं। यही नहीं, इनकी लाइफ में चाहे कितनी भी बड़ी समस्या हो, वो यहां नहाने के बाद एक दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ते।

श्रीधर मिश्र एक ऐसी प्रेरणादायक शख्सियत हैं, जिन्होंने अपनी अद्भुत शारीरिक क्षमता और अटूट समर्पण से समाज में एक नई मिसाल...
04/06/2025

श्रीधर मिश्र एक ऐसी प्रेरणादायक शख्सियत हैं, जिन्होंने अपनी अद्भुत शारीरिक क्षमता और अटूट समर्पण से समाज में एक नई मिसाल कायम की है। 78 वर्ष की आयु में भी वे एक सक्रिय पहलवान की तरह न केवल अपनी फिटनेस बनाए हुए हैं, बल्कि युवाओं को भी प्रेरित कर रहे हैं। वे प्रतिदिन 50 किलो वजनी गदा को 50 से 70 बार घुमाते हैं, जो उनकी मजबूत इच्छाशक्ति, आत्मनियंत्रण और अनुशासन का प्रमाण है। उनका यह अभ्यास सिर्फ शरीर की नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता की भी पहचान है।

श्रीधर मिश्र का जीवन बनारस की गलियों में बसी उस प्राचीन कुश्ती परंपरा को जीवंत करता है, जिसके लिए काशी सदियों से जानी जाती है। गंगा के तट पर बसे बनारस में अखाड़ों की संस्कृति आज भी जीवित है, जहाँ पहलवान न केवल अपनी ताकत बढ़ाते हैं, बल्कि आत्मिक और नैतिक मूल्यों को भी अपनाते हैं। श्रीधर मिश्र इस परंपरा के प्रतीक हैं, जो दिखाते हैं कि अनुशासन और साधना से व्यक्ति हर उम्र में उत्कृष्टता पा सकता है।

हाल ही में उनकी कहानी सोशल मीडिया, विशेषकर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वायरल हुई, जहाँ लोगों ने उनके जीवट और जोश की भरपूर सराहना की। उनकी जीवनशैली इस बात की मिसाल है कि उम्र कभी भी आपके हौसलों के आड़े नहीं आ सकती।

काशी जैसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शहर में, जहाँ परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम है, श्रीधर मिश्र जैसे व्यक्तित्व यह सिद्ध करते हैं कि इस पावन नगरी की आत्मा आज भी जीवित, प्रेरणादायक और ऊर्जावान है।

एक  वार  ब्राह्मण के  घर  की  स्त्री  स्नान  कर  रही  थी. तभी  संयोग  से  वहां  से  ब्राह्मण  कुल  शिरोमणि  वाजीराव  पेश...
29/12/2024

एक वार ब्राह्मण के घर की स्त्री स्नान कर रही थी. तभी संयोग से वहां से ब्राह्मण कुल शिरोमणि वाजीराव पेशवा की सवारी निकल रही थी. हाथी पर बेठे महाराज वाजीराव पेशवा को घर के अंदर आँगन मै स्नान कर रही स्त्री का चेहरा गर्दन तक दिख गया संयोग से ब्राह्मण स्त्री की नजर भी पेशवा जी से टकरा गयी . महाराज वाजीराव पेशवा जी तत्काल हाथी से नीचे उतर पैदल चलने लगे.. साथ चल रहे उनके अंग रक्षक ने हिम्मत जुटा कारण पूछा तो पेशवा जी वोले अनजाने मैने एक ब्राह्मण स्त्री की हत्या कर दी.. आज के वाद हाथी की सवारी नहीं करुँगा घोड़े की सवारी करुँगाऔर वास्तव मै थोड़ी देर वाद खवर मिली की उस ब्राह्मण स्त्री ने लज्जावस प्राण त्याग दिए... मेरे भैया बहिनों ऐसा रहा ब्राह्मणों का मर्यादित गरिमामय जीवन इतिहास..
अतः आप लोग भले ही आधुनिक रहें लेकिन पूर्वजों की अर्जित की हुई महानता को याद रखें. ब्राह्मण ऐसे ही पूज्य नहीं हुए हमारे पूर्वजों का त्याग तपस्या. त्रिकाल संध्या सहित जीवन सदैव पवित्रता पूर्ण मर्यादित गरिमामय रहा सदैव ब्राह्मण धर्म का पालन करें।

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! मेरे नए फ़ॉलोअर्स का स्वागत है! आपसे जुड़ना मेरे लिए खुशी...
06/11/2024

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! मेरे नए फ़ॉलोअर्स का स्वागत है! आपसे जुड़ना मेरे लिए खुशी की बात है! Saurabh Tiwari, Santosh Tiwari Jee, Akhilesh Pandey, Dhirendra Panday

बोलिए राम राम
22/09/2024

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एक बार जयकारा बांके बिहारी लाल की जय
21/09/2024

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